उत्तर प्रदेश में एक मंत्री जी है��� जिनको पंचायत विभाग मिला है पर इनको अपने विभाग से कोई मतलब ही नहीं है,
उनके विभाग के ही कर्मचारी पिछले लगभग दो हफ्तों से धरना दे रहे हैं पर उनकी सुनने वाला कोई नहीं,
उनसे सिर्फ ₹6000 में बधुआ मजदूर की तरह पूरे महीने भर काम कराया जाता है,
आखिरकार ₹200 दिन में कौन काम करता है,
उनकी मांग है कि उनकी सैलरी बढ़ाई जानी चाहिए जो की जायज है।
प्रधानमंत्री जी की तरह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी भी जुमलेबाजी करने से चूकते नहीं है।
जो किया नहीं है उसका भी गुणगान करते हैं और जो कर नहीं सकते चुनाव के समय उसका जुमलेबाजी कर लेते हैं।
7000 करोड़ प्रदेश की जनता के टैक्स के पैसे ऐसे ही जुमले और विज्ञापन में ��ो खर्च हो रहे है।
जब पंचायत सहायकों की आवाज़ हर तरफ से उठ रही है, तो सरकार की चुप्पी क्यों? 🚨
🔥 नेता आवाज़ उठा रहे हैं… मीडिया सवाल उठा रहा है… संगठन लगातार संघर्ष कर रहे हैं… पंचायत सहायक सड़कों पर हैं… फिर भी शासन स्तर से कोई ठोस जवाब क्यों नहीं?
आखिर पंचायत सहायकों के मानदेय में सम्मानजनक बढ़ोतरी करने में सरकार को क्या आपत्ति है?
पंचायत सहायक लगातार अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।
ज्ञापन दिए गए, प्रदर्शन हुए, अभियान चलाए गए और लगातार शासन-प्रशासन तक अपनी आवाज़ पहुंचाई गई।
आज तमाम राजनीतिक दलों के नेता, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और मीडिया साथी भी यह सवाल उठा रहे हैं कि पंचायत सहायकों को उनकी मेहनत और जिम्मेदारियों के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय मिलना चाहिए।
तो ��िर सवाल सरकार से है—
❓ जब मांग जायज़ है, आवाज़ लगातार उठ रही है, जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, तो फैसला कब होगा?
❓ पंचायत सहायकों को उनके अधिकार और सम्मान का जवाब कब मिलेगा?
अब चुप रहने का समय नहीं है।
हर पंचायत सहायक अपनी आवाज़ को शासन तक पहुंचाए।
🔥 14 सितंबर 2026 | सुबह 11 बजे से
🔥 15 सितंबर 2026 | शाम 5 बजे तक
🔥 ट्विटर (X) पर महाअभियान
📢 हर साथी ट्वीट करे।
📢 ज्यादा से ज्यादा साथियों को जोड़े।
📢 जन��्रतिनिधियों, नेताओं और मीडिया को टैग करे।
📢 अपनी मेहनत, जिम्मेदारियों और जायज़ मांगों की आवाज़ बुलंद करे।
सरकार तक एक ही सवाल पहुंचना चाहिए—
“पंचायत सहायकों की मेहनत दिख रही है, उनकी जिम्मेदारियां दिख रही हैं, उनकी आवाज़ दिख रही है… फिर उनकी मांगें क्यों नहीं दिख रही?”
✊ अबकी बार आवाज़ हर पंचायत सहायक की होगी।
✊ एकता हमारी ताकत है, संघर्ष हमारा अधिकार है।
14–15 सितंबर को ट्विटर पर इतिहास ���चने के लिए तैयार रहें।
#पंचायत_सहायक_संघर्ष
#पंचायत_सहायक
#पंचायत_सहायक_कल्याण_समिति
लखनऊ के ईको गार्डन में अपनी विभिन्न जायज मांगों (नियमितीकरण, मानदेय वृद्धि आदि) को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे 'पंचायत सहायक कर्मचारियों' के समर्थन में अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ प्रदेश महासचिव नूर सिद्दीकी जी का संबोधन 🙌
"पंचायत सहायकों" के धरने में AAP सांसद @SanjayAzadSln जी की हुंकार! 🔥
👉 सरकार ने 1 लाख सरकारी स्कूल बंद किए और स���कूलों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है।
👉 चंद पूंजीपतियों के 17 लाख करोड़ माफ़ किए गए, लेकिन पंचायत सहायकों को ₹30,000 मानदेय देने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं!
👉 40 दिन वाले सांसद/विधायक को आजीवन पेंशन, लेकिन 40 साल देश की सेवा करने वाले कर्मचारी को पेंशन नहीं?
👉 अब हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करने वालों की दुकान बंद करने का वक्त है। अपने हक़ के लिए एकजुट होकर लड़ो, सरकार को झुकना पड़ेगा!
: @SanjayAzadSln जी, राज्यसभा सांसद, AAP
आठ दिनों से पंचायत सहायक जो हैं जिनकी संख्या 58 हजार है, वो पंचायत सहायक यहां पर आंदोलन पर बैठे हुए हैं। उनकी बात कोई सुनने वाला नहीं है।
सरकार को इनकी मांग सुननी चाहिए और तीस हज़ार रुपये जो न्यूनतम मानदेय की ये लोग मांग कर रहे हैं, उसको पूरा करना चाहिए।
: @SanjayAzadSln जी, राज्यसभा सांसद, AAP
29 विभागों का काम संभालने वाले पंचायत सहायकों को मात्र ₹6,000 देना शर्मनाक है!
पंचायत सहायक कर्मचारियों का मानदेय ₹30,000 करे योगी सरकार!
: @SanjayAzadSln जी, राज्यसभा सांसद, AAP
उत्तर प्रदेश में लगातार धरनारद पंचायत सहायकों की मांग जायज है,
आप ऐसे बधुआ मजदूर की तरह उन्हें नहीं रख सकते हैं,
पंचायत सहायकों के सम्मान में उनकी सैलरी में तत्काल वृद्धि की जानी चाहिए,
सरकार को जल्द यह सुनिश्चित करना चाहिए।
#WATCH लखनऊ (उत्तर प्रदेश): AAP सांसद संजय सिंह ने पंचायत सहायक कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन पर कहा,"आठ दिनों से पंचायत सहायक जो हैं जिनकी संख्या 58 हजार है वो पंचायत सहायक यहां पर आंदोलन पर बैठे हुए हैं। उनकी बात कोई सुनने वाला नहीं है। सरकार को इनकी मांग सुननी चाहिए और तीस हज़ार रुपये जो न्यूनतम मानदेय की ये लोग मांग कर रहे हैं उसको पूरा करना चाहिए। 6 हज़ार रुपये तो मतलब इनके साथ शोषण है मैं यही कह सकता हूं।"
2029 तक NDA-शासित 21 राज्यों में UCC लागू होने पर उन्होंने कहा," वो इसी सब में तो उलझा के रखा हुए हैं। रोजगार ���ी स्कूल की अस्पताल की तरक्की की बात ही नहीं करते हैं।"
यूपी में 58,000 पंचायत सहायक पिछले कई वर्षों से मात्र 6,000 रुपये प्रति माह में काम कर रहे हैं। 6,000 रुपये में कोई नौजवान अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे कर सकता है? इनकी मांग ��ै कि मानदेय 30,000 रुपये प्रति माह किया जाए। @myogiadityanath जी को इनकी मांगें तुरंत मान लेनी चाहिए। @AamAadmiParty सड़क से संसद तक पंचायत सहायकों की मांगों का समर्थन करती है।