जब श्रृद्धा अपने चरम पर पहुंच जाए तो भक्त भी पूज्य हो जाता है उसकी भक्ति अमूल्य।आज मेरठ में ऐसा ही उदाहरण देखने को मिला जब एक माली नरेन्द्र जी निवासी अयोध्या ने रामभक्ति में अपना सर्वश्रेष्ठ सहयोग देकर उन सभी रामभक्तों में अपना स्थान ऊंचा कर लिया
#राम_मंदिर_से_राष्ट्र_निर्माण
त्रिपुरा के सेपाहिजाल में BSF पर उन्मादी भीड़ का जानलेवा हमला,
हफीजुर्रहमान ने सरकारी वाहन से खींच कर घसीटते हुए मारा राष्ट्र के रक्षकों को,
हिजाब वा��ी खातूनें आगे खड़ी की गईं थी फिलिस्तीनी अंदाज में,
उबल रहा है राष्ट्र उस सिस्टम के खिलाफ, जिसने बाँधे थे रणबांकुरो के हाथ..
#Tripura #BSF @BSF_India @Tripura_Police
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में लव जिहाद की घटना डराने वाली है।
यूपी STF की जांच रिपोर्ट के अनुसार -
👉 हिंदुओं को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भी छुट्टी नहीं दी जाती थी और अपमानित किया जाता था।
मुस्लिम डॉक्टर और स्टाफ को नमाज पढ़ने और रिश्तेदारों के निकाह के लिए छुट्टी दी जाती थी।
👉 2013 में जिम की सेकंड फ्लोर को इबादत खाने में बदल दिया गया था और मौलाना आकर तकरीर करते थे।
👉 डॉक्टर डॉ. रमीजुद्दीन ने कई हिंदू महिला डॉक्टरों का यौन शोषण किया और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया।
रमीजुद्दीन के खिलाफ 06 महिला डॉक्टरों ने FIR किया है।
👉 एक नर्सिंग स्टाफ नफीस ने एक हिंदू महिला का यौन शोषण किया और धर्म परिवर्तन के बाद निकाह किया।
👉 फुरकान ने महिला कर्मचारी को प्रेम संबंध में फंसाकर निकाह के लिए दबाव डाला।
👉 शफात अली ने एक महिला कंप्यूटर ऑपरेटर से छेड़छाड़ की और धर्म परिवर्तन का दबाव डाला।
पीड़िता ��े शिकायत की तो उसे नौकरी से हटा दिया।
👉 डॉ. रिजवान ने दो महिला डॉक्टरों को ब्लैकमेल किया और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला।
महिला डॉक्टरों ने शिकायत की तो उन्हें परीक्षा में फेल करने की धमकी दी।
👉 डॉ. सुमायरा कयूम पीड़िताओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करती थी।
🛑 डॉ. अब्बास अली मेहंदी और प्रोफेसर उस्मान कौसर लव जिहादियों को संरक्षण देते थे।
त��सीन से प्रश्न पूछा गया कि आप अल फलाह यूनिवर्सिटी के बारे में क्यों नहीं बोलते?
तहसीन ने अपना मत दे दिया कि बिल्कुल, इसे बंद कर दीजिए। यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है और अवैध रूप से चल रही है।
बीजेपी प्रवक्ता को शायद तहसीन से इस जवाब की उम्मीद नहीं थी। जवाब सुनते ही बीजेपी प्रवक्ता ने अपने दिल की आवाज निकाल दी।
अब 10 लोग गलत हैं तो पूरी यूनिवर्सिटी बंद कर दें?
यही बीजेपी 5000 साल के शोषण की कहानी बताकर सामान्य वर्ग के अजन्मे बच्चे को भी अपराधी घोषित करती है। सामान्य वर्ग की अजन्मी पीढ़ी तक ��े लिए यूजीसी जैसे कानून लाती है।
पर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई नहीं करेगी, क्योंकि कुछ निर्दोष लोग भी यूनिवर्सिटी में हैं।
फिर बीजेपी को सामान्य वर्ग के लिए ऐसे न्याय के विचार दिमाग में क्यों नहीं आते?
बीजेपी सामान्य वर्ग से ज्यादा अब्दुल के हित के लिए
प्रयासरत है।
यह चौंकाने वाला वीडियो है!
देखिए कैसे पंजाब पुलिस एक हिंदू महंत को ड्रग केस में फंसाने की कोशिश कर रही है।
पंजाब के खन्ना में महंत कश्मीर गिरी के घर के CCTV फुटेज में एक पुलिस ऑफिसर गद्दे के नीचे कुछ रखते हुए दिख रहा है।
बाद में उसी जगह से नाटकीय ढंग से 30 ग्राम हेरोइन बरामद होने का दावा करके महंत को गिरफ्तार कर लिया गया।
"कौन विदेश में किससे गुप्त रूप से मिल रहा है,
भारत विरोधी ताकतें किसे समर्थन दे रही हैं,
कौन भारत के दुश्मनों की भाषा बोल रहा है,
हमें इन्हें पहचानना और इनका मुकाबला करना होगा"
: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
जामिया मिलिया विश्वविद्यालय में हिजाब पहने हुए ये महिला कब्र खोद रही है,
किसकी -
- RSS की कब्र खोद रही है
- जातिवाद की कब्र खोद रही है
- इस्लामोफोबिय��� की कब्र खोद रही है
ये किसकी कब्र ��हीं खोद रही है-
- आतंकवाद की कब्र नहीं खोद रही है
- कट्टरपंथ की कब्र नहीं खोद रही है
- ISIS की कब्र नहीं खोद रही है
- पहलगाम के हमलावरों की कब्र नहीं खोद रही
- कश्मीर को भारत से काटने की मंशा रखने वालों की कब्र नहीं खोद रही है
सवाल- अगर ये छात्र आंदोलन है तो- इन कट्टरपंथी नारों का क्या रोल?
@IXD444 SC को बजट से 1.96 लाख करोड़
St को बजट से 1.43 लाख करोड़
ओबीसी को 38,000 करोड़
मुस्लिमों के लिए 3200 करोड़
वक्फ बोर्ड को 200 करोड़
बांग्ला देश को 60 करोड़
सत्ता मिलते ही जातीय जनगणना पर Uटर��न
एक मंदिर tax खत्म कर सनातन बोर्ड तक न बनाया 12 साल में,,,,,,,
सवर्ण को 0 Zero
एक बात अच्छी तरह समझ लीजिए,
डेमोग्राफी बहुत तेजी से बदल रही है।
आज के वोटजीवी, नोटजीवी, सत्ताजीवी नेता 25 वर्ष बाद आपका घर-प���िवार, मकान-दुकान, खेत-खलिहान, उद्योग-व्यापार और मठ-मंदिर बचाने नहीं आएंगे
लेकिन लव जिहाद, लैंड जिहाद, ड्रग जिहाद, घुसपैठ जिहाद, धर्मांतरण जिहाद, जनसंख्या जिहाद और कालाधन, हवाला, भ्रष्टाचार के खिलाफ बना कठोर कानून आपकी 25 पीढ़ियों को बचाएगा,
इसलिए दल गुलामी छोड़िये और सांसद से मिलकर कठोर कानून की मांग करिए।
#पहाड़ी' को मोदी सरकार ने 2023 में ST का दर्जा दिया था।वस्तुतः यह हिंदुओं की आंख में धूल झोंकना था !!
पहाड़ी वास्तव में शेख, सैय्यद,मुगल,पठान,मुस्लिम राजपूत जैसी बहुत सारी मुस्लिम जातियों का सामूहिक गठबंधन ��ै जिन्हें जम्मू कश्मीर में पहाड़ी भाषा बोलने वाले समूह में वर्गीकृत करके ST के रूप में #मुसलमानों को #आरक्षण दिया गया है...
जबकि इसी मोदी सरकार ने मणिपुर के हिंदू मैतेई जाति को मणिपुर हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी ST का दर्जा नहीं दिया .....मुसलमानों को भांति भांति प्रकार का छल करके आरक्षण दिया जा रहा है...
ये है #SaniaMirza भारत की टेनिस खिलाड़ी,
इनको सरकार नें टेनिस ट्रेनिंग के लिए जमीन दी
थी लेकिन,
उन्होंनें वो जमीन वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनानें
के लिए दान कर दीं और, अपने व्यक्तिगत खर्च से मस्जिद बनवा रहीं हैं?
यहां निर्माण कि ईंट भी, भारत के पूर्व क्रिकेटर
कप्तान व कांग्रेस नेता मो अजहरुद्दीन रख रहे?
सरकारी नें जमीन टेनिस के लिए दी थी या, ��िसी और मकसद के लिए?
सरकार नें जमीन और फंड दिए हैं,तो जवाब देही भी सरकार की तय होनी चाहिए!
यहां सवाल ये है कि क्या यहां पर स्कूल अस्पताल आदि आवश्यक कि चीजें नहीं बनाई जा सकती थी? ये इसके ऊपर सोच ही नहीं सकते?
आज राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि मोदी सरकार टाटा ग्रुप में दखल दे रही है
जबकि रतन टाटा जी के निधन के बाद खुद टाटा ग्रुप के जितने भी बड़े-बड़े शेयर होल्डर हैं या उनके रिश्तेदार हैं वह आपस में लड़ रहे हैं
वैसे जब राहुल गांधी सत्ता में थे तब किस तरह से उद्योगपतियों की कंपनी हड़प ली जाती थी आप एयरसेल कंपनी के मालिक रहे जिन्होंने एयरसेल कंपनी अपनी मेहनत से कड़ी की थी चिन्नाकन्नन शिवशंकरन के मुंह से सुनिए
चिन्नाकन्नन शिवशंकरन ने एयरसेल कंपनी बनाई शुरू में इस कंपनी ने भारत में इंटरनेट सर्विस देने का लाइसेंस लिया और कंपनी शुरू में ही 400 करोड रुपए प्रति महीने प्रॉफिट करने लगी थी
उसके बाद कंपनी ने पांच सर्कल में मोबाइल सर्विस देने का लाइसेंस अप्लाई किया लाइसेंस उसे मिला फिर कंपनी और ज्यादा म��नाफा कमाने लगी उसके बाद कंपनी ने 8 और सर्कल में सर्विस देने का लाइसेंस की अप्लाई किया
तब तक इस कंपनी पर मनमोहन सरकार के द��र में दूरसंचार मंत्री रहे दयानिधि मारन और गृह मंत्री पी चिदम्बरम की नजर पड़ चुकी थी
फिर कंपनी के मालिक शिवशंकरन उसे वक्त चौंक गए जब नया लाइसेंस मिलना तो छोड़िए जो पुराना लाइसेंस मिला था उसे भी अचानक कैंसिल कर दिया गया और एयरसेल के 30 लाख ग्राहकों के फोन अचानक बंद हो गए
शिवशंकरन भागे भागे दयानिधि मारन के पास गए तो दयानिधि मारन ने उनसे कहा कि मैं जिसे बोल रहा हूं उस ग्रुप को तुम अपनी कंपनी बेच दो और उस प्राइस में बेचोगे जो प्राइस मैं तुम्हें बताऊंगा वरना भारत में काम करना भूल जाओ तुम्हारी कंपनी बर्बाद कर दी जाएगी
अंत में 15 दिन तक उन्हें रुला कर मलेशिया की एक कंपनी मैक्सन ग्रुप को 70% हिस्सा बेचने 20% हिस्सा अपोलो हॉस्पिटल के मालिकों को बेचने और 5% हिस्सा 3 चिदंबरम के लड़के कार्ति चिदंबरम की शेल कंपनी को बेहद कम कीमतों पर बेचने को कह दिया गया
और इस डील के एवज में दयानिधि मारन को अलग-अलग कंपनियों के रास्ते 800 करोड रुपए मिले बाद में यह खुलासा होने पर और खुद कोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच में यह सच पाए जाने पर दयानिधि मारन को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा
हालांकि भारत में मंत्रियों के भ्रष्टाचार की यही सजा होती है दूसरा कोई देश होता तो उसे क्या सजा मिलती आपको पता ही है
40000 करोड़ का चारा घोटाला करके लालू यादव 1 दिन भी जेल में नहीं रहा वह या अस्पताल में रहा या अपने ही घर में रहा
���र आज दोगला राहुल गांधी मोदी सरकार को सीखा रहा है कि उद्योगपतियों से कैसे डील की जाती है उद्योगपतियों को कैसे संभाला जाता है
कोयंबटूर के दसवीं कक्षा के एक छात्र ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐसे सवाल उठाए, जो केवल सरकार से नहीं, बल्कि पूरे हिंदू समाज से जवाब मांगते हैं।
उसकी उम्र कम थी, लेकिन सवालों में स्पष्ट तर्क, सामाजिक चिंता और निर्भीकता दिखाई दी।
छात्र ने पूछा कि यदि सरकार हिंदू मंदिरों को धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्त विभाग के माध्यम से नियंत्रित कर सकती है, तो मस्जिदों और चर्चों के लिए वैसी व्यवस्था क्यों नहीं है।
क्या इसका कारण यह है कि उनके सरकारी नियंत्रण का प्रयास होते ही बड़े पैमाने पर विरोध शुरू हो जाएगा।
यदि ऐसा है, तो सरकारी नी���ियां समानता के सिद्धांत पर चलती हैं या विरोध की आशंका देखकर तय होती हैं।
उसने कोयंबटूर में 1998 के बम धमाकों के मामले में आरोपी रहे बाशा की अंतिम यात्रा का उदाहरण दिया, जिसमें भारी भीड़ जुटी थी और प्रशासन ने जुलूस नहीं रोका।
छात्र का सवाल था कि ऐसे मामलों में सरकार का रवैया अलग क्यों दिखाई देता है।
उसने सीजेपी का उल्लेख करते हुए ��हा कि वह इस संगठन का विरोध करता है, लेकिन जब ऐसे संगठन पिछले बारह वर्षों से सत्ता में रही सरकार को चुनौती देने का साहस रखते हैं, तो हिंदू समाज अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज क्यों नहीं उठाता।
देश में लगभग अस्सी प्रतिशत हिंदू हैं। यदि इतनी बड़ी आबादी का महत्वपूर्ण हिस्सा अपने साथ अन्याय महसूस करता है, तो उसका लोकतांत्रिक विरोध करने में संकोच क्यों करता है।
हम आपस में नाराजगी व्यक्त ���रते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से एकजुट क्यों नहीं हो पाते।
छात्र ने तमिलनाडु विधानसभा में सनातन धर्म के उन्मूलन संबंधी कथित बयानों का भी उल्लेख किया।
उसका प्रश्न था कि जब हमारी धार्मिक मान्यताओं पर इस प्रकार प्रहार होते हैं, तो हम उनका प्रभावी और तर्कपूर्ण प्रतिवाद क्यों नहीं कर पाते। सामान्य नागरिक होने का अर्थ क्या अपने अधिकारों के लिए आवाज न उठा पाना है।
उसने हिंदू समाज के विचारकों से आग्रह किया कि वे युवाओं को दिशा दें और संवैधानिक तथा शांतिपूर्ण आंदोलन का नेतृत्व करें।
युवा उनके साथ खड़े होने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं।
इन सवालों का महत्व केवल किसी धर्म या राजनीतिक संगठन के विरोध तक सीमित नहीं है। मूल प्रश्न धार्मिक समानता, सरकार की निष्पक्षता, नागरिक अधिकारों और सामाजिक एकजुटता का है।
जो लोग स्वयं को धर्मनिरपेक्ष कहते हैं, उन्हें भी स्पष्ट करना चाहिए कि समानता का सिद्धांत सभी धर्मों पर एक समान क्यों न लागू हो।
यदि अलग व्यवस्थाओं के पीछे उचित संवैधानिक या प्रशासनिक कारण हैं, तो उन्हें समाज के सामने रखा जाना चाहिए।
छात्र के सभी दावों की तथ्यात्मक जांच आवश्यक है, लेकिन उसके मूल प्रश्नों को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
किसी समाज की शक्ति केवल उसकी संख्या में नहीं, बल्कि जागरूकता, संगठन, विवेक और संवैधानिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से खड़े होने की क्षमता में होती है।
दसवीं के इस छात्र ने यही सोचने पर विवश किया है कि हम अन्याय की शिकायत करते रहेंगे या उसके समाधान के लिए संगठित और सार्थक प्रयास भी करेंगे।
सवाल पूछना साहस है, लेकिन सही उत्तर खोजना और उन प�� जिम्मेदारी से काम करना उससे भी बड़ी आवश्यकता है।
"अक्खा मुंबई अपना है.. सिग्नल , फाटक सब तोड़ रहे हैं.. सबकी मां @# देंगे"..
मुंबई पुलिस को मोहम्मद शाकिर, दिलशाद मियां और आमिर अली का चैलेंज...
खुलेआम बोले कि रोकने का दम नहीं है किसी के अंदर..
#Mumbai@MumbaiPolice
एंटी कैंसर दवाओं के 543 ब्रैंड्स की कीमत कम कर दी गई है। जो दवा पहले 26 हज़ार+ की मिलती थी वही अब 6 हज़ार से भी कम में मिलेगी।
अभी तो ये कैंसर की दवा के लिए हुआ है। यही कैपिंग हर दवा के लिए होनी चाहिए।
@News18India पर “देश की पाठशाला” में भी ये मुद्दा तब तक उठता ���हेगा जब तक दवा माफिया पर कम्पलीट एक्शन ना हो जाए और दवा के नाम पर आम आदमी के साथ होने वाली लूट ना रुक जाए।
सवर्ण समाज के लोग अब कोलेज युनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी नहीं बन सकते क्योंकि उनको 100% लाना होगा और वही दुसरी और ST/SC वाले को 3 % लाने पर प्रोफेसर बनाया जा रहा है देश कि शिक्षा व्यवस्था खत्म होने कि कगार पर है