राज्य सरकार विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण करें अन्यथा केन्द्र सरकार ग्रांट देना बंद कर देगी : ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में लिए गए निर्णय से बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश : निजीकरण थोपने की हर कोशिश का होगा राष्ट्रव्यापी विरोध
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि यह विदित हुआ है कि 16 सितम्बर को हुई ग्रुप आफ मिनिस्टर्स ऑफ पॉवर की मीटिंग में यह सहमति बनी है कि विद्युत वितरण निगमों के संचालन हेतु राज्य सरकारों को तीन विकल्प दिए जाए और जो राज्य सरकार इन तीनों विकल्पों को न माने उनको केन्द्र सरकार से मिलने वाली ग्रांट बन्द कर दी जाय।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निजीकरण की प्रक्रिया व्यापक रूप से चलाई जा रही है जिसका बिजली कर्मी विगत 11 महीनों से जोरदार विरोध कर रहे हैं। अब इन घटनाक्रमों से उद्वेलित सारे देश के 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर एकजुट होकर सामने आ गए हैं और वे निजीकरण का व्यापक विरोध करेंगे और राष्ट्रव्यापी आंदोलन किया जायेगा जिसका निर्णय आगामी 03 नवम्बर को मुम्बई में होने वाली नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की मीटिंग में लिया जायेगा।
संघर्ष समिति ने बताया कि ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की इसी मीटिंग में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के मसौदे को अन्तिम रूप दिया गया था जिसे 09 अक्टूबर को विद्युत मंत्रालय ने जारी कर दिया है। संघर्ष समिति निजीकरण हेतु लाए गए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 का प्रबल विरोध करती है और मांग करती है कि इसे तत्काल वापस लिया जाय।
उन्होंने बताया कि मुम्बई में 04 एवं 05 नवम्बर को हो रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का मुख्य एजेंडा "विद्युत वितरण निगमों के सस्टेनेबिलिटी के लिए पी पी पी मॉडल" है जिसका अर्थ निजीकरण ही है।
संघर्ष समिति ने बताया कि सात राज्यों के ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की बैठक में हुई चर्चा के बाद केंद्र सरकार बिजली के निजीकरण पर राज्यों को तीन विकल्प देने जा रही है, अन्यथा की स्थिति में केंद्र सरकार की ग्रांट बंद कर दी जाएगी।
पहला विकल्प है - राज्य सरकार विद्युत वितरण निगमों की 51% हिस्सेदारी बेंच दे और पीपीपी मॉडल पर विद्युत वितरण कंपनियां चलाई जाए।
दूसरा विकल्प है - विद्युत वितरण कंपनियों की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी जाए और प्रबंधन बिजी कंपनी को सौंप दिया जाए।
तीसरा विकल्प है - जो राज्य निजीकरण नहीं करना चाहते तो वह अपनी विद्युत वितरण कंपनियों को सेबी और स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्टर कर लिस्टिंग कर दें।
यह पता चला है कि ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में यह सहमति हुई है कि जो राज्य यह तीनों विकल्प न दें उनका केंद्र से मिलने वाली ग्रांट बंद कर दी जाए और आगे कोई आर्थिक मदद न की जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली संविधान की आठवीं अनुसूची में कॉन्करेंट लिस्ट पर है जिसका मतलब होता है कि बिजली के मामले में केंद्र और राज्य सरकार के बराबर के अधिकार हैं। ऐसे में चुनिंदा सात प्रांतों (उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु) की राय लेकर निजीकरण का निर्णय राज्य सरकारों के ऊपर कैसे थोपा जा सकता है ?
संघर्ष समिति ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति की कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन जो सोसाइटी एक्ट में रजिस्टर्ड है उसे ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में किस हैसियत से और क्यों बुलाया जा रहा है ? उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन सरकार और निजी घरानों के बीच बिचौलिया की भूमिका में आ गई है।
उन्होंने बताया कि मुंबई में चार और पांच नवंबर को होने वाली डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का एकमात्र एजेंडा भी यही है। अब स्पष्ट हो गया है कि इस डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी में 2025 में यही निष्कर्ष निकाला जाएगा जो ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग की राय है। ऐसा लगता है कि सारे देश में निजीकरण की मुहिम बहुत तेज गति से चलाई जानी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह शर्तें निजीकरण हेतु राज्य सरकारों पर बेजा दबाव डालना है और एक प्रकार से ब्लैक मेल है जिसके विरोध में देशव्यापी आन्दोलन चलाया जाएगा।
उप्र में निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 324 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi@myogiadityanath@myogioffice@mlkhattar@aksharmaBharat@ChiefSecyUP@spgoyal@UPGovt@UPPCLLKO@chairmanuppcl@yadavakhilesh@RahulGandhi@Mayawati@aajtak@ABPNews
@ANILKUM58758451@UPGovt@aksharmaBharat@myogiadityanath इतनी भीषण गर्मी में हमारे सभी अधिकारी और कर्मचारी साथियों ने मिलकर दिन रात मेहनत करके उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्रदान की फिर भी दक्षिणांचल प्रबंधन द्वारा सैलरी को रोका जाना न्याय संगत नहीं है।
बिना संसाधन उपलब्ध कराए फेशियल अटेंडेंस का दबाव बनाना न्यायसंगत नहीं है दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के मुख्यालय द्वारा 1892 कर्मचारियों का वेतन रोकना न्यायोचित नहीं है। मानवीय आधार पर कर्मचारियों का वेतन अविलंब निर्गत किया जाए।
@UPGovt@aksharmaBharat@myogiadityanath
बिजली निजीकरण = महंगाई की मार।
सरकारी बिजली व्यवस्था जनता के हक की चीज़ है।
लेकिन निजीकरण का मतलब है...
➡️ सब्सिडी खत्म, बिल में बढ़ोत्तरी।
➡️ मुनाफे के लिए सेवा, सेवा के लिए नहीं मुनाफा।
➡️ गरीब और मध्यम वर्ग पर सीधी मार।
संवैधानिक हक है सस्ती और समान बिजली।
बिजली का निजीकरण बंद करो।
बरेली जनपद के विद्युत तकनीकी कर्मचारी एकता संघ के जिला मंत्री श्री अवतार सिंह जी का स्थानांतरण गोंडा किया गया है।
यह स्थानांतरण ऐसे समय में हुआ है जब श्री अवतार सिंह निजीकरण के खिलाफ शांतिपूर्वक विरोध कर रहे थे और साथ ही अपने विभागीय कार्य का भी निष्ठा से निर्वहन कर रहे थे।
ऐसे में यह स्थानांतरण एक दमनात्मक कार्रवाई की तरह प्रतीत होता है जिसका उद्देश्य आंदोलन को कमजोर करना है।
सभी बिजली कर्मचारी मांग करते हैं कि श्री अवतार सिंह जी का स्थानांतरण तत्काल निरस्त किया जाए।
ऊर्जा प्रबंधन लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का सम्मान करे।
निजीकरण जैसे गंभीर मुद्दे पर कर्मचारियों की चिंताओं को सुना जाए उन्हें दबाया न जाए।
🙏बिजली कर्मचारी प्रबंधन से आग्रह करते हैं कि संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर ही निर्णय लिए जाएं। ट्रांसफर जैसी कार्रवाई से कर्मचारियों का मनोबल गिरता है।
@UPRVPAS@uprvup@ashish_for_u@MVVNLHQ
माननीय ऊर्जा मंत्री जी जब हमारे बिजली कर्मचारी दिन रात मेहनत करके प्रदेश भर में रिकॉर्ड स्थापित कर रहे हैं। तूफ़ानों में, बारिश में, त्योहारों में भी अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं ,तो फिर उनके भविष्य को निजीकरण की अनिश्चितता में क्यों झोंका जा रहा है.
@uprvup@UPRVPAS@VtkesUPTG2
@AnupKum06403522@myogioffice@myogiadityanath@aksharmaBharat माo मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है। इस निजीकरण को आप हस्तक्षेप कर तत्काल प्रभाव से रोक लगानी चाहिए। जिससे आम उपभोक्ताओं को हित एवं ऊर्जा विभाग के कर्मचारी के भविष्य को देखते हुए इस निजीकरण को रोकने की कार्यवाही को संबंधित को आदेश जारी करने की कृपा करे।
पूर्वांचल की क्रांतिकारी भूमि और बिजली का निजीकरण नामंजूर है।
पूर्वांचल कि धरती जिसे क्रांति और संघर्ष की भूमि कहा जाता है आज एक बड़े संकट का सामना कर रहा है। उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग (UPPCL) का निजीकरण सबसे पहले पूर्वांचल से शुरू करने की योजना अन्यायपूर्ण और अनुचित है। यह निर्णय न केवल पूर्वांचल की जनता बल्कि किसानों, सरकारी कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के भविष्य को अंधकारमय बना देगा। बिजली कर्मी जो दिन रात जनता की सेवा में तत्पर रहते हैं निजीकरण के कारण अपनी नौकरियां और अधिकार खो सकते हैं।
निजीकरण होने से किसानों पर बिजली की लागत बढ़ने से सबसे अधिक आर्थिक नुकसान होगा।निजी कंपनियां लाभ कमाने के उद्देश्य से बिजली की दरें बढ़ा सकती हैं जिससे आम जनता पर आर्थिक भार बढ़ेगा।
सरकारी कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा और उनके अधिकार खतरे में आ जाएंगे। आदरणीय मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि जनता और कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए विद्युत निजीकरण पर तत्काल रोक लगाई जाए।
#StopElectricityPrivatization
#StopPrivatizationOfUPPCL
#जनता_की_बिजली_जनता_के_लिए