तुम मेरे शिव हो; मैं इस जन्म में भस्म होकर भी अगला जन्म लेकर तुम्हारी प्रतीक्षा करूंगी।
योग, ध्यान, जप, तप हर युक्ति करूंगी तुम्हें पाने की और फिर देखना, सारा ब्रह्माण्ड तुम्हें मेरा बनाने के प्रयास में लग जायेगा।
अंत मे मुझे समझ आया कि धोखेबाज कोई और नही स्वयं मैं था..क्योंकि मैने न सिर्फ स्वयं को और बल्कि दूसरो को भी छला है दूसरे से प्रेम,की परवाह,बदलाव और प्रायोरिटी की अपेक्षा करना भी छल ही है शायद.. और हां शायद जिसके काबिल मैं हूं ही नही उस से प्रेम करना भी छल ही है...🖤
मेरे कमरें की
दीवारों के हिस्से आए
मेरी पहली तनख़्वाह से
घर में लगने वाला पहला रंग,
पहली तस्वीर और पहले फूल
क्योंकि इन्होंने मुझे देखा हैं
नंगा, बेबस, बेहूदा और बेरोजगार
फ़ेंकी हैं इनपे मैंने गुस्से
में किताबें, और मारी हैं लातें
मग़र इन्होंने किसी को बताया नही !
@Yug_Dave 🩶
सिर्फ़ पोषित ही नहीं करती,
गलती करने पर हमारी अम्मा हमें झपड़िया देती हैं और चप्पल, बेलन दे मारती हैं ;
तो ये प्रकृति अम्मा तो जगत अम्मा हैं। अपनी नालायक सन्तानों की मनमानियां यूँ ही तो माफ ना करती हैं,
सही समय आने पर ये सज़ा भी देती हैं और सबक भी सिखाती हैं।
🙂
#प्रकृति_दोहन
सच ये है कि आँखें मूंदने से भी डर लगने लगा है..
वो सारी कड़वी बातें..
यूं घूमने लगती हैं मानो पुनः घटित हो रही हों
उतनी ही ताज़ा
उतनी ही क्रूर
उतनी ही घातक