शर्म आनी चाहिए ऐसे बड़े ब्रांड को। सोचिए,अगर यहीoatsकिसी छोटे बच्चे ने खा लिया होता,किसी बुज़ुर्ग ने या किसी बीमार इंसान ने,और उसकी हालत बिगड़ जाती,तो क्याSaffolaसिर्फ़ पैकेट बदलकर मामला रफा-दफा कर देती?
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इतना बड़ा ब्रांड और इतनी बड़ी लापरवाही?
आज ऑफिस से आकर जैसे ही मैंने Safola ओट्स का ₹18 वाला पैकेट खोला, उसमें कीड़ा निकला।
सोचिए-जो ब्रांड सेहत की बात करता है, वही कीड़े वाला प्रोडक्ट बेच रहा है!
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छत्तीसगढ़ में लॉ एंड ऑर्डर की हालत देखिए, और अंदाजा लगाएं कि जब ये हाल पुलिस का है तो आम जनता का क्या होता होगा ? पुलिस से अनुरोध है इलाज करें ऐसे लोगों का
🔹 ग्वालियर-चंबल के सिंधिया समर्थक अब हाशिए पर!
कमलनाथ सरकार गिराने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक विधायक अब राजनीति में गर्दिश के दौर से गुजर रहे हैं।
न तो अब उनके पास विधायकी है, न संगठन या सरकार में कोई महत्वपूर्ण पद।
कुल 22 विधायकों में से लगभग 70% का राजनीतिक भविष्य धुंधला पड़ गया है—
भाजपा ने उपचुनावों में टिकट देकर कुछ को पुर्नवास तो किया, लेकिन अब कई को 2023 में टिकट तक नहीं मिला।
📍 ऐसे हैं हालात —
1️⃣ ओपीएस भदौरिया – मेहगांव, भिंड से विधायक थे।
➤ उपचुनाव में टिकट मिला, लेकिन 2023 में टिकट काट दिया गया।
➤ वर्तमान में कोई पद नहीं।
2️⃣ गिर्राज डंडौतिया – दिमनी, मुरैना से विधायक थे।
➤ उपचुनाव में टिकट मिला लेकिन हार गए।
➤ 2023 में टिकट काटकर नरेंद्र सिंह तोमर को मैदान में उतारा गया।
3️⃣ रणवीर जाटव – गोहद, भिंड से विधायक थे।
➤ उपचुनाव में टिकट मिला लेकिन हार गए।
➤ 2023 में पार्टी ने टिकट लाल सिंह आर्य को दिया।
4️⃣ मुन्नालाल गोयल – ग्वालियर पूर्व विधानसभा से विधायक थे।
➤ उपचुनाव में टिकट मिला लेकिन हार गए।
➤ 2023 में पार्टी ने टिकट माया सिंह को दिया।
5️⃣ इमरती देवी – ग्वालियर की डबरा सीट से विधायक थीं।
➤ उपचुनाव में टिकट मिला, हार गईं।
➤ 2023 में फिर टिकट मिला, फिर हार गईं।
➤ संगठन में कोई पद नहीं।
6️⃣ रक्षा सिरोनिया – भांडेर से विधायक थीं।
➤ उपचुनाव में टिकट मिला लेकिन हार गईं।
➤ 2023 में टिकट काट दिया गया।
➤ संगठन में कोई पद नहीं।
7️⃣ रघुराज सिंह कंसाना – मुरैना से विधायक थे।
➤ उपचुनाव और 2023 में टिकट मिला लेकिन हार गए।
➤ संगठन में कोई पद नहीं।
🎙️ बीजेपी का पक्ष:
पूर्व सांसद विवेक शेजवलकर ने कहा—
“भाजपा में जिम्मेदारी योग्यता और काम के आधार पर दी जाती है।
संगठन ने देखा होगा, तभी किसी को पद नहीं मिला।”
🎙️ कांग्रेस का पलटवार:
विधायक सतीश सिकरवार बोले—
“दगा किसी का सगा नहीं होता।
इन्होंने कमलनाथ के साथ दगा किया था, अब बीजेपी ने इनके साथ किया।”
🟣 नतीजा:
ग्वालियर-चंबल के ये चेहरे अब राजनीतिक गुमनामी में हैं।
फिलहाल न संगठन में जगह, न जनता के बीच सक्रियता।
उम्मीदें बस सिंधिया कोटे से आने वाली नियुक्तियों पर टिकी हैं।
Report By @gaurinasir@IBC24News@SatishSGwalior
I ask Justice Chandrachud why he permitted the survey of the Gyanvapi mosque in Benares, despite the law banning any change in the character of religious structures.
He said because it is "undisputed" that prayers have taken place "through the ages" inside the mosque’s cellar.
This is factually untrue. The mosque trust have consistently *disputed* the claim of prayers in the basement -- in the public domain and in court.
Full interview: https://t.co/TyaKG95L7h @newslaundry