रस्म ए आवारगी सोग़ात नहीं होती है ।
मेरी सहरा से मुलाक़ात नहीं होती है ।
बस सवालात के देता है जवाबात मुझे ।
बात होती है मगर बात नहीं होती है ।
Himanshi babra katib
किसी के हाथ से छीना गया हूँ
तभी तो इस कदर टूटा हुआ हूँ
तेरा हर काम पूरा कर चुका हूँ
भला मैं अब तेरे किस काम का हूँ
Kisi ke hath se cheena gya hoon
Tabhi to is kadr tuta hua hoon
Tera har kaam pura kar chuka hoon
Bhala main ab tere kis kaam ka hoon
_himanshi babra katib🤍🖤