अशोक सिद्धार्थ का गुनाह था कि उन्होंने समर राज की एक पोस्ट को RT कर दिया। अतः राजनीति से संन्यास लो।
आकाश आनंद का गुनाह है कि उन्होंने बहन जी की एक पोस्ट को RT नहीं किया। अतः पार्टी से बाहर हो जाओ।
लेकिन बहन जी, सतीश मिश्रा पर कार्रवाई कब होगी, जो न तो आपके हर पोस्ट को रीट्वीट करते हैं और न ही पार्टी को मजबूत करने के लिए कोई काम करते हैं। ऊपर से सतीश मिश्रा ने BSP में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके अपने बेटे, बेटियों और दामाद... सबको सेटल कर दिया है।
बहन जी उन धूर्त पदाधिकारियों की बिल्कुल समीक्षा नहीं कर रही हैं, जो कई-कई राज्यों के प्रभारी बनकर डमी कैंडिडेट खड़ा करने अथवा टिकट दिलाने के नाम पर करोड़ों का धन लुटाने और पार्टी को रसातल में धकेलने के काम किए हैं।
आखिर सतीश मिश्रा से सवाल कब होगा, जो लंबे समय से पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं, कई बार पार्टी के सांसद भी रहे हैं और विगत कई वर्षों से मीडिया की जिम्मेदारी भी संभालते हैं? लेकिन पार्टी का नैरेटिव गढ़ने के नाम पर उन्होंने बहन जी को केवल गुमराह किया है कि इस बार पूरा ब्राह्मण आपके साथ खड़ा है लेकिन हकीकत इससे उलट है।सच कहूं तो उनके कहने से कोई भी ब्राह्मण बसपा से नहीं जुड़ता है। साथ ही, आए दिन पार्टी के खिलाफ फेक न्यूज और झूठा नैरेटिव चलता रहा, लेकिन न तो उन पर कोई कार्रवाई हुई और न ही मीडिया IT सेल खड़ा करने का कोई प्रयास दिखाई दिया। हाँ, लखनऊ के अपने सजातीय YouTubers पर अकूत पैसा लुटाकर अपना माहौल बनवा लेते हैं। दलित-बहुजन YouTubers को तो कोई पूछता भी नहीं।
ऊपर से आगामी यूपी विधानसभा का चुनाव सिर पर है। ऐसे में बहन जी को इन जैसे पदाधिकारियों एवं प्रभारियों से सवाल करने की बजाय सारी चिंता इस बात की है कि ट्विटर पर उन्हें आकाश आनंद ने रीट्वीट क्यों नहीं किया। ऊपर से बहन जी ने आदेश दिया कि बसपा के सभी पदाधिकारी आकाश आनंद को अनफॉलो कर दें। इतने बड़े समाज और इतने बड़े राष्ट्र की इतनी बड़ी नेता का ध्यान इस बात पर हो कि उन्हें किसी ने रीट्वीट क्यों नहीं किया... यह सोचकर भी पीड़ा हो रही है।
आपने कहा कि अगर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास ले लें, तो आकाश आनंद की वापसी का रास्ता खुल जाएगा। जबकि ऐसी मांग भी अपने आप में अनैतिक और असंवेदनशील है, फिर भी अशोक सिद्धार्थ ने समाजहित को ध्यान में रखते हुए राजनीति से संन्यास ले लिया और कहा कि बहन जी, आपके लिए तो जान भी हाजिर है।
अब अपने वादे पर कायम रहने की बजाय आप कह रही हैं कि अशोक सिद्धार्थ ने तुरंत संन्यास क्यों नहीं लिया? संन्यास लेने में कुछ घंटे की देरी क्यों हुई? हद है। भला इस बात का भी कोई तुक है? संवेदना और सदमा भी कोई चीज होती है।
माननीया बहन जी को चाहिए कि जो लोग उन्हें गुमराह कर रहे हैं और जिनकी वजह से किसी के राजनीतिक जीवन का फैसला कुछ घंटों की देरी और सोशल मीडिया पर रीट्वीट करने या न करने से तय होने लगे, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
इसलिए समय आ गया है कि सतीश मिश्रा समेत तमाम राष्ट्रीय महासचिवों, प्रभारियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के कामकाज की निष्पक्ष समीक्षा हो। पार्टी में जवाबदेही तय हो और यह देखा जाए कि कौन वास्तव में BSP को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है और कौन केवल पद और प्रभाव का लाभ उठा रहा है। क्योंकि चुनाव सोशल मीडिया के रीट्वीट से नहीं, बल्कि संगठन, कार्यकर्ताओं, रणनीति और जमीन पर किए गए काम से लड़ा जाता है।
- सूरज कुमार बौद्ध
@Mayawati@AnandAkash_BSP
@SurajKrBauddh सूरज भाई आप बहुत ही पढ़े लिखे समझदार और शिक्षित व्यक्ति हैं। बहन जी को 50,100 या सत्ता तक पहुंचना कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन कोई तो है पार्टी में जो बहन जी को बाहर नहीं निकलने देता। बसपा का नाश इन्हीं धूर्त लोगों ने किया है। अब दलित समाज जाए तो किधर जाए।
@Mayawati इसी को कहते हैं कि """जब नाश मनुज पर छाता है पहले विवेक मर जाता है।""" बसपा को बर्बाद करने और मान्यवर साहब काशीराम का मिशन में को धूल में मिलाने की कसम मायावती ने खा ली है।
@MP_SiddharthBSP राजनीति में पद से बड़ा विचार और निष्ठा होती है। मायावती जी के मिशन और आतिश को सर्वोपरि मानते हुए अशोक सिद्धार्थ जी का राजनीति से संन्यास लेना वैचारिक ईमानदारी और त्याग का प्रतीक है। पद अस्थायी होते हैं पर एक सच्चे सिपाही का संकल्प और विचारधारा के प्रति समर्पण हमेशा जीवित रहता है।
@yadavakhilesh वफ़ा का ढोंग रचकर जो गिरगिट सा रंग बदलते हैं...
सत्ता की खातिर वही हर बार, दलितों को छलते हैं...!!!
नाज़ था जिन पर कभी, वो ही राह का कांटा बन गए...
हक छीनने वाले आज फिर हमदर्द का मुखौटा बन गए...!
@jitu_rajoriya पता नहीं मायावती को हुआ क्या है । अपना तो खुद भाजपा के खिलाफ कुछ बोलती नहीं है और पार्टी का कोई दूसरा व्यक्ति बोले तो उसे पार्टी से बाहर कर देती हैं या उसे पद से हटा देती है। इस तरह से भाजपा को सत्ता से हटाना बहुत ही मुश्किल है।
@Susheel226@Mayawati आप सही कह रहे हो भाई साहब अगर मायावती जी ने भाजपा पर इतनी नरमी न वर्ती होती और समाज की स्पष्ट और उनके बीच में अच्छा ताल मेल बनाएं रखती तो कोई चंद्रशेखर रावण की हिम्मत नहीं होती की दूसरी पार्टी बना सके, भाजपा में इतनी ताकत ना थी कि वह दलित का वोट ले सके, PDA नारा हवा में उड़ जाता
@Mayawati शासन प्रशासन पर इतना गरम मत होइए बहन जी वरना सीबीआई ईडी आपके पीछे पड़ जाएगी। और शुक्र है कि सरकार से सवाल नहीं पूछा वरना कब की इनकम टैक्स जांच पड़ गई होती। इसलिए सरकार से सवाल तो पूछना ही नहीं है। केवल सलाह दे दो यही बहुत है।
@dbabuadvocate बिल्कुल मात्र समाजवादी पार्टी ऐसी है जो परिवार वालों से बहुत दूर है। ना तो अखिलेश यादव का कोई भाई सांसद है ना विधायक है अखिलेश यादव ने हमेशा समाज की चिंता की है। दूसरे नंबर पर कांग्रेस है जो परिवार वाद से बहुत दूर है,और तीसरे नंबर पर आप जैसे अंधे हो जो इतने पर भी दिखाई नहीं देता
@Neeraj_Bhawanii यह हम सब जानते हैं कि मायावती चुप रहने वालों में से नहीं है राजनीति की वह बहुत पुरानी खिलाड़ी हैं लेकिन आज सत्ता और बीजेपी की दमक से उन्हें कुछ नहीं बोलने दिया जा रहा है। आकाश आनंद पर जो कार्रवाई होती है वह बीजेपी के दबाव में आकर ही होती है। इसलिए आज भाजपा को उखाड़ फेंको।