साल 2020 लंच टेबल की फोटो अमित शाह तब के ओडिशा मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, बिहार के नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी
अब तीनों जगह भाजपा के मुख्यमंत्री
@Advocatehca बेहतर नेता कौन? मोदी या राहुल गांधी
2024: वाराणसी लोकसभा सीट पर नरेंद्र मोदी 1.5 लाख से ज्यादा वोटों से जीते थे
कॉंग्रेस के राहुल गांधी 3.65 लाख से ज्यादा वोटों से जीते हैं
अब बेहतर कौन नेता कौन राहुल गांधी या नरेंद्र मोदी
भाई इतना ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं इंडी गठबंधन मोदी को हराने के बजाय खुद को जनता से जोड़कर जनहित का कार्य करना शुरू कर दे बाकी जनता पर छोड़ दे, क्योंकि ये जितने के लिए तो चुनाव लड़ते ही नहीं मोदी को हराने के लिए लड़ते और मोदी जीतकर जनता की सेवा करने के लिए लड़ता ये फर्क है
लेट हिम राइज...
इंडिया गठबंधन का नाम, इंडिया नही रखा जाना चाहिए था। और यदि इंडिया रख ही दिया गया, तो इसे छिन्न भिन्न होने से रोकने का जिम्मा भी लीजिए।
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राहुल गांधी कई बार कह चुके हैं कि "विचारधारा की लड़ाई में उन्हें कुछ राजनीतिक नुकसान उठाना पड़े तो उठाएंगे।
यदि वे गम्भीर थे, तो यह मौका है कि वह गठबंधन की दैनिक रीति नीति अखिलेश के हवाले कर, यह नुकसान उठा लें।
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अध्यक्ष सोनिया गांधी या खरगे हो सकते हैं। पर दैनिक रीति नीति और सिनर्जी के लिए, अखिलेश यादव अधिक ऊर्जावान, ज़िम्मेदार और वेल प्लेस्ड कोई नही है।
और परिपक्व भी हैं, लोकप्रिय और अधिकतर दलों को स्वीकार्य भी।
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नितीश कुमार के ब्लूप्रिंट पर बना ये गठबंधन, नेतृत्व के अभाव में शुरू से ही बिखरा बिखरा रहा है।
लोकसभा चुनाव के पर्याप्त पहले गठित होने के बावजूद, कांग्रेस के अनिर्णय और धीमेपन की छाया इस पर बनी रही। न नियमित बैठक, न ऑफिस, न सीटो को लेकर रणनीति, न कॉमन मेनिफेस्टो, न प्रधानमंत्रीय उम्मीदवार..
कन्वीनर तक नही। सुनते है कि किसी बैठक में ममता बनर्जी ने मल्लिकार्जुन खड़गे को गठबंधन का प्रधानमंत्री चेहरा बनाए जाने का प्रस्ताव रखा था, जिसका केजरीवाल ने भी समर्थन किया था।
इसी में नितीश कुमार को कन्वीनर बनाने की भी बात हुई, जो बनी नही। इसके बाद नितीश कुमार गठबंधन छोड़कर चले गये।
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इस पर भी जनता का समर्थन इतना कि बहुमत से महज 40-50 सीट पीछे रहे।
जरा बेहतर प्रबंधन होता, तो आज नरेन्द्र मोदी गुजरात में कहीं बैठ कर धुनी रमा रहे होते, और सवा सौ सीटो के साथ, प्रधानमंत्री कांग्रेस का होता।
बनिस्पत, गुड़ गोबर प्रबंधन ने मोदी को लाइफलाइन दे दी।
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अब जब लोकसभा पीछे छूट गई, राज्यो के चुनाव में गठबंधन के दलों को डर है कि राहुल की सामाजिक न्याय की राजनीतिक का असर, भाजपा के वोटर्स पर पड़े या ना पड़े, उनके अस्तित्व पर अवश्य पड़ेगा।
तो अब कोई पार्टनर न तो कांग्रेस का नेतृत्व स्वीकार करने के लिए तैयार है, ना अपने राज्य में जगह देने को।
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दिल्ली में केजरीवाल नेस्तनाबूद कर दिया गया, एक किला विपक्ष का ही ढहा है।
आगे भी कांग्रेस के कई दलों से संबंध कटुता की हद तक जाएंगे, यदि यही नीति रही। हर जगह फायदा बीजेपी को होगा।
अखिलेश का मजबूत पक्ष यह है कि उनके सभी नेताओं के साथ मधुर संबंध हैं और उनसे किसी को अपने राज्य में ज़मीन खोने का कोई डर नहीं।
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जब अखिलेश यादव के नेतृत्व में INDIA गठबंधन की बैठकें होंगी तो आपसी तल्खी दूर होंगी और राहुल गांधी की सामाजिक न्याय की लड़ाई मज़बूत होगी।
यह भी सत्य है कि राहुल की पिछले 2 साल से जातिगत जनगणना और उसी आधार पर भागीदारी की मुहिम टिगर प्वाइंट इस लिए नहीं बन पा रही है, क्योंकि वह खुद OBC नहीं हैं और पूर्व में खुद को जनेऊधारी ब्राह्मण बताते रहे हैं।
अखिलेश यादव इसे भागीदारी टिगर प्वाइंट बना सकते हैं, वह खुद ओबीसी हैं।
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दरअसल कांग्रेस को 38 साल पहले की एक राजनैतिक रणनीति को अपनाना चाहिए जब विश्वनाथ प्रताप सिंह विपक्षी राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा थे मगर संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष चौधरी देवीलाल को चुना गया था।
यहां तक कि चुनाव जीतने के बाद देवीलाल को विपक्षी गठबंधन ने प्रधानमंत्री भी चुना, देवीलाल ने प्रधानमंत्री पद को नकारते हुए विश्वनाथ प्रताप सिंह को प्रधानमंत्री बनाने की घोषणा कर दी।
अगर प्रधानमंत्री पद को त्यागने के कारण सोनिया गांधी महान हुईं, तो वैसा त्याग 1989 में देवीलाल ने भी किया था, ये भुला दिया गया।
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दरअसल एक मज़बूत सरकार को हटाने के लिए विपक्षी दलों जो सामंजस्य और आपसी विश्वास ज़रूरी है जो फिलहाल दिखाई नहीं देता।
कांग्रेस के धीमे और असमंजस से भरे नेतृत्व में तो यह और भी असंभव है। वहीं अखिलेश के कन्वीनर होने से कई सकारात्मक परिणाम आने की संभावना बनेगी।
पहला कि 2027 के उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव की छवि और अधिक मजबूत होगी और ओबीसी जातियां उनकी तरफ़ आएंगी।
उसके पहले बिहार विधानसभा चुनाव में भी यही समीकरण बनेंगे।
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अखिलेश यादव के सभी विरोधी दलों के नेताओं के साथ संबंध राहुल गांधी की अपेक्षा कहीं बेहतर नहीं बल्कि बहुत बेहतर हैं।
अखिलेश यादव का गठबंधन को लेकर दिल भी अन्य के मुकाबले बहुत बड़ा है। और फिर चंद्र बाबू नायडू नायडू और अखिलेश यादव की मित्रता कुछ भी गुल खिला सकती है।
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एक ही खिलाड़ी बैटिंग, बोलिंग, फील्डिंग एक साथ करके मैच नही जीत सकता।
आपने जब टीम बनाई है, तो अलग अलग लोगो को अलग अलग भूमिका दीजिए। अखिलेश को बैटिंग ऑर्डर में ऊपर लाइये।
लेट हिम राइज।
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( पोस्ट मूलतः, मित्र मो. जाहिद की)
तिल हम है,और गुड़ आप ।
मिठाई हम है,और मिठास आप ।।
साल के पहले त्यौहार सूर्य के मकर राशि में ।
प्रवेश करने के पर्व से हो रही आज शुरुआत ।।
आपको व आपके परिवार को मेरी की तरफ से मकर संक्रांति 2025 की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं ।।
नए साल में खुशियों की बरसाते हों ।
प्यार के दिन और मोहब्बत भरी राते हो ।
रंजिशे नफरते मिट जाए सदा के लिए ।
सभी के दिलो में ऐसी ही चाहतें हो ।
नववर्ष 2025 की हार्दिक शुभकामनाएं ।
यह वर्ष जीवन में सुख,समृद्धि सफलता लाए ।
सदैव स्वस्थ और आनंदित रहें ।
पूर्ण हो आप की सभी मनोकामनाएं ।
महाराष्ट्र राज्य मंत्रिमंडळात राज्यमंत्री म्हणून नगर विकास, परिवहन, सामाजिक न्याय, वैद्यकीय शिक्षण, अल्पसंख्यांक विकास, औकाफ मंत्रालयाची जबाबदारी दिल्याबद्दल मुख्यमंत्री मा.श्री. देवेंद्रजी फडणवीस यांचे मनःपूर्वक धन्यवाद!
माझ्यावर आणि माझ्या कर्तृत्वावर विश्वास ठेवत मला ही संधी दिल्याबद्दल सर्व वरिष्ठ नेत्यांचे आभार मानते. मिळालेल्या संधीचं नक्कीच सोनं करेन आणि सर्वांच्या विश्वासाला पात्र ठरून मिळालेल्या सर्व खात्यांची जबाबदारी निष्ठापूर्वक आणि नेटाने पार पाडेन !
याचसोबत मंत्रिमंडळात खातेवाटप झालेल्या माझ्या सर्व सहकाऱ्यांचेही अभिनंदन आणि शुभेच्छा !
@Dev_Fadnavis@cbawankule@BJP4Maharashtra
#MinistryofHigherandTechnicalEducation
सिद्ध गंवन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥"
जगत जननी माँ दुर्गा की नवम स्वरूप, सर्व सिद्धियां प्रदान करने वाली माँ सिद्धिदात्री आप पर अपनी कृपा सदैव बनाये रखें।
जय माता दी 🙏🙏
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ।।
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री के चरणों में कोटि-कोटि वंदन। आप सभी को 9 दिनो तक चलने वाले मां की आराधना हेतु समर्पित ।
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।