@anantvijay तुमसे बड़ा प्रचार का भूखा कौन है धरती पर ! हिसाब तो देना ही होगा l राम मन्दिर किसी की जागीर नहीं है l मंदिर पर इस देश के प्रत्येक 🕉 का अधिकार है l
राम जन्मभूमि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने परोक्ष रूप से मंदिर लूट के लिए चंपत राय को जिम्मेदार ठहरा दिया है।गोविंद गिरी का कहना है मैं तो पुणे में रहता हूं।अयोध्या में जो रहते हैं वो जानें।बैंक में मेरे हस्ताक्षर तक नहीं चलते।तो बैंक दस्तावेजों में हस्ताक्षर करने के लिए कौन अधिकृत था?
@amitmalviya@AlokKumarLIVE दान चोरी करने वाली जमात के इतनी मिर्ची क्यों लग रही है? राम मंदिर RSS ,BJP & VHP की निजी जागीर नहीं है l यह सकल हिन्दू समाज की सम्पत्ति है l इसलिए हर व्यक्ति को दान चोरों के खिलाफ बोलने का अधिकार है और बोलेंगे l
The Bombay High Court on Thursday (July 2) orally commented that "horse trading" was going on in the entire State of Maharashtra, and that a political leader can get the criminal cases against oneself closed by joining the "washing machine", in an oblique reference to the ruling party.
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"BJP मुर्दाबाद" कहने पर जिला बदर? — जज ने कहा: नागरिक गुलाम नहीं हैं
आज बॉम्बे हाईकोर्ट में कुछ असाधारण हुआ।
एक जज ने वह कहा — जो शायद ही कभी किसी अदालत ने इतनी साफगोई से कहा हो।
जस्टिस माधव जामदार ने कहा — "नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है। वे प्रदर्शन नहीं कर सकते, आंदोलन नहीं कर सकते — यह क्या है?"
मामला क्या था
Socialist Democratic Party of India के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी CAA और ज्ञानवापी विवाद के खिलाफ मोर्चे और धरने आयोजित कर रहे थे।
मुंबई पुलिस ने उन्हें एक साल के लिए जिला बदर कर दिया — पांच FIR के आधार पर जो ज़्यादातर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के लिए थीं।
जस्टिस जामदार ने यह आदेश देखा।
और आगबबूला हो गए।
जज ने जो कहा — वह इतिहास में दर्ज होगा
"याचिकाकर्ता ने तो सिर्फ 'BJP Government Murdabad', 'Amit Shah Murdabad' जैसे नारे लगाए। नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए जिला बदर आदेश क्यों?"
"पुलिस मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की सेवक नहीं है — वे जनसेवक हैं। मैं आपके अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाऊंगा।"
"अगर लोग विरोध करें तो आप केस थोप देंगे — यह क्या है? नागरिकों का प्रदर्शन करना उनका अधिकार है।"
और फिर — "वॉशिंग मशीन" वाली टिप्पणी
जस्टिस जामदार ने महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे "horse-trading" पर भी टिप्पणी की।
उन्होंने कहा — "एक 10 साल के बच्चे की दुर्घटना में मौत हो गई और राज्य विधानसभा में चर्चा हो रही थी कि Presiding Officer कैसे चुना जाए और वह एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कैसे shift हो गया। पूरे महाराष्ट्र में horse-trading चल रही है — केस बदलने पर विचार करें, वॉशिंग मशीन है।"
फैसला
जस्टिस जामदार ने अपने आदेश में लिखा — "सरकार के फैसलों का विरोध करने और उसके खिलाफ नारे लगाने मात्र से किसी नागरिक को जिला बदर नहीं किया जा सकता। यह कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण है और संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।"
जिला बदर आदेश रद्द।
यह फैसला इतना बड़ा क्यों है
आज के भारत में —
जहाँ असहमति को देशद्रोह कहा जाता है।
जहाँ विरोध प्रदर्शन पर UAPA लगाया जाता है।
जहाँ "BJP मुर्दाबाद" कहने पर जिला बदर किया जाता है।
एक जज ने खड़े होकर कहा — नागरिक गुलाम नहीं हैं।
पुलिस प्रधानमंत्री की नौकर नहीं है।
विरोध करना — अधिकार है।
यह फैसला नज़ीर है।
इसे शेयर करें।
क्योंकि जब अदालतें जागती हैं —
तो लोकतंत्र सांस लेता है।
- ज्ञानेंद्र अवस्थी जी की पोस्ट
अंधभक्तों तुम्हारे लिए एक ब्रेकिंग ख़बर है, पिछले तीस साल से राम मंदिर का हिसाब किताब यासिन अंसारी देखते थे, है ना ब्रेकिंग न्यूज़।
तुम्हारी बुद्धि तलवो मै है। 😎
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अयोध्या के रहने वाले यासिन अंसारी राम मंदिर आंदोलन और बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़े एक बेहद खास और दिलचस्प व्यक्ति रहे हैं।
उनके बारे में कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
राम चबूतरे की देखरेख और हिसाब-किताब: यासिन अंसारी के पूर्वज और वे स्वयं लंबे समय तक उस परिसर के 'राम चबूतरे' के सेवादारों (पुजारियों) के लिए आने वाले राशन, चढ़ावे और अन्य खर्चों का पूरा हिसाब-किताब रखते थे।
पीढ़ियों का रिश्ता: उनका परिवार पीढ़ियों से राम चबूतरे के निर्मोही अखाड़े के साधु-संतों से जुड़ा रहा। उनके पिता और दादा भी मंदिर के साधुओं के लिए सामान लाने और वित्तीय लेखा-जोखा संभालने का काम करते थे।
सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल: एक मुस्लिम होते हुए भी हिंदू धर्मस्थल और वहां के संतों के साथ उनका यह जुड़ाव अयोध्या की साझी संस्कृति और आपसी भाईचारे (गंगा-जमुनी तहजीब) का एक बेहतरीन उदाहरण माना जाता है।
अब चुल्लु भर पानी मै डूब मरो चंदाचोरो।
@umashankarsingh@nitin_gadkari@AjitSinghRathi लेकिन साथ यह भी कह रहे हैं कि सिर्फ पेट्रोल की गाडियों का भी एवरेज जो बताते हैं उतना नहीं होता l क्योंकि यह गाड़ी चलाने की व्यक्तिगत आदतों पर निर्भर करता है l यह तो एथेनॉल के 30 % एवरेज कम देने के बाद भी इस्तेमाल को जायज ठहरा रहे हैं l
@MuditUpdates राष्ट्र सेवा नहीं बल्कि संघ सेवा कर रहे थे श्रीमान l इनकी सेवा सिर्फ और सिर्फ संघ के लिए रही है वो भी एक सीमित दायरे में l इसलिए ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है l