माननीय चन्द्रशेखर आज़ाद जी ने राजनीतिक की दिशा बदल दी है।
#सामान्य सीटों पर #दलित प्रत्याशियों को उतारने के लिए सभी #राजनीतिक_दलों को मजबूर होना पड़ा है—और यही हमारे मिशन की सबसे बड़ी जीत है।
@BhimArmyChief
परम प्रतापी योद्धा, अद्भुत साहस, दूरदर्शी रणनीति और जनकल्याणकारी शासन के प्रतीक, बहुजन प्रतिपालक राजाधिराज छत्रपति शिवाजी महाराज के संबंध में यह कहना कि वे युद्धों से थककर अपना मुकुट किसी और को सौंपना चाहते थे, न केवल ऐतिहासिक रूप से असत्य है, बल्कि उनके अदम्य साहस और स्वाभिमान का घोर अपमान भी है।
प्रधानमंत्री @narendramodi जी के ‘मुँहबोले छोटे भाई’ धीरेन्द्र द्वारा नागपुर में ऐसे मंच से, जहाँ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में इस प्रकार का बयान दिया जाना, भाजपा-आरएसएस की उसी सोच का परिणाम है, जहाँ बहुजन नायकों के योगदान को कमतर दिखाने, उनके संघर्ष को कमजोर करने और उनके व्यक्तित्व को विकृत करने की कोशिश लगातार की जाती रही है।
इतिहास साक्षी है कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी।उनका जीवन त्याग, संघर्ष और आत्मसम्मान की सर्वोच्च मिसाल है-न कि थककर पीछे हट जाने की कहानी।
ऐसे भ्रामक और असत्य बयानों के माध्यम से न केवल समाज को गुमराह किया जा रहा है, बल्कि नई पीढ़ी के सामने इतिहास की विकृत तस्वीर प्रस्तुत की जा रही है। यह सीधे-सीधे हमारे महापुरुषों के गौरव को ठेस पहुँचाने का प्रयास है।
हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि बहुजन समाज अपने महापुरुषों के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। इस बयान के लिए धीरेंद्र पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, स्वाभिमान और बहुजन अस्मिता के जीवंत प्रतीक हैं। उनके गौरव को ठेस पहुँचाने वाली किसी भी सोच और साजिश को देश का जागरूक समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।
भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार एवं शोषितों वंचितों व महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रतीक, विश्व रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन एवं विनम्र आदरांजलि और आप सभी को हार्दिक बधाई व मंगलकामनाएं।
#AmbedkarJayanti
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#संविधान_निर्माता_दिवस
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आज लोकसभा में माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष @BhimArmyChief, नगीना से लोकप्रिय सांसद भाई चन्द्रशेखर आज़ाद जी ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाने का प्रयास किया।
कार्यालय मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश
(प्रेस नोट)
लखनऊ, 07 फरवरी 2026
प्रदेश में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण- 2026 के अंतर्गत 6 मार्च, 2026 तक दावे एवं आपत्तियां प्राप्त की जाएगी। उन्होंने बताया आपत्तियों के संबंध में फार्म 7 के माध्यम से मृत, स्थानांतरित, दोहरी प्रविष्टि, अनुपस्थित आदि मतदाताओं के संबंध में नियमानुसार प्रक्रिया अपनाते हुए कार्रवाई की जा रही है।
मतदाता सूची को शुद्ध एवं त्रुटिरहित तैयार किये जाने हेतु विलोपन कार्यवाही की जाती है। फॉर्म-7 में प्रस्तुत आवेदन के आधार पर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा मतदाता सूची से किसी मतदाता का नाम विलोपित किए जाने की कार्यवाही की जाती है। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 1960 के नियम 13(2) के अनुसार विद्यमान नामावली में नाम के प्रस्तावित समावेश के लिए प्रत्येक आपत्ति या नाम को हटाये जाने के लिए आवेदन प्ररूप-7 में होगा और केवल ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाएगा, जिसका नाम पहले से ही उस मतदाता सूची में सम्मिलित है। साथ ही आपत्तिकर्ता को फार्म-7 में स्वयं का विवरण यथा-नाम, मतदाता फोटो पहचान पत्र संख्या, स्वयं का एवं संबंधी का मोबाइल नम्बर इत्यादि देना आवश्यक है।
फॉर्म-7 में प्राप्त आपत्तियों की सूची निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा फार्म-10 में तैयार की जाती है। दावे एवं आपत्तियों की अवधि में प्राप्त आपत्तियों की सूची फार्म-10 में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के नोटिस बोर्ड पर प्रतिदिन प्रदर्शित की जाती है तथा निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों को साप्ताहिक रूप से उपलब्ध करायी जाती है। साथ ही राजनैतिक दलों एवं जन सामान्य की सुविधा हेतु फार्म-7 में प्राप्त आवेदनों की उक्त सूची (फार्म-10) जिला निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर प्रतिदिन अपलोड की जाती है, जिसका लिंक मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहता है।
फार्म-7 में प्राप्त आवेदनों का नियमानुसार प्रक्रिया अपनाते हुए निस्तारण किया जाता है, जिसके अन्तर्गत नोटिस निर्गत करना, बूथ लेवल अधिकारी द्वारा स्थलीय सत्यापन की कार्यवाही करते हुए रिपोर्ट लगाया जाना तथा न्यूनतम 7 दिन की अवधि के पश्चात् निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा यथावश्यक सुनवाई की प्रक्रिया करते हुए प्रस्तुत आवेदन पर निर्णय लिया जाना सम्मिलित है। किसी व्यक्ति के नाम को मतदाता सूची में सम्मिलित करने के विरूद्ध आपत्ति के प्रकरण में आपत्तिकर्ता को फार्म-13 में नोटिस निर्गत की जाती है। जिस व्यक्ति का नाम सम्मिलित करने के विरूद्ध आपत्ति की गयी है उस व्यक्ति को फार्म-14 में नोटिस निर्गत की जाती है।
निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 1960 के नियम 19 के अनुसार निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी आपत्ति के संबंध में सुनवाई की तारीख, समय और स्थान निर्धारित कर उसकी सूचना अपने नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करेगा और सुनवाई की सूचना/नोटिस जारी करेगा। नियम 19 के अनुसार सूचना/निर्गत नोटिस के अन्तर्गत निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा ऐसी हर आपत्ति की संक्षिप्त जाँच की जाएगी। इस हेतु निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा आपत्तिकर्ता/व्यक्ति को अपने समक्ष उपस्थित होने तथा समुचित साक्ष्य प्रस्तुत करने हेतु कहा जा सकता है।
प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा आवेदन थोक में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। केवल व्यक्तिगत आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे। यही सिद्धांत डाक से प्राप्त आवेदनों पर भी लागू होगा। थोक आवेदन का आशय उन आवेदनों से है जिन्हें अनेक व्यक्तियों की ओर से एक व्यक्ति द्वारा जमा किया जाता है। हालांकि परिवार के सदस्यों से जुडे़ एक साथ प्रस्तुत व्यक्तिगत आवेदनों को स्वीकार किया जा सकता है।
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उत्तर प्रदेश के जनपद औरैया के थाना दिबियापुर अंतर्गत थाना फफूंद क्षेत्र के ग्राम तुलसीपुर निवासी 21 वर्षीय दलित युवक अनुज कुमार उर्फ छोटू [आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) की उत्तर प्रदेश कोर कमेटी के सदस्य देवराज आज़ाद जी के छोटे भाई] की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हत्या अत्यंत दुखद एवं गंभीर जाँच का विषय है।
दिनांक 18 जनवरी 2026 को शाम लगभग 5:30 बजे अनुज यह कहकर घर से निकला था कि वह ग्राम लाडपुर मोटरसाइकिल देने जा रहा है। शाम 7:00 बजे उसके मोबाइल पर कॉल कर यह कहा गया कि अनुज का ग्राम दखलीपुर में एक्सीडेंट हो गया है, लेकिन मौके पर न तो कोई एक्सीडेंट मिला और न ही अनुज का कोई पता चला।
लगातार तलाश के बाद अगली सुबह अनुज की मोटरसाइकिल सड़क किनारे तथा उसका शव सड़क से लगभग 100 मीटर दूर खेत में पड़ा मिला, जिसके सिर में गंभीर चोट के निशान थे।परिस्थितियाँ स्पष्ट रूप से हत्या की ओर संकेत करती हैं।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि घटना को कई दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस अब तक किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सकी है। न तो हत्या की वजह स्पष्ट की गई है और न ही किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई है। यह स्थिति न केवल पीड़ित परिवार, बल्कि पूरे समाज के लिए गहरी चिंता का विषय है—विशेषकर तब, जब मृतक दलित समुदाय से संबंध रखता हो।
हम इस हृदयविदारक घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हैं। हमारी संवेदनाएँ शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। प्रकृति उन्हें यह असीम दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे।
हम @UPGovt से मांग करते हैं कि—मामले की तत्काल उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जाँच कराई जाए
हत्या में शामिल सभी दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए,जाँच में हो रही देरी व लापरवाही की जवाबदेही तय की जाए, पीड़ित परिवार को सुरक्षा, न्याय एवं सम्मान दिया जाए
@CMOfficeUP@myogiadityanath
हमीरपुर (उ.प्र.) की एक युवती के साथ नशीली दवा देकर शोषण वीडियो बनाकर ब्लैकमेल पैसे की उगाही और जान से मारने की धमकी का आरोप
शिकायत पत्र उपलब्ध है फिर भी कार्रवाई लंबित है कृपया तत्काल FIR दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
@Uppolice@dgpup@adgzonekanpur@hamirpurpolice
जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद रायपुर से कश्मीर का हवाई किराया 10,000 रुपये से सीधे 21,000 रुपये तक पहुंच गया है। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि "आपदा में अवसर" ढूंढने वाली इस व्यवस्था का क्रूर मज़ाक है।
एक ओर देश की जनता आतंकवाद से डरी-सहमी है, दूसरी ओर मुनाफाखोरी के दलाल किराया लूट रहे हैं। और सरकार? सरकार चुप है। न कोई नियंत्रण, न कोई राहत। क्या यही "न्यू इंडिया" है, जहाँ संकट में भी राहत नहीं, सिर्फ लूट की खुली छूट है?
मैं पूछना चाहता हूँ प्रधानमंत्री @narendramodi जी से जब जनता आतंकी हमले से डरी हुई है, तब क्या सरकार की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह जनता की मदद करे? क्या सरकार इस आपदा में भी मुनाफा कमाने वालों के साथ खड़ी है?
भारत मुनाफे की मंडी नहीं ,जनता का गणराज्य है। "आपदा में अवसर" की इस अमानवीय मानसिकता को बंद होना चाहिए!
पूरे देश ने बहुजन समाज की एकता का जो जनसैलाब दिल्ली में देखा उससे एक बार फिर ये साबित हो गया-
"हक-अधिकारों की लड़ाई में निमंत्रण नहीं भेजे जाते, जिनका ज़मीर ज़िंदा हो, वे खुद दौड़े चले आते हैं।"
देश के हुक्मरानों की नाक के नीचे देश की राजधानी में आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के साथ लाखों बहुजन योद्धाओं ने बहुजन एकता की इस जंग में सिपाही की तरह अपनी जिम्मेदारी को महसूस करते हुए प्रण लिया कि–
1) जाति जनगणना के साथ ही आर्थिक जनगणना के लिए व्यापक आंदोलन चलाएंगे जिससे पता चल सके देश के संसाधनों पर कौन कब्ज़ा जमाए बैठा है?
2) ओबीसी वर्ग के लिए 27% के अतिरिक्त 15% और शेड्यूल्ड कास्ट (एससी) के लिए 15% से अतिरिक्त 10% आरक्षण बढ़ाने के प्रावधान की मांग के लिए सदन से लेकर सड़क तक संघर्ष।
3) SC-ST में क्रीमीलेयर ढूंढने के नापाक मंसूबों को तो किसी कीमत पर कामयाब होने ही नहीं देंगे। साथ ही OBC के जबरन क्रीमीलेयर के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे।
4)सरकारी नौकरियों में बैकलॉग(जो लाखों की संख्या में है) पूरा कराकर छोड़ेंगे।
5) निजी क्षेत्र में SC/ST व OBC को आरक्षण की पूर्ण व्यवस्था के लिए पुरज़ोर प्रयास करेंगे।
6) सफाईकर्मी की नौकरी में ठेकेदारी समाप्त कर पक्की नौकरी देने और गटर में उतरने की अमानवीय व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म कराने किए संघर्ष करेंगे।
7) समान कार्य समान वेतन के लिए प्रतिबद्धता।
8) SC/ST व OBC को प्रमोशन में रिजर्वेशन।
9) 2 अप्रैल 2018 के सभी मुकदमे वापस होने तक संघर्ष।
10) पुरानी पेंशन बहाल की जाए।
और अंत में, सरकार की तरफ से दलित समाज की एकता को बांटने का जो प्रयास किया गया है उसके खिलाफ हर स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा जिससे की समाज के हर व्यक्ति को सरकार के षड्यंत्र से वाकिफ कराया जा सके।
नमो बुद्धाय, जय भीम, जय मंडल, जय जोहार।