ऐसी पढ़ाई लिखाई किसी काम की नहीं है जो इंसानियत नहीं दिखाती है।
चाहे कितनी भी बड़े बन जाओ
इंसानियत नहीं है तो आपके पास
जो भी है वो सब कुछ बेकार है।
We live in this society ?
@NamrataVaishna4@maheshvarig11
यह सर्द मौसम ये ठंडी हवाएँ और खिड़की से उतरती गुनगुनी धूप जो मेरे केशों और चेहरे को छूकर धरती पर बिखर रही है मन में एक अजीब-सी उदासी और रिक्तता है आँखें न जाने कब से एक ही दिशा में टिकी हैं मानो कुछ खोज रही हो पर क्या खोज रही हैं यह न आँखें जानती हैं न मन बता पाता है बस देख रही।
ज़मीन पर गिरे हुए ये #फूल हमें सिखाते हैं कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन हर परिस्थिति में अपनी खूबसूरती और सकारात्मकता बनाए रखना ही असली खूबी है...!!
90 का दशक तकनीक और सादगी के बीच आख़िरी संतुलन था. आज का मन सूचनाओं की भीड़ से थका हुआ है; तब हर चीज़ में जल्दबाज़ी नहीं, एक ठहराव था. शायद हमें वह दौर नहीं, बल्कि अपना खोया हुआ सुकून, सहजता और वह असली दुनिया याद आती है, जिसमें जीना कम और महसूस करना ज़्यादा था…
कभी आपने गौर किया है; कुछ बड़े काम हम इतने दर्द, दबाव और संघर्ष के बीच कर जाते हैं कि उनके पूरा होने के बाद कुछ पल के लिए ख़ुद पर ही यक़ीन नहीं होता कि “ये मैंने ही किया है?...🤍:)
कई साल पुरानी पोस्ट पढ़ता हूँ तो तारीख और साल देखकर एहसास होता है कि वाकई कितने साल गुजर गए लेकिन मन मानने को तैयार ही नहीं होता लगता है जैसे ये सब अभी कल ही की तो बात है,वक्त पता ही नहीं चला कब गुजर गया,बस तारीखें पुरानी होती गईं और यादें आज भी उतनी ही ताज़ा हैं...!
मेरे शब्द पलटकर मुझसे बात करते हैं कई बार ज़िद करते हैं कि इन्हें किसी और तरीके से लिख दूँ और किसी दूसरे अंत तक ले जाऊँ पर ये कोरी कल्पनाएँ नहीं हैं,जिन पर मनमर्ज़ी से लीपापोती की जा सके ये वक़्त से मिले अनुभव हैं,ऐसी यादें हैं जिन्हें देखा और महसूस तो किया जा सकता है,लेकिन बदला नहीं जा सकता...!
सबसे पीड़ादायक क्षण वह है कि जब आपकी माँ आपको परेशान देख पूछती है कि क्या हुआ, और आप उस समस्त पीड़ा को अपने गलें में खींच कर रोकते हुए कहते हैं कि कुछ नहीं माँ,"सब ठीक है... एक उम्र आती है जब दुःख माँ से नहीं कहे जाते...!!!
अक्टूबर… साल का वो महीना,जिससे मेरी जिंदगी की बहुत-सी यादें जुड़ी हैं कुछ पल ऐसे हैं जिन्हें याद करते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है,और कुछ ऐसे भी,जिन्हें याद करके मन कुछ देर के लिए खामोश हो जाता है लेकिन इस महीने की सबसे खूबसूरत बात यही है कि इसकी यादों में उदासी से कहीं ज्यादा खुशियाँ हैं इसलिए अक्टूबर का आना मेरे लिए सिर्फ कैलेंडर का एक पन्ना बदलना नहीं है,बल्कि जैसे पुराने दिनों का फिर से लौट आना है...!