23 August, Jodhpur.
विरोध और हंगामे के बीच Jodhpur के युवाओं ने Ashutosh Ranka जी का जोरदार स्वागत कर साफ़ संदेश दिया - विचारों को दबाया नहीं जा सकता।
असहमति लोकतंत्र का अधिकार है, हिंसा नहीं।
हम CJP के साथ खड़े हैं। 🇮🇳
Have you ever seen anything like this after a military operation in any serious country?
How is this even allowed for someone in service?
The current regime is shamelessly using our forces for its petty politics and hyper nationalism.
7 साल की मासूम भव्या…
डोल का बाढ़ बचाने, मूक पक्षियों का घर बचाने और जयपुर की सांसों को ज़िंदा रखने CMR तक साइकिल से निकली थी।
बीच रास्ते “बहादुर” राजस्थान पुलिस के CI साहब मिले,
नियम-कानून का ज्ञान देने लगे —
बोले “चाभी भरी है!”
सवाल ये है साहब…
चाभी भव्या ने भरी है या आपकी सोच किसी और ने भर दी है?
भव्या ने जो किया वो इंसानियत है, सेवा है, संघर्ष है…
जिसे ऊपर वाला भी देख रहा है — और उम्मीद है प्रधानमंत्री जी भी देखेंगे।
काश सरकार भी कभी इस मासूमियत से कुछ सीख ले।
@narendramodi
#Rajasthan
#SaveDolKaBadh
डोल का बाड़ को कौन बचाएगा???
कंक्रीट के जंगल में तब्दील होते जयपुर जैसे शहर के 100 एकड़ क्षेत्र में पनपे जंगल को सरकार समतल जमीन और फिर उस पर कंक्रीट का जंगल बनाने पर आमादा है। दमदार तर्क है कि जमीन सरकारी है लेकिन इस पर पनपा जंगल सरकार ने नहीं उगाया है। सरकार जंगलों को लगाना और बचाना नहीं जानती, उजाड़ना जरूर जानती है। सरकार के पास ताकत भी है और वह उजाड़ ही देगी।
कुछ ही लोग इस जंगल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, वे धन्यवाद के पात्र हैं। उनको आपका साथ चाहिए। लोकतंत्र में सिर गिने जाते हैं। प्रदर्शनकारी कह रहे हैं कि आज पांच आए हैं कल 500 आएंगे और परसों 5000 आएंगे लेकिन जयपुर की आबादी तो बहुत बड़ी है उसमें पांच, 500 और 5 हजार कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन इतने लोग जुटें तो सही। यकीन मानिए, अगर आप आज चाहेंगे तो यह जंगल खड़ा रहेगा। आप आज चुप रहे तो यह जंगल भी कट जाएगा।
आज से अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा की गई है। धरना देने के लिए बहुत सारे लोगों की जरूरत होती है। यह धरना किसी एक व्यक्ति, किसी एक परिवार, किसी एक समाज के लिए नहीं है। जंगल सबको समान रूप से शुद्ध हवा देता है। पक्षियों को आश्रय देता है।
जिम्मेदारी सबकी है। निभाइए...
आज डोल का बाढ़ में पेड़ो को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे छात्रों और एक्टिविस्ट्स से मुलाकात की। वे इस मुहिम में पेड़ो सहित स्थानीय पर्यावरण को बचाने के लिए दिन-रात प्रयास कर रहे हैं।
वन और पर्यावरण को बचाने को लेकर उनकी मांग जायज है, और सरकार को विवाद समाप्त करने के लिये पहल करनी चाहिए।
JAIPUR IS COMING TOGETHER TO SAVE Dol Ka Badh!
In the heart of our city stands a forest full of life, now at risk of vanishing. But hope is rising. People from all walks of life are uniting to protect what matters.
This is more than a protest, it’s a movement for our future.
अभी अचानक से रात 11 बजे, डोल का बाढ़ में शेड के चारों तरफ़ खूब सारा मलबा फेंका जा रहा है। लोग कह रहे है कि अगले एक दो दिन में कुछ बड़ा करने की प्लानिंग की जा रही है, और लोग अंदर ना घुस पाये उसके लिए यह मलबा फेंका जा रहा है। रात में सोना दूभर।
राजस्थान सरकार क्या करना चाह रही है?
विश्व पर्यावरण दिवस पर डोल का बाढ़ में सफाई कर रहीं युवतियों की बिना अनुमति तस्वीरें पुलिसकर्मी ने बेहद करीब से लीं। 10 लड़कियाँ डर के मारे वहाँ से चली गईं।
Commissioner Biju George, Tejaswini Gautam, @KumariDiya को पत्र लिखा है।
निजता अधिकार है।
#SaveDolKaBadh@RajPoliceHelp
कल डोल का बाढ़ में सफाई
अभियान में भाग ले रहीं छात्राओं की बिना अनुमति तस्वीरें पुलिस ने बेहद करीब से लीं। इस कारण 10 लड़कियाँ डरकर वहाँ से चली गईं। इस बारे में जब एक बुजुर्ग महिला ने उन्हें टोका तो पुलिसकर्मी हँसने लगा।
राजस्थान में सरेआम लोकतंत्र का मजाक बनाया जा रहा है।