कुछ कहानियाँ सिर्फ़ शब्दों से नहीं, आँसुओं, बलिदान और तपस्या से लिखी जाती हैं। यह उस विरासत की झलक है जिसने आँसुओं से साहस और बलिदान से नेतृत्व को जन्म दिया। कांग्रेस की वह परंपरा, जिसे सोनिया गांधी जी ने संजोया और राहुल गांधी जी आज अपने कंधों पर आगे बढ़ा रहे हैं।
27 साल पहले जब मैं एक स्कूल की छात्रा थी, दसवीं कक्षा में पढ़ती थी, राजनीति की गहराइयों से अनजान थी, तब मैंने पहली बार एक महिला को देखा — शांत लेकिन संकल्प से भरी हुई।
वो थीं श्रीमती सोनिया गांधी।
कांग्रेस को जब कोई रास्ता नहीं दिख रहा था, जब कार्यकर्ताओं को उम्मीद की किरण भी नहीं मिल रही थी, तब सोनिया गांधी ने संगठन को संभाला। बिना शोर किये देश को मनरेगा दिया, RTI दिया, शिक्षा और भोजन का अधिकार दिया। उन्होंने राजनीति में त्याग का मतलब सिखाया।
जब मैं कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में खड़ी थी और वो महिला, जिन्हे मैंने 27 साल पहले देखा था — ठीक मेरे सामने बैठी हैं। मेरे लिए यह सिर्फ गर्व का पल नहीं, भावनाओं का समंदर था। राजनीति में लोग कुर्सी के पीछे भागते हैं, लेकिन उन्होंने सत्ता से बड़ा संगठन को माना, और कांग्रेस को टूटने नहीं दिया।
सोनिया जी ने संगठन को अपने संकल्प का केंद्र बनाया और शायद उसी शांति, उसी गहराई से एक नेता तैयार हुआ जिसे हम राहुल गांधी के नाम से जानते है। एक ऐसा युवा जो राजनीति में पद या विरासत के कारण नहीं, संघर्ष के रास्ते से आया। जिसने बचपन में ही अपने पिता और दादी को खोया, एक ऐसा बेटा जिसने माँ की आँखों में आँसू देखे।
आज जब चारों ओर सत्ता की भूख, प्रचार का तमाशा और जनता से दूरी थी। तब राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा में आम आदमी की तरह पैदल चलते हैं। उनके पास कोई पद नहीं था, बस एक विचार था और वो विचार था जोड़ने का, न्याय का, सच्चाई का।
उन्हें संसद से निष्काषित किया गया लेकिन उन्होंने संसद से बड़ी जनता की संसद में विश्वास रखा। वो बिना किसी तामझाम के लोगों से बात करते हैं, सुनते हैं और समझते हैं। उनकी राजनीति में ‘मैं’ नहीं है, ‘हम’ है। उनकी आँखों में सत्ता की चपलता नहीं, संवैधानिक संकल्प है। जब वो बोलते हैं तो हमें लगता है — ये नेता हमारी भाषा बोलता है, हमारे जैसा दिखता है, और हमारे साथ चल सकता है।
आज जब देश की आत्मा पर हमला हो रहा है, जब संविधान की रक्षा सबसे बड़ा संघर्ष बन गया है। तब सोनिया गांधी का त्याग और राहुल गांधी का साहस हमें राह दिखा रहा है।
ये वो वक्त है जब हमे राहुल गांधी के साथ खड़ा होना है और कांग्रेस के हर कार्यकर्ता को खड़ा होना है।
यह वक्त है कांग्रेस को एकजुट करने का!
यह वक्त है न्याय पथ पर चलने का! @INCIndia@RahulGandhi@priyankagandhi@IYC@kcvenugopalmp@kharge@ajaymaken@Pawankhera@SupriyaShrinate
आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली एक मज़दूर की बेटी, देश के सबसे अच्छे संस्कृति स्कूल में वीरेंद्र सहवाग के बेटे, अमिताभ बच्चन के पोते और सचिन पायलट के बेटे के साथ पढ़ती है।
ये संभव हुआ शीला दीक्षित जी की कांग्रेस सरकार की नीतियों के कारण दिल्ली में,
समानता का ऐसा देश बनाया था कांग्रेस ने।
“ये चाचा-भतीजे एक ही हैं…काम शीला दीक्षित ने किया” शख्स की क्या नाराजगी ?
◆ देखिए माहौल क्या है, राजीव रंजन के साथ
#MahaulKyaHai | #MKH | @rajeevranjanMKH
A very rare video in which Sagarika Ghose & Arundhati Roy expose chameleons like Arvind Kejriwal
Watch & share this video before the lobby reports & removes it!
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