@Ajay_reporter Aaj tak kbhi bhi bihar mai Alliance mai Friendly fight nahi hote suna tha agar congress mai itna hi himmat tha to 243 seat pe larte tb na jante ... RJD hai tbhi congress hai nahi to congress ka koi Adhar nahi hai... 61 Seat mai 50 seat pe congress neta maal kha ke ticket becha ha
किस तरह से बिहार में बचे खुचे कांग्रेस को मारा जा रहा है। कोई भी सामान्य व्यक्ति समझ सकता है..कौन लोग हैं जो कांग्रेस के भीतर बैठकर ही पार्टी को घुन की तरह कमजोर कर रहे हैं..कई सीटों पर टिकट वितरण को लेकर अनियमितता का आरोप लग रहा है। कई जगहों से टिकट बेचने का आरोप लग रहा है। अगर ये सब आरोप झूठे भी हों तो भी ये कैसे संभव हो सकता है कि कोई व्यक्ति दो दिन पहले, 10 दिन पहले, एक महीने पहले पार्टी में शामिल हो और उसे हाथ के हाथ टिकट भी दे दिया जाय। एक या दो व्यक्ति तो ऐसे हैं जिनको टिकट मिलने के बाद लोगों को पता चला कि वो कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। आइए बिहार कांग्रेस के इस अजब गजब टिकट वितरण से आपको भी रूबरू कराते हैं...👇
* सोनवर्षा – चिराग पासवान की पार्टी छोड़कर 8 अक्टूबर को कांग्रेस में शामिल हुए महिला को उम्मीदवार बनाया गया है..
* कुमराहर (पटना) – इंद्रदीप चंद्रवंशी ( अमित शाह के करीबी)
* नौतन – अमित गिरी ( पायनियर कोचिंग के मालिक) ( बीजेपी और संघ के करीबी)..
* रक्सौल – श्याम बिहारी सिन्हा ( 23 सितम्बर को कांग्रेस में शामिल हुए और एक महीने में पार्टी के उम्मीदवार बन गए)
* फारबिसगंज – मनोज विश्वास ( 5 अक्टूबर को कांग्रेस में शामिल हुए और एक हफ्ते में पार्टी ने इन्हें टिकट दे दिया)
* कुचायकोट – हरिनारायण ( 2 सितम्बर को अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल और एक महीने बाद पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बना दिया है..)
* बेलदार – मिथिलेश कुमार ( आजीवन रामविलास पासवान के करीबी रहे। टिकट मिलने से पहले किसी को नहीं पता था कि वो कांग्रेस में कब शामिल हुए..)
* नालंदा – छोटे मुखिया उर्फ कौशलेंद्र कुमार ( बीजेपी के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा के करीबी)..
* कस्बा – मोहम्मद इरफान आलम ( निर्दलीय सांसद के करीबी) कुछ दिन पहले तक ये साहब जेडीयू अल्पसंख्यक सेल के महासचिव थे। कांग्रेस ने अपने 5 बार के विधायक अफाक आलम को टिकट काट कर इनको टिकट दिया है..
* पूर्णिया – जितेंद्र यादव ( मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी रहे हैं) ( निर्दलीय सांसद से नजदीकी)..
*किशनगंज – कमरुल होंडा ( 2019 के उपचुनाव में MIM के टिकट पर चुनाव जीते थे। 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी इजरायल हुसैन चुनाव जीते थे और होंडा जी तीसरे नंबर पर थे। लेकिन इस बार 10 सितंबर को कांग्रेस में शामिल होते हैं और इन्हें पार्टी अपना उम्मीदवार बना देती है।)
* सिकंदरा – विनोद चौधरी ( प्रधानमंत्री मोदी से प्रभावित है। सोशल मीडिया पर इसका खूब प्रचार करते रहे हैं। इस साल फरवरी में कांग्रेस में शामिल हुए थे..पार्टी ने अपने निष्ठावान एक पूर्व विधायक का टिकट काटकर उनको सम्मानित किया है..
* बथनाहा – नवीन कुमार ( उम्र सिर्फ 25 साल)...इनको भी टिकट मिलने से पहले बिहार कांग्रेस के वर्तमान बड़े नेता भी नहीं जानते..
* हरनौत – अरुण बिंद ( टिकट मिलने से दो तीन दिन पहले तक ये लोकजनशक्ति पार्टी और चिराग पासवान का झंडा उठाए हुए थे। आखिरी के दो दिनों में पहले ये कांग्रेसी बने फिर रिवॉर्ड के रूप में पार्टी ने इन्हें टिकट भी दे दिया..
पिछले साल जब मैं रेलवे के लोको पायलटों से मिला, तो उनकी स्थिति जानकर गहरी चिंता हुई थी — 14-14 घंटे की शिफ्ट, लगातार रात की ड्यूटी, न पर्याप्त आराम, न खाने का ब्रेक और न शौचालय की सुविधा।
हादसों के बाद रेलवे 'मानवीय चूक' कहकर पल्ला झाड़ लेता है, लेकिन यह नहीं बताता कि कर्मचारियों से कैसे अमानवीय तरीके से काम लिया जाता है।
उनकी बुनियादी मांगें थीं — काम के घंटे तय हों और बेहतर माहौल मिले। लेकिन सरकार ने सिर्फ दिखावे के लिए कमेटी बना दी, समाधान की कोई मंशा नहीं थी।
अब खाना और टॉयलेट ब्रेक जैसी मांगें भी यह कहकर ठुकरा दी गई हैं कि "यह व्यावहारिक नहीं है।"
ये न सिर्फ लोको पायलटों के साथ अन्याय है, बल्कि उन करोड़ों यात्रियों की सुरक्षा से भी खिलवाड़ है जो ट्रेनों से सफर करते हैं।
यह न्याय की लड़ाई है और हम इसमें लोको पायलटों के साथ हैं — जब तक सरकार बहरी बनी रहेगी, आवाज़ उठाते रहेंगे।
आम लोग कब safe होंगे, मोदी जी? आप तो बस 'एक' अडानी को safe करने में लगे हुए हैं।
ये भयावह तस्वीर और खबर भारतीय रेल की लंबी लापरवाही, उपेक्षा और जान बूझकर की गई कम भर्तियों का परिणाम है।