महाभारत काल से यादवों ने नाइंसाफी की लड़ाई लड़ी है आज भी वो खून में है पैदा होते ही विद्रोही हो जाते हैं।
आज भी लड रहे हैं आगे भी लडते रहेंगे देश को जो लोग बेच रहे हैं उनके खिलाफ लड़ते रहेंगे।
योगी जी, अगर जनता के लिए बस की सुविधा देना आपके बस की बात नहीं है, तो कम से कम बुलडोज़र की ही सुविधा दे दीजिए। गरीबों के आशियाने उजाड़ने के लिए बुलडोज़र बड़ी आसानी से पहुँच जाता है, तो कभी उसी बुलडोज़र से जनता की यात्रा भी करवा दीजिए।
शर्म करो @ChouhanShivraj जी !
मध्य प्रदेश ने आपको मुख्यमंत्री बनाया.
विदिशा ने आपको साँसद बना कर भेजा.
आज आप कृषि मंत्रालय तक पहुँच गए. आपकी राजनीतिक सीढ़ी लगातार ऊपर जाती रही.
लेकिन जिस किसान के नाम पर यह पूरी राजनीति खड़ी की गई, उसकी आमदनी कहाँ पहुँची?
#किसान_विरोधी_शिवराज
#किसान_BJP_से_हलक़ान
यूपी पुलिस रीलबाजी से बाज नहीं आ रही है।
यदि वह महिला घायल थीं तो फौरन उन्हें जीप में लादकर अस्पताल ले जाना चाहिए उनकी जान बचानी चाहिए कि कैमरे के सामने हीरो बनकर ही मदद होगी?
सरकार का डर भय पुलिस के अंदर खत्म हो गया है।
दलितों के लिए पेपर कप और कथित ऊँची जातियों के लिए काँच का गिलास!
अब जातिवाद के बचाव में नया तर्क सुनिए - “देश की बड़ी आबादी पेपर कप में चाय पीती है, यह तो आज की जरूरत है।”
बिल्कुल! पेपर कप में चाय पीना अपने आप में भेदभाव नहीं है। भेदभाव तब है, जब एक ही दुकान पर कप का चुनाव ग्राहक की सुविधा से नहीं, उसकी जाति देखकर किया जाए। अगर सबको पेपर कप मिल रहा है तो कोई सवाल ही नहीं। सवाल तब उठेगा, जब एक जाति के लिए पेपर कप और दूसरी के लिए काँच का गिलास तय हो।
मुद्दा कप नहीं, कप तय करने वाली जातिवादी मानसिकता है।
और जो लोग हर जातिगत भेदभाव के सामने कोई नया बहाना खोज लेते हैं, वे बताएं - अगर जाति खत्म हो चुकी है तो बर्तन तय करते समय जाति बीच में क्यों आ रही है?
जिला बदायूं के दातागंज थाना क्षेत्र में दलित युवक राजेश कोरी की पुलिस कस्टडी में मौत बेहद दुखद,गंभीर और चिन्ताजनक है।
परिजनों के अनुसार, पुलिस की पिटाई के बाद राजेश की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। अब हवालात के अंदर का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें राजेश पानी पीने की हालत में तक नजर नहीं आ रहा है और पुलिसकर्मी के हाथ छोड़ते ही वह जमीन पर गिर जाता है। यह वीडियो पुलिस की भूमिका और पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुलिस कह रही है कि पहले राजेश की तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि अगर राजेश की हालत इतनी खराब थी तो उसे समय रहते इलाज क्यों नहीं दिया गया?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस के बचाव में परिजनों से तहरीर लेकर दूसरे पक्ष के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर दिया गया। अगर हत्या हुई थी, तो राजेश पुलिस की हवालात में क्यों था? और अगर वह पुलिस हिरासत में सुरक्षित था, तो हवालात के अंदर उसकी हालत इतनी गंभीर कैसे हुई?
दातागंज थाने के CCTV फुटेज को तत्काल सुरक्षित कर सार्वजनिक किया जाए। पुलिस हिरासत में हुई इस मौत की जांच उसी पुलिस तंत्र से नहीं, बल्कि स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय एजेंसी से कराई जाए।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी जवाब दें कि दलित युवक राजेश कोरी की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है?
@UPGovt से हमारी मांग है कि पुलिस हिरासत में हुई दलित युवक राजेश कोरी की मौत की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। दोषियों को बचाने के बजाय उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा मृतक के परिवार को न्याय, सुरक्षा और उचित मुआवजा दिया जाए।
हमारी संवेदनाएँ भाई राजेश कोरी के शोकाकुल परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। प्रकृति उन्हें इस असीम दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
यूपी में सिंगर अंकित बालियान की दिनदहाड़े गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई. कई दिन बीतने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं.
अंकित बालियान की पत्नी कह रही हैं- CM योगी, हमें न्याय दिला दो. आप बोलते हो यूपी में माफियागिरी नहीं है. फिर ये कैसे हो गया?
शुरू में लगा कि असल साधू संत हैं..चन्दन टीका और और गेरुआ जो धारण किए हुए थे..!
भिक्षा लेने आएं है..10..20..50 लेकर आगे बढ़ जाएंगे..!
लेकिन हुआ क्या आप खुद देख लीजिए -
ऐसे ही कुछ लुटेरे भगवा भेष धारण कर हमारी आस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं देश को खोखला कर रहे हैं..दिन दहाड़े चोरी कर रहे हैं लूट कर रहे !
आरक्षण का विरोध कर रही यूपी के गाजियाबाद की रहने वाली एक ठाकुर महिला रुचि ठाकुर बड़ी दबंगई के साथ कह रही है कि हम 24 घंटे थाने में बैठते हैं. थाना पुलिस हमसे पूछकर काम करती है. ऐसी स्थिति में गरीब जनता के लिए निष्पक्ष न्याय की उम्मीद करना बेमानी है.