Mohan Bhagwat @DrMohanBhagwat hasn’t even reached Canada and a campaign against the RSS is already underway.
Canadian MPs Heather McPherson and Jenny Kwan have called for Bhagwat to be barred from entering Canada and for the RSS to be banned.
Behind the campaign, more than 40 advocacy and civil society groups are reportedly involved, with several names linked to broader international campaigns around Kashmir, CAA, minority rights and religious freedom.
Who is driving this campaign and how does the Justice For All (JFA) network fit into the larger ecosystem?
@shreya_arora22
"So what if Pak keeps killing Hindus in India? Terrorism isn't an issue over which we can suspend IWT. Pak is the inheritor of Indus valley civilization."
- 'Indian defense expert' on Arfa's show
भगवंत मान पंजाब की सड़कों को बेहद अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से बनवा रहे हैं
भगवंत मान का कहना है कि इस टेक्नोलॉजी से ग्रामीण हाथों से ही सड़क को खिसका कर दूसरी जगह ���े जा सकते हैं
#fake_news
अंतिम संस्कार सेवा भारती के द्वारा किये गये | इरफाना इकबाल ने फोटो खिंचवाये और आप ने वायरल किये | सत्य जाने बिना ही झूठ फैलाते हो या सत्य जान कर भी जानबूझ कर ?
एक RSS कार्यकर्ता का अंतिम संस्कार एक मुस्लिम महिला ने किया।
घंटा नारायणन (नारायणन थोट्टाथोडी)64 पूर्व आरएसएस/बीजेपी कार्यकर्ता थे और मुंह के कैंसर से पीड़ित थे।
एक महिना पहले भूखे और बीमार वो एक दुकान के पास दिखाई दिए थे, तो कुछ लोगो�� ने मदद करके हॉस्पिटल में भर्ती कराया था कुछ दिनों पहले
26 जून को इनकी मृत्यु हो गई, इनके घर पर बोला गया तो इनकी दोनों पत्नियां और बच्चों ने शव को लेने से मना कर दिया।
परिवार ने हिंसक अतीत का हवाला दिया।
जिसके बाद मुस्लिम महिला इरफाना इकबाल ने आगे बढ़कर उनका हिंदू रीति-रिवाजों से अंतिम संस्कार किया और कहा, "मानवता - - धर्म और राजनीति से ऊपर है।"
इस्लाम
क्या ये झूठ बोलने, छल कपट करने के मजहबी तरीके हैं??
तक़िय्या या मुदारात
कितमान
तौरिया
तैसिर
दारुरा
मुरुना
तो क्या
इस्लाम एक सैनिक संगठन है??
और
पृथ्वी से मानवता को मिटाना ही लक्ष्य है??
मतलब
हर मुसलमान इस्लाम का एक सैनिक है??
तो
कहीं आप इस कार्य में सहयोगी तो नहीं??
👇😵💫
वह मस्जिद से बाहर निकला था और सरदार पटेल पर हमला किया था।
हमें सिखाया गया कि महात्मा गांधी की हत्या नाथूराम गोडसे ने की थी,
लेकिन हमें कभी नहीं सिखाया गया कि 14 मई 1939 को भावनगर में सरदार वल्लभभाई पटेल पर किसने हमला किया,
किसने उनकी हत्या करने की कोशिश की, और अदालत ने कितने आरोपियों को फांसी या आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई।
भावनगर में 14 और 15 मई 1939 को भावनगर राज्य प्रजा परिषद का पाँचवाँ अधिवेशन आयोजित होना था, जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल करने वाले थे।
जब सरदार पटेल भावनगर पहुँचे, तो रेलवे स्टेशन से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
सरदार पटेल एक खुली जीप में बैठे हुए थे, दोनों ओर खड़ी जनता का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे।
जब जुलूस खार गेट चौक पहुँचा, तो नगीना मस्जिद में छिपे हुए 57 तथाकथित शांतिप्रिय लोग तलवारें, चाकू और भाले लेकर जीप की ओर दौड़ पड़े।
दो युवकों — बच्छुभाई पटेल और जाधवभाई मोदी — ने यह दृश्य देखा।
उन्होंने तुरंत सरदार पटेल को चारों ओर से घेर लिया ताकि उन्हें बचा सकें, और अपनी जान की परवाह किए बिना, वे उन वारों को अपने ऊपर ले लिए जो सरदार पटेल के लिए किए गए थे।
उन्होंने सरदार पटेल की ढाल बनकर अपने प्राणों की आहुति दे दी।
हमलावरों ने दोनों युवकों पर तलवार से कई वार किए — बच्छुभाई पटेल वहीं शहीद हो गए, जबकि जाधवभाई म��दी ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
आज भी उन वीर युवकों की प्रतिमाएँ उसी स्थान पर स्थापित हैं जहाँ उन्होंने अपने प्राण न्योछावर किए थे।
तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने इस घटना की गहन जांच की और एक विशेष न्यायालय गठित किया।
57 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से:
• आजाद अली
• रुस्तम अली सिपाही — को फांसी की सज़ा सुनाई गई।
निम्नलिखित 15 अपराधियों को आजीवन कारावास की सज़ा दी गई:
• कासिम दोसा घांची
• लतीफ मियां काज़ी
• मोहम्मद करीम सैनिक
• सैयद हुसैन
• चंद्र गुलाब सैनिक
• हाशिम सुमरा ताह
• लुहार मूसा अब्दुल्ला
• अली मियां अहमद मियां सैयद
• अली मामद सुलेमान
• मोहम्मद सुलेमान कुम्भार
• अबू बकर अब्दुल्ला
• लुहार अहमदिया
• मोहम्मद मियां काज़ी
उन्होंने अदालत में कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने कोलकाता में मुस्लिम लीग के खिलाफ भाषण दिया था,
जिसके कारण उनकी हत्या की साजिश रची गई।
यह अत���यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरदार पटेल की मृत्यु के बाद, नेहरू सरकार ने इस ऐतिहासिक घटना को इतिहास की पुस्तकों से मिटा दिया,
ताकि आने वाली पीढ़ियाँ यह न जान सकें कि सरदार पटेल पर भी एक घातक हमला और हत्या का षड्यंत्र हुआ था।
मोहन गांधी Vs गोपाल पाठा
जब गांधी ने गोपाल पाठा से मांगी सुरक��षा... जब गोपाल पाठा ने स्टेनगन लेकर की गांधी की रक्षा... “अहिंसा के पुजारी” का ये किस्सा बड़ा हैरतअंगेज़ है !!!
16 अगस्त 1946 को कोलकाता में “डायरेक्ट एक्शन डे” पर हजारों हिंदुओं का नरसंहार हुआ। तब हिंदू बाहुबली गोपाल पाठा ने हिंदुओं की रक्षा में हथियार उठाये थे। इतिहास की ये जानकारी अब धीरे-धीरे सभी तक पहुंच रही हैं। लेकिन...
बहुत कम लोग जानते हैं कि जब आजादी के बाद अगस्त 1947 में कलकत्ता में एक बार फिर दंगा भड़का और निशाने पर मुसलमान थे तब गांधी उन्हें बचाने का पूरा प्रयत���न कर रहे थे। ये और बात है कि एक साल पहले जब “डायरेक्ट एक्शन डे” पर हिंदू निशाने पर थे तब गांधी कलकत्ता नहीं आये थे।
ऐसे में नाराज़ हिंदुओं की भीड़ ने 31 अगस्त 1947 की रात में गांधी पर हमला कर दिया और गांधी की जान जाते-जाते बची। इस घटना से हमारे बापू चिंतित हो उठे... और फिर हमारे बापू को याद आये बाहुबली गोपाल पाठा... और फिर गोपाल पाठा और उसके साथियों ने स्टेनगन और हथियार ��ेकर गांधी को सुरक्षा दी। और ये सब हुआ “अहिंसा के पुजारी” गांधी की अनुमति से...
@jambootalks
Former UP Information Director Shambhunath Tandon writes in an article that the first electoral malpractice in Independent India was done on orders of PM Nehru to UP CM Pt.Pant to force DM of Rampur to transfer winner V C Seth’s votes to Abdul Kalam's box&declare Maulana winner!