@myogiadityanath@myogioffice@AKSharmaOffice@aksharmaBharat@EMofficeUP@ChairmanUppcl@mduppcl@Dircompvvnl@ChiefSecyUP@Gomtinagarzone लगातार 4 माह से 16 घंटे की ड्यूटी बीमार पत्नी और नवजात बच्चे के साथ उपकेंद्र में काम करने को मजबूर SSO अधिकारियों की अनदेखी से रोष|
||लखनऊ||
राजधानी लखनऊ के अंतर्गत विद्युत उपकेंद्र लौलाई से विभागीय लापरवाही और कर्मचारियों के शोषण का एक गंभीर मामला सामने आया है बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों की उदासीनता के कारण उपकेंद्र की व्यवस्थाएं राम भरोसे चल रही हैं।
लगातार चार महीनों से बिना किसी अवकाश के 16-16 घंटे की कठिन रात्रि पाली में ड्यूटी करते-करते सब-स्टेशन ऑपरेटर (SSO) अभिषेक कुमार गंभीर रूप से बीमार हो गए हैं।
विद्युत उपकेंद्र लौलाई में रिलीवर और पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
संविदा पर तैनात तीन सब-स्टेशन ऑपरेटर—अभिषेक कुमार अमरीश कुमार और विवेक सिंह—पिछले 4 महीनों से बिना किसी छुट्टी के लगातार ओवरटाइम और कठिन पालियों में काम करने को मजबूर हैं।
स्थिति की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि SSO अभिषेक कुमार की पत्नी पिछले कई दिनों से गंभीर रूप से बीमार हैं घर पर देखभाल करने वाला कोई न होने और ड्यूटी से छुट्टी न मिलने के कारण वे अपने मासूम नवजात बच्चे को उपकेंद्र में साथ रखकर ड्यूटी निभाने पर विवश ��ैं अत्यधिक मानसिक व शारीरिक तनाव के कारण अब अभिषेक की तबीयत खुद बिगड़ चुकी है।
पीड़ित कर्मचारियों का आरोप है कि उन्होंने अपनी समस्याओं और उपकेंद्र पर स्टाफ की कमी को लेकर 33 केवी के जूनियर इंजीनियर को बार-बार अवगत कराया और गुहार लगाई इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के सिर पर जूं तक नहीं रेंग रही है 33 केवी जैसे संवेदनशील और हाई-वोल्टेज उपकेंद्र पर बिना आराम के लगातार ड्यूटी कराना किसी बड़�� हादसे को आमंत्रण देने जैसा है।
कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है और वे सवाल उठा रहे हैं कि क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी अप्रिय घटना या तकनीकी हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यदि बिजली विभाग के आला अधिकारियों ने जल्द ही मामले का संज्ञान लेकर रिलीवर की तैनाती नहीं की और कर्मचारियों को राहत नहीं दी तो सभी संविदा कर्मी ड्यूटी ��ोड़कर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर होंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।
ग्राम सौरईया, ब्लॉक खुटहन, तहसील शाहगंज, जनपद जौनपुर (उत्तर प्रदेश) में राजस्व अभिलेखों में दर्ज ���कमार्ग संख्या 543/1 को प्रवीण शर्मा उर्फ़ रिंकू शर्मा पुत्र विनोद शर्मा द्वारा जोतकर अपने खेत में मिला लिया गया था, जिसके कारण ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया था।
इस रास्ते को कब्जामुक्त कराने के लिए शिकायतकर्ता श्रीमती उर्मिला पत्नी श्री बसंत लाल कनौजिया को काफी सं��र्ष करना पड़ा। स्थानीय स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई न होने के बाद उन्हें मजबूर होकर मुख्यमंत्री जनसुनवाई/IGRS पोर्टल का सहारा लेना पड़ा। शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर पहुंचने के बाद मामला जिलाधिकारी, जौनपुर महोदय के संज्ञान में आया।
जिलाधिकारी महोदय द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित तहसील एवं राजस्व/चकबंदी अधिकारियों को तत्काल मौके पर जाकर चकमार्ग को कब्जामुक्त कराने के निर्दे��� दिए गए। इसके बाद दिनांक 20.09.2024 को चकमार्ग संख्या 543/1 को मौके पर खाली कराया गया।
रास्ता खाली होने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद जगी कि अब समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा।
ग्राम प्रधान जी द्वारा भी आश्वासन दिया गया कि गर्मी के मौसम में चकमार्ग पर मिट्टी पटाई एवं खड़ंजे/निर्माण का कार्य करा दिया जाएगा। शिकायतकर्ता ने प्रशासन और ग्राम प्रधान के आश्वासन पर भरोसा किया।
लेकिन इसके बाद भी रास्ते का निर्माण नहीं कराया गया। शिकायतकर्ता द्वारा लगातार ग्राम प्रधान से संपर्क किया गया। साथ ही संबंधित लेखपाल, सहायक चकबंदी अधिकारी एवं कान��नगो से चकमार्ग की पैमाइश/सीमांकन के लिए आवेदन किया गया। संबंधित अधिकारियों द्वारा मौके पर चकमार्ग की पैमाइश एवं सीमांकन भी किया गया, जिससे रास्ते की स्थिति स्पष्ट हो गई।
इसके बावजूद आज तक चकमार्ग संख्या 543/1 का स्थायी निर्माण नहीं कराया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि रास्ते पर कब्जा करने वाले प्रभावशाली लोगों के दबाव/प्रभाव के कारण ग्राम प्रधान द्वारा निर्माण कार्य नहीं कराया जा रहा है। यद��� यह तथ्य सही है तो यह अत्यंत गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय किया जाना आवश्यक है।
आज बारिश के मौसम में वही चकमार्ग पूरी तरह पानी में डूबा हुआ है। ग्रामीणों को मजबूरी में घुटने तक पानी और कीचड़ के बीच से होकर आवागमन करना पड़ रहा है। बुजुर्गों, प्रेग्नेंट महिलाओं और छोटे-छोटे बच्चों, विशेषकर स्कूल जाने वाले बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या प्रत्���ेक बरसात में ग्रामीणों को इसी कठिनाई से गुजरना पड़ता है।
माननीय जिलाधिकारी, जौनपुर महोदय से विनम्र अनुरोध है कि शिकायतकर्ता उर्मिला पत्नी बसंत लाल कनौजिया के आवेदन, मुख्यमंत्री IGRS शिकायत, दिनांक 20.09.2024 को कराए गए कब्जामुक्ति की कार्रवाई तथा चकमार्ग संख्या 543/1 की पैमाइश/सीमांकन के पूरे प्रकरण को एक साथ संज्ञान में लेकर मौके की जांच कराई जाए।
साथ ही.
1. चकमार्ग संख्या 543/1 पर तत्काल मिट्टी पटाई एवं उचित निर्माण कराया जाए।
2. निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।
3. रास्ते पर पूर्व में कब्जा करने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर नियमानुसार कार्र���ाई की जाए।
4. यदि ग्राम प्रधान द्वारा दबाव या किसी अन्य कारण से सरकारी रास्ते का निर्माण जानबूझकर नहीं कराया गया है तो इसकी भी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
5. भविष्य में दोबारा चकमार्ग पर कब्जा न हो, इसके लिए राजस्व अभिलेख के अनुसार रास्ते को सुरक्षित कराया जाए।
ग्रामीण को अपने ही गांव के सरकारी रास्ते के लिए मुख्यमंत्री पोर्टल तक शिकायत करनी पड़े, जिलाधिकारी महोदय के हस्तक्षेप से रास्��ा कब्जामुक्त हो, 20.09.2024 को रास्ता खाली कराया जाए, अधिकारियों द्वारा पैमाइश और सीमांकन भी कर दिया जाए, फिर भी ग्रामीणों को उसी रास्ते पर पानी में चलकर आना-जाना पड़े यह निश्चित रूप से गंभीर प्रशासनिक प्रश्न है।
माननीय जिलाधिकारी महोदय से अपेक्षा है कि इस मामले में सिर्फ रास्ता खाली कराने तक नहीं, बल्कि रास्ते का स्थायी निर्माण कराने और लापरवाही/कब्जे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करन�� तक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए���ी।
@DMjaunpur @CMOfficeUP @UPGovt
@ramesh4shahganj @DMjaunpur
@UPPCLLKO विभागीय वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान तकनीशियन (टीजी–2) संवर्ग के संदर्भ में अध्यक्ष महोदय द्वारा "दलाल" जैसे शब्द का सार्वजनिक प्रयोग किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, अमर्यादित एवं अशोभनीय है। विद्युत तकनीकी कर्मचारी एकता संघ उत्तर प्रदे��� इस प्रकार की टिप्पणी का स्पष्ट एवं कड़ा विरोध करता है।
सार्वजनिक मंच से पूरे तकनीकी संवर्ग को इस प्रकार संबोधित करना हजारों कर्मठ तकनीशियन साथियों के मान सम्मान, गरिमा और आत्मसम्मान पर आघात है। यह प्रशासनिक मर्यादा एवं सेवा मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
प्रदेश के तकनीशियन कर्मचारी विषम मौसम, जोखिमपूर्ण एवं जानलेवा परिस्थितियों में दिन रात कार्य करते हुए विद्युत आपूर्ति व्यवस्था ���ो सुचारु बनाए रखते हैं। उपभोक्ता शिकायतों (1912, IGRS आदि) का त्वरित निस्तारण, राजस्व कार्यों की सुनिश्चितता तथा फील्ड से जुड़े समस्त तकनीकी दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, अनुशासन और ईमानदारी के साथ करते है।
तकनीशियन पद विभाग की सबसे जिम्मेदारी भरी एवं जमीनी स्तर पर कार्य करने वाली महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि किसी स्तर पर प्रशासनिक विसंगति है तो उसका समाधान संस्थागत प्रक्रिया से किया जाना चाहिए न कि संपूर्ण संवर्ग को अपमानजनक शब्दों से संबोधित करते हुए।
संघ प्रदेश के सभी तकनीशियन साथि���ों के समर्पण, परिश्रम और साहस का अभिनंदन करता है तथा उनके सम्मान और गरिमा की रक्षा को सर्वोपरि मानता है।
संघ द्वारा पूर्व में भी संघ सदस्यों की समस्याओं से अवगत कराते हुए कहा जा चुका है कि तकनीशियन कर्मचारियों को उसके मूल पद पर तैनात कर तकनीशियन का कार्य लिया जाए।
संघ इस अवैधानिक शब्द के प्रयोग को शीघ्र अतिशीघ्र लिखित में माफी नहीं मांगी गई तो विधिक एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत आ���दोलन करने हेतु बाध्य होगा जिससे उत्पन्न होने वाली अशांति की संपूर्ण ��िम्मेदारी उच्च प्रबंधन की होगी।
अनिल कुमार राठौर
महामंत्री
विद्युत तकनीकी कर्मचारी एकता संघ उप्र!
@aksharmaBharat @VTKESAZM
@VtkesUPTG2 @myogioffice@UPRVPAS @uprvup
@Lokeshrajput28 ग्रांट एंड थॉर्टन कंपनी फ्रॉड और उस ओर लगे जुर्माने की खबर के बावजूद उसको टेंडर देना इसको कहते हैं असली दलाली , करोड़��ं की विद्युत विभाग की सम्पत्ति टके में उद्योगपतियों को देना इसको कहते हैं असल दलाली , दूसरों को दलाल कहने से पहले अपने गिरेबान में झांकिये सरकार
चेयरमैन द्वारा 𝚃𝙶2 के संबंध में दिए कथित आपत्तिजनक बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते है। 𝚃𝙶2 जैसे जिम्मेदार और समर्पित कर्मचारियों को “दलाल” कहना न केवल अशोभनीय है,बल्कि पूरे कर्मचारी वर्ग का अपमान है।अपने इस अमर्यादित और असंवेदनशील बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगे.
@UPPCLLKO की बैठक में चेयरमैन द्वारा टीजी–2 कर्मचारियों के संबंध में���दलाल”जैसी टिप्पणी आपत्तिजनक एवं निंदनीय है । टीजी 2 कर्मचारियों के सम्मान व मनोबल पर यह सीधा आघात है
संघ तत्काल सार्वजनिक खेद एवं सम्मानजनक स्पष्टीकरण की मांग करता है
@myogioffice @aksharmaBharat @ANI @RVPPKSUP
मतदाता के वोटर ID कार्ड (EPIC) के साथ उसका मोबाइल नंबर जोड़ना बहुत ही आसान है और घर बैठे ही मिनटों में इस काम को किया जा सकता है। वोटर ID कार्ड के साथ मोबाइल नंबर जोड़ने के निम्नलिखित फ़ायदे हैं।
१. अगर आप फ़ॉर्म 6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कर�� रहे हैं और फ़ॉर्म 6 भरते समय आपने फ़ॉर्म में अपना मोबाइल नंबर भरा है तो आपका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ते ही (लगभग दस पंद्रह दिन में) अपना e-EPIC (वोटर ID कार्ड) डाउनलोड कर सकते हैं। प्रिंटेड वोटर ID कार्ड डाक विभाग के माध्यम से आपके आवासीय पते पर भेजा जाता है जिसमें कई बार समय लग जाता है।
२. जब जब आप ज़रूरत समझें तब तब और जितनी बार चाहे उतनी बार अपना e-EPIC घर बैठे ही डाउनलोड कर सकते हैं।
३. वोटर लिस्ट तथा वोटर ID कार्ड ( EPIC) में आपके विवरण में विद्यमान् त्रुटियों को घर बैठे ही ऑनलाइन फ़ॉर्म 8 भरकर त्रुटियों को ठीक करने के लिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं।
४. ECINET mobile ऐप तथा https://t.co/oc9BoIIa7R website पर voter ID से जुड़ा मोबाइल नंबर डालकर अथवा वोटर आयी कार्ड पर बने QR कोड को स्कैन कर जब चाहें तब कुछ ही सेकेंडों में अपना पोलिंग स्टेशन नंबर और मतदाता सूची में अपना क्रमांक तुरंत ज्ञात कर सकते हैं।
वोटर ID कार्ड के साथ मोबाइल नंबर जोड़ने की ��्रक्रिया संलग्न चित्रों से स्पष्ट हो जाएगी। यह प्रक्रिया चंद मिनटों में पूरी की जा सकती है। यह प्रक्रिया पूरी होते ही सैकंडों में मोबाइल नंबर आपके वोटर ID कार्ड से जुड़ जाता है।
@ECISVEEP
दिनांक -11.01.26 को @Vtkes के बैनर तले सर्वसम्मति से मैनपुरी में नवीन कार्यकारिणी का गठन किया गया।श्री शिवनारायन जिला मंत्री एवं श्री सत्यभान सिंह जादौन को पुनः जिला अध्यक्ष चुना गया। इस ���ौके पर सभी सदस्य बृजेंद्र सिंह शाक्य, अनुज कुमार दुबे, सौरभ कुमार, उपस्थिति रहे। @MDDVVNL
केंद्र सरकार द्वारा निजीकरण की प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश की बिजली कंपनियों को शामिल करना अनुचित देश के जिन 6 राज्यों को किया गया है बेल आउट पैकेज के लिए चिन्हित उसमें उत्तर प्रदेश सबसे अच्छी स्थिति में— उपभोक्ता परिषद
उ प्र परिवहन की बस मे कंडक्टर पैसे लेकर टिकट काटकर शेष रूपये पीछे लिख देते है
और चुपके बैठे रहेगे वापस मांगने पर आगे चलो वापस कर रहे है बस भूल गये तो पैसा गया
इसपर लगाम लगे श्रीमान @UPSRTCHQ@Lko_VivekSharma