जल जंगल और ज़मीन के रखवाले महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी क्रांतिवीर जननायक धरती आबा बिरसा मुंडा जी के शहादत दिवस पर उन्हें शत-शत नमन। जय भीम, जय भारत, हूल जोहार।
आज ‘व्यवस्था परिवर्तन दिवस’ पर प्रारंभ हो रही सत्ता परिवर्तन यात्रा से घबराकर मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी के इशारे पर मुझे मेरे धामपुर स्थित आवास पर पुलिस द्वारा डिटेन किए जाने का निंदनीय एवं अलोकतांत्रिक कृत्य होने के उपरांत, पुलिस-प्रशासन से वार्ता के बाद मैंने यात्रा शुरू करने से पहले जिला बिजनौर स्थित संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के गुरूघर पहुंचकर गुरु महाराज जी को नमन किया।
इतने सबके बाद भी बिजनौर की सड़कों पर उमड़े जनसैलाब ने साबित कर दिया कि परिवर्तन की यह लड़ाई अब जन-जन की आवाज़ बन चुकी है और कोई भी दमन या बाधा इस जनसंकल्प को रोक नहीं सकती।
आभार बिजनौर, एक बार पुनः आभार नगीना।
#ASP_K_Mission2027 #सत्तापरिवर्तनयात्रा
#UPMaangeChandraShekharAzad #ASPK
#AzadSamajParty #bhimarmy #SattaParivartanYatra
आज राष्ट्रमाता अहिल्याबाई होलकर जी की जयंती के अवसर पर बदायूं के इस्लामिया ग्राउंड पर बड़ा कार्यक्रम होने वाला था जिसे प्रशासन द्वारा अंतिम समय में कैंसिल कर दिया। काफी आर्थिक नुकसान हुआ और निराशा फैल गयी
इसीलिए बोलता हूं यूपी में @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद को सत्ता में लेकर आओ अगर बहुजन महापुरुषों का सम्मान सुनिश्चित करना है तो!!
चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा है कि वो MBBS की पढ़ाई मुफ़्त करवाएंगे।
वैसे जर्मनी, नॉर्वे, चेक रिपब्लिक, ऑस्ट्रिया और फ्रांस जैसे देशों में मेडिकल की पढ़ाई मुफ़्त या बहुत कम फीस में होती है।
मेरी नज़र में अमीर हो या गरीब, डॉक्टर बनने का मौका सबको बराबर मिलना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में 40+ से ज़्यादा सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। अगर MBBS की पढ़ाई मुफ़्त होती है, तो हर साल लगभग 5500+ छात्रों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है।
देश में न्यायप्रिय, धर्मनिर्पेक्ष एवं लोक कल्याणकारी महान शासक के रूप में प्रसिद्ध अहिल्याबाई होलकर जी की जयन्ती पर शत्-शत् नमन एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित।
भारतीय इतिहास की महान शासक अहिल्याबाई होलकर जी ने अपने आदर्शों, सेवा-भाव और जनहितकारी कार्यों से समाज को नई दिशा प्रदान की। उनका जीवन नारी शक्ति, सुशासन, सामाजिक समरसता एवं जनसेवा का प्रेरणा स्त्रोत है। आज उनकी जयन्ती के पावन अवसर पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं उनके अनुयायियों को शुभकामनाए।
नारी शक्ति, साहस, वीरता व न्याय की अनोखी मिसाल, होल्कर साम्राज्य की महारानी माता अहिल्याबाई होल्कर जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन एवं विनम्र आदरांजलि!
त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में आरक्षण नई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर निर्धारित किए जाने के संबंध में माननीय पंचायती राज मंत्री @oprajbhar जी को पत्र लिखा।
प्रतिलिपि :
माo @myogiadityanath जी, @CMOfficeUP , @UPGovt - सादर सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु।
@ceoup , राज्य निर्वाचन आयोग, सादर सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु।
इस्लाम के पैदा होने से हजारों साल पहले से आदिवासियों की संस्कृति अस्तित्व में है. संविधान उनको अलग से प्रोटेक्शन देता है.
सिर्फ मुसलमान नहीं, किसी भी और को वो प्रोटेक्शन नहीं मिलेंगे.
हिंदुओं में भी बहुविवाह था. संसद ने 1955 में कानून बनाकर रोक दिया. वे तो नहीं रो रहे हैं.
महान त्याग, समर्पण एवं संघर्ष की प्रतिमूर्ति बाबासाहेब की जीवनसाथी माता रमाबाई आम्बेडकर जी के महापरिनिर्वाण दिवस पर उन्हें शत शत नमन एवं विनम्र आदरांजलि!हमारी मुस्कान के खातिर आपने बहुत तकलीफ का सामना किया है माँ। हम आपके संघर्षों को कभी नहीं भूला सकते।
चन्द्रशेखर आजाद बेहतर तरीके से जानते हैं कि भाजपा का मुकाबला कैसे किया जा सकता है। वो भाजपा के मजबूत आईटी सेल के खिलाफ बहुजन मीडिया को ताकतवर बनाने में लगातार जोर दे रहे हैं
सभी बहुजन मीडिया के साथियों को शुभकामनाएं, हम मिलकर लड़ेंगे और जीतेंगे ✊🏼
हाल ही में सहारनपुर के एक मंदिर के पुजारी द्वारा दलित समाज की बच्ची के हाथ छेड़छाड़ की घटना सामने आई थी, जिसे लेकर भीम आर्मी पीड़ित परिवार के न्याय के लिए लड़ रही थी
परंतु बेशर्मी देखिए, आज हिंदू संगठन के लोग POCSO एक्ट के उस आरोपी के समर्थन में थाने पहुंचे और भीम आर्मी के खिलाफ बयानबाजी करते हुए जातीय तनाव पैदा करने की कोशिश की
बताओ पहले तो दलित समाज की बच्ची के साथ गलत कृत्य होता है और जब वो लड़ाई लड़ने के लिए आगे आते हैं तो उल्टा उन्हें ही दबाने का प्रयास होता है। सोचकर देखिए पीड़ित परिवार पर क्या गुजर रही होगी
क्या इनके घर में बहन बेटियां नहीं हैं? POCSO एक्ट के अपराधी का समर्थन करते हुए इन्हें बिल्कुल भी शर्म नहीं आई...??
मल्टी पार्टी सिस्टम में बड़े राजनीतिक दलों से लड़ने के लिए गठबंधन करना समय की मांग है.
बहुजन समाज पार्टी और आजाद समाज पार्टी की विचारधारा में कोई अंतर नही है.
दोनों पार्टी सामाजिक परिवर्तन और गैर बराबरी को खत्म कर समतामूलक समाज की स्थापना करना चाहती है.
अगर बहन मायावती जी ने 2017 से पहले या 2012 में ही जब अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के उत्तराधिकारी बने,
BSP का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया होता, तो युवा चंद्रशेखर आजाद की तरफ नही जाते. खैर जो होना था वो हो गया.
2027 का UP विधानसभा चुनाव ध्यान में रखते हुए आजाद समाज पार्टी और BSP के बीच गठबंधन होना चाहिए. मिलकर रहेंगे तो पार्टी ज्यादा सीट जीतेंगी, अलग रहेंगे तो हारेंगे.
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का “दुरुपयोग” हो रहा है, यह बात आए दिन कोई न कोई कहता दिखाई देता है। अभी @richaanirudh जी भी यही कह रही हैं।
दरअसल, यह शोषित-वंचित समाज को मिले कानूनी सुरक्षा कवच को बदनाम कर उसे कमजोर करने की साजिश है।
हमारा सवाल है रिचा अनिरुद्ध जी से कि ऐसा कौन सा कानून है, जिसके दुरुपयोग की शिकायतें नहीं हुई हैं?
सबसे बड़ा दुरुपयोग तो जाति, ऊँच-नीच और सामाजिक वर्चस्व का हुआ है, जिसने करोड़ों शोषित-वंचितों को हजारों साल अपमान, हिंसा और भेदभाव में जीने पर मजबूर किया। उस “दुरुपयोग” पर इतनी बेचैनी क्यों नहीं दिखाई देती?
दुरुपयोग तो राज्य की शक्ति का भी होता है, झूठे मुकदमे भी लगते हैं, निर्दोष लोग भी फँसते हैं। फिर क्या सारे कानून खत्म कर दिए जाएँ? क्या राज्य की व्यवस्था खत्म कर अराजकता को स्वीकार कर लिया जाए?
और वैसे भी, अगर किसी कानून का दुरुपयोग होता है, तो उसके खिलाफ मुकदमा करने और न्याय पाने का अधिकार हर व्यक्ति को है।
सच यह है कि समस्या कानून नहीं, बल्कि वह मानसिकता है, जिसने दलितों, आदिवासियों और वंचितों का बराबरी से जीना आज भी स्वीकार नहीं किया। इसलिए बार-बार SC/ST Act को निशाना बनाया जाता है, ताकि समाज में नफरत और भ्रम फैलाकर इसे कमजोर किया जा सके।
जय भीम! SC/ST Act जिंदाबाद!
नरेंद्र मोदी ने इस बार बड़ा रिस्क ले लिया है. उन्होंने दिल्ली के सबसे पावरफुल खानदानी रईस लोगों से उनका दारू और नेटवर्किंग का ठिकाना छीन लिया है.
इन लोगों की सत्ता परमानेंट होती है. सरकारें आती जाती रहती हैं. इनको कोई छूता नहीं था. अतिक्रमण हटाओ का मतलब हमेशा आम लोग होता था. मोदी जी ने पहली बार इसका मतलब बदल दिया है.
ये लोग माफ नहीं करेंगे. बहुत हाहाकार मचेगा. देखते रहिए.
ऐसे और भी क्लब है जो 1 या 2 रुपया का सालाना किराया देकर हजारों करोड़ रुपए की सरकारी जमीन पर मौज कर रहे हैं. इन सबका गठजोड़ सक्रिय हो जाएगा.
मोदी को तो सिर्फ गरीब और मिडिल क्लास का सहारा है. खासकर महिलाओं का.
राज सिंह का यह बयान ‘अगर सीबीआई नहीं आती, तो मेरा एनकाउंटर हो जाता’ मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी की एनकाउंटर नीति की भयावह सच्चाई को उजागर करता है। जब किसी व्यक्ति का बिना जांच के एनकाउंटर कर दिया जाता है, तो सवाल सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे कानून-व्यवस्था तंत्र की विश्वसनीयता का है।
आज उत्तर प्रदेश में कानून नहीं, बल्कि “पहले गोली, बाद में जांच” की मानसिकता को बढ़ावा दिया गया है। बुलडोजर और एनकाउंटर को न्याय का विकल्प बनाकर संविधान और न्यायपालिका दोनों को कमजोर किया गया है।
इसीलिए उत्तर प्रदेश में हमारी सरकार आने पर पिछले 8 वर्षों में हुए सभी एनकाउंटरों और बुलडोजर की कार्रवाइयों की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच के लिए एक स्वतंत्र ‘विशेष आयोग’ का गठन किया जाएगा।
#ASP_K_Mission2027
सेक्युलरिज्म की कब्र पर उगे पेड़ हैं सरकारी व सरकारी मदद से चल रहे मदरसे!
पश्चिम बंगाल में हर मदरसों में वंदे मातरम गाना जरूरी नहीं किया है. लेकिन जो मदरसा सरकारी है, वेतन सरकार देती है या जो मदरसे सरकारी मदद लेते हैं, उनमें वंदे मातरम होगा. इस पर भी विवाद किया जा रहा है.
वैसे, मेरी निजी राय में ये सिस्टम ही गलत है कि इस्लाम का प्रचार करने और मुल्ला-मौलवी-इमाम तैयार करने वाले इन संस्थाओं को सरकार अपने बजट से चलाती है. वहां कुरान रटाया जाता है.
पुजारी, पुरोहित, बौद्ध भंते, सिख ग्रंथी आदि बनाने के लिए तो कोई सरकारी स्कूल नहीं चलता. उन बेचारों के साथ भेदभाव क्यों?
ये तो सर्वधर्म समभाव या सेक्युलरिज्म नहीं हुआ. इस्लाम को सरकारी रिलीजन की तरह दर्जा देने का क्या मतलब?
"कोलकाता में तो जुमे की नमाज सड़क पर ही होगी" का अहंकार एक दिन में टूट गया.
स्ट्रीट पावर को खत्म करने के लिए लाठी-गोली की जरूरत नहीं पड़ती. लोकतंत्र में सिर्फ सरकार महाबली है. सड़क पर दादागीरी तब तक चलती है, जब तक सरकार चलने देती है.
फिर कोई सरकार कहती है अब से कानून तोड़ना बंद. सब मान जाते हैं.
यहां हर मस्जिद में नमाज अंदर ही हुई. कहीं कहीं दो शिफ्ट लगाई गई. पर नमाज हुई अंदर ही.
इसके बावजूद मुसलमानों में शिक्षा दर सभी धर्मों में सबसे कम है. एससी के लोगों ने बाबा साहब का रास्ता अपनाया और देखते ही देखते इनसे आगे निकल गए. दरअसल मुसलमान नेता उम्मा के चक्कर में पगलाए रहे और शिक्षा की परवाह ही नहीं की. स्त्री शिक्षा का हाल तो इनका बहुत बुरा है.