I was trying to book tatkal ticket on date 20.01.2026 for train No 13020 while making the payments of Rs. 1824 was debt frm my bank account and ticket was nt booked. yet bt aftr complain response from irctc that acount is closed bt ac still active.
@IRCTCofficial@RailMinIndia
UPGB महाराजगंज का गालीबाज RM #मुकेश_जैन अब बना गुंडा-मवाली
#UPGB महराजगंज में हालात अब उत्पीड़न से आगे बढ़कर गैरकानूनी जब्ती और डर का माहौल वाले बन चुके हैं।
बदतमीज और गालीबाज RM मुकेश जैन आदतन उत्पीड़क बन चुका है। ये लगातार अधिकारियों को गाली देने, अपमानित करने और मानसिक उत्पीड़न जैसे कृत्य कर रहा है। इनकी वीडियो वायरल होने के बाद अपने में सुधार लाने की जगह ये अब गुंडागर्दी पर उतर आया है।
वीडियो किसने वायरल की ये जानने के लिए किया गया इसका कृत्य-
➡️ रविवार सुबह 7 बजे, RM मुकेश जैन कथित रूप से महुआन अड्डा शाखा पहुँचा , छुट्टी के दिन स्टाफ को जबरन बुलाया,
अधिकारी व कैशियर को धमकाया, अपशब्द कहे, शाखा का DVR खंगाला और फिर अधिकारी, कैशियर व PTJ के निजी मोबाइल फोन जबरन जब्त कर लिए।
➡️ आज मंगलवार तक मोबाइल फोन अभी भी RM के कब्ज़े में बताए जा रहे हैं। स्टाफ का आरोप है कि मना करने पर उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी गई।
यह गंभीर सवाल है कि
❓ किस कानून के तहत कोई RM कर्मचारियों के निजी मोबाइल फोन और CCTV/DVR जब्त कर सकता है?
❓ क्या यह ज़्यादा डर फैलाने की कोशिश नहीं है?
यह पहली घटना नहीं है:
▪️ अधिकारी पवन त्रिपाठी को कथित रूप से इतनी भयानक गाली-गलौज झेलनी पड़ी कि उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा लेकिन कार्रवाई इस आरोपी RM पर नहीं हुई बल्कि पीड़ित पवन की न केवल 2 महीने की मेडिकल को LWP कर दिया गया बल्कि उनका ट्रांसफर 700KM दूर झाँसी कर दिया गया।
▪️ अधिकारी शिवम श्रीवास्तव को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और आत्मसम्मान में जवाब देने पर वीडियो में और अधिक अपशब्द कहे गए और गंभीर पनिशमेंट भुगतने की चेतावनी दी गई है ।
ये सब घटनाएँ मिलकर एक ही बात बताती हैं कि
UPGB में डर, अपमान और मानसिक उत्पीड़न को प्रशासनिक हथियार बनाया जा रहा है।
BOB से आए मुकेश जैन जैसे लोग ग्रामीण बैंक के अधिकारी कर्मचारी को इंसान नहीं गुलाम समझ रहे है।
अब सबसे गंभीर प्रश्न:
➡️ सबसे दुखद ये है कि जिन्हें बोलना चाहिए वो यूनियने और उनके नेताजी लोग पूँछ दबाए चुप क्यो पड़े हुए है।
➡️ चेयरमैन वाई.एस. ठाकुर अब तक चुप क्यों हैं?
➡️ क्या यह चुप्पी इस व्यवहार को संस्थागत संरक्षण दे रही है?
➡️ क्या यही कारण है कि आरोपी RM के हौसले बढ़ते जा रहे हैं?
@maharajganjpol@bankofbaroda@DFS_India आपसे अपेक्षा है कि इस घटना पर तत्काल एक्शन ले:
✔️ जब्त किए गए सभी मोबाइल फोन और DVR तुरंत लौटाए जाएँ
✔️ कर्मचारियों को धमकाने पर FIR/अनुशासनात्मक कार्रवाई हो
✔️ पीड़ित अधिकारियों को संरक्षण दिया जाए
✔️ RM मुकेश जैन को पद से हटाकर स्वतंत्र जांच कराई जाए
मोबाइल जब्त करना, DVR उठाना, धमकाना, ये प्रशासन नहीं, खुलेआम दमन है।
अगर आज आवाज़ नहीं उठी, तो कल हर शाखा में यही होगा।
@FinMinIndia@PMOIndia@CMOfficeUP@Uppolice@CVCIndia@India_NHRC
#StopWorkplaceAbuse
#UPGBank
#GraminBankers
#EndBankHarassment
#WhistleblowerProtection
@IndianTechGuide Working Days in Week 👇
▶️RBI- 5days
▶️DFS - 5 days
▶️LIC - 5 days
▶️CVC - 5 days
▶️SEBI - 5 days
▶️BSE- 5 days
▶️NSE- 5 days
▶️NPCI - 5 days
▶️IRDAI- 5 days
▶️Ministry - 5 days
▶️State Govt - 5 days
▶️Central Govt - 5 days
15 Lac Bankers still waiting....
#5DaysBanking
Bankers will work 40 Minutes extra everyday , in exchange of all Saturday Off, it's a Fair demand, keeping Public Services in mind.
#Approve5DayBankingNow
This news is regarding UTTAR PRADESH GRAMIN BANK REGION GHAZIPUR where RM Mr. Anirudh Singh has called a review meeting of officers of some branch today at 4:30 PM which concluded at around 9:30-10pm in which while going home one staff Mr. Amit kumar met with an accident in which he met with serious injury and both of his leg got fractured.
The RM and whole RO team daily and regularly pressurises the ghazipur team with un necessary targets and creating new techniques of evaluating staff performances which creates undue pressure.
(Shared by UPGB Staff)
Dy CLC, नई दिल्ली की कार्यवाही ने एक और गंभीर सच्चाई उजागर कर दी है — कि बैंक प्रबंधन और IBA न केवल निर्णय से भाग रहे हैं, बल्कि कर्मचारियों को डराने और हतोत्साहित करने की रणनीति भी अपना रहे हैं। UFBU ने स्पष्ट रूप से दर्ज कराया कि कई बैंकों द्वारा SMGS-IV और SMGS-V अधिकारियों को चुनिंदा रूप से धमकी भरे पत्र जारी किए गए, ताकि उन्हें वैध, लोकतांत्रिक और अधिसूचित हड़ताल से रोका जा सके। यह कोई प्रशासनिक संचार नहीं, बल्कि सीधी-सीधी intimidation है, जिसे Dy CLC ने स्वयं Industrial Disputes Act, 1947 की धारा 25-T के अंतर्गत अवैध हस्तक्षेप माना है।
इसके बावजूद सबसे बड़ा सवाल IBA की चुप्पी पर है। जब Dy CLC ने स्पष्ट निर्देश दिया कि ऐसे सभी धमकीपूर्ण पत्र तुरंत प्रभाव से abeyance में रखे जाएँ और वापस लिए जाएँ, तब IBA ने न तो इस प्रवृत्ति की सार्वजनिक निंदा की, न ही यह स्पष्ट किया कि वह अपने सदस्य बैंकों को किस आधार पर नियंत्रित करता है। यदि IBA वास्तव में एक जिम्मेदार नीतिगत संस्था है, तो उसे ऐसे अवैध और उकसावेपूर्ण कृत्यों पर कठोर रुख अपनाना चाहिए था। लेकिन IBA ने यहाँ भी वही भूमिका निभाई — मौन समर्थन की।
और इससे भी गंभीर तथ्य यह है कि Dy CLC ने यह भी दर्ज किया कि औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 33(1) और 22 पूरी तरह प्रभाव में रहेंगी। इसका सीधा अर्थ है कि यह हड़ताल न तो अवैध है, न ही मनमानी — बल्कि कानून के संरक्षण में है। इसके बावजूद IBA और बैंक प्रबंधन ने हड़ताल को “illegal” बताने का दुस्साहस किया, जो न केवल अधिकार क्षेत्र से बाहर है, बल्कि कर्मचारियों को भ्रमित और भयभीत करने का प्रयास भी है।
कार्यवाही अंततः किसी समाधान पर नहीं, बल्कि “adjournment” पर समाप्त हुई। फिर वही घिसा-पिटा बहाना — “सरकार समय लेगी”, “मामला विचाराधीन है”, “और प्रयास किए जाएँ।” IBA ने यहाँ भी सरकार से कोई समय-सीमा तय कराने का साहस नहीं दिखाया। इसका स्पष्ट संदेश है कि IBA का उद्देश्य समाधान नहीं, बल्कि टालमटोल को संस्थागत रूप देना है।
अब बैंक कर्मचारी यह पूछने को मजबूर हैं —
जब Dy CLC तक यह मान रहा है कि धमकी गलत है, अधिकार वैध हैं और कानून कर्मचारियों के साथ है,
तो IBA किसके पक्ष में खड़ा है?
कर्मचारियों के, या निर्णयहीनता के?
इसलिए अब यह आंदोलन केवल 5 दिवसीय बैंकिंग का नहीं रहा।
यह लड़ाई धमकी बनाम अधिकार,
टालमटोल बनाम जवाबदेही,
और चुप्पी बनाम संघर्ष की है।
अब ज्ञापन नहीं — IBA का घेराव होगा।
अब आश्वासन नहीं — निर्णय की तारीख़ चाहिए।
अब डर नहीं — कानून हमारे साथ है।
IBA को समझ लेना चाहिए —
कर्मचारी दबाव से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
नारे नहीं, नतीजे चाहिए।
और नतीजे अब टाले नहीं जा सकते। ✊
@iNitinTyagi@RtiCell15796@bankpediaa
@FinMinIndia@DFS_India@nsitharamanoffc@RBI
In the era of Digital India when smart banking should be the mark of VIKSIT BHARAT we are still following back dated idea of 6 days Banking. Long pending demand of #5DayBankingNow
should be implemented immediately unconditional.
Working Days in Week 👇
▶️RBI- 5days
▶️DFS - 5 days
▶️LIC - 5 days
▶️CVC - 5 days
▶️SEBI - 5 days
▶️BSE- 5 days
▶️NSE- 5 days
▶️NPCI - 5 days
▶️IRDAI- 5 days
▶️Ministry - 5 days
▶️State Govt - 5 days
▶️NABARD-5 days
15 Lac Bankers still waiting....
For #5DaysBankingNow
When the world is moving to a 4-day week, and banking is already 24x7 in the digital era, bankers asking for a 5-day week isn’t a luxury. It’s justice.
IBA has agreed. The understanding is signed.
Now the Government must honour its commitment – no more excuses, no more delays.
Respect the Settlement. Deliver it.
We demand #5DayBankingNow
When the entire world is moving towards 4 days a week, only we are deprived of the much needed 5 days banking… RBI, state government, insurance sector is having 5 days a week.. It’s high time that bankers should also be given 5 days a week… #5DayBankingNow