ऐसी कविताएं लिखने के लिए
जिनमें राजनीति नहीं हो-
इसके लिए जरूरी है कि
मैं चिड़ियों को सुनूँ
और चिड़ियों को सुनने के लिए
जरूरी है
कि
लड़ाकू विमान आवाज़ न करें।।
- मरवान मख्खुल ❤️
अनुवाद : @Kitabganj1
(फिलिस्तीनी कवि Marwān Makhkhūl की कविता का अनुवाद, किताबगंज द्वारा)
ॐ शांति, दूबे परिवार को विनम्र श्रद्धांजलि !!
आज अक्षय वाटिका, देवरिया में स्वर्गीय सत्य प्रकाश दूबे एवं उनकी पत्नी बच्चों की विशाल श्रद्धांजलि सभा में मौजूद रह कर अपनी अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की एवं उनके पुत्र देवेश दूबे को संबल दिया, अस्पताल में भर्ती अनमोल दूबे के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।
देवरिया, फ़तेहपुर की घटना में इंसाफ को अंजाम तक पहुँचाने के लिए आज स्व. सत्य प्रकाश दूबे के बेटे देवे़श दूबे व समाज के प्रबुद्धजनों, अधिवक्ताओं, वरिष्ठों व नौजवानों के साथ भेंट की। सभी ने घटना पर गहरा कष्ट व्यक्त किया और इस परिवार की पूरी ज़िम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया। देवेश ने जो बताया वह बेहद दर्दनाक है। हम सबने दूबे परिवार की कानूनी लड़ाई लड़ने का भी प्रण लिया। हम सभी को पूरा विश्वास है माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी के नेतृत्व में भू माफिया की कमर तोड़ दी जाएगी और दू्बे परिवार को हर हाल में इंसाफ मिलेगा।
akelepan mein sukoon bahot hai,
behtar hoga,
agar yeh sukoon yunhi bana rahe,
khudke andar jhankane ki aur khudse rubaru hone ki yeh chahat,
sada rahee,
ab jaroorat nahi zamaane ki,
hai khwaish bas itni si,
ki rehta jaha mai aur bas mai hi mai,
woh aangan yunhi saja rahe🧿
mai dost yaar bhi bana loon toh saja hi mile,
kosu unko unki galtiyon pr toh safai mile,
mai dukh dard apne unse kehna chahu,
toh woh raasta dikhaye, bole,
udhar dekh,
waha har dard ki dawayi mile....!! (1/3)
par mai dekhu jab bhi unko thode kareeb se,
aur jab sochu unke bare sirf dil se,
na dimag se,
toh mujhe har dum hi unmein acchayi dikhe,
dimag kehta,
dhyan se dekh,
unke hai do chehre,
agar dhundhe kabhi tu toh, ek mein achhayi aur dooje mein sachhai mile, (2/3)