देश भर में प्राथमिक विद्यालय और माध्यमिक विद्यालयों के भवनों को लेकर समस्याएं हैं। लेकिन कैमरा लेकर जाने वाले केवल भविष्य के राजनीतिक लाभ के लिए ऐसा कर रहे हैं।
दिल्ली शिक्षा क्रांति EXPOSED (Part 2) ‼️
केजरीवाल जी की सरकार में बना एक और स्कूल जो कुछ ही सालों में खंडहर में बदल रहा है। इस स्कूल में भी पक्के लैंटर की छत की जगह सस्ती कमज़ोर सिल्लियों की छत है।
पूरी बिल्डिंग में सीलन, cracks, gap हैं। ये बिल्डिंग भी बच्चों-टीचरों के लिए ख़तरनाक।
स्कूल की हालत देखिए…
देश के नागरिक जो टैक्स चुकाते हैं, उसी टैक्स के 125 करोड़ रुपए से जालंधर का नया रेलवे स्टेशन बना। इतना खूबसूरत, इतना शानदार कि लोग कह रहे हैं कि एयरपोर्ट जैसा लगता है।
लेकिन 1 महीने में ही कुछ लोगों ने स्टेशन पर यह "संस्कार" दिखा दिए हैं।
भारत में ऐसा एक वर्ग है जो "दीमक" की तरह अन्दर ही अन्दर इस देश को खाये जा रहा है।
इनका क्या इलाज हो ?
अमर बलिदानी क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद की माँ की मृत्यु लगभग भुखमरी की कगार पर हुई, क्योंकि कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने उन्हें गद्दार की माँ करार दिया था।
लेकिन गद्दारों की मौज हुई जैसे
1
एक भारतीय, शोभा सिंह (मशहूर लेखक खुशवंत सिंह के पिता), ब्रिटिश अदालत में भगत सिंह के ख़िलाफ़ चश्मदीद गवाह के तौर पर पेश हुए; उनकी गवाही के कारण ही भगत सिंह को फाँसी हुई। बाद में, अंग्रेज़ों ने शोभा सिंह को 'सर' की उपाधि से सम्मानित किया; उन्होंने दिल्ली में अपने नाम पर ज़मीन के बड़े हिस्से हासिल किए।
3
कुंज बिहारी थापर—जो करण थापर और रोमिला थापर के दादा थे—ने रिटायरमेंट के बाद जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड के मास्टरमाइंड माइकल ओ'डायर के लिए ₹1.75 लाख इकट्ठा किए। उन्हें 'दीवान बहादुर' की उपाधि से सम्मानित किया गया और उनकी वफ़ादारी के सम्मान में 1920 में 'ऑर्डर ऑफ़ द ब्रिटिश एम्पायर' (MBE) का सदस्य बनाया गया।
2
चिमनलाल हरीलाल सीतलवाड़, नागरिक अधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार तीस्ता सीतलवाड़ के परदादा थे। पेशे से बैरिस्टर, उन्होंने हंटर कमीशन में काम किया, जिसने जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड के मामले में माइकल ओ'डायर को क्लीन चिट दे दी थी।
अगर बहादुरी की 10,000 कहानियाँ हैं, तो गद्दारी की भी उतनी ही कहानियाँ हैं।
जंतर मंतर तो खाली करा लिया जाएगा लेकिन बिना किसी रिव्यू के अंधाधुंध दिए जा रहे आरक्षण को लेकर जो विरोध लोगों के मन में भर चुका है वो मन से ख़ाली कैसे होगा?
लेकिन पता है कि कोई पार्टी इसपर चर्चा तक को तैयार नहीं होगी। लिख के ले लीजिए।
जाति आधारित आरक्षण को विरुद्ध शान्तिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को बलपूर्वक जंतर-मंतर से हटाना है और तिलचट्टों की बेहूदगी भी झेलते रहे। यह अच्छी बात नहीं है
कुर्बान अली जी नव निर्माण आंदोलन और 74 के सपने से अगर कॉकरोच जनता पार्टी की तुलना कर रहे हैं तो मैं इस पर कुछ नहीं कह सकता। हमारे देश में 40 करोड़ के आसपास जेएनजी हैं और उसमें से 10 - 20 लाख लोग ऐसा कर रहे हैं। राजस्थान में जो हुआ है उससे सीख लेनी चाहिए।
भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन तो इस देश में कई बार हुए, जेपी से लेकर अन्ना तक, परंतु आरक्षण और SC/ST एक्ट के दुरुपयोग को लेकर पहली बार सड़क पर भीड़ उतरी है, और वो भी भगवा झंडे के तले ⛳️
ऐसे आंदोलनों से आरक्षण/SC ST एक्ट समाप्त हो या न हो, इसका बढ़ता हुआ दायरा और दुरूपयोग, दोनों पर लगाम लगेगी
#UGC के नये नियमों को लेकर मैं पहले कई बार लिख/कह चुका हूँ कि उन्हें लागू करना संभव ही नहीं है, वो कहानी ख़त्म हुई, लेकिन सरकार को फिर से याद दिलाना एक अच्छा क़दम है
#जंतर_मंतर
थोड़ी बहुत अराजकता भी समाज को ठीक करने के लिए कभी-कभी आवश्यक होती है, लेकिन जब आप अराजकता को कारोबार बनाकर मजे लेने लगते हैं तो किसी दिन अराजकता पलटकर आती है। तिलचट्टों के साथ वही हो रहा है।
विकल्प के रूप में इसके पास देश के प्रधानमंत्री के रूप में 56 बरस का अधेड़ है।
गृहमंत्री के रूप में इसके पास दिमागी नक्सल चिदंबरम विकल्प है।
इसके शेष विकल्प की सूची में इंडी गिरोह के शेष छोटे सरगनाओं के नाम उनकी लूटो खाओ की क्षमतानुसार दर्ज हैं, बिल्कुल उसी तरह जैसे इसका आका जब महराष्ट्र का CM था तो उसका गृहमंत्री मुम्बई में नाच गाने दारू के अड्डों से 100 करोड़ रु महीना की उगाही में जुटा था, खुद मुम्बई पुलिस कमिश्नर का यह बयान है।