Do my bit for democracy, freedom, equity, socio-ecological justice, scientific temper. National Council Member & Research Lead, @yuvahallabol. Wid @sanyuktyuvam
Rather than addressing the concerns raised in the PIL, Counsel for the CBSE opposed the petition calling it political.
Class XII students are minors and it is not convenient for them to approach the High Court. @lawyerkhanmd argued.
@nsui has already collated all such grievances which are still unaddressed.
However Hon'ble HC recorded the statement of CBSE counsel that they are dealing with grievances even after portal is closed. Also, asked CBSE & UOI to file reply with their objections.
Students can write to us if their grievances are unaddressed. The re-evaluation portal has already been closed. CBSE is well aware that the portal faced technical glichtes even during 2nd June to 7th June.
https://t.co/O0OuGS16JD
दुनिया की सबसे बड़ी 18 से 35 साल की जनसंख्या को बेरोज़गारी, कम वेतन की कच्ची नौकरियां, धर्म के नाम पे नफ़रत व झूठ और अज्ञानता के दलदल में धकेल दिया है मोदी सरकार ने।
पर युवा शक्ति धीमे धीमे हर तरफ़ से जाग रही है। वो समझ रही है कि जो लोग खुद देश के लोगों को कुर्बानियां देने को कहें पर खुद अपने, अपने बच्चों और अपने दोस्तों के लिए ज़्यादा से ज़्यादा ताकत और दौलत इकट्ठी करते रहेंगे, वो कभी देश की जनता के सगे नहीं हो सकते।
@withbharatjodo@PrataykshMishr@SandeepYadavhry@IYC@iycbihar@NSUIRajasthan@NSUIDelhi@dlambahry@RajatYadav_
अपनी रातें काली कर, भूखे-प्यासे रहकर जो युवा इस तपस्या से गुजर रहे हैं, अगर उनके इस संघर्ष के बाद भी सरकारें उन्हें रोजगार और सुरक्षित भविष्य न दे सकें... तो ऐसी व्यवस्था किस काम की?
दरअसल 8, 9 और 10 तारीख को यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती की परीक्षा है, और हालात देखकर रूह कांप जाए।
सीटें: कुल 32,679 पोस्ट
दावेदार: लगभग 29 लाख युवा!
मुकाबला: यानी हर 1 सीट के लिए 89 लोग लाइन में खड़े हैं।
अगर आप गोवा और मिजोरम की कुल आबादी को भी जोड़ दें, तो उतने लोग यूपी में सिर्फ एक परीक्षा देने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं।
एक बेरोजगार युवा के पास इतने पैसे नहीं होते कि वह महंगे होटलों में कमरे ले सके, इसलिए रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म, फुटपाथ और बस स्टैंड ही इन युवाओं के रैनबसेरे बन गए हैं।
#UPPoliceExams #UPPoliceBharti #Unemployment
Students demand Compensatory Marks for incorrect evaluation, blur & missing answer sheets. Their fate of higher edu hangs in doubt.
Prayers in our petition is doable for the Gov.
Let's Hope for the best!
@nsui@VinodJakharIN@IYC
पूरी तरह से बेशर्म और सत्ता के घमंड में चूर भाजपा के नेताओं की जवाबदेही तय और पूरा हिसाब सालों से इनके हाथों तड़प रही देश की आम जनता ही करेगी अब - युवा, छात्र, महिलाएं, किसान, मज़दूर.. सब मिलकर एक न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित करेंगे।
@AnupamConnects@GovindMishraMrj@prashant_kamal1@RajatYadav_@rishav_ranjan18
क्या आपको पता है कि देश भर के मजदूरों के लिए मोदी सरकार ने दशकों पुराने 29 मज़दूर कानूनों को एक साथ मिला, उनमें बड़े बदलाव कर उन्हें 4 नए लेबर कोड के रूप में देश भर में लागू कर दिया है।
आखिर क्या हैं ये नए मज़दूर कानून या कोड जो कह लीजिए और कैसे ये मजदूरों पर असर डालेंगे?
भारत के कई विशेषज्ञ और मज़दूर नेता बार बार कह रहे हैं कि ये 4 नए लेबर कानून भारत के मज़दूरों द्वारा 100 साल से ऊपर के संघर्षों के बाद पाए गए मौलिक अधिकारों को बहुत कमजोर या लगभग खत्म कर देंगे।
ये कानून जब हर रोज़ देश भर में ज़मीन पर मजदूरों पर लागू होंगे तो क्या होगा और क्या हो सकता है?..
यही बता रहे हैं देश की सबसे बड़ी मज़दूर यूनियनों में से एक, सीटू (CITU) के दिल्ली NCR उपाध्यक्ष अनुराग सक्सेना हमें इस खास इंटरव्यू में मेरे YouTube चैनल "Ground Reality with Anchal" में।
अनुराग जी के हमें दिए पूरे इंटरव्यू का ये दूसरा हिस्सा है जिसमें वो 4 नए लेबर कानूनों के प्रावधानों का जमीन पर असर क्या होगा, ये बता रहे हैं। इसके पहले हिस्से में उन्होंने नोएडा में हरियाणा के मानेसर के बाद अप्रैल 2026 में हुए मज़दूर विरोध के पीछे के कड़वे सच और उसके बाद हुई हिंसा के बारे में अपनी बेबाक राय दी थी।
यहां नीचे दिया youtube लिंक 4 नए लेबर कोड वाले इंटरव्यू के हिस्से का है।
https://t.co/9DsE3CCf6U
• न इनसे NEET की परीक्षा होती है
• न CBSE का एग्जाम हो पाता है
• और न ही ढंग से SSC का होता है
और इनका कहना है कि सिर्फ चुनाव अच्छे से होता है अपने देश में..
अरे अरे... ये सुधीर चौधरी ही थे 2012 में जो ऐसा बोल रहे थे?
ज़रूर मेरी आंखे और यादाश्त खराब हैं...
मैंने ही शायद गलत पढ़ लिया या गलत याद होगा। असल में उस वक्त पेट्रोल 128 रुपए प्रति लीटर और डीजल 118 रुपए प्रति लीटर रहा होगा।
@GovindDotasra जी के नेतृत्व में @INCRajasthan, @RajasthanNSUI, @Rajasthan_PYC, @RajasthanPMC इत्यादि सब ने मिलकर तगड़ा लोकतांत्रिक विरोध किया जयपुर के बीचों बीच, सड़क पर, मई में तेज़ लू भरी दोपहर की गर्मी में धरना करके देश के शिक्षा मंत्री @dpradhanbjp का हाल ही के #NEETPaperLeak और #CBSE इम्तिहान में भी गड़बड़ पाए जाने पर इस्तीफ़ा मांगते हुए।
@dpradhanbjp जी को दुनिया के अनेकों सुदृढ़ लोकतांत्रिक देशों और भारत में भी स्वतंत्रता के बाद से कई दशकों तक चलीं लोकतांत्रिक राजनैतिक परंपराओं के आधार पर पहले ही नैतिक आधार पर इस्तीफ़ा दे देना चाहिए था।
और अब तक तो प्रधानमंत्री को खुद ही उनसे त्यागपत्र मांग लेना चाहिए था।
पर इस भाजपा सरकार का दशकों तक कुछ हद तक कायम रहे हर संवैधानिक लोकतांत्रिक मूल्य, शुचिता और पारदर्शिता की राजनैतिक परंपरा को कूड़े में फेंक देने और निहायती बेशर्म रवैये को देखते हुए नहीं लगता कि शिक्षा मंत्री अब भी इस्तीफ़ा देंगे या उनसे लिया जाएगा।
पर, इस मुद्दे को मुखरता से उठाने के लिए @GovindDotasra जी व राजस्थान कांग्रेस नेतृत्व को ✊🏼 और भविष्य में ऐसे ही जीवट भरे लोकतांत्रिक संघर्षों के लिए शुभकामनाएं..
@yuvahallabol@GovindMishraMrj@rishav_ranjan18@RajatYadav_@prashant_kamal1@irabose11@_SurinderKohli@ashfakindia
मोदी सरकार में पेपर बिकता है..
हर बार युवाओं का भविष्य लुटता है
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष @GovindDotasra जी के नेतृत्व में राजस्थान कांग्रेस का केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार विरोध-प्रदर्शन।
📍भाजपा मुख्यालय का घेराव, जयपुर
#NEETPaperLeak #SackDharmendraPradhan
आखिर कब तक, कब तक..
देश के युवा, छात्र, महिलाएं, किसान, मज़दूर..
सब मोदी सरकार और भाजपा की झूठ, नफ़रत, गैरबराबरी और सामाजिक-अर्थिक-पर्यावरणीय अन्याय की राजनीति में पिसते रहेंगे?
ये कैसा अमृत काल है जिसमें किसान को फ़सल का सही दाम नहीं, ना फ़सल खराब होने पर सही बीमा राशि का भुगतान, छात्रों के लिए अच्छे सरकारी स्कूल और कॉलेज नहीं, टीचर नहीं, लाइब्रेरी नहीं, कंप्यूटर इंटरनेट नहीं, अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, नर्स, बिस्तर, ऑक्सीजन और उपकरण नहीं, उच्च शिक्षा हो या नौकरी, हर भर्ती में पेपर लीक या धांधली होने से रुकती नहीं, मज़दूर को सम्मानजनक जीवन जीने को पर्याप्त न्यूनतम मज़दूरी नहीं, महिलाओं पर अपराध और अत्याचार बढ़ना रुकता नहीं...
"विकास" के नाम पे अंधाधुंध जल, जंगल, ज़मीन, जीव जंतुओं का विनाश रुकता नहीं।
और तो और, कभी अमेरिका तो कभी चीन, हरेक के आगे झुकने में विश्वगुरु सरकार को तनिक भी शर्म नहीं...
और तो और... देश के सबसे ऊंचे पदों पर बैठे नेता और सबसे बड़े धन्नासेठ आम जनता को कॉकरोच से ज़्यादा कुछ समझते नहीं।
फ़िर भी हममें से बहुत अभी तक चुप हैं? फ़िर भी बहुतेरे अभी तक शांत हैं? फ़िर भी ना जाने कितने चुप चाप इस ज़हर को रोज़ पी रहे हैं? इस अन्याय को रोज़ सह रहे हैं?
सिंहासनों पर बैठा हर शहंशाह ये याद रखे कि जब ये "कॉकरोच" एक साथ मिल जाते हैं तो बड़ी से बड़ी सत्ता की नींव और मंज़िले सब ढहा देते हैं।
https://t.co/I1DgoMc9gc
@yuvahallabol@SanyuktYuvaM@AnupamConnects@GovindMishraMrj@prashant_kamal1@RajatYadav_@RashidaHusaini2@rishav_ranjan18@advocateharshit@_SurinderKohli@PriyaKumar37365@_AmitPrakash@hrishirajanand_@shobha_tweets@anuradhaxyz@adv_akashverma@withbharatjodo@neeraj_jhaa@brijeshrai@thealokputul@kapil_agarwal27
Interim Bail Granted to Radha Paswan Ji by Lucknow District Court.
Such FIRs against young job aspirants are illegal and only to harass the vocal youngsters.
Kudos to Adv Utkarsh Chaurasia for pursuing her matter pro-bono. @GovindMishraMrj@IYC@INCUttarPradesh@lawyerkhanmd
देखिए कैसे डबल इंजन सरकार में एक दलित युवक का आत्मसम्मान और शरीर दोनों चकनाचूर किए जा रहे हैं।
ओडिशा केकालाहांडी जिले के जयापटना ब्लॉक के तलागुड़ा गांव में एक दलित युवक को बेरहमी से पीटा जा रहा है।
NCRB 2023 रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में अनुसूचित जातियों (SC) के खिलाफ अपराध के 57,789 मामले दर्ज किए गए।
2022 के मुकाबले (57,582 मामले) यह वृद्धि 0.4% है।
अगर 57,789 मामलों को 365 दिनों में बांटें, तो हर दिन लगभग 158 से अधिक मामले दर्ज हुए।
सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश (15,130) में, उसके बाद राजस्थान (8,449) और मध्य प्रदेश (8,232) में दर्ज किए गए। और इन सभी राज्यों में डबल इंजन सरकार है।
#Odisha #Violence #BJPgovt
दिल्ली से एक और रूह कँपा देने वाली कहानी सामने आई है, जिसने इंसानियत को फ़िर शर्मसार कर दिया है। दूर दूर से दिल्ली आके रह रहे मेहनतकश मजदूर (Migrant Labour) अपने परिवार का पेट पालने के लिए आज भी कठोर संघर्ष करते हैं, पर जब उनके रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो ये मज़दूर और उनके परिवार न्याय के लिए कहां जाएं?
इस वीडियो में हम बात कर रहे हैं पांडव कुमार की, जिसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोप दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल नीरज बल्हारा पर है। क्या सिर्फ 'बिहारी' होना पांडव का सबसे बड़ा गुनाह था?
इस वीडियो में है:
• 📍 पूरी घटना: कैसे एक मामूली विवाद (LPG संकट के दौरान) जानलेवा हमले में बदल गया?
• ⚖️ नफरत का एंगल: क्या यह वाकई क्षेत्रीय भेदभाव और 'बिहारी' पहचान के प्रति नफरत का मामला है?
• 👩👦 एक माँ की पुकार: पांडव की माँ (गुलाबी साड़ी में) की आँखों के आँसू और उनकी इंसाफ की लड़ाई।
• 🔍 ग्राउंड रिपोर्ट: हमारी टीम ने मौके पर जाकर असलियत का पता लगाया।
अगर हम लोकतंत्र और संविधान में मानने वाले ऐसे ही चुप रहे, तो कल किसी और 'पांडव' के साथ ऐसा हो सकता है। इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि सिस्टम तक यह आवाज पहुँचे और पीड़ित परिवार को न्याय मिले।
@SanyuktYuvaM@yuvahallabol@AnupamConnects@prashant_kamal1@_SurinderKohli@RajatYadav_@anuradhaxyz@shobha_tweets@RashidaHusaini2@paranjoygt@_AmitPrakash@_utsavyadav@neeraj_jhaa@brijeshrai@mishutosh
https://t.co/tSrKHl5JMj