1. आज श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा अति-देर से उठाया गया यह सही क़दम है।
2. वैसे लोगों का यही कहना है कि अगर यह फैसला वे काफी पहले ही ले लेते तो बी.एस.पी., बहुजन समाज व बहुजन मूवमेन्ट तथा उनके दामाद श्री आकाश आनन्द को भी लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता और ना ही मुझे विधानसभा आमचुनाव एवं ख़ासकर यूपी में पाँचवीं बार सरकार बनाने की ज़बरदस्त तैयारियों के बीच, पार्टी व मूवमेन्ट के व्यापक हित के मद्देनज़र इनके बारे में कई बार कड़े फैसले लेने आदि की ज़रूरत पड़ती।
3. वैसे यह भी सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी की अम्बेडकरवादी राजनीति की परम्परा, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के पदचिन्हों पर चलने वाली ज़बरदस्त त्याग, तपस्या, संघर्ष व कुर्बानी आदि के साथ-साथ सबसे बढ़कर निजी व पारिवारिक स्वार्थ से दूर रहने की विशिष्ठ पहचान की है, जिसे मान्यवर श्री कांशीराम जी की तरह ही मैं भी समर्पित हूँ और जिससे पार्टी के सभी लोगों को ज़रूर सबक़ सीखकर बी.एस.पी. में आगे बढ़ाने के लिये निजी व पारिवारिक स्वार्थ एवं पद आदि की लालसा से ऊपर उठना चाहिये तभी फिर यहाँ सदियों से शोषित, पीड़ित, उपेक्षित व तिरस्कृत ’बहुजन समाज’ ’शासक वर्ग’ बन पायेगा और इस क्रम में हमेशा याद रहे कि जितना महान लक्ष्य, उतनी ही बड़ी कुर्बानी की भी ज़रूरत होती है।
4. कुल मिलाकर, श्री अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास लेने का फैसला ’देर आये दुरुस्त आये’ की कहावत की तरह ही यह अच्छी बात है।
5. किन्तु श्री अशोक सिद्धार्थ को, अपने दामाद श्री आकाश आनन्द के उज्जवल भविष्य के साथ ही बी.एस.पी. पार्टी व इसके अम्बेडकरवादी बहुजन मूवमेन्ट के व्यापक हित के प्रति थोड़ी भी सही चिन्ता होती, (जो कि उनमें स्वाभाविक तौर पर होनी ही चाहिये), तो वे बिना देरी किये कल फ़ौरन ही राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर देते और जिससे श्री आकाश आनन्द की पार्टी व मूवमेन्ट के प्रति सक्रियता काफी हद तक सुनिश्चित हो सकती थी, किन्तु ऐसा कुछ नहीं होना यह साबित करता है कि श्री अशोक सिद्धार्थ की नीयत में खोट व अभिलाषा कम नहीं हुई है बल्कि अभी तक भी पूरी तरह से बरक़रार है।
6. इतना ही नहीं बल्कि श्री आकाश आनन्द द्वारा भी अपने कैरियर से अधिक अपने ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ के प्रति इस हद तक लगाव क़ायम है कि उन्होंने बी.एस.पी प्रमुख के सोशल मीडिया एकाउण्ट ’एक्स’ पर तत्सम्बंधी पोस्ट को रिपोस्ट करना भी उचित नहीं समझा, हालाँकि यह पोस्ट उनके ही सकारातमक व भलाई के लिये था।
7. जबकि इससे पहले वे बी.एस.पी. प्रमुख के ’एक्स’ पर पोस्ट को रिपोस्ट करके अपनी वफादारी का सबूत देने का प्रयास करते रहे हैं। इससे भी यही लगता है कि श्री अशोक सिद्धार्थ व श्री आकाश आनन्द दोनों को पार्टी व मूवमेन्ट की सफलता में कम व अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ का ज़्यादा मोह है, जबकि बी.एस.पी. ने ही इन दोनों को व अन्य अनेकों लोगों को भी फर्श (ज़मीन) से अर्श (आसमान) की बुलन्दी पर पहुँचाया है और जिसके लिये उन सभी लोगों द्वारा बी.एस.पी. व उसके नेतृत्व का जितना भी वे लोग अहसान मानें व शुक्रगुज़ार हों, वह कम ही होगा, ऐसा सभी लोगों का मानना है।
8. ऐसे हालात में श्री आकाश आनन्द को पार्टी व मूवमेन्ट के वास्तविक हित तथा इससे जुड़े अपने कैरियर की भी परवाह कम तथा रिश्ते-नातों आदि का मोह ज़्यादा है तो ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि श्री आकाश आनन्द डबल माइण्ड होकर फिर बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट का भला कैसे कर सकते हैं?
9. इसीलिये पार्टी के लोगों को यही बेहतर लगता है कि उन्हें पहले दिनांक 3 सितम्बर 2026 को जिस प्रकार से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के अति-महत्वपूर्ण पद की सभी अहम ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, उसी प्रकार अब उन्हें पार्टी में भी आज से पूरी तरह से फ्री (आज़ाद) कर दिया जाये। अतः श्री आकाश आनन्द पार्टी में अब स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं अर्थात ऐेस में अब इनको पार्टी से पूरेतौर से मुक्त कर दिया गया है।
10. अन्त में यही कहना है कि बी.एस.पी के सभी लोगों को, विरोधियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि सभी प्रकार के हथकण्डों का डट कर सामना करते हुये ख़ासकर यूपी में फिर से पूर्ण बहमत की अपनी ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की ज़बरदस्त क़ानून-व्यवस्था व बेहतरीन विकास वाली आयरन हुकूमत बनाने के संघर्ष में, पूरे जी-जान से अर्थात पूरे तन, मन, धन की लगन से लगे रहें, बस यही लक्ष्य सर्वोपरि है।
“मैंने श्री आकाश आनन्द को पार्टी में कार्य करने की तो इनको इजाज़त दी है, जो हक़ीकत आप सभी लोगों के सामने है, लेकिन इस मामले में श्री आकाश आनन्द को अभी और अधिक परिपक्व/मैच्योर होने की जरुरत है। तब तक इनको पार्टी की अभी बड़ी ज़िम्मेवारी देना उचित नहीं होगा”
~ आदरणीय बहन जी
BSP यदि शून्य प्रतिशत वोट और शून्य सीट भी लाती है, तब भी मैं BSP के साथ रहूँगा। BSP बहुजन समाज को जो देती है, वह दूसरी पार्टियाँ लाख कोशिश करने के बाद भी नहीं दे सकतीं।
हमारे बाप-दादाओं के पास कोई सत्ता या राज-पाट नहीं था। न हम कोई नवाब थे कि शून्य हो जाने पर हमारे पास से कुछ चला जाएगा।
खोने के लिए जिनके पास कुछ नहीं है, उनके पास पाने के लिए सब कुछ है।
इसलिए चुनाव की तैयारी कीजिए। 2027 में सरकार बनानी है।
बी.एस.पी. द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति-दिनांक 03.09.2026
(1) बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन कु. मायावती जी द्वारा आज बी.एस.पी. की आल-इण्डिया की हुई बैठक में पार्टी व मूवमेन्ट से सम्बन्धित पिछले दिये गये कार्यो की समीक्षा व कमियों को दूर करने तथा आगे के हर वर्ष सालाना होने वाले कार्यों के बारे में भी पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को दिये गये ज़रुरी दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी व निष्ठा से अनुपालन करने की सख़्त हिदयात।
(2)वैसे भी पार्टी के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी के त्याग, तपस्या व समर्पण की तरह ही, मेरे लिये भी ’बहुजन समाज’ का हित, कल्याण व उसकी अस्मिता अर्थात बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट द्वारा ’शोषित वर्ग को शासक वर्ग’ बनाने का मिशनरी लक्ष्य सर्वोपरि है जिसके लिए सत्ता भी ज़रूरी।
(3)इसके अलावा, आर.एस.एस. (RSS) प्रमुख श्री मोहन भागवत के अमेरिका दौरे में कही गयी बातों का भी संज्ञान लेते हुये बहन कु. मायावती जी ने कहा कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने जातिवाद व असमानता आदि के विरुद्ध आजीवन कड़े संघर्षों के बल पर एससी, एसटी व ओबीसी समाज के
(4)अर्थात् ’बहुजन समाज’ के करोड़ों लोगों के आत्म-सम्मान तथा उनके वास्तविक हित, कल्याण व उनके लिये आरक्षण के संवैधानिक अधिकार के साथ-साथ मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के जान, माल एवं मज़हब की सुरक्षा तथा महिलाओं आदि के मामलों में भी आरएसएस की कथनी व करनी में ज़मीन-आसमान का भारी अन्तर होने से उनमें विश्वसनीयता का अभाव है। अतः आरएसएस, बाबा साहेब के मानवतावादी व समतामूलक संविधान पर खुद ईमानदारी व निष्ठा से अमल करे और अपने लोगों पर उसपर अमल भी कराये, यही पूरी तरह से देश व जनहित में होगा।
(5)साथ ही, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने देश व दुनिया के ज्वलन्त मुद्दों पर भी पार्टी के लोगों का ध्यान आकृर्षित कराया।
लखनऊ, 03 सितम्बर 2026, वृहस्पतिवार: बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की चार बार रहीं मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद तथा ’बहुजन समाज’ के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान की प्रतीक बहन कु. मायावती जी द्वारा आज बी.एस.पी. की आल-इण्डिया की हुई बैठक में पिछले दिये गये कार्यो की समीक्षा व उनकी कमियों को दूर करने तथा आगे के हर वर्ष के सालाना होने वाले कार्यों के बारे में भी पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को दिये गये ज़रूरी दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ अनुपालन करने की भी सख़्त हिदायत दी गयी।
इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा कि बी.एस.पी., परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के आदर्श सिद्धान्तों व उच्च आदर्शों को लेकर चलने वाली उनके ’आत्म-सम्मान व स्वाभिमान’ के कारवाँ को सत्ता की मंज़िल तक पहुँचाने के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु समर्पित पार्टी एवं मूवमेन्ट है, जिसको लेकर मान्यवर श्री कांशीराम जी ने उच्च वैज्ञानिक पद की अपनी सरकारी नौकरी भी छोड़ दी थी।
और फिर अपने माँ-बाप का घर, परिवार, रिश्तों-नातों आदि ये सब कुछ त्यागकर अपना पूरा जीवन कड़ा संघर्ष करते रहे और मुझे भी ख़ासकर शोषितों को जागरुक करने के लिए देश के कोने-कोने में भेजकर इस योग्य बनाया कि मैं, उन्हीं के नक्शेक़दम पर चलते हुये, उनके अधूरे रहे कारवाँ को आगे बढ़ाने की पूरी त्याग व तपस्या में लगी रहूँ और अन्ततः उन्होंने मुझे बी.एस.पी. पार्टी व बहुजन मूवमेन्ट का राजनीतिक उत्तराधिकारी भी बनाया। और मैंने भी उनके जीते-जी ही काफी हद तक अच्छा रिज़ल्ट लाकर भी दिखाया है और उनके संघर्ष को विनम्र श्रद्धांजलि के रूप में यूपी में पूर्ण बहुमत की बी.एस.पी. सरकार बनाकर बहुजन मूवमेन्ट के मान-सम्मान को ऐतिहासिक व गौरवशाली भी बनाया है, जो सबकी ज़ुबान पर होने के साथ-साथ तथा यहाँ इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में भी दर्ज है।
इसके साथ ही, आदरणीया बहन कु. मायावती जी ने यह भी बताया कि बहुजन समाज पार्टी के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी के संकल्प व समर्पण की तरह ही, मेरे लिये भी ’बहुजन समाज’ का हित, कल्याण व उसकी अस्मिता अर्थात् बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट द्वारा ’शोषित वर्ग को शासक वर्ग’ बनाने का मिशनरी लक्ष्य सर्वोपरि है और इस महान लक्ष्य की प्राप्ति के लिये निजी तौर पर मेरा ना तो कोई अपना है और ना ही पराया। जो भी बी.एस.पी व बहुजनों के हित के काम करेगा उसका स्वागत व आभार भी है।
और इसीलिये जिस प्रकार मान्यवर श्री कांशीराम जी ने अपने परिवार के लोगों व अन्य रिश्तों-नातों आदि को पार्टी कार्य में सहयोग करने की छूट तो दे दी थी, किन्तु उन्हंे चुनाव लड़ाने या सरकार बनने पर कोई भी पद आदि देने के वे खिलाफ थे, उसी प्रकार से उस संकल्प पर मैं भी पूरी तरह से क़ायम हूँ। जिस पर अमल करते हुये ही मैंने श्री आकाश आनन्द को पार्टी में कार्य करने की तो इनको इजाज़त दी है, जो हक़ीकत आप सभी लोगों के सामने है, लेकिन इस मामले में श्री आकाश आनन्द को अभी और अधिक परिपक्व/मैच्योर होने की जरुरत है। तब तक इनको पार्टी की अभी बड़ी ज़िम्मेवारी देना उचित नहीं होगा, जो कि विरोधियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों को इस्तेमाल करके चुनाव में हानि पहुँचाने से बचने के लिये भी समय की ज़रूरत है।
बी.एस.पी. यूपी स्टेट कार्यालय में आयोजित इस आल-इण्डिया की बैठक को सम्बोधित करने से पहले मा. बहनजी ने बी.एस.पी. सेन्ट्रल कैम्प कार्यालय में विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ पदाधिकारियों व अन्य ज़िम्मेदार लोगों से राज्यवार समीक्षा बैठक की और उनसे उनके राज्यों में पार्टी संगठन की मज़बूती एवं पार्टी के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के बारे में पिछली आल-इण्डिया की हुई बैठक में दिये गये दिशा-निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट ली और उल्लेखित कमियों को समयबद्ध तरीके़ से दूर करने की भी हिदयात दी। ख़ासकर यूपी, उत्तराखण्ड व पंजाब में ये कार्य चुनाव की घोषणा से काफी पहले ही पूरा करने के भी जरुरी निर्देश मा. बहनजी ने पार्टी के लोगों को दिये, जिसके लिए उन्होंने 25 अगस्त को पंजाब स्टेट की व 31 अगस्त को उत्तर प्रदेश स्टेट की अलग से पार्टी की बड़ी बैठक भी बुलाई, जिसकी जानकारी मीडिया बन्धुओं को भी है।
इसके साथ ही, बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी की अगले महीने दिनांक 9 अक्तूबर को पुण्यतिथि के अवसर पर यूपी मंे प्रदेश स्तर पर तथा बाकी राज्यों में ज़ोन-स्तर पर ’खुली संगोष्ठी के कार्यक्रम’ पूरी मिशनरी भावना से आयोजित करने के निर्देश देते हुये कहा कि इन कार्यक्रमों को बी.एस.पी. के प्रदेश व मुख्य ज़ोन प्रभारी आदि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि बी.एस.पी. दिल्ली प्रदेश के सभी लोग नई दिल्ली गुरुद्वारा रकाबगंज रोड पर स्थित ’बहुजन समाज प्रेरणा स्थल’, जहाँ मान्यवर श्री कांशीराम जी की अस्थिकलश प्रतिष्ठापित है, वहाँ पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे।
इसके अलावा, यूपी-दिल्ली सीमा पर बी.एस.पी. सरकार द्वारा स्थापित भव्य ’बहुजन प्रेरणा केन्द्र’ में रख-रखाव का वर्तमान में सरकारी कार्य चलने के कारण इस वर्ष पश्चिमी यूपी के लोग भी, यूपी के बाकी सभी मण्डलांे के लोगों के साथ ही लखनऊ आकर यहाँ वीआईपी रोड पर, वहाँ ’बौद्ध स्मृति उपवन’ के सामने, बी.एस.पी. सरकार द्वारा स्थापित विशाल गुम्बद आकार के भव्य ’मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल’ पर अपनी विनम्र श्रद्धांजलि एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे, जिस कार्यक्रम को पूरी मिशनरी भावना से सफल बनाना है। इसके साथ-साथ हर वर्ष की तरह बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष के जन्मदिन के मौके पर पार्टी को आर्थिक सहयोग देने के लिए भी ज़रूरी दिशा-निर्देश दिये गये, जिस पर पार्टी के लोगों ने अपनी सहमति भी जताई।
इसके अलावा, आरएसएस प्रमुख श्री मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान भारत की अनेकता में एकता आदि सम्बंधी कही गयी बातों का संज्ञान लेते हुये बहन कु. मायावती जी ने कहा कि भारत में ख़ासकर जातिवाद व असमानता तथा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अथक संघर्षों से एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों के अर्थात देश में ’बहुजन समाज’ के करोड़ों लोगों के वास्तविक हित, कल्याण और उनके आरक्षण के संवैधानिक अधिकार के साथ-साथ महिलाओं, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के जान, माल व मज़हब की सुरक्षा-सम्मान आदि के मामलों में आरएसएस की कथनी व करनी में ज़मीन-आसमान का भारी अन्तर होने के कारण ही उनमें विश्वसनीयता का अभाव है तथा यह संगठन काफी पुराना होने के बावजूद वह मान्यता/सम्मान अर्जित नहीं कर पाया है जो वे चाहते हैं।
इसीलिये आरएसएस के लोग, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी, कल्याणकारी व समतामूलक संविधान में अपनी पूरी आस्था व निष्ठा रखते हुये उस पर खुद ईमानदारी से अमल करें और उसी के हिसाब से अपने लोगों को उस पर अमल करने को बाध्य भी करें तो यह पूरी तरह से देश व जनहित में होगा और देश अवश्य ही अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी, अशिक्षा को दूर करके विकास की ओर तेज़ी से अग्रसर होगा जो कि संविधान का मुख्य उद्देश्य भी है और जिसके लिये बी.एस.पी. की स्थापना की गयी है और सरकार में रहते हुये व सरकार में नहीं रहने पर भी लगातार संघर्षरत है, और यही देश की जातिवादी व जनविरोधी पार्टियों के खिलाफ बी.एस.पी. की अम्बेडकरवादी पहचान है।
जबकि अन्य पार्टियों की तरह कांग्रेस पार्टी तो हर मामले में जबरदस्त दलित व अम्बेडकर विरोधी पार्टी है, जिसका इतिहास किसी से छिपा नहीं है। ऐसी स्थिति में अब पार्टी ने पूरे देश में सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले ही लड़ने का फैसला लिया है।
इसके साथ ही, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इस समय दुनिया के कई भागों में जारी जंग तथा उसके फलस्वरूप तेज़ी से बदलते हुये संगीन हालात व सुरक्षा उपायों आदि में भी भारत की अपनी नीति/रणनीति मज़बूत होनी चाहिये।
और अब फिर से देश में आएदिन बढ़ रही महंगाई व कुदरती हो रही मार भी काफी चिन्ताजनक है। साथ ही, वर्तमान में जेन-जी (Gen-Z) व जेन-अल्फा (Gen-Alpha) आदि की भी चल रही गम्भीर समस्याओं को दूर करना बहुत ज़रूरी है। राज्यों के साथ-साथ खासकर केन्द्र सरकार भी इन सब मामलों को ज़रूर गम्भीरता सेे ले, तो यह देश व जनहित में उचित होगा।
जारीकर्ता:
बी.एस.पी. यूपी स्टेट कार्यालय
12 माल एवेन्यू,
लखनऊ-226001
1. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अगले छह महीने में (अर्थात विधानसभा आमचुनाव तक) एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा हालाँकि विलम्ब से उठाया गया सही किन्तु चुनावी क़दम ज़्यादा लगता है, फिर भी वे नियुक्तियाँ पेपरलीक व भ्रष्टाचार आदि के अभिशाप से मुक्त समय से पूरा हो जायें तो यह सही होगा ताकि यह चुनावी छलावा ना साबित हों, जबकि इसके साथ ही एससी, एसटी व ओबीसी समाज के आरक्षित पदों के बैकलाग पर भर्तियों के बारे में भी सरकारी घोषणा की लोगों को उत्सुकता से प्रतीक्षा है।
2. इतना ही नहीं बल्कि यहाँ 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण के नियमों को लेकर इन वर्गों के 6,800 अभ्यार्थी अपनी नियुक्ति के लिये भूखे-प्यासे लगातार आन्दोलनरत हैं, उनके बारे में भी सरकार को पूरी सहानुभूतिपूर्वक ज़रूर सोचना चाहिये, क्योंकि उन्हें वास्तविक राहत सरकार ही दे सकती है।
3. इसके साथ ही, बी.एस.पी. यूपी सहित पूरे देश भर में स्कूली शिक्षा की बदहाल व्यवस्था को समुचित तौर पर बेहतर बनाने की माँग लगातार करती रहती है, किन्तु संभवतः ’जेन-जी’ व ’जेन-अल्फा’ के दबाव में जो थोड़ी अनचाही हलचल सरकारी स्तर पर देखने को मिल रही है वह मामूली ही सही परन्तु स्कूली शिक्षा में सुधार करने की सही नीयत से हो तो यह उचित होगा और इस क्रम में यहाँ लगभग 30 हज़ार जो सरकारी स्कूल बंद कर दिये गये हैं उन्हें दोबारा अच्छे तरीके से सक्रिय करने की व्यवस्था सरकार अविलम्ब करे तो यह भी जनहित में होगा।
4. इसके अलावा, बुजुर्ग महिलाओं को बसों में निशुल्क यात्रा आदि की व्यवस्था से कहीं अधिक महिलाओं को हर क्षेत्र में शोषण, अत्याचार, उत्पीड़न आदि से बचाने के साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान व आत्मनिर्भरता के बारे में भी सरकारों को सही नीयत व नीति से कार्य करने की ज़रूरत है।
आज दिनांक 14 अगस्त 2026 को हम सबकी आदर्श त्यागी जन नेता परम आदरणीया बहन कुमारी मायावती जी के द्वारा जारी किया गया अति महत्वपूर्ण ट्वीट _सादर सहित जय भीम 🙏
हम भारत के लोग कल दिनांक15अगस्त 2026 को 80 वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं।इस हर्षोल्लास के बीच एक सवाल चीख चीखकर जन मानस के अंतःकरण को झकझोर रहा है कि आजाद भारत में भी अनुसूचित जातियों/जनजातियों के प्रति ऊंचनीच,भेदभाव,अस्पृश्यता व असमानता का भाव क्यों.? क्या यह आजादी है या सत्ता का हस्तांतरण?मल्लिकार्जुन खड़गे का यह अपमान संसद में बैठे131scst सांसदों के गाल पर करारा तमाचा है।
यही131scst सांसद अगर चाहें तो देश से scst विरोधी विचारधारा को पल भर में उखाड़कर फेंक दें,मगर अफसोस कि ये सभी सर्कस के शेर बने हुए हैं,लानत है ऐसे कायर सांसदों/जनप्रतिनिधियों पर,जो scst समाज के जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के खिलाफ एकजुटता नहीं दिखा पाते,पूरे देश में सिर्फ बहनजी ही scst समाज और उसके अधिकारों की ढाल बनी हुई,पर ये कायर बहनजी को मिशन से भटका हुआ कहकर समाज को उन लोगो के लिए बरगलाते है जिनके लिए दरी बिछाते है।बसपा को बी टीम का तमगा देने के लिये तो एकजुट हो जाते है पर समाज के साथ हो रहे अमानवीय कृत्यों,जातिगत उत्पीड़न पर मुह पर टेप इस डर से लगाये लगाए रहते है कि इनका मालिक इनका राशन पानी न बंद कर दे....बसपा ही समाज को सुरक्षित रखने का विकल्प है।
प्रश्न : बाबा लोग एकाएक बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर को क्यो टारगेट कर रहे है?
उत्तर : क्योंकि ओबीसी समाज को उनकी जनसँख्यानुसार आरक्षण व सुविधाओ की माँग के प्रति तेज होती आवाज के कारण।
बस यह सिंपल सा कारण है। इसके अलावा और कुछ नही। क्योंकि;
"बाबाओं और उनके समर्थकों को लगता है की शुद्र अथार्त वर्तमान की ओबीसी जातिया मनुस्मृति के अनुसार आराम से हाथ जोड़कर उन्हें महाराज कहकर उनकी श्रेष्ठता स्वीकार कर रही थी। उन्हें अपने अधिकारों से मतलब नही था। सभी कुछ मनुस्मृति के अनुसार चल रहा था। लेकिन डॉक्टर अम्बेडकर के कारण शुद्र अथार्त ओबीसी को एहसास हुआ और उसने मनुस्मृति में उनकी श्रेष्ठता को मानने से विद्रोह कर दिया और हिस्सेदारी, समानता, मानव अधिकारों की मांग कर रहे है"
यह ही कारण है कि बाबा लोगो के निशाने पर बाबा साहब डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर सबसे ज्यादा है।
अनुसुचित जाति व जनजाति ओबीसी के अधिकारों का साथ दे रही है, इसलिए यह जातिया भी निशाने पर है। वास्तव में इसे ज्यादा दिन रोका नही जा सकता। बाबा लोगो को इसे स्वीकार कर लेना चाहिए कि वर्तमान इतिहास में वापस नही जाएगा। ओबीसी को उनके अधिकार देने ही पड़ेंगे।
जब जातिया है तो जातियो का सरकारी संसाधनों में प्रतिनिधित्व भी होगा ही। उसे रोका नही जा सकता है।
विकास कुमार जाटव
@Mayawati@AnandAkash_BSP
राहुल गांधी के खुलासे को किसने दबाया ?
अगर 2014 से पहले ऐसा खुलासा होता तो 10 मिनट में PM का इस्तीफा हो जाता?
शायद..
राहुल जी के चुनाव आयोग पर ख़ुलासा के बाद ग़ुलाम भक्तों को मिर्ची लगी हुई है और गोदी मीडिया को भी।
#VoteChori#VoteChor
लखनऊ में डॉ अम्बेडकर पार्क (सामाजिक परिवर्तन स्थल) का काम अपने आखरी चरण में था, उद्घाटन की तारीख नजदीक थी ,
तत्कालीन मुख्यमंत्री मां• मायावती जी पल-पल की अपडेट उच्चाधिकारियों से ले रही थी, तभी वहां कुछ लोग आए जो वहां फर्नीचर संबंधी काम देख रहे थे।
डॉ अम्बेडकर पार्क के विजिटर ऑफिस में कुछ सोफे वगैरह डालने थे।
उन्होंने फाइल नुमा कई बुकलेट बहन जी को दिखाई और बताए कि बहन जी यह एक सोफा 10000 हजार रुपए का है, यह दूसरा सोफा 15000 रुपए का है और ये 25000 रुपए का है।
बहन जी उस व्यक्ति को ऊंची आवाज में कहा कि सबसे अच्छा और महंगा सोफा इस विजिटर ऑफिस में डालना चाहिए मैं खुद आकर देखूंगी।
यहां मेरे बहुजन समाज के लोग आकर बैठेंगे।
बहन जी ने जिन आम लोगों को एक सामाजिक स्थल में लाखों के सोफे पर बिठा दिया, आज उसी समाज के बहके हुए लोग कान पकड़कर थाना परिसर में बैठे हैं।
मान्यवर साहब जिस समाज को हुक्मरान बनाना चाहते थे उसी समाज को कुछ बहरूपिए लोगों ने कान पकड़वाकर थाना परिसर में बिठा दिया।
कितना शर्मनाक दृश्य है.
@Mayawati ji
@AnandAkash_BSP@BhimArmyChief
आदरणीया बहन कु. मायावती जी ने आज से ग्यारह माह पूर्व ही कह दिया था कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्गों के लिए 'आपातकाल की स्थिति' है,उन्हें अब एकजुट हो जाना चाहिए।
बीएसपी शासन = ''कानून द्वारा कानून का राज''
एक तरफ बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्षा आदरणीया बहन जी हैं,जो खुद की पार्टी के गलत छवि वाले नेताओं को मुख्यमंत्री आवास बुलाकर पुलिस के हवाले कर देती हैं,वहीं दूसरी ओर भाजपा है जो खुद की पार्टी गलत छवि वाले नेताओं को बचाती है।
“मायावती ने किया ही क्या है हमारे लिए.?”कितनी आसानी से यह कह देते हैं कुछ नौसिखिए।मुझे लोग तब भी पूछते थे और आज भी पूछते हैं—तुमने बसपा ही क्यों चुनी.?कुछ का तर्क होता है कि आजाद समाज पार्टी अब ज़्यादा प्रभावशाली हो रही है।फिर सवाल उठता है—फिर क्यों बीएसपी? मेरा जवाब पहले भी यही था, आज भी यही है—बीएसपी को अपनाने के पीछे सबसे बड़ा कारण है इसकी समतामूलक सोच।आदरणीया बहन मायावती जी ने हमेशा एक ऐसा समाज गढ़ने की कोशिश की है,जहाँ हर व्यक्ति को बराबरी का दर्जा मिले—चाहे वो किसी भी जाति या धर्म का हो।यह सिर्फ कोशिश नहीं रही, बल्कि हकीकत में काफी हद तक साकार भी हुआ।वहीं दूसरी ओर, ASP जैसी पार्टियाँ कई बार आपसी मतभेद पूर्ण और विभाजन को बढ़ावा देती दिखती हैं।कुछ लोग सवाल उठाते हैं—“सवर्णों को साथ क्यों लेना.?”
क्या उनके ‘भाईचारे’ से कोई फर्क पड़ता है?तो जवाब यही है—
आदरणीया बहन मायावती जी किसी एक व्यक्ति या समूह की गलती के आधार पर पूरे समाज को कटघरे में नहीं खड़ा करतीं।
वो सबको साथ लेकर चलने में विश्वास रखती हैं।आपने देखा होगा, आजकल कुछ नवयुवक धर्म और जातियों पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करते हैं।
ऐसा करने से न तो उन्हें कोई लाभ होता है, न समाज को—बल्कि उनके अपने परिवार को मानसिक, सामाजिक और कानूनी परेशानियाँ उठानी पड़ती हैं।तब न कोई नेता उनकी मदद को आता है, न कोई पार्टी।ऐसे उदाहरण हजारों मिलेंगे।
ASP से जुड़ने वाले 90% युवा हैं—गर्म खून वाले। लेकिन सिर्फ आक्रोश से, या विरोध से, आप समतामूलक समाज नहीं बना सकते।हमें ऐसा समाज बनाना है जहाँ किसी के भी गलत होने पर विरोध हो—चाहे वो मिश्रा जी हों या माली जी।लेकिन जब तक वो संविधानवादी हैं, उनका सम्मान हम सबका कर्तव्य है।बीएसपी आज भले ही 0 पर हो, लेकिन इस पार्टी ने वो कर दिखाया है, जो न तो कोई और दलित पार्टी कर पाई, और न ही कोई दूसरी तथाकथित सर्वसमाज की पार्टी।आप दो-चार गलतियों के आधार पर उस नेतृत्व को नकार नहीं सकते,जिसने अपने समाज के लिए अपना सब कुछ—परिवार, निजी जीवन, सुख-दुःख—सब कुछ समर्पित कर दिया। जब अन्य पार्टियाँ नफरत और ध्रुवीकरण की राजनीति करती हैं,
बीएसपी तब भी सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए न्याय और अवसर की बात करती है। इसलिए मैं बीएसपी के साथ हूँ।हार-जीत अपनी जगह है।अगर बसपा के पास सिर्फ 2 वोट भी होंगे,तो यकीन मानिए—उनमें एक मेरा होगा,और एक मेरे जैसे किसी सच्चे शुभचिंतक का... (भाईचारे वाली बात सिर्फ सवर्ण के लिए ही नहीं अपितु सभी समाज और धर्म के लोगों के लिए है)
@bspindia@Mayawati