झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव जी जब अपनी ही सरकार के मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी को महाभ्रष्ट बता रहे हैं, तो सोचिए आम जनमानस में मुख्यमंत्री की छवि कैसी होगी?
@RahulGandhi जी, कांग्रेस के अधिकांश नेता भी ऐसा ही मानते हैं, लेकिन कुछ मंत्री पद पर आसीन होने के कारण चुप हैं, तो कुछ आर्थिक लाभ के कारण चुप्पी साधे हुए हैं।
आपने तो नौकरी बेचने और नियुक्तियों में हुई धांधली में मुख्यमंत्री की भूमिका को भी नजदीक से देखा है। इसके बावजूद ऐसी क्या मजबूरी है कि आप ऐसे मुख्यमंत्री का समर्थन कर रहे हैं?
क्या पत्थर, बालू, कोयला, लौह अयस्क के अवैध खनन, टेंडर में कमीशनखोरी और ट्रांसफर पोस्टिंग से होने वाली काली कमाई में हिस्सेदारी के कारण आप धृतराष्ट्र की तरह आंखें बंद किए हुए हैं?
इन सवालों का जवाब आपको देना ही पड़ेगा। क्योंकि आज योगेंद्र साव जो सवाल पूछ रहे हैं, कल पूरा झारखंड आपसे पूछेगा।
@BJP4India@narendramodi@AmitShah@NitinNabin@blsanthosh@BJP4Jharkhand
सोचिए, जब पुलिसिया तंत्र के सबसे निचले पायदान पर बैठा एक मामूली दारोगा अपनी लोहे की अलमारी में 30 लाख रुपये का काला धन दबाकर सांप की तरह बैठा है, तो इस राज्य को दीमक की तरह चाट रहे सफेदपोश IAS, IPS और सत्ता के गलियारों में बैठे मठाधीशों की तिजोरियों का क्या मंजर होगा?
उनकी तिजोरियां तो अरबों रुपयों के काले धन से लबालब भरी होंगी! यह सिर्फ एक दारोगा की हैसियत नहीं है, बल्कि यह इस राज्य के शीर्ष अधिकारियों और नेताओं के गंदे गठजोड़ का एक छोटा सा नमूना है।
क्यों लिखें भ्रष्टाचार पर? क्यों किसी की नज़रों में खटके?
क्या फर्क पड़ता है अगर : सचिवालय में मंत्री के ठीक सामने पीएस के चैंबर से घूस का पैसा निकल जाए?
क्या फर्क पड़ता है अगर : मंत्री के पीएस के नौकर चाकर के घर से भी 30–32 करोड़ कैश ही निकल जाए।
क्या फर्क पड़ता है अगर : इंजीनियर से लेकर सचिव और मंत्री तक कमीशनखोरी में लिप्त हों और उनकी खबरें तथ्य के साथ ही आ जाए।
क्या फर्क पड़ता है अगर : नौकरियों के लिए सीटें बिक जाएं, और खरीदार नौकरी में ही रह जाएं। परीक्षाओं के पहले पेपर लीक हो जाए, परीक्षा लेने वाले ही अंदर हेरफेर कर पास को फेल और फेल को पास कर दें।
क्या फर्क पड़ता है अगर : किसी अफसर ने कमाई कर ली, पत्नी, बच्चों के नाम पर महल ही बना लिया ।
क्या फर्क पड़ता है अगर : कोयला, बालू का हजारों करोड़ का अवैध खनन हो, विभाग में घोटाले हों, आप खबरों पर खबरें लिखते रहें।
क्या फर्क पड़ता है, अगर आप ना लिखें?
क्या फर्क पड़ता है, अगर: आपकी कलम सिर्फ सरकारी विज्ञप्तियां लिखें।
क्या फर्क पड़ता है, अगर: आप सत्ता की एजेंडा चलाते, लिखते रहें।
बताइए क्या फर्क पड़ता है, अगर ना ही लिखें?
PIN कोड गया, अब आया DigiPIN 📍
भारतीय डाक विभाग ने पते के लिए नया सिस्टम लॉन्च कर दिया है। अब 6 अंकों वाले PIN कोड की जगह 10 अंकों का DigiPIN होगा।
DigiPIN क्या है?
- 10 अंकों का डिजिटल कोड है जो आपके घर/दुकान की *सटीक लोकेशन* बताता है।
- 4 मीटर के दायरे तक सटीक पता देता है, जबकि पुराना PIN कोड पूरे इलाके का होता था
- इसे India Post + IIT हैदराबाद + NRSC + ISRO ने मिलकर बनाया है।
- ऑफलाइन भी काम करता है।
फायदे क्या होंगे?
1. डाक/पार्सल सही घर तक पहुंचेंगे, गली-मोहल्ले में भटकना नहीं पड़ेगा।
2. इमरजेंसी सेवाएं - एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड को एकदम सही लोकेशन मिलेगी।
3. ई-कॉमर्स डिलीवरी तेज और सटीक होगी।
4. गांव-दूरदराज के इलाकों में भी पते की दिक्कत खत्म होगी।
अपना DigiPIN कैसे पता करें?
बहुत आसान है 👇
1. वेबसाइट पर जाएं: https://t.co/vUFjdJi2tD
2. मैप पर अपनी लोकेशन चुनें या सर्च करें।
3. 10 अंकों का DigiPIN स्क्रीन पर आ जाएगा।
बस उसे नोट करके अपने ऑनलाइन ऑर्डर, आधार, बैंक आदि में इस्तेमाल कर सकते हैं।
PIN vs DigiPIN
PIN कोड DigiPIN
6 अंक 10 अंक
एरिया बड़ा इलाका कवर4 मीटर तक सटीक
कौन बनाया डाक विभागIndia Post + IIT + ISRO
मतलब अब "मकान नंबर 12, गली नंबर 3" लिखने की जरूरत कम होगी। DigiPIN डालते ही डिलीवरी वाला सीधा आपके दरवाजे पहुंच जाएगा।
उनके दुख में मैं भी दुखी हूँ जो अपनी मेहनत के बल पर JSSC CGL में चयनित हो कर नौकरी कर रहे थे मगर दोषी सरकार है । अगर सरकार परीक्षा को ढंग से कराई रहती तो ऐसा नहीं होता । और अगर परीक्षा में धांधली होने के बाद भी सरकार तुरंत अच्छे से जाँच की होती तब जॉइनिंग देती तो भी ऐसा नहीं होता ।
महाभारत के युद्ध में कर्ण ने अधर्म का साथ दिया था । वो ग़लत नहीं था मगर वो ग़लत लोगों को लड़ाई में साथ दे रहा था । परिणाम क्या हुआ ?
जब भी धर्म और अधर्म का सामना हो तो व्यक्तिगत स्वार्थ छोड़ कर धर्म का साथ दें भविष्य बेहतर होगा और ईश्वर भी साथ देंगे
सत्यमेव जयते
जेपीएससी के तत्कालीन सदस्य डॉक्टर अजीता भट्टाचार्य के पीए बीएन राम गिरफ्तार।
जेपीएससी में साक्षात्कार मैनेज करने के एवज में 40 लाख वसूलने का आरोप उनपर है।
एल ख्यांगते को दो दिन की पूछताछ के बाद भेजा गया जेल।
Ranchi के IPS SP City Paras Rana ने मीडिया वालों से ये बदतमीजी क्यों की? शांति से बैठे लोगों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिस अफ़सरों पर कार्रवाई करेगी सोरेन सरकार?