बिल्कुल सही,,,
दूसरा किसान है कहाँ,, जहां देखो, जाट, गुज्जर, अहीर, सैनी, पंडित, चमार, कुम्हार, नाई जैसी जातियां तो नजर आती है किसान कहीं नजर नही आता।
जातियां भूल किसान और मजदूर को संगठित होना होगा वरना पूंजीपतियों और नेताओं से ऐसे ही शोषित होते रहेंगे।
रेलवे का निजीकरण होना दुर्भाग्यपूर्ण है कितनी मुश्किलों का सामना करके देश की सम्पत्ति बनती है और निजी लोगो के हाथों में देना कितना दुख होता है जिस तरह से अपने घर में बनाए समान को कोई और दूसरा ले जाए। #Stop_Railway_Privatization
गरीबो की सवारी अमीरो के हाथ ।
@PiyushGoyal