अगर सच में मेहनती अभ्यर्थियों के साथ न्याय चाहिए, तो दोषियों पर कार्रवाई कीजिए, पास हुए मेहनती बच्चों का हक मत छीनिए।
राजनीति चमकाने के चक्कर में हजारों युवाओं का भविष्य मत जलाइए।
#JSSC_JPSC_चयनितों_को_न्याय_दो
गुत्थी की रिपोर्ट के अनुसार, 11वीं–13वीं JPSC को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे “बाहरी अभ्यर्थियों” के आंकड़े वास्तविक तस्वीर से काफी अलग हैं। 📊
रिपोर्ट में उपलब्ध आंकड़ों के मिलान के आधार पर दावा किया गया है कि दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान—तीनों राज्यों से मिलाकर केवल 7 अभ्यर्थी चयनित हुए हैं—दिल्ली से 4, हरियाणा से 2 और राजस्थान से 1 .
कुल 155 अभ्यर्थियों का चयन अनारक्षित श्रेणी में हुआ, लेकिन इनमें 63 अभ्यर्थी SC/ST/OBC वर्ग से थे, जिन्होंने अधिक अंक प्राप्त कर मेरिट के आधार पर अनारक्षित सीट हासिल की। यानी UR सीट का अर्थ स्वतः “बाहरी अभ्यर्थी” नहीं होता।
रिपोर्ट के अनुसार शेष 92 UR अभ्यर्थियों में 41 का गृह राज्य झारखंड से बाहर दर्ज है—बिहार 27, उत्तर प्रदेश 6, दिल्ली 4, हरियाणा 2, राजस्थान 1 और पश्चिम बंगाल 1।
इतना ही नहीं, रिपोर्ट यह भी बताती है कि उत्तर प्रदेश से जुड़े 6 अभ्यर्थियों में 2 की पूरी पढ़ाई झारखंड में हुई है और उनके परिवार लगभग 15–20 वर्षों से यहां रह रहे हैं। बिहार से जुड़े 27 अभ्यर्थियों में भी करीब 10 की शिक्षा झारखंड में हुई है, जबकि कई परिवार लंबे समय से राज्य में निवास कर रहे हैं।
इसके विपरीत सोशल मीडिया पर यह नैरेटिव चलाया गया कि 150 अनारक्षित सीटों में 128 अभ्यर्थी दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान से चयनित हुए। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इन तीन राज्यों की वास्तविक संख्या सिर्फ 7 बताई गई है।
📢 सवाल जरूर उठाइए, जांच भी होनी चाहिए—लेकिन आंकड़ों को बढ़ाकर पूरे चयन को संदेह के घेरे में खड़ा करना तथ्य नहीं, भ्रम पैदा करता है।
तथ्यों पर बहस हो, अफवाहों पर फैसला नहीं।
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ये है रद्दी लोगों का leader जब leader ऐसा है तो followers का अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं ये निहायत ही घटिया और जाहिल किस्म का इंसान है जो खुद तो पागलपन का शिकार है लेकिन इसे लोगों का जिंदगी बर्बाद करने में मजा आता है
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