@Md_Shaheen_Rana@yadavakhilesh बुनियाद नहीं रहीं बल्कि समाजवादी पार्टी के साथ-साथ बहुजन समाजवादी पार्टी और उस से पहले कांग्रेस बुनियाद बनी लेकिन सबने मुस्लिमों को ठगा
आज भी मुस्लिम समुदाय अपने आपको ठगा महसूस करता है खास कर आज़म खां प्रकरण के बाद और बुलडोजर और मुस्लिम धरोहरो के मामले में विपक्ष नेता का अनदेखा
@Rksingh86102420 मुस्लिम तो बार बार याद रखने की कहता लेकिन बार बार भूल जाता है
अच्छा है कि देश के युवा स्टूडेंट्स याद रखे अंग्रेजों के टाईम एक हुए थे जर्नल डायर
आज है.....
ना देशवासी जर्नल डायर को भूलें हैं
ना देशवासियों को भूलना कैमरा जीवी को
प्रोटेस्ट में एक छात्र हाथ जोड़कर खड़ा है पुलिस लाठियों से पीटती रही उस सिपाही ने आखिर में उसके सिर पर लाठी मारा उसके बाद वह छात्र वहीं सड़क पर गिरकर बेहोश हो गया।
कुत्ते पुलिस वाले हत्या के लिए भेजे गये हैं।
उस पुलिस वाले पर attempt to murder का मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया जाय।
@HMOIndia@AmitShah
@IPSinghSp जर्नल डायर की नाजाय��़ औलाद ही ऐसा कर सकती है
ऐसा ही जर्नल डायर की नाजायज़ औलादो ने जामिया के स्टूडेंट्स के साथ किया था और दिल्ली दंगो के टाईम मुस्लिमों से राष्ट्र गीत गाने के लिए कहते हुए किया था
बाकी आप सब समझदार हो
बीजेपी राज में बारी सब की आएगी
रोको ज़रा सबकी बारी आएगी
याद करो दिल्ली ��ें 4/5 मुस्लिम नौजवान को पीट पीट कर देशभक्ती साबित कर रहे थे, अरे राष्ट्रगान बोल रे राष्ट्रगान
और देख लो राष्ट्रगान गा रहे हैं फिर भी घसीटती रहा पुलिस
______ 2020________________2026________
@aloksriawadh@VoxShadabKhan ये पिछवाड़े की पैदावार गंदी नस्ल है इसे जबाव देना कीचड़ में पत्थर नहीं बल्कि खुद गिर जाना है
इस जैसे jombi yo से बचे
बहस करके टाईम बर्बाद ना करें
वाराणसी: लंका पुलिस ने गौवंश तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम
शिवेंद्र सिंह,
अभिषेक तिवारी,
छोटू सिंह,
आशू खरवार
मामले में एक नाबालिग को भी पकड़ा गया है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 16 गौवंश बरामद किए हैं। बरामद सभी गौवंश को सुरक्षित संरक्षण में भेज दिया गया है। पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है और यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह के अन्य सदस्य या इससे जुड़े नेटवर्क का कोई और व्यक्ति इसमें शामिल तो नहीं है।
@Firojkh74200536 अगर टोपी फेंक कर अल्लाह हू अक़बर जोर से बोल पड़े तो सारी भक्ति और कट्टरता उल्टी चढ़ जाती जैसा कि भारतीय मीडिया दिखती आयी है
जबकि मोब लचिंग में मुस्लिम ही शिकार होते आए हैं
📍अमरोहा, उत्तर प्रदेश
4 साल से UPTET की तैयारी कर रहीं वायजा खान की मेहनत विभाग की कथित तकनीकी लापरवाही की भेंट चढ़ गई।
वायजा का आरोप है कि एडमिट कार्ड पर दिए गए पते के अनुसार वह मेरठ परीक्षा केंद्र पहुँचीं, लेकिन वहाँ कोई UPTET परीक्षा आयोजित ही नहीं हो रही थी। शिकायत के बाद आनन-फ���नन में दोबारा एडमिट कार्ड प्रिंट कराया गया, जिसमें परीक्षा केंद्र मुरादाबाद निकला। तब तक परीक्षा छूट चुकी थी।
आख़िर इस गंभीर गड़बड़ी का ज़िम्मेदार कौन है? क्या एक अभ्यर्थी की 4 साल की मेहनत का यही इनाम है?
@UPGovt @basicshiksha_up जवाब दे— क्या वायजा खान समेत प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा कराई जाएगी? दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?
मुसलमान का एनकाउंटर दूसरे को संरक्षण!– यह सिस्टेमेटिक आतंक हैं .............🤔
अगर कानून सबके लिए बराबर है, तो कार्रवाई भी बिना भेदभाव के बराबर दिखनी चाहिए।
एनकाउंटर हो या गिरफ्तारी—उसका आधार केवल सबूत और कानून होना चाहिए, किसी की जाति या धर्म नहीं।
चुनिंदा ��ार्रवाई का आरोप जनता का भरोसा कमजोर करता है। न्याय का अर्थ यही है कि न किसी को बेवजह निशाना बनाया जाए और न किसी को संरक्षण मिले। संविधान का तकाज़ा है—समान न्याय, समान कानून।
"BJP मुर्दाबाद" कहने पर जिला बदर? — जज ने कहा: नागरिक गुलाम नहीं हैं
आज बॉम्बे हाईकोर्ट में कुछ असाधारण हुआ।
एक जज ने वह कहा — जो शायद ही कभी किसी अदालत ने इतनी साफगोई से कहा हो।
जस्टिस माधव जामदार ने कहा — "नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है। वे प्रदर्शन नहीं कर सकते, आंदोलन नहीं कर सकते — यह क्या है?"
मामला क्या था
Socialist Democratic Party of India के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी CAA और ज्ञानवापी विवाद के खिलाफ मोर्चे और धरने आयोजित कर रहे थे।
मुंबई पुलिस ने उन्हें एक साल के लिए जिला बदर कर दिया — पांच FIR के आधार पर जो ज़्यादातर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के लिए थीं।
जस्टिस जामदार ने यह आदेश देखा।
और आगबबूला हो गए।
जज ने जो कहा — वह इतिहास में दर्ज होगा
"याचिकाकर्ता ने तो सिर्फ 'BJP Government Murdabad', 'Amit Shah Murdabad' जैसे नारे लगाए। नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए जिला बदर आदेश क्यों?"
"पुलिस मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की सेवक नहीं है — वे जनसेवक हैं। मैं आपके अधिकारियों पर भारी जुर��माना लगाऊंगा।"
"अगर लोग विरोध करें तो आप केस थोप देंगे — यह क्या है? नागरिकों का प्रदर्शन करना उनका अधिकार है।"
और फिर — "वॉशिंग मशीन" वाली टिप्पणी
जस्टिस जामदार ने महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे "horse-trading" पर भी टिप्पणी की।
उन्होंने कहा — "एक 10 साल के बच्चे की दुर्घटना में मौत हो गई और राज्य विधानसभा में चर्चा हो रही थी कि Presiding Officer कैसे चुना जाए और वह एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कैसे shift हो गया। पूरे महाराष्ट्र में horse-trading चल रही है — केस बदलने पर विचार करें, वॉशिंग मशीन है।"
फैसला
जस्टिस जामदार ने अपने आदेश में लिखा — "सरकार के फैसलों का विरोध करने और उसके खिलाफ नारे लगाने मात्र से किसी नागरिक को जिला बदर नहीं किया जा सकता। यह कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण है और संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।"
जिला बदर आदेश रद्द।
यह फैसला इतना बड़ा क्यों है
आज के भारत में —
जहाँ असहमति को देशद्रोह कहा जाता है।
जहाँ विरोध प्रदर्शन पर UAPA लगाया जाता है।
जहाँ "BJP मुर्दाबाद" कहने पर जिला बदर किया जाता है।
एक जज ने खड़े होकर कहा — नागरिक गुलाम नहीं हैं।
पुलिस प्रधानमंत्री की नौकर नहीं है।
विरोध करना — अधिकार है।
यह फैसला नज़ीर है।
इसे शेयर करें।
क्योंकि जब अदालतें जागती हैं —
तो लोकतंत्र सांस लेता है।
- ज्ञानेंद्र अवस्थी जी की पोस्ट
आज @MahuaMoitra के साथ हो रही है कल आपके साथ भी हो सकती है ये गुंडागर्दी ,रीट्वीट करो और देश को दिखाओ एक सांसद को पुलिस की मौजूदगी में क्या क्या सहना पड़ रहा है .
मैं ललित कुमार पेट दर्द की दवा लेने गया था,
लेकिन जो हुआ उसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए.!
मैं किसी कवरेज के सिलसिले में सांचौर जिला अस्पताल गया हुआ था उसी दौरान मेरे पेट में तेज दर्द शुरू हो गया दर्द लगातार बढ़ता जा रहा मैंने अस्पताल में मौजूद डॉक्टर से कहा कि मेरा पेट बहुत ज्यादा दर्द कर रहा कोई दवा लिख दीजिए. डॉक्टर ने तुरंत पर्ची बनवाकर पेट दर्द की कुछ दवाइया�� लिख दीं.
जब मैं दवा लेने पहुंचा तब तक सरकारी नि:शुल्क दवा वितरण केंद्र बंद हो चुका था अस्पताल परिसर में ही संचालित सहकारी उपभोक्ता भंडार की मेडिकल शाखा खुली हुई थी, तो मैंने मेडिकल संचालक को डॉक्टर द्वारा लिखी गई पर्ची दिखाई,दवाइयां मांगी. उसने कहा कि पर्ची में लिखी गई सभी दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं और केवल एक टैबलेट ही है पेट में असहनीय दर्द होने के कारण मैंने कहा कि जो लिखी है वो उपलब्ध है वही दे दीजिए, कम से कम दर्द तो कम होगा
उसने मुझे एक टैबलेट दी कहा कि ₹30 दे दीजिए ���ैंने तुरंत अपने खाते से ऑनलाइन भुगतान कर दिया भुगतान करने के बाद मैंने उससे बिल मांगा बिल मांगते ही उसने बहाने बनाना शुरू कर दिया. कभी बोला कंप्यूटर खराब है, कभी बोला इंटरनेट नहीं चल रहा है। जबकि मेरे सामने इंटरनेट भी चल रहा था और सिस्टम भी चालू था करीब आधे घंटे तक बहानेबाजी करने के बाद जब मैंने लगातार बिल देने की मांग की तो आखिरकार उसने बिल निकालकर दिया.
बिल देखकर मैं हैरान रह गया. जिस ��वा के लिए उसने मुझसे ₹30 लिए थे, उसी दवा की कीमत बिल में मात्र ₹19 लिखी हुई थी मैंने उससे पूछा कि जब बिल में ₹19 लिखे हैं तो मुझसे ₹30 क्यों लिए गए.?
उसने जवाब दिया कि "इतना तो लगेगा उस समय मेरा पूरा ध्यान पेट दर्द पर था, इसलिए मैंने ज्यादा बहस नहीं की.
मैंने मेडिकल संचालक पर भरोसा करते हुए टैबलेट खा ली.
करीब 15 मिनट बाद मुझे चक्कर आने लगा सिर घूमने लगा और सिर भारी-भारी महसूस होने लगा मेरी हालत बिगड़ने लगी मैं तुरंत एक निजी अस्पताल गया वहां डॉक्टर को अपनी समस्या बताई.
डॉक्टर ने सबसे पहले पूछा कि क्या आपने कोई दवा ली है.?
मैंने अस्पताल की पर्ची और मेडिकल से मिली दवा उन्हें दिखाई।
पर्ची और दवा देखने के बाद डॉक्टर ने जो बात कही, उसने मुझे अंदर तक झकझोर दिया।
डॉक्टर ने बताया कि जिस दवा की पर्ची डॉक्टर ने लिखी वो दवा दी ही नहीं गई उसकी जगह कोई दूसरी दवा दे दी इतना ही नहीं, डॉक्टर ने बताया कि जो दवा दी ��ई, वो भूखे पेट नहीं ली जा सकती और उसे लेने से पहले दूसरी दवा लेना जरूरी था.!
डॉक्टर ने मुझसे पूछा कि यह दवा आपक�� किसने दी.? कहा कि यह दवा हर व्यक्ति को नहीं दी जा सकती और बिना उचित सलाह के इसका सेवन करना खतरनाक हो सकता है
मैंने डॉक्टर से कहा कि अभी भी मेरे पेट में दर्द हो रहा कोई दवा दे दीजिए लेकिन डॉक्टर ने कहा कि पहले आपके शरीर पर गलत दवा का प्रभाव कम होने दीजिए, उसके बाद ही दूसरी दवा दी जा सकती है
मेनें गंभीरता को देखते हुए मैंने तुरंत जालौर जिला कलेक्टर को फोन किया और पूरी घटना की जानकारी दी, जिला कलेक्टर ने मामले को गंभीर मानते हुए सांचौर अतिरिक्त जिला कलेक्टर को जांच के निर्देश दिए इसके बाद मैं स्वयं अतिरिक्त जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचा उन्हें बिल, पर्ची, दवा तथा अन्य सभी दस्तावेज दिखाए. उन्होंने भी प्रथम दृष्टया इसे गंभीर लापरवाही माना संबंधित अधिकारियों को फोन कर जानकारी ली.
मेरे मन में सबसे बड़ा सवाल यही कि अगर एक पत्रकार के साथ सरकारी अस्पताल परिसर में संचालित मेडिकल शाखा पर ऐसा ���ो सकता तो आम मरीजों के साथ क्या होता होगा.? कितने लोग ऐसे होंगे जो बिल नहीं मांगते होंगे, कितने लोग ऐसे होंगे जिन्हें डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा के बजाय द���सरी दवा दे दी जाती होगी, और कितने लोग ऐसे होंगे जिन्हें गलत दवा के कारण स्वास्थ्य संबंधी गंभीर नुकसान उठाना पड़ा होगा.!
अस्पताल परिसर में संचालित मेडिकल शाखा पर मरीजों को गलत दवा दी जा रही बिल देने में आनाकानी की जा रही और निर्धारित राशि से अधिक पैसे वसूले जा रहे तो इसकी निष्पक्ष और गहन जांच होना बेहद जरूरी।! @GajendraKhimsar
@RajCMO @BhajanlalBjp @narendramodi @8PMnoCM @arvindchotia @ashokgehlot51@PMOIndia @rashtrapatibhvn @GovindDotasra @TikaRamJullyINC @kkvishnoibjp @jogeshwarg @RajGovOfficial@DmJalore @lumbaram64 @jivaramchoudhar #Sanchore #Jalore
यूपी सरकार ही नहीं बल्कि केंद्र सरकार भी भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लगाम लगाने की बात करती हैं जिसका पालन करते हुए अधिकारी किसानों से 2,4 हज़ार नहीं बल्कि 5 लाख 10 लाख रूपये रिश्वत मांग रहे हैं।
मुजफ्फरनगर में शीमली गांव के जंगलों में किसान आस मोहम्मद ने अपनी खेती की ज़मीन की पैमाइश के लिए लेखपाल से अनुरोध किया था, लेखपाल ने पैमाईश के लिए किसान से 8 लाख रुपए रिश्वत के रूप में मांगे, किसान ने 5 लाख रूपये लेखपाल गौरव और नवनीत को दे दिए 3 लाख रूपये पैमाईश के बाद देने का वादा कर लिया। 5 लाख रूपये लेने के बाद भी किसान की ज़मीन की पैमाईश न होने पर किसान ने रिश्वत देते हुए बनाई गई वीडियो को न सिर्फ़ वायरल किया है बल्कि आला अधिकारियों के यहां भी लिखित में शिक़ायत दर्ज कराई हैं। मामला अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचने के बाद भी लेखपाल के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई है, ये है भ्रष्टाचार पर लगाम?
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