अकल्पनीय... अविश्वसनीय... अलौकिक 🔱
25 दिन से निरंतर साधना, रोज 20 से 27 घंटे एक ही आसन पर बैठना, बिना पर्याप्त अन्न-जल के...
और फिर इतनी भारी मात्रा में भस्मवर्षा करना!
ये मनुष्य के बस की बात नहीं है, ये तो स्वयं महादेव ही अपने भक्त से करा सकते हैं 🙏
पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी जी महाराज - आप साक्षात शिव स्वरूप हैं।
दर्शन कर के कमेंट में लिखें - हर हर महादेव 🕉️
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#Mahadev #ShivBhakti #Haridwar
संपादक तो आते और जाते रहेंगे, पर जिस प्यार मोहब्बत से आपने काशी को जिया है, वो ताउम्र मुझे याद है और रहेगा।
ड्यूटी हॉर्स के बाद घाटों के जीवन को महसूस करना, बनारसियों के मस्ती को दिल ❤️ से उनके ख़ुशी में रहना, ये सब कभी और किसी संपादक ने नहीं किया।
काशी आपको अपना चुका है।
काशी आए, यहां अपना पता जुटाए आज 1095 दिन यानी तीन साल पूरे हो गए। अब ये शहर मेरी जरूरत, सोहबत और लत तीनों है। ये लोबान की गश्त भी है और देसी घी के दिए की लौ भी।
घाट की सीढ़ियों पर इतवार का इत्मिनान लिए मैंने इसकी तमाम कहानियां सुनी हैं। गंगा, घाट गलियों में तुरपी यादों की थप्पियां मेरे जहन में घटस्थापना का दर्जा ले चुकी हैं। दोहे चौपाई से सने इसके घाट और सोकर उठी सिलवटों सी लहरों को अपनी धमनियों में महसूस करना सीख लिया है।
काशी तुम सचमुच खुद को दी हुई थपकियों सा दुलार हो। तुम्हारी ऑक्सीजन में वक्त बिताने का गुरूर मुझे मणिकर्णिका की राख हो जाने तक रहेगा। ❤️
#Kashi #AmarUjala #Milestone
सिजेरियन के बाद सिडक्टिव्स के नशे में पहली आवाज जो मेरे कानों में पड़ी थी वो राष्ट्रगान थी। वही आवाज शायद अदिवन के लिए भी पहले शब्द और सुर थे। बचपन से आर्मी और यूनिफॉर्म की जो दीवानगी थी उसी का सुरूर था कि मैंने उसी दिन तय किया था, आदू को हर बर्थडे पर किसी परमवीर चक्र के परिवार से मिलने ले जाऊंगी।
इस बार पांचवा मौका था जब अदिवन को अपने बर्थडे के दिन परमवीर चक्र को हथेलियों पर रखने और उंगलियों के पोरों से उसके कोनों पर उकेरे नाम को छूने का मौका मिला। उस दहलीज पर पैर धरने का सौख्य, जहां वो वीर पैदा हुआ जिसे देश का सर्वोच्च वीरता सम्मान, परमवीर चक्र मिला।
हम भोपाल और काशी दोनों जगहों से 1000 किमी दूर लुधियाना पहुंचे, फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों के घर।
सीजफायर से ठीक दो दिन पहले, 14 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी विमानों ने श्रीनगर एयरबेस पर हमले की फिराक में उड़ान भरी थी। फ्लाइंग ऑफिसर सेखों ने दुश्मन के 6 सबरे विमानों का अपने एक साथी के साथ 2 जीनेट फाइटर से मुकाबला किया। अदम्य साहस दिखाते हुए हमले के बीच उन्होंने उड़ने का फैसला किया।पाकिस्तान के एक विमान को मार गिराया और दूसरे को आग से हवाले कर दिया।
मौत निश्चित थी। पर वो रुके नहीं। उनका विमान दुश्मन के हमले में क्रैश हो गया। पैराशूट के जरिए वो जंगल में कहीं एयरड्रॉप की कोशिश में कूद पड़े। पैरा नहीं खुला और सिर पर गहरी चोट के कारण वो नहीं बचे।
उनका कद काफी ऊंचा था। और तब के वक्त फाइटर प्लेन बहुत छोटे होते थे। वो बमुश्किल फिट आ पाते थे। पग में उनका जूड़ा हाइट और लंबी कर देता था इसलिए उन्होंने बाल कटवा दिए। धर्म से पहले देश के खातिर।
जब दुश्मन के हमले के बाद कश्मीर के जंगल में वो गिरे तो एक बूढ़ी औरत ने उन्हें सबसे पहले देखा था। अपनी गोद में उनका सिर रख उन्हें काफी वक्त तक सहलाया। एक साल बाद फ्लाइंग ऑफिसर सेखों की मां उस जगह पर इस बूढ़ी औरत से मिलने भी गईं थीं। तब शहीदों के शव घर नहीं भेजे जाते थे। जहां शहीद होते वहीं अंतिम संस्कार किया जाता था। बुरी खबर भी कई दिन बाद घर आती थी। जब वो शहीद हुए तो कुछ दिन बाद होशियारपुर एयरबेस से लोग उनके घर ये मनहूस खबर लेकर पहुंचे थे। और एक साल बाद उनकी मां के हवाले वीर बेटे की अस्थियां एयरफोर्स ने सौंपी थीं। उनकी मां कहतीं थीं, वो इतना मजबूत थे कि घाव होता, चोट लगती थी तो उस पर दवा की जगह मिट्टी लगा देते थे।
तस्वीर उनके लुधियाना वाले घर की है। साथ में फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों की भाभी हैं। उनकी शादी निर्मलजीत सिंह सेखों की शादी के अगले दिन हुई थी। और शादी के बमुश्किल आठ महीने बाद उन्हें वीरगति मिली। सेखों के दादा, पिता और भाई तीनों एयरफोर्स में थे।
21 परमवीर चक्र हासिल करनेवाले योद्धाओं में वो देश के इकलौते एयरफोर्स ऑफिसर हैं।
#Adivan #ParamVeerChakra #FlyingOfficer #nirmaljeetsekhon
"पंडित जी लोग दलितों को खाट पर नहीं बैठने देते थे, उनके साथ अत्याचार करते थे"-पता नहीं, कहाँ-कहाँ से ऐसी झूठी कहानियाँ बनाई गईं।
एक दलित वाल्मीकि रामायण लिखता है, जिसमें एक क्षत्रिय राजा की कहानी है, जो आदिवासियों को साथ लेकर एक ब्राह्मण राजा का वध करता है और इस कहानी को ब्राह्मण घर-घर जाकर सुनाते हैं, क्षत्राणी मीराबाई के के गुरु जूता गाँठने वाले रविदास हैं, क्षत्रिय राम दलितों के जूठे बेर खा रहे हैं।
ऐसा समाज रहा है हमारा, लेकिन उसके बाद एक नई "कौम" ने जन्म लिया"-"अंबेडकरवादी", और इन्होंने पूरे समाज की ऐसी-तैसी कर दी।
बबली घर के कामों में मेरी मदद करती हैं। उनका कॉन्फिडेंस, मेहनत और इंटेलिजेंस काबिले तारीफ है।
खबरों को लेकर जो समझ और अवेयरनेस है उस सुनकर मैं कई बार हैरान हो जाती हूं।
इस वीडियो में वो कुछ महीने पहले तमिलनाडु वाली एक घटना के बारे में बता रहीं थीं। बबली की तीन बेटियां हैं, वो बेटियों की सुरक्षा को लेकर काफी अग्रेसिव रहती है।
मुझसे हर सुबह ये जरूर पूछती है कि दीदी आपके अखबार में आज क्या छपा है? फिर तमाम खबरों की खबर लेती है। अपने घर कंदवा पोखरी से लेकर जौनपुर, बिहार, दिल्ली मुंबई और ट्रंप तक की बतकही उसके पास होती है।
#Tamilnadu #Varanasi #ViralVideo
जिसके पास मर्सिडीज़ है बस उसके नाम के आगे दलित लग गया तो वो गरीब है
मेरे पिता किसान है - बस मै सवर्ण समाज से हु इसलिए मैं अमीर हु
आरक्षण के खिलाफ मोर्चा खुल चुका है - हर्ष दुबे के द्वारा अब देखते हैं सवर्ण समाज कितनी अपने बच्चों की चिंता करता है
40% हमारी आबादी देश के सबसे बड़े टैक्स पेयर्स हमारे लोग और हम ही गुलाम हैं
गुलाम ही हैं - 50% सीटो पर हम बैठ ही नहीं सकते हमे अधिकार ही नहीं है ये गुलामी नहीं तो क्या है ?
#EndReservation