जब कभी लगे कि जीवन में सब कुछ ग़लत हो रहा है और कुछ समझ न आए कि खुद को कैसे संभालें,उस वक्त थोड़ा-सा रुक जाओ ज़रूरी नहीं कि हर पल भागते रहो कुछ परेशानियों के हल समय के साथ ही मिलते हैं,बस उस बुरे वक्त में थोड़ा संयम रखना होता है सच तो यह है कि वक्त कैसा भी हो,गुज़र ही जाता है...!
प्रेम कम लोग कर पाते हैं समय पास हर कोई कर लेता है। यही कड़वा सच है। मैंने देखा लोग बड़ी सहजता से कहते हैं– मैं तुमसे प्यार करता हूँ। जबकि यह झूठा है। अक्सर, यह प्रेम नहीं बल्कि किसी आवश्यकता सुविधा अकेलेपन या स्वार्थ का दूसरा नाम होता है। अब प्रेम, विलासिता का पर्याय बन चुका है।
एकांकीपन की कोई उम्र नही होती यह किसी भी उम्र मे आपको घेर सकता है,इसलिए जिस हुनर से आपको प्रेम है,उससे प्रेम और लगाव बनाये रखिए क्योकि लोग छूट जाते है हुनर हमेशा हमारे साथ रहता है और हमारे पास भी...!
हमारे बीच की दूरियाँ आज भी सिर्फ़ स्थानों की हैं,दिलों की नहीं फ़ासले चाहे जितने हों,साथ रहने के अपने तरीक़े होते हैं कभी बातों में,कभी तस्वीरों में,तो कभी बिना किसी वजह भेजे गए एक छोटे-से संदेश में साथ होने का मतलब एक ही जगह होना नहीं,बल्कि एक-दूसरे की दुनिया में बने रहना है...!
कभी-कभी मैं बैठकर रिश्तों के बारे में सोचता हूँ तो लगता है कि हर रिश्ता अपने आप में एक जीवित संसार होता है। उसकी अपनी एक लय होती है, अपनी गति होती है, अपनी चाल होती है और अपनी एक निश्चित दिशा भी होती है। हम अक्सर समझते हैं कि रिश्ते केवल प्रेम, अपनापन या साथ का नाम हैं, लेकिन सच मायने में रिश्ते उन अनगिनत अदृश्य धागों से बने होते हैं जो रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातों, प्रतीक्षाओं, विश्वासों, संवादों और एहसासों से बुने जाते हैं।
हर रिश्ता एक नदी की तरह बहता है। उसकी धारा चाहे कितनी भी शांत क्यों न दिखाई दे, भीतर उसका एक निश्चित प्रवाह होता है। जब तक प्रवाह बना रहता है सब कुछ सहज लगता है, लेकिन जैसे ही उस प्रवाह में हल्का सा अवरोध आता है, जैसे ही उसकी दिशा में तनिक सा परिवर्तन आता है, कुछ बदलने लगता है। बाहर से सब कुछ सामान्य दिख सकता है, लेकिन भीतर कहीं कोई पत्थर गिर चुका होता है जो जल की गति को प्रभावित करने लगा होता है।
मुझे लगता है कि रिश्तों का सबसे बड़ा आधार आदत नहीं, बल्कि निरंतरता होती है। किसी का रोज़ पूछ लेना कि दिन कैसा रहा, किसी का बिना वजह याद कर लेना, किसी का ये जानना कि तुम्हें चाय कैसी पसंद है, किसी का तुम्हारी चुप्पी के पीछे छिपी उदासी को पहचान लेना, यही वे छोटी-छोटी बातें हैं जो किसी रिश्ते की लय बनाती हैं।
फिर एक दिन अचानक कुछ बदल जाता है।
शायद किसी के पास समय कम हो जाता है, शायद कोई पहले जितना नहीं लिखता, शायद कोई पहले जैसी उत्सुकता से बात नहीं करता, शायद कोई पहले जैसी चिंता नहीं करता और ये परिवर्तन भले ही क्षणिक हो, भले ही उसके पीछे कोई मजबूरी हो, लेकिन रिश्ते अक्सर तर्कों से नहीं, एहसासों से चलते हैं। मन कारण नहीं देखता, वह केवल परिवर्तन देखता है। वह केवल ये महसूस करता है कि जो पहले था, अब वैसा नहीं है।
यहीं से प्रश्न जन्म लेते हैं।
क्या सब कुछ पहले जैसा है? क्या मैं अब भी उतना ही महत्वपूर्ण हूँ? क्या कुछ बदल गया है? क्या दूरी आ गई है? और कई बार इन प्रश्नों का कोई उत्तर नहीं मिलता। उत्तरों के अभाव में मन अपने उत्तर स्वयं गढ़ने लगता है। वहीं से गलतफहमियाँ जन्म लेती हैं, वहीं से मौन धीरे-धीरे संवाद की जगह लेने लगता है।
मुझे हमेशा लगता है कि रिश्ते टूटते नहीं हैं, वे धीरे-धीरे अपनी धड़कन खो देते हैं। जैसे किसी पुराने घर में पहले एक-एक कर खिड़कियाँ बंद होती हैं, फिर रौशनी कम होती है, फिर आवाज़ें कम होती हैं, और एक दिन वह घर आबाद होकर भी वीरान लगने लगता है।
दूरियाँ भी अचानक नहीं बढ़तीं।
वे एक अनुत्तरित संदेश से शुरू होती हैं, एक अधूरी बातचीत से शुरू होती हैं, एक अनकहे दुःख से शुरू होती हैं, एक ऐसे क्षण से शुरू होती हैं जब कोई मन की बात मन में ही दबा लेता है, फिर धीरे-धीरे दो लोगों के बीच शब्द कम होने लगते हैं, बातें औपचारिक होने लगती हैं, हँसी की जगह शिष्टाचार ले लेता है, अपनापन मौजूद रहता है, लेकिन उसकी गर्माहट कहीं खो जाती है।
उससे ज्यादा दुखद स्थिति जब दोनों पक्ष एक-दूसरे को खोना नहीं चाहते, फिर भी दूर होते चले जाते हैं। जैसे दो नावें एक ही नदी में बह रही हों, लेकिन धाराएँ उन्हें अलग-अलग दिशाओं में ले जा रही हों। वे एक-दूसरे को देख सकती हैं, याद कर सकती हैं, पुकार भी सकती हैं, लेकिन उनके बीच की दूरी हर क्षण बढ़ती जाती है, और फिर एक समय ऐसा भी आता है जब लौटना संभव नहीं रह जाता।
इसलिए नहीं कि रास्ता नहीं होता, बल्कि इसलिए कि रास्ते पर चलने वाली भावनाएँ थक चुकी होती हैं।
कभी-कभी लोग वर्षों बाद मिलते हैं। चेहरे वही होते हैं, नाम वही होते हैं, स्मृतियाँ भी वही होती हैं, लेकिन उनके बीच वह रिश्ता नहीं होता जो कभी हुआ करता था। वे एक-दूसरे को पहचानते तो हैं, पर महसूस नहीं कर पाते, जैसे किसी पुराने गीत के शब्द याद हों लेकिन उसकी धुन भूल गई हो।
शायद यही रिश्तों का सबसे दुखद सत्य है।
रिश्ते बड़े कारणों से कम और छोटी उपेक्षाओं से अधिक मरते हैं। वे किसी एक बड़ी घटना से नहीं, बल्कि उन हजारों छोटे क्षणों से कमजोर होते हैं जिन पर उस समय ध्यान नहीं दिया गया।
आज जब जीवन को देखता हूँ तो महसूस करता हूँ कि हर रिश्ता एक नाज़ुक वाद्ययंत्र की तरह है। उसकी तारें बहुत कस दी जाएँ तो टूट जाती हैं, बहुत ढीली छोड़ दी जाएँ तो संगीत समाप्त हो जाता है। मधुरता केवल संतुलन में रहती है।
इसलिए ये समझना जरूरी है कि रिश्तों को बचाने के लिए हमेशा बड़े प्रयासों की आवश्यकता नहीं होती। कभी-कभी एक सच्चा संदेश, एक ईमानदार क्षमा, एक छोटा सा संवाद, एक पल का धैर्य और एक क्षण की संवेदनशीलता भी बहुत कुछ बचा सकती है। क्योंकि जब दूरियाँ बहुत अधिक बढ़ जाती हैं, तब लोग नहीं खोते, उनके साथ जुड़ी हुई पूरी दुनिया खो जाती है।
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कई मामलों में हम फिक्रमंद दिखना चाहते है हम चाहते है कि सामने वाला ये समझे कि हमें उसकी परवाह है हम रह रह के उसके मर्ज के बारे में इलाज के बारे में पूछते रहते है मगर सच तो ये है कि हम सुनना चाहते है की एक दिन कि आखिर में उसके साथ क्या हुआ था...!
जब तक हम लोगों की उम्मीदों के अनुसार जीते रहते हैं,तब तक हम उन्हें अच्छे लगते हैं मगर जिस दिन हम अपनी सोच के साथ खड़े होना सीख लेते हैं,उनकी हर बात पर हाँ कहना छोड़ देते हैं,
उसी दिन उन्हें लगता है कि हम बदल गए हैं जबकि सच तो यह है कि उस दिन पहली बार हम खुद के होने लगते हैं...!
मैं अपने संघर्षों से विजयी होने के बाद ही विवाह करना चाहता हूँ। क्योंकि किसी का हाथ थामना केवल प्रेम नहीं, उत्तरदायित्व भी है। मैं नहीं चाहता कि मेरी अपूर्ण परिस्थितियों का भार किसी स्त्री के सपनों पर पड़े, और न ही यह चाहता हूं कि कोई स्त्री मेरे जीवन की कठिनाइयों के कारण अपने ख्वाबों से समझौता करे।
शराब के बाद की रातों में जो लिखा जाता है,वह अक्सर दिन की रौशनी से भी ज़्यादा सच होता है क्योंकि दिन भर हम अपने भीतर की कई बातों को छिपाए रखते हैं,लेकिन रात की तन्हाई और नशे की धुंध में मन के बंद दरवाज़े खुल जाते हैं तब जो शब्द निकलते हैं,1/2
उस स्त्री के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ाव मृत्यु के समान है,जिसके साथ आपका कोई भविष्य नहीं,वो चाहेगी जुड़े रहना क्युकी उसको अच्छा लगता है,एक समय बाद जब उसको कोई मिल जाएगा जिसमें वो अपना भविष्य देखेगी, तो जीवन आपका नर्क बनेगा उसका नहीं...!