पाली जिले के देसूरी गांव से प्रेरणा लेकर मैंने तय किया है कि मेरे सपोटरा विधानसभा के हर गांव में “जय भीम लाइब्रेरी” और "सावित्रीबाई फुले पाठशाला" की शुरुआत करूंगा। अभी संसाधनों की कमी है, लेकिन शिक्षा और जागरूकता की इस रोशनी को हर बस्ती तक पहुंचाने का संकल्प अटूट है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के काकोरी थाना क्षेत्र, पुरानी बाजार, शीतला मंदिर में RSS कार्यकर्ता द्वारा दलित बुजुर्ग रामपाल पासी को पेशाब चा���ने के लिए मजबूर करना — सिर्फ़ एक अपराध नहीं, बल्कि जातिवाद व सामंतवाद की वर्षों पुरानी दलित विरोधी मानसिकता का नंगा प्रदर्शन है।
बीमारी से पीड़ित एक बुजुर्ग को, जिनसे पानी पीते समय गलती से थोड़ा पानी नीचे गिर गया था, आरोपी ने कहा कि “तुमने पेशाब किया है” और पानी मंगवा कर उससे धूलवाया। साथ ही जातिसूचक गालियाँ देकर अपमानित किया गया — यह न केवल मानवता के लिए कलंक है, बल्कि संविधान की आत्मा पर भी प्रहार है।
शरीर पर सत्ता का जोर, आत्मा पर जातिवाद का विष।
हम @UPGovt से माँग करते हैं कि —
1. आरोपी को तत्काल गिरफ्तार कर SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कठोरतम सजा दी जाए।
2. पी���़ित रामपाल पासी को सरकारी सुरक्षा, सम्मानजनक मुआवज़ा और इलाज की सुविधा दी जाए।
@CMOfficeUP
@myogiadityanath
दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर से आए हज़ारों SSC अभ्यर्थी और शिक्षक शांतिपूर्ण ढंग से SSC के कुप्रबंधन और प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे थे।
लेकिन छात्रों की जायज़ माँगों को सुनने के बजाय उन पर लाठीचार्ज किया गया!
इतना ही नहीं, प्रोटेस्ट को कवर करने पहुँचे पत्रकारों को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पत्रकारों के माइक और मोबाइल फोन तक छीन लिए गए। यह साफ़ दिखाता है कि सरकार सिर्फ़ छात्रों की आवाज़ नहीं, बल्कि सच्चाई दिखाने वाली पत्रकारिता को भी दबाना चाहती ��ै।
छात्रों पर लाठीचार्ज कर सरकार ने साबित कर दिया है कि—
“उसे युवाओं की मेहनत और सपनों से कोई मतलब नहीं, वह सिर्फ़ छात्रों की आवाज़ को हिंसा से कुचलना जानती है।”
हम प्रधानमंत्री @narendramodi जी से पूछते हैं—
क्या अपने हक़ और भविष्य की लड़ाई लड़ना अब गुनाह है? क्या लोकतंत्र में छात्रों की आवाज़ का स्वागत लाठियों से किया जाएगा?
यह संघर्ष सिर्फ़ SSC अभ्यर्थियों का नहीं, बल्कि देश के हर उस युवा का है, ज���सका हक़ छीना जा रहा है। लाठियाँ आंदोलन की चिंगारी को बुझा नहीं सकतीं, बल्कि यह चिंगारी अब महाविस्फोट बनेगी!
#SSCVendorFailure #SSC_System_Sudharo
#SSCप्रोटेस्ट #StudentProtest #SSCStudents #RamleelaMaidan #StopLathicharge
कानपुर के सजेती थाना क्षेत्र के मुगल रोड पर भदवारा गांव के पास सड़क दुर्घटना में हमारे साथी देवेंद्र (32 वर्ष, शिवपुरी पश्चिमी निवासी) और अभिषेक उर्फ रविशंकर (20 वर्ष, जाजपुर निवासी) की मौके पर ही दर्दनाक मृत्यु होना अत्यंत दुखद है।
आज हमने दो बहादुर और संघर्षशील साथियों को खो दिया। यह घटना न केवल उनके परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि पूरे समाज और आंदोलन के लिए भी गहरा आघात है।
हम शोकाकुल परिवारजनों के साथ इस दुख की घड़ी में पूरी मजबूती से खड़े हैं।प्रकृति उन्हें इस असीम दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
जय भीम! नमो बुद्धाय!
आज संसद भवन परिसर से कर्मचारियों के हक में आवाज बुलंद की...
जब काम एक जैसा है, तो सैलरी और सम्मान में भेदभाव क्यों?
माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी कहा है—“Equal Pay for Equal Work” हर कर्मचारी का हक़ है।
संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 39(d) स्पष्ट तौर पर देश के प्रत्येक नागरिक को सरकारी नौकरियों में अवसर की समानता और समान कार्य के बदले समान वेतन का अधिकार बताते हैं।
तो फिर समान कार्य करने पर संविदा कर्मियों को स्थायी कर्मचारियों से वेतन कम क्यों? यह अन्याय नहीं तो और क्या है?
"समान काम, समान वेतन, समान सम्मान" एक संवैधानिक और कानूनी सिद्धांत है। इसका अर्थ है कि अगर दो व्यक्ति समान योग्यता के साथ समान पद पर समान कार्य कर रहे हैं तो उन्हें समान वेतन मिलना चाहिए, चाहे वह स्थायी कर्मचारी हों या अस्थायी या संविदा कर्मचारी।
देश के कर्मचारियों के हक, अधिकार और मान–सम्मान से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर भीम —आर्मी आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) @mygovindia से विनम्र अनुरोध करती है कि इस महत्वपूर्ण विषय पर देश भर के कर्मचारियों के हित में स्पष्ट और प्रभावी कानून बनाया जाए और कर्मचारियों को उनका न्यायसंगत हक देने में सहयोग किया जाए।
#समान_काम_समान_वेतन_समान_सम्मान
#समान_काम #समान_वेतन #समान_सम्मान
@PMOIndia@narendramodi@FinMinIndia@nsitharaman@LabourMinistry@mansukhmandviya
उत्तर प्रदेश के गोंडा ज़िले में तेज बारिश के बीच हमारी माताएँ-बहनें सिर्फ 2 बोरी खाद के लिए घंटों लाइन में खड़ी रहीं।
ये तस्वीर बताती है कि किस तरह किसान परिवारों को बुनियादी ज़रूरतों के लिए भी अपमान और कठिनाइयाँ झेलनी पड़ रही हैं।
क्या यही है किसानों के सम्मान का वादा?
क्या यही है महिला सशक्तिकरण का सच?
जब बहन-बेटियों को खाद जैसी ज़रूरी चीज़ के लिए भी भीगते हुए लाइन में लगना पड़े तो ये किसका ‘डबल इंजन’ विकास है?
किसान और उनकी बेटियाँ किसी उपकार की नहीं, अपने हक़ की मांग कर रही हैं। सरकार तुरंत खाद की पर्याप्त व समान वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करे, वरना ये संघर्ष सड़क से संसद तक पहुँचेगा।
बहुजन, किसान और मेहनतकश समाज के हक़ की आवाज़ बुलंद करते रहेंगे।
उत्तर प्रदेश के 94 विभागों ने 2023-24 में आवंटित ₹9,859 करोड़ में से एक भी रुपया खर्च नहीं किया।
उद्यमियों की मदद के ₹925 करोड़, किसानों के लिए बनी 29% मंडियां अक्रियाशील — जनता का पैसा धरे का धरा।
उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का दावा करने वाली मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी की सरकार अपने ही बजट का सही उपयोग नहीं कर पा रही!
कमी पैसे की नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति, कुशल नेतृत्व और साफ़ नीयत की है।
आज उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर में आयोज���त "अस्तित्व बचाओ–भाईचारा बनाओ" प्रबुद्ध जनसम्मेलन में अपनों के बीच अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए।
1. ओबीसी की जातिवार जनगणना का मुद्दा:
केन्द्र सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की जाति आधारित जनगणना को जानबूझकर न कराना, सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ एक सोचा-समझा षड्यंत्र है। यह बहुजन समाज की वास्तविक संख्या और उनके अधिकारों को दबाने का एक प्रयास है।
2. आरक्षण और संविधान पर विश्लेषण:
वर्तमान शासन व्यवस्था आरक्षण को निष्प्रभावी करने तथा संविधान की ��ूल भावना को कमज़ोर करने में लगी हुई है। हमें परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सतत जागरूक और संगठित रहना होगा।
3. EVM प्रणाली का लोकतंत्र पर प्रभाव:
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के माध्यम से चुनाव कराना लोकतंत्र की पारदर्शिता और जनविश्वास के विरुद्ध है। यह व्यवस्था शासक वर्ग के षड्यंत्र का हिस्सा प्रतीत होती है, जिसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को नियंत्रित करना है।
4. दलित, पिछड़े, आदिवासी वर्ग एवं अल्पसंख्यकों व मुस्लिमों पर बढ़ते अत्याचार:
वर्तमान समय में अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम समाज पर होने वाले अत्याचारों में चिंताजनक वृद्धि हो रही है। यह न केवल संवैधानिक मूल्यों पर आघात है, बल्कि सामाजिक ताने-बान��� को भी छिन्न-भिन्न करने वाला संकट है।
5. प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की मांग:
सरकारी क्षेत्र के निजीकरण के कारण आरक्षण प्राप्त अवसर सीमित होते जा रहे हैं। अतः यह आवश्यक है कि प्राइवेट सेक्टर में भी अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग को आरक्षण मिले, ताकि समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके।
6. मंडल कमीशन की सिफारिशों का पूर्ण क्रियान्वयन: मंडल कमीशन ने सामाजिक न्याय को स्थापित करने हेतु जि�� सिफारिशों को प्रस्तुत किया था, उनका पूर्ण रूप से लागू किया जाना समय की आवश्यकता है।
देश को संस्कृत नहीं संविधान जानने वालों की जरूरत है.
बाबासाहेब को संस्कृत समेत 9 भाषाओं का ज्ञान था लेकिन आप जैसों को वो काँटे की तरह चुभते हैं…
…क्योंकि जिन महिलाओं और दलितों को आप जैसे लोग कमतर आंकते हैं, उन्���ोंने उन्हें समानता का अधिकार दिलाया था.
दर्द तो होगा ही!
भारत-नेपाल सीमा पर यूरिया खाद की खुली तस्करी हो रही है और यह सब कृषि विभाग, जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की मिलीभगत से संभव हो रहा है।
जब हमारे किसान खेतों में बोआई के लिए खाद की बाट जोहते हुए रातभर गोदामों के बाहर लंबी कतारों में खड़े हैं, तब उनकी जरूरत का यूरिया घोड़ा गाड़ियों में भरकर नेपाल भेजा जा रहा है।
यह सिर्फ तस्करी नहीं, बल्कि राष्ट्र और अन्नदाता दोनों के साथ ��द्दारी है।
संलग्न वीडियो उत्तर प्रदेश के जनपद सिद्धार्थनगर के बजहा चौकी क्षेत्र का है।
पूरे देश के आदिवासी और हाशिये पर खड़े लोगों के मार्गदर्शक, झारखंड के महान जननायक ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन जी के निधन पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करने मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी से पैतृक गांव नेमरा पहुंचकर मुलाकात की।
शिबू जी ने राजनीति को सत्ता का साधन नहीं, बल्कि अपने लोगों के अधिकारों की लड़ाई का हथियार बनाया। उनकी विरासत हर न्यायप्रिय इंसान को संघर्ष के लिए प्रेरित करती रहेगी।
उन्��ोंने राजनीति को सत्ता पाने का साधन नहीं, बल्कि अपने लोगों के अधिकार वापस लेने का हथियार माना।
वे झारखंड के पहले ऐसे बड़े नेता थे जिन्होंने खुलेआम कहा —
"जमीन, जंगल, और जल हमारी पहचान है, इसे छीनने वालों से समझौता नहीं होगा।"
उनकी यही सोच उन्हें "दिशोम गुरु" बनाती है...
ऐसे जननायक को मेरी विन्रम आदरांजलि...
#DishomGuru #ShibuSoren
आज संसद भवन परिसर में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया, ताकि अधिवक्ताओं को निडर होकर न्याय के लिए काम करने का सुरक्षित माहौल मिल सके।
आज संसद भवन परिसर में उन कर्मचारियों की आवाज़ बुलंद की, जो वर्षों से देश की सेवा कर रहे हैं और अब अपने बुढ़ापे के सहारे पुरानी पेंशन से वंचित किए जा रहे हैं।
ये वही कर्मचारी हैं जिन्होंने जीवन का सबसे सुनहरा समय देश और समाज की सेवा में समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने खून-पसीने से सरकारी तंत्र को चलाया, न्याय दिलाया, योजनाओं को गांव-गांव तक पहुँचाया और देश की प्रगति ���ा रास्ता बनाया। आज रिटायरमेंट के बाद जीवन का सबसे बड़ा सहारा पुरानी पेंशन उनसे छीनकर बाजार आधारित NPS का झुनझुना उन्हें पकड़ा दिया गया है।
NPS शेयर बाजार का खेल है, जबकि OPS में राज्य की गारंटी होती है। क्या एक कर्मचारी को अपने भविष्य की सुरक्षा शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर छोड़ देना न्याय है?
👉 आज राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, और हिमाचल जैसे कई राज्य पुरानी पेंशन योजना की वापसी कर चुके हैं। तो केंद्र सरकार चुप क्यों है?
2004 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने जो ऐतिहासिक गलती की थी, मौजूदा प्रधानमंत्री @narendramodi जी के पास उसे सुधारकर लाखों-करोड़ों कर्मचारियों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे को हल करने का मौका है।
OPS को समाप्त करना इन संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
अनुच्छेद 21 – जीवन और गरिमा का अधिकार।
अनुच्छेद 41 – राज्य वृद्धावस्था में सुरक्षा देगा।
@AzadSamajParty कर्मचारियों के हित से जुड़े इस मुद्दे में पूरी तरीके से उनके साथ खड़ी है। साथ ही @mygovindia @DOPPW_India @PIBPersMin से मांग करती है कि–
1–नई पेंशन स्कीम (NPS) को समाप्त कर सभी केंद्र व राज्य कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) बहाल की जाए।
2. जो राज्य OPS लागू करना चाहते हैं, उन्हें केंद्र सरकार का पूर्ण सहयोग दिया जाए।
3. कर्मचारियों के वृद्धावस्था के सम्मानजनक जीवन के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाई जाए।
यह सिर्फ एक आर्थिक मुद्दा नहीं है — यह सामाजिक सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा है।
बूढ़े मां-बाप की तरह, एक सेवानिवृत्त कर्म��ारी को भी सुरक्षा चाहिए-न कि शेयर बाजार की सट्टेबाजी।
जय भीम, जय भारत, जय संविधान।
दिल्ली पुलिस के साहसी कर्मियों को विगत दो वर्षों से वीरता पुरस्कार नहीं मिल पाए हैं।
इन कर्मियों की अदम्य साहसिकता और कर्तव्यनिष्ठा को सम्मान देने हेतु माननीय गृह मंत्री @AmitShah जी को पत्र लिखा है, ताकि इस प्रक्रिया को शीघ्र पुनः सक्रिय किया जा सके।
हमें विश्वास है कि आपके नेतृत्व में दिल्ली पुलिस के बहादुर जवानों को उनका यथोचित सम्मान शीघ्र मिलेगा।
@mygovindia@HMOIndia@DelhiPolice
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में बादल फटने की घटना अत्यंत दुखद है। इस आपदा में हुए जन-धन के नुकसान से मैं हृदय से व्यथित हूँ। प्रभावित परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।
मैं @ukcmo से आग्रह करता हूँ कि राहत और बचाव कार्यों में पूरी तत्परता बरती जाए, घायलों के उपचार की समुचित व्यवस्था की जाए ��र प्रभावित लोगों को त्वरित मुआवजा एवं पुनर्वास प्रदान किया जाए।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन के खतरे वास्तविक हैं और इनके समाधान के लिए ठोस व दीर्घकालिक कदम उठाने की आवश्यकता है।
#Uttarakhand #Uttarkashi #Cloudburst #Dharali
मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के नावरा गांव में दलित युवती भाग्यश्री धानुक की गला रेतकर नृशंस हत्या — अत्यंत दुखद, दण्डनीय और कानून व्यवस्था की गंभीर विफलता है।
एक दलित महिला के घर में घुसकर उसकी बेरहमी से हत्या इस बात का सबूत है कि महिलाओं की सुरक्षा, खासकर अनुसूचित जाति समुदाय की महिलाओं की सुरक्षा, आज भी प्रशासन की प्राथमिकता नहीं है।
मृतका भाग्यश्री द्वारा पूर्व में नेपानगर थाने में आरोपी के खिलाफ शिकायत की गई थी लेकिन पुलिस प्रशासन की लापरवाही और ��दासीनता के चलते समय पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई।
यही लापरवाही अपराधी के हौसले इतने बुलंद करने का कारण बनी, जिसका परिणाम यह नृशंस हत्या है।
हम @CMMadhyaPradesh से माँग करते हैं:
1. आरोपी को फास्ट ट्रैक कोर्ट में पेश कर कठोरतम सजा दी जाए।
2. नेपानगर थाना पुलिस की लापरवाही की उच्च स्त��ीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
3. पीड़िता के परिवार को आर्थिक सहायता, सरकारी नौकरी व सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
@DrMohanYadav51
पूर्व राज्यपाल श्रद्धेय सत्यपाल मलिक जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद।
मुझे उनके साथ कई महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा का अवसर प्राप्त हुआ था और उनके स्पष्टवादी व्यक्तित्व, जनसरोकारों के प्रति उनकी निष्ठा और निडरता ने हमेशा प्रेरित किया। उनका निधन मेरे लिए एक व्यक्तिगत क्षति है।
वे सदैव किसानों, जवानों और आम जनता के मुद्दों पर निर्भीकता से अपनी बात रखने वाले नेता के रूप में याद किए जाएंगे।
हम इस शोक की घड़ी में उनके परिजनों और अनुयायियों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हैं।
साथ ही प्रकृति से प्रार्थना है कि वो हम सबको यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे।
विनम्र आदरांजलि।
जय भीम, जय भारत।
#satyapalmalik
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय शिबू सोरेन 'गुरुजी' के निधन का समाचार अत्यंत दुखद ।
गुरुजी का संपूर्ण जीवन सामाजिक न्याय, जल-जंगल-जमीन के अधिकारों और बहुजन-आदिवासी समाज की गरिमा के संघर्ष का प्रतीक रह��� है।
उनकी स्मृति, विचार और संघर्ष हम सबके लिए सदैव प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।
हम इस शोक की घड़ी में उनके परिजनों, अनुयायियों और झारखंड की समस्त जनता के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हैं।
साथ ही प्रकृति से प्रार्थना है कि वो भाई @HemantSorenJMM जी व हम सबको यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे।
विनम्र आदरांजलि।
जय भीम। जय जोहार।
उत्तर प्रदेश के एटा जिले के थाना निधौली कलां क्षेत्र में 16 वर्षीय नाबालिग सत्यवीर सिंह लोधी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु अत्यंत दुखद और गंभीर चिंता का विषय है।
परिजनों के अनुसार, 1 अगस्त की शाम को सत्यवीर को उसके पिता और भाई स्वयं थाना निधौली कलां ले गए थे। वहां पुलिसकर्मियों ने उसे अंदर ले जाकर डंडों और बेल्टों से बेरहमी से पीटा। अगले दिन सुबह उसका शव गांव के बाहर सड़क किना��े पड़�� मिला।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी से हमारा सवाल है:
यूपी के थाने और जेलें बहुजन समाज के लोगों के लिए कब्रिस्तान बन चुके हैं, आखिर ऐसा कब तक चलेगा?
हमारी गहरी संवेदनाएं पीड़ित परिजनों के साथ हैं। प्रकृति उन्हें इस दुख के पहाड़ को उम्र भर उठाने की शक्ति प्रदान करे।
हम @UPGovt से पूरे मामले की न्यायिक जांच, दोषियों पर कठोर कार्रवाई, और परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की माँग करते हैं।