@meevkt युवाओ ने NEET की परीक्षा दी और उसका रिजल्ट आ गया. अब वो दाखिले के लिए तैयारियां कर रहे है.
जिनको आप दिखा रहे हो वो, वो है जिनको पढ़ाई नहीं करनी सिर्फ नंबर अच्छे चाहिए और नौकरी बहुत बढ़िया वाली.
पेपर लीक गलत है बहुत बुरा है लेकिन पढ़ना जरूरी है और ज्यादातर वही कर रहे है.
आज शाम सीमापुरी बंगाली बस्ती, 200 फुटा रोड के पास सरकारी जमीन पर हुए अवैध अतिक्रमण की रिपोर्टिंग करने गई All India News की रिपोर्टर सुप्रिया पाठक एवं कैमरामैन श्याम के साथ बुरी तरह मारपीट की गई। उपद्रवी भीड़ कैमरा एवं माइक भी लेकर भाग गई।।
रिपोर्टर सुप्रिया पाठक को पैरों में गहरी चोट आई है जिससे वो चलने में असमर्थ हैं। दिल्ली पुलिस अभी दोनों पत्रकारों के मेडिकल जांच के लिए GTB Hospital लेकर गई है।
@gupta_rekha जी , @CMODelhi कृपया मामले का संज्ञान लें और @DelhiPolice को उचित कार्रवाई के लिए निर्देश दें।
देवेंद्र फडणवीस से महाराष्ट्र संभल नहीं रहा है,
पर प्रांतीय हिन्दू वहां असुरक्षित हैं।
एकनाथ शिंदे या नितेश राणे को कमान देनी चाहिए।
राज ठाकरे के गुंडों को उसी की भाषा में जवाब देने वाला चाहिए।
@Dev_Fadnavis@mieknathshinde@NiteshNRane@RajThackeray
@PMishra_Journo जाति की राजनीति PDA नाम वाले संगठनों और कुछ कथित पत्रकारों की वजह से ज्यादा हो रहीं है.
कुछ भी हो ब्राह्मण सर्वश्रेष्ठ थे, है और हमेशा रहेंगे.
कुछ नकली लोग शायद सहमत न हो.
मेरे पास जो पेट्रोल कार है, लगभग 9 वर्ष होने जा रहे हैं, लेकिन उस लिहाज से कम चली है और नियमित देखभाल से पूरी तरह से दुरुस्त है। मेरे पास अभी के सरकारी नियमों के लिहाज से भी बहुत समय है, इस तरह से मुझे अभी कोई चिंता नहीं है, लेकिन इस मूर्खतापूर्ण नीति पर गंभीर प्रश्न है कि, 15 वर्ष में पेट्रोल और 10 वर्ष में डीजल कार नहीं चलेगी। PUC प्रमाणपत्र किसलिए होता है। हो सकता है कि, किसी की एकदम नई कार भी अधिक प्रदूषण कर रही हो और किसी की 20 वर्ष पुरानी कार भी हर पैमाने पर टनाटन हो। गाड़ी का प्रदूषण. फिटनेस पैमाना हो सकता है, उम्र कैसे? यह जनविरोधी नीति रद्द की जानी चाहिए @PMOIndia@narendramodi
फिर से बता रहा हूँ...
जंतर मंतर पर बजरंग पूनिया ने प्रदर्शन के दौरान कोच नरेश दहिया पर दुष्कर्म और यौन शोषण के आरोप लगाये थे।
अब पूनिया ने 17 मई को बिना शर्त माफी मांग ली है।
@BajrangPunia
अजीत अंजुम ने जीवन बिता दिया अरविंद केजरीवाल के मोहल्ला क्लिनिक का प्रचार करते हुए, लेकिन जब मर रहे थे तो जान बची उत्तराखंड के एक छोटे से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में!
इसके बावजूद अजीत अंजुम @pushkardhami की प्रशंसा में एक शब्द नहीं लिखेंगे। मात्र 10 रुपए में उनकी जान बचा ली गई, वो भी एक पहाड़ी क्षेत्र में। ऐसा अनुभव रहा कि उन्हें प्राइवेट अस्पताल भी फेल लग रहा है।
क्या अजीत अंजुम अब @ukcmo को धन्यवाद देंगे? वैसे एहसानफरामोशी तो इस गिरोह के ख़ून में है। उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था ने उन्हें जीवनदान दे दिया, कल से फिर वो वापस मोदी को गाली देने के मिशन पर लग सकते हैं।