मैं मृत्यु से नहीं डरता,मुझे भय रहा अपनों के खो देने का.. जब भी कुछ मनचाहा मुझसे दूर हुआ वो मेरे लिए मृत्यु सी रही, मैं जीवन में इतनी बार मर चुका हूं कि अब वास्तविक मृत्यु से भय नहीं...!!!
@alokrajRSSB जब लेबल 1 की परीक्षा एक दिन ही है तो सर्दी को देखते हुए समय 1 से 5 बजे का क्यों नहीं रख सकते 10 बजे का समय है विद्यार्थी को 8 बजे तक पहुंचना है 9 बजे गेट बंद हो जाता है सर्दी की परेशानी को देखते हुए समय 12 ,1 के बाद का कर दो
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वीर तुम अड़े रहो,रजाई में पड़े रहो*
ठंड ही ठंड है,
यह बड़ी प्रचंड है,
कक्ष शीत से भरा,
बर्फ से ढकी धरा,
यत्न कर संभाल लो,
ये समय निकाल लो,,
*वीर तुम अड़े रहो,रजाई में पड़े रहो*
चाय का मजा रहे,
पकोड़ा दल सजा रहे,
मुंह कभी थके नहीं,
रजाई भी हटे नहीं,
लाख मिन्नतें करे,
स्नान से बचे रहो,
*वीर तुम अड़े रहो,रजाई में पड़े रहो*
एक प्रण किए हुए,
है कंबलों को लिए,
तुम निडर डटो वहीं,
पलंग से हटो नहीं,
मां की लताड़ हो,
या पिता की दहाड़ हो,
*वीर तुम अड़े रहो,रजाई में पड़े रहो*
बधिर बन सुनो नहीं,
कर्म से डिगो नहीं,
प्रातः हो कि रात हो,
संग हो न साथ हो,
पलंग पर पड़े रहो,
तुम वहीं डटे रहो,,
*वीर तुम अड़े रहो,रजाई में पड़े रहो*
- *रजाईधारी सिंह 'दिनभर'*
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Sent by a friend ….😅
कबीरा तेरी दुनियाँ में, पैसा सबका पीर,
नोटों की ख़ातिर फिर रहे, बन के सब फ़कीर !
भूल गये रिश्ते नाते, और भूल गये ज़मीर,
राँझा माँगे स्कॉर्पियो, और सरकारी नौकरी माँगे हीर !!
😂😂😂😂
आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष-बिंदु की साक्षी बन रही है। श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर ध्वजारोहण उत्सव का यह क्षण अद्वितीय और अलौकिक है। सियावर रामचंद्र की जय! https://t.co/4PPt0rEnZy
दुःख भी तुमसे है,सुख भी तुमसे ज़िंदगी के हर मोड़ पर तुम ही वजह भी बने और राहत भी अब बस इतनी दुआ है कि जो भी मिले सुकून ही मिले,और वो भी तुमसे क्योंकि दर्द तो हम दोनों पहले ही बहुत सह चुके हैं अब हमारी कहानी में बस थोड़ा सा साथ और थोड़ा सा सुकून ही चाहिए...!
तुम्हारा सिर्फ एक शब्द सुनते ही मेरी सारी नकारात्मकता जैसे कहीं गायब हो जाती है पर कल जब पूरे दिन तुम्हारा एक शब्द भी नहीं मिला,तो शाम होते-होते जाने क्यों सब ख्याल नकारात्मक होने लगे फिर भी,मैंने खुद को संभाला अपने मन को समझाया,और किसी भी ख्याल को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया..!
हम रोते हैं इसलिए नहीं कि हम कमजोर हैं,बल्कि इसलिए कि हमें समझ ही नहीं आता कि इसके आगे क्या किया जाए आँसू दरअसल उस विकल्पहीनता से उपजी विवशता हैं,जहाँ इंसान खुद से भी संवाद नहीं कर पाता,जहाँ सब कुछ होते हुए भी वो खुद को सबसे अकेला पाता है...!
कभी-कभी किसी से इतना गहरा लगाव हो जाता है,
कि वो सिर्फ इंसान नहीं रहता एहसास बन जाता है।
ऐसा एहसास, जो सांसों की तरह होता है… दिखता नहीं, पर उसके बिना सब कुछ अधूरा लगता है।
बस एक दिन उससे बात न हो,
तो लगता है जैसे दिन अधूरा है,
कॉफी फीकी है,
और हवा में वो खुशबू ही नहीं जो उसके शब्दों से घुल जाती थी।
फोन की स्क्रीन बार-बार जलती है,
हर नोटिफिकेशन पर दिल धड़कता है
“शायद उसी का मैसेज हो…”
पर जब नहीं होता, तो वो धड़कन भी खामोशी में बदल जाती है।
कभी लगता है खुद से कह दूं
“क्या हुआ, एक दिन ही तो बात नहीं हुई।”
पर दिल मानता कहाँ है!
वो कहता है
एक दिन नहीं, पूरी उम्र सूनी लग रही है बिना उसके।
उसकी हंसी याद आती है,
वो छोटे-छोटे नखरे, वो ‘पता नहीं’ बोलकर छेड़ना,वो हर बात में छिपा है
वो जब कहती थी, “तुम पागल हो ना,”
और मैं जवाब देता था, तेरे लिए ही तो
और फिर एहसास होता है
प्यार का मतलब हमेशा साथ होना नहीं,
कभी-कभी बस उसका न होना ही ये जताने को काफी होता है
कि वो तुम्हारे भीतर कितना गहराई तक बस चुका है।
शायद यही मोहब्बत है
जब एक दिन की खामोशी, हज़ार बातों से ज़्यादा बोल जाती है…
और उस खामोशी में भी बस एक ही आवाज़ आती है
“कब बात होगी फिर?”