From Spain to France, India to Chile, people are taking to the streets to defend what matters.
Because when rights are at stake, silence isn't an option.
आरएसएस ने किये दीक्षाभूमि पर कब्ज़ा; किये ताले बंद. मैं बौद्धों को पूरी छूट देता हूँ आरएसएस को इस अपमान का जवाब देने का!
कल रात नागपुर में धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस की पूर्वसंध्या पर जब हज़ारों बौद्ध अनुयायी दीक्षाभूमि पहु���चे, तो उन्होंने पाया कि दीक्षाभूमि के गेट पर ताले लगे हुए थे!
यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि RSS ने दीक्षाभूमि स्मारक समिति पर कब्ज़ा कर लिया है और उनका पिट्ठू उनके इशारों पर काम कर रहा है।
14 अक्टूबर 1956 को डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने दीक्षाभूमि पर अपने लाखों अनुयायियों के साथ धम्म अपनाया था। कल रात जो हुआ, वह RSS की एक स���ची-समझी साज़िश थी, जिसका मकसद धम्म चक्र परिवर्तन दिवस की पूर्व संध्या पर न सिर्फ़ बाबासाहेब बल्कि बौद्ध धर्म का भी अपमान करना था।
इससे पहले भी RSS के कब्ज़े वाली समिति ने पार्किंग की व्यवस्था के बहाने दीक्षाभूमि की ज़मीन पर अतिक्रमण करने की कोशिश की थी। तब वंचित बहुजन आघाड़ी ने नागपुर को झकझोर कर रख दिया था।
कल हमारे नागपुर शहर अध्यक्ष मंगेश वानखेड़े ने भंतेगण के साथ दीक्षाभूमि पर ताला हो���े की वजह से वहाँ बाहर से ही बाबासाहेब को अभिवादन किया और वंदना की।
कल की घटनाएँ केवल महाराष्ट्र के बौद्धों का ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के बौद्ध समाज का अपमान था।
मैं देशभर के सभी बौद्धों से कहता हूँ कि वे बाबासाहेब और बौद्ध धर्म का अपमान करने के लिए RSS को सबक सिखाएँ। आपको पूरी छूट है।।
जय भीम। नमो बुद्धाय।
#Dikshabhoomi #Nagpur
आकाश आनंद जी का रात 10:04 पर बसपा पार्टी कार्यालय में फोन जाता है जिसे आलोक कुमार पार्टी इंचार्ज रिसीव करते हैं...आकाश आनंद जी पूछते हैं की बहन जी कहीं बीमार तो नहीं है तो आलोक कुमार जी कहते हैं कि नहीं ऐसी कोई बात नहीं है,बहन जी ठीक है और पार्टी के कामों में लगी हुई है।
इ��नी बात सुनकर आकाश आनंद जी आलोक कुमार को कहते हैं कि यह बात बहन जी को नहीं बताना कि मैंने यहां फोन किया था।
अब सवाल उठता है कि अगर आकाश आनंद जी को बहन जी के स्वास्थ्य की इतनी ही चिंता थी तो खुद लखनऊ आकर बहन जी से मिलकर उनका स्वास्थ्य जान सकते थे। और यदि किसी कारणवश मुलाकात नहीं भी होती तो स्वयं बहन जी को पर्सनल नंबर पर फोन करके उनसे स्वयं हाल चाल पूछ सकते थे।
आकाश जी बहन जी का सब कुछ आपका ही था लेक���न आपने अपनी अपरिपक्वता के कारण संयम और धैर्य का परिचय नहीं दिया।
समय से पहले किसी को कुछ नहीं मिलता।
जय भीम, जय बसपा 🐘🐘
अगले कुछ दिनों में दुनियाभर के नेता BRICS Summit के लिए जुटेंगे। पूर्ण विश्वास है कि सम्मेलन में विश्व कल्याण की कामना के साथ विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा होगी।
सद्भिरेव सहासीत सद्भिः कुर्वीत सङ्गतिम्।
सद्भिर्विवादं मैत्रीं च नासद्भिः किंचिदाचरेत्॥
बाबा साहब आंबेडकर, मान्यवर कांशीराम, जगजीवन राम, कर्पूरी ठाकुर, बहन मायावती जैसे नेताओं ने किसी को गाली दिए बिना समाज के लिए इतने बड़े बड़े काम कर दिए.
इनके बोले और लिखे गए लाखों करोड़ों शब्दों में आपको एक गाली नहीं मिलेगी. जमकर मुद्दों पर लड़े पर गालियां नहीं दीं. विरोधियों का सम्मान रखा, उनके साथ मिलकर काम भी किए.
मतभेद रखा, मनभेद नहीं. राष्ट्र निर्माण का प्रश्न आया तो आगे रहे.
अपशब्द आप तब बोलते हैं, जब आपके पास तर्क खत्म हो जाते हैं या आज के समय की बात करें तो,आपको सोशल मीडिया से पैसे कमाने हैं, या पॉपुलर हो���ा है.
गालियों की भी सोशल मीडिया में इकॉनोमी है. गाली देने के पैसे मिलते हैं.
एक आदमी क्यूआर कोड लगाकर हर रात घंटों गालियां देता है. बाबा साहब, गांधी, पटेल से लेकर भागवत, मोदी, शाह, राहुल, लालू, स्टालिन सबको गालियां देता है. जिंदा-मुर्दा सबको कोसता रहता है. इतना बड़ा देश है तो कुछ लोग पैसे डाल भी देते हैं.
पर इससे कुछ बदलेगा नहीं.
गालियां आपके पारिवारिक संस्कार और लालन-पालन के वातावरण का परिचय हैं. बचिए उनसे.
ये बेईमानी भारत सरकार खुद सिखाती है। हर सरकारी चीज या टिकेट भी उन्हें दो से तीन गुना चुका कर मिलता है
अगर यूरोपियों देशों ने भारत��य NRI के साथ ऐसा करना शुरू कर दिया तो।
@ShivAnupam48969 बहुजन मीड़िया दिलीप मंडल जी की ही देन है। दिल्ली में the प्रिंट के जमाने मे आते आते उन्होंने एक फौज खड़ी कर दी थी बहुजन पत्रकारों, लेखकों की। उनको प्लेटफॉर्म दिया। जिसमें शेखर गुप्ता जी जैसे लोगो का भी सहयोग उन्हें मिला। एक पत्रकार से और क्या उम्मीद ज्यादा किया जाय।
@ShivAnupam48969 लौंगलता। सावन में खाने में बहुत अच्छा लगता है।
बनारस मिर्जापुर इसका प्रसिद्ध क्षेत्र है। यूनानी मिठाई है।
लेकिन अब इसमें से लौंग गायब रहता है।