काफी लंबे समय बाद अंतत लोकसभा में देश के ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लिखित में जवाब दिया कि पूरे देश में विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं की सहमति के बाद ही बिजली कंपनियां उपभोक्ता को प्रीपेड मोड में कनेक्शन उपलब्ध कराएंगे।
@UPPCLLKO की बैठक में चेयरमैन द्वारा टीजी–2 कर्मचारियों के संबंध में“दलाल”जैसी टिप्पणी आपत्तिजनक एवं निंदनीय है । टीजी 2 कर्मचारियों के सम्मान व मनोबल पर यह सीधा आघात है
संघ तत्काल सार्वजनिक खेद एवं सम्मानजनक स्पष्टीकरण की मांग करता है
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केंद्र सरकार द्वारा निजीकरण की प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश की बिजली कंपनियों को शामिल करना अनुचित देश के जिन 6 राज्यों को किया गया है बेल आउट पैकेज के लिए चिन्हित उसमें उत्तर प्रदेश सबसे अच्छी स्थिति में— उपभोक्ता परिषद
प्रदेश की बिजली कंपनियों में 3 करोड़ 61 लाख विद्युत उपभोक्ताओं के सापेक्ष मानक पर उपभोक्ता सेवा में सुधार के लिए सहायक अभियंता अवर अभियंता व टेक्निकल ग्रेड 2(TG-2) की अभिलंब भर्ती शुरू करना चाहिए उपभोक्ता परिषद जल्द इस मुद्दे पर प्रबंधन व सरकार से बात करेगा।
उपभोक्ता परिषद का बड़ा खुलासा आरडीएसएस योजना के फ्री स्मार्ट प्रीपेड मीटर जो लगने थे को नए कनेक्शन पर अनिवार्य करके गरीब उपभोक्ताओं से ₹6016 वसूली – दीपावली से पहले विद्युत कनेक्शन से वंचित हो रहे हजारों लोग।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर थोपना असंवैधानिक, उपभोक्ताओं के अधिकारों का खुला उल्लंघन विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) जो उपभोक्ताओं को प्रीपेड व पोस्टपेड का देता है विकल्प उसमें कोई संशोधन प्रस्तावित नहीं: अवधेश कुमार वर्मा
विधान सभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का किया विरोध : निजीकरण के उद्देश्य से हजारों पदों को समाप्त कर बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने की साजिश : केवल लेसा में लगभग 8000 पद समाप्त करने के निर्णय से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा
उत्तर प्रदेश के चार शहरों में विद्युत वितरण प्रणाली की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग करने से आए दुष्परिणामों को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने 01 नवंबर से लेसा में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू कर हजारों पदों को समाप्त किए जाने का विरोध किया है।
आज संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने इस संबंध में विधानसभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष और मेरठ के माननीय विधायक श्री अमित अग्रवाल जी से फोन पर बात की। श्री अमित अग्रवाल ने कहा कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के बाद मेरठ की बिजली व्यवस्था पहले से खराब हो गई है। श्री अमित अग्रवाल ने बताया कि 12 सितंबर 2025 को हुई प्राक्कलन समिति की बैठक में भी प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष के पद से उन्होंने वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का प्रबल विरोध किया था। श्री अमित अग्रवाल ने कहा कि विद्युत वितरण की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग आम उपभोक्ताओं के हित में नहीं है अतः इसे वापस लिया जाय।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन निजीकरण के नाम पर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू कर रहा है और इसके बहाने बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अकेले लेसा में ही 8000 से अधिक पद समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की है कि वह मनमाने ढंग से हजारों पदों को समाप्त करने के मामले में तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप करें अन्यथा पावर कार्पोरेशन प्रबंधन उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त कर देने पर आमादा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि प्रबन्धन यह सब तब कर रहा है जब बिजली कर्मी और अभियन्ता दीपावाली के पर्व पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति करने हेतु योजनाबद्ध ढंग से काम कर रहे हैं। अभियंता संघ ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जनपदों में 16 अक्टूबर को अभियंताओं की सभा भी बुलाई है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि लेसा में 2055 नियमित पद और लगभग 6000 संविदा कर्मियों के पद मनमाने ढंग से समाप्त पर पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन प्रदेश की राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने का काम कर रहा है जिसका उपभोक्ता सेवा पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने बताया की वर्तमान में लेसा में अधीक्षण अभियंता स्तर के 12 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर आठ किया जा रहा है, अधिशासी अभियंता स्तर के 50 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर 35 किया जा रहा है, सहायक अभियंता स्तर के 109 पद स्वीकृत उन्हें घटाकर 86 किया जा रहा है, अवर अभियंता स्तर के 287 पर स्वीकृत है उन्हें घटाकर 142 किया जा रहा है और टीजी 2 के 1852 पर स्वीकृति उन्हें घटाकर 503 किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त लेखा संवर्ग में अकाउंटेंट के 104 पद हैं उन्हें घटाकर 53 किया जा रहा है, एग्जीक्यूटिव अस्सिटेंट के 686 पद हैं उन्हें घटाकर 280 किया जा रहा है और कैंप असिस्टेंट के 74 पद हैं उन्हें लगभग समाप्त कर 12 किया जा रहा है ।
संघर्ष समिति ने बताया कि पद समाप्त करने और छटनी के मामले में सबसे बड़ी मार संविदा कर्मियों पर पड़ रही है। संविदा कर्मियों के छह हजार से अधिक पद समाप्त किए जा रहे हैं।
निजीकरण के विरोध में आज प्रदेश के समस्त जनपदों पर बिजली कर्मचारियों ने लगातार 320 वें दिन जोरदार प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
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वित्त मंत्री एवं ऊर्जा मंत्री के साथ हुये समझौते का सम्मान करते हुये निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की मांग : निजीकरण के विरोध में प्रान्त व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी
प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री श्री सुरेश खन्ना और तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा के साथ ठीक पांच वर्ष पूर्व आज के ही दिन हुये लिखित समझौते का उल्लेख करते हुये बिजली कर्मियों ने आज सभी जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर मांग की कि प्रदेश सरकार के शीर्ष मंत्रियों के साथ हुये समझौते का सम्मान करते हुये पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाय।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि आज की ही तारीख को 06 अक्टूबर, 2020 को वित्त मंत्री एवं पूर्व ऊर्जा मंत्री से वार्ता के बाद विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के साथ लिखित समझौता हुआ था। समझौते के पहले बिन्दु में ही लिखा गया है -"विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही सुधार हेतु कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्यवाही की जायेगी। कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में लिये बिना उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जायेगा।"
संघर्ष समिति ने कहा कि इतने वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों के साथ किए गये लिखित समझौते का खुला उल्लंघन कर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन द्वारा ऐलान किए जाने का दुष्परिणाम यह है कि प्रदेश के ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मी विगत 314 दिनों से सड़क पर उतरकर आंदोलन करने हेतु विवश हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि कि बिजली कर्मी सदा ही संघर्ष से पहले सुधार को महत्व देते हैं किंतु बड़े अफसोस की बात है कि 06 अक्टूबर 2020 को हुए समझौते के अनुरूप पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने सुधार पर आज तक विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र से कोई वार्ता नहीं की। उल्लेखनीय है कि संघर्ष समिति ने समझौते के एक महीने के अंदर ही पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन को सुधार का प्रस्ताव दे दिया था।
संघर्ष समिति ने कहा कि इतने वरिष्ठ मंत्रियों के साथ हुए समझौते का सम्मान न करने से बिजली कर्मियों में अनावश्यक रूप से अविश्वास का वातावरण बन रहा है जो सरकार और प्रबन्धन दोनों के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
समझौते के ठीक पांच साल पूरा होने पर आज बिजली कर्मियों ने सभी जनपदों में समझौते की प्रतियां लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने नारे लगाये - " समझौते का सम्मान करो, निजीकरण वापस लो।"
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प्रदेश की बिजली कंपनियों में बिना नियामक आयोग के अनुमोदन के नए कनेक्शन पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य करके कनेक्शन दिए जाने के आदेश से कनेक्शन की नई दरों में 5 से 6 गुना बढ़ोतरी पर नियामक आयोग में उपभोक्ता परिषद ने दाखिल किया पावर कार्पोरेशन प्रबंधन के खिलाफ अवमानना याचिका।
केंद्र सरकार ने 3% #DA बढ़ाने का फैसला किया है। जो स्वागत योग्य है लेकिन 18 महीने का अभी DA एरियर बकाया है। लगभग एक साल पहले DA 50% हो गया था जिसको बेसिक सेलरी में मर्ज होना था, जो अब तक नहीं हुआ उससे कम से कम 10% का नुकसान हर महीने हो रहा है। केंद्र सरकार से अपील है कि उस पर भी तस्वीर साफ करे और 8 महीने पहले जो #8CPC के गठन की घोषणा की थी उसको भी पूरा करे।#ManjeetSinghPatel
प्रदेश के 42 जनपदों के निजीकरण के मामले में आया नया मोड़ पूर्व निदेशक वित्त के जाते ही खुल गई पोल ग्रांट थॉर्नटन को दोष मुक्त करने के मामले में टेंडर मूल्यांकन कमेटी ने नहीं दी थी सहमति केवल पूर्व निदेशक वित्त ने पत्रावली पर एमडी व चेयरमैन से सीन कर उसे दबा लिया। जो गलत।
42 जिलों में बिजली निजीकरण का खेल, 1 लाख करोड़ की संपत्ति 6500 करोड़ में बेचने की तैयारी!
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निजीकरण पर कारपोरेशन और सरकार के करोड़ो के सलाहकार को यह नही भूलना चाहिए उपभोक्ता परिषद के सवालों का जबाब देना बच्चों का खेल नही।अडानी और टाटा जो निजीकरण पर बहुत फड़फड़ा रहे वह परिषद से अभी तक हारे ही है।(विदेशी कोयला-टाटा हेयर कट ऑफ-स्मार्ट प्रीपेड मीटर-पैरलल लाईसेंस) याद है न।
उप्र बिजली विभाग निजीकरण के खिलाफ चल रही इस ऐतिहासिक लड़ाई में उपभोक्ताओं और कर्मचारियों की आवाज़ बनकर जो शख़्स लगातार मजबूती से खड़े हैं वह हैं आदरणीय अवधेश वर्मा साहब।
इनकी बुलंद आवाज़ और जोशीले शब्दों ने बार बार यह साबित किया है कि... निजीकरण बच्चों का खेल नहीं है।
पिछले 08 महीनों से जिस मजबूती और तथ्यों के साथ इन्होंने विद्युत नियामक आयोग में याचिकाएँ दायर कीं उसी का नतीजा है कि निजीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही। टाटा, अडानी जैसे बड़े पूंजीपतियों की मनमानी को रोकने का साहस दिखाने वाले अवधेश वर्मा जी वास्तव में संविधानिक योद्धा हैं।
यह सिर्फ उपभोक्ता परिषद क़े अध्यक्ष ही नहीं बल्कि उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के विश्वसनीय नेता हैं जो बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की उस बात को आगे बढ़ाते हैं कि बिजली जैसी आवश्यक सेवाएँ हमेशा सरकारी क्षेत्र में रहनी चाहिए।
उनके संघर्ष में जो जोश है, जो जुनून है, जो जज़्बा है वह सुनकर हर बिजली कर्मचारी और उपभोक्ता गर्व महसूस करता है कि हमारे पास ऐसा सशक्त नेतृत्व है जो निजीकरण जैसी जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संवैधानिक और कानूनी लड़ाई पूरी दमदारी से लड़ रहा है।
श्री अवधेश वर्मा जी आज सिर्फ एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक आंदोलन हैं बिजली विभाग बचाने का, अधिकार बचाने का और संविधान बचाने का आंदोलन। @uprvup
आज प्रयागराज जनपद में बिजली विभाग उत्तर प्रदेश के PUVVNL और DVVNL के निजीकरण के विरोध में मानवता की दृष्टि से बाढ़ पीड़ितों को अन्न दान किया गया।
संयुक्त संघर्ष समिति प्रयागराज द्वारा
विभाग में IAS व उनके "खास" आज तक धरातल की समस्या और उसके निवारण की दिशा में सही कदम उठाते नहीं दिखे। फोटो शूट और गलत नीतियां/आदेशों से विभाग नहीं सुधरेगा ।जमीन पर उतरिए ,अध्ययन करिए ,जमीन से जुड़े कर्मियों से संवाद करिए तब सुधार होगा ।
लेकिन अफसोस!!
@UPPCLLKO@myogioffice