माफ़ी माँगने से क्या होगा दलाल @ABPNews ? जो अफ़वाह उड़ा दिए हो वो ख़त्म हो जाएगी क्या? मैंने विरोध किया तो माफ़ी माँग रहे हो! जो बेटियाँ विरोध नहीं कर सकतीं उनको तो तुम आत्महत्या करने पर मजबूर कर दोगे? तुम्हारी बदमाशी से मेरी गरिमा को जो ठेस पहुँची है उसकी कोई माफ़ी नहीं है. कोर्ट में मिलते हैं.
@narendramodi@NCWIndia
डियर @smritiirani जी,
हमारी विचारधारा अलग हो सकती है लेकिन क्या मैं इस देश की बेटी नहीं हूँ? क्या किसी भी बेटी के ख़िलाफ़ फेक न्यूज़ चलाकर उसे वेश्या कहना छोटी बात है? आप ख़ुद महिला हैं और आपके परिवार में भी बेटियाँ होंगी!
अगर @ABPNews जैसा चैनल एक महिला के ख़िलाफ़ बेबुनियाद और झूठी पत्रकारिता करके उसका मान-मर्दन कर रहा है तो क्या आपको इस पर कुछ भी नहीं कहना है?
"हमारे स्पष्ट 3 सवाल हैं सरकार से-
1. लाठियां, टियर गैस, गोली चलाने का आदेश किसने दिया?
2. सिविल ड्रेस में मौजूद गुंडे कौन थे?
3. गिरफ्तारी और एफआईआर नहीं होंगे ये एश्योरेंस देने के बाद अपने वादे से सरकार क्यों मुकरी?" - अंजली
देश यह जानना चाहता है कि सिविल कपड़ों में छात्रों पर लाठियां बरसाने वाले लोग कौन थे? क्या वे बिना वर्दी के पुलिसकर्मी थे, या किराये पर बुलाए गए थे?
छात्रों पर हुए इस बर्बरतापूर्ण हमले की पूरी जवाबदेही तय करने लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया जाना चाहिए।
इनसे मिलिए- ये हैं IAS सुबोध कुमार सिंह।
जब 2024 में NEET का पेपर लीक हुआ था, लाखों बच्चों की मेहनत बर्बाद हुई थी, तब सुबोध कुमार सिंह NTA के DG थे।
लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए मोदी सरकार ने चाल चली और इन्हें पद से हटा दिया।
लेकिन जैसे ही लोगों का गुस्सा शांत हुआ, इन्हें स्टील मिनिस्ट्री में पोस्टिंग दे दी और अब ये छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के Principal Secretary हैं।
BJP सरकार में इसी तरह छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को इनाम दिया जाता है, उन्हें बड़े-बड़े पदों पर बैठाया जाता है।
कारण साफ है- पेपर लीक के इस गोरखधंधे में BJP सरकार खुद ही साझेदार है, जिसका खामियाजा देश के मेहनती छात्रों को चुकाना पड़ रहा है।
BJP का फंडा साफ है- जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम
ओडिसा के केओंझर जिले में एक आदिवासी व्यक्ति जीतू मुंडा को अपनी मृत बहन के कंकाल को कब्र से निकालकर बैंक के सामने लाना पड़ा, सिर्फ इसलिए कि वह उसकी मौत साबित कर सके और ₹20,000 निकाल सके। यह शासन नहीं, क्रूरता है। व्यवस्था अपने सबसे कमजोर नागरिकों के साथ पूरी तरह विफल हो चुकी है।