एकाग्रता बढ़ाने के 7 प्रभावी उपाय, एकदम लेजर फोकस के साथ काम करने लगेंगे।
1. डिजिटल डिस्ट्रैक्शन को दूर करें।
2. रोज़ स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें।
3. एक समय में एक ही कार्य करें।
4. मस्तिष्क को पौष्टिक आहार दें।
5. पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद लें।
6. प्रतिदिन ध्यान (मेडिटेशन) करें।
7. पोमोडोरो तकनीक का उपयोग करें। (25 min काम 5 min रेस्ट.. रिपीट)
श्रद्धा-विश्वास!
मार्कण्डेय महादेव मंदिर:
वाराणसी से गाजीपुर राजमार्ग पर स्थित है. मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने और रुद्राभिषेक या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, गंभीर रोगों से मु��्ति मिलती है और संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होती है.
श्रद्धा-विश्वास!
वाराणसी का महामृत्युंजय मंदिर: यहाँ दर्शन और महामृत्युंजय मंत्र के जाप से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है. मंदिर परिसर में धन्वंतरि कूप है. कहते हैं कि इसम��ं धन्वंतरि ने सभी औषधियां डाली थीं. इस कुएं के जल में रोगों को ठीक करने की चमत्कारिक शक्ति मानी जाती है.
श्रद्धा-विश्वास!
यूपी के मुरादाबाद मंडल में बहजोई (संभल) के निकट स्वयम्भू शिवलिंग पातालेश्वर महादेव से जुड़ी रोचक मान्यता है कि मंदिर प्रांगण में झाड़ू लगाने से श्रद्धालुओं को कुष्ठ एवं चर्म रोगों से निज़ात मिलती है.
-- पौराणिक मान्यता है कि कलियुग में कल्कि अवतार संभल में होगा.
बुद्धिमान नेता मृदु उपाय से मृदु शत्रु को हराता है और उसी से दारुण शत्रु का भी संहार करता है। मृदु उपाय से कुछ भी असाध्य नहीं है; अतः मृदु ही तीक्ष्ण है।
Wise leader defeats soft enemy with soft power & strong one with same, therefore soft power is hardest power.
#KaṇikaNīti
शनि की दशा या साढ़े साती चल रही है तो धैर्य रखिए. स्थिति को स्वीकार कीजिए. भरोसा कीजिए. फीनिक्स पक्षी की तरह, कि इसे जब जब मरा हुआ समझा जाता है, तब तब ये फिर से ज़िंदा हो जाता है. कहते हैं कि आग लगाकर इसे मार दिया जाता है लेकिन उस आग से बनी राख से ये फिर से नया जन्म लेकर उठता है.
⚠️ शनि की चेतावनी: क्या आपका शनि कमजोर है? 🪐
अगर आपके जीवन में सब कुछ रुक गया है, तो ये 7 संकेत इशारा कर रहे हैं कि आपका शनि (Saturn) कमजोर है:
1️⃣ आलस और सुस्ती: काम टालने की आदत और अनुशासन की कमी।
2️⃣ पैसों की तंगी: अच्छी कमाई के बाद भी हाथ में पैसा न टिकना।
3️⃣ करियर में रुकावट: नौकरी में प्रमोशन न मिलना या मेहनत का फल न मिलना।
4️⃣ शारीरिक दर्द: हड्डियों और जोड़ों में पुराना दर्द जो ठीक न हो रहा हो।
5️⃣ रिश्तों में तनाव: शादी में देरी या अपनों से बिना बात का झगड़ा।
6️⃣ मानसिक भारीपन: हर समय डर, उदासी और नेगेटिव विचार आना।
7️⃣ गलत संगति: बुरी आदतों या नशे की ओर झुकाव होना।
✨ घबराएं नहीं, समाधान मुमकिन है!शनि 'कर्म' के देवता हैं। सही मार्गदर्शन, मंत्र जाप और नीलम जैसे उपायों से आप अपनी इच्छाशक्ति और किस्मत क��� फिर से मजबूत कर सकते हैं। हजारों लोगों ने सही ज्योतिषीय सलाह से अपना जीवन बदला है। 🙏
आज ही अपने शनि को मजबूत बनाने की शुरुआत करें! 🚀
#ShaniDev #Astrology #Karma #SuccessTips #VedicAstrology #LifeHacks #SaturdaySpecial
मनोरथ सिद्धि के लिए चौपाई
भव भेषज रघुनाथ जसु
सुनहिं जे नर अरु नारि।
तिन्ह कर सकल मनोरथ
सिद्ध करहिं त्रिसिरारि॥
श्री रघुवीर का यश भव (जन्म-मरण) रूपी रोग की (अचूक) दवा है। जो पुरुष और स्त्री इसे सुनेंगे, त्रिशिरा के शत्रु श्री राम जी उनके सब मनोरथों को सिद्ध करेंगे॥
#Astrology & #Remedies
साढ़े साती, शनि और राहु उपाय📌
शनि महादशा, अंतर अथवा साढ़े साती/ढय्या से निकल रहे हों, कष्टकारी राहु की दशा अंतर हो या गोचर ये छोटा सा उपाय करें।
सरसों अथवा तिल के तेल में उड़द दाल के बड़े बनाकर हनुमान जी को अर्पित करें,माला बनकर उनका श्रृंगार कराएं, उत्तर भारत में श्रृंगार के रूप में इस तरह के प्रयोग नहीं होते तो बस मंदिर में भोग लगवाकर इनको प्रस���द के रूप में बंटवा दें।
शनि में मंगल का अंतर चल रहा हो तो दाल की बड़ी वाली बूंदी जिसे रसभरी भी कहते हैं उसका भोग लगाएं, आप इमरती का भोग भी लगवा सकते हैं।
ये उपाय सभी कर सकते हैं, साथ में देवस्थल में बै��कर हनुमान चालीसा और सुन्दरकाण्ड का पाठ भी करें, रामरक्षास्तोत्र का पाठ करें।
ये सरल सात्विक उपाय हैं इनके पूर्ण लाभ लेने के लिए आवश्यक है इन्हें लगातार थोड़ा लंबे समय तक किया जाए।
भारत में वामपंथ की शुरुआत 26 दिसंबर 1925 को कानपुर में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की आधिकारिक स्थापना से हुई थी।
1925 में ही नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी।
स��घ और वामपंथ दोनों ने अपनी यात्रा 1925 में शुरू की थी।संघ अपने ही स्वयंसेवक से मिलने वाली गुरु दक्षिणा से चलने वाला राष्ट्रवादी संगठन बना,वामपंथ चीन से मिलने वाले पैसे पर देश में अराजकता फैलाने वाला और हिंसा को पोषित करने वाला संगठन बना।
आज 100 साल बाद संघ दुनिया का सबसे अनुशासित और सबसे बड़ा संगठन बना और संघ से निकला स्वयंसेवक देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विराजमान है, वही 100 साल बाद आज देश की ���ाजनीति वामपंथ से मुक्त हो गई।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को खत्म करने की सौगंध खाने वाले कामरेड आज ख़ुद ख़त्म हो गए।
मोदी और शाह ने वामपंथ पोषित नक्सलवाद को समाज से और नक्सलवाद से सत्ता की यात्रा तय करने वाले वामपंथ को देश की राजनीति से मुक्त कर दिया है।
वामपंथ का शोकगीत लिख दिया गया है।
संघ को मिट्टी में मिलाने की कसम खाने वाला वामपंथ ख़ुद मिट्टी में दफन हो गया है।
संघ शक्ति युगे युगे
बंगाल में जीत के पीछे एक गुमनाम चेहरे की भी बात हो जाए….
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि पूर्व राष्ट्रपति स्व. प्रणब दा को 2018 में आरएसएस के नागपुर कार्यक्रम में जाने के लिए राज़ी करने के पीछे संघ के एक गुमनाम मगर धुरंधर प्रचारक हैं। नाम है- रामचंद्र पांडेय। बंगाल से आने वाले कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे प्रणव दा के नागपुर जाने की घटना ने बंगाली भद्रलोक में संघ और भाजपा के प्रति भरोसा भर दिया। बंगाल में बीजेपी की जीत के यूँ तो बहुत से सूत्रधार हैं। फ़्रंट पर कार्य करने वालों को दुनिया जानती है, किंतु पांडेय जी का नाम पहले भी गुमनाम था, आज भी गुमनाम है। मौजूदा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को मिर्जापुर में आरएसएस का जिला कार्यवाह बनाकर पहली बार संगठन सिस्टम में सक्रिय करने वाले रामचंद्र जी हैं। अब बात ब���गाल में उनके योगदान की।
2016 विधानसभा चुनाव के बाद आरएसएस ने अपने इस धुरंधर प्रचारक का केंद्र कोलकाता बनाकर उन्हें पूरे राज्य में संगठन को चुस्त-दुरुस्त रखने की कमान सौंपी। यह रामचंद्र पांडेय थे, जिन्होंने सिलिगुड़ी से लेकर बर्दवान, आसनसोल तक, कोलकाता के गली-कूचों से लेकर मुर्शिदाबाद, मालदा तक आम लोगों में छिपे बीजेपी और संघ कार्यकर्ताओं की कड़ियों को जोड़ना शुरु किया। कांग्रेस, टी��मसी और लेफ्ट के उन लोगों से संपर्क साधा जो बंगाल की दुर्दशा से अपने संगठनों में अंसतुष्ट थे। टीएमसी में सबसे मुखर सुवेंदु अधिकारी से लेकर प्रणब दा के संपर्क-सूत्र मनोज कुमार तक रामचंद्र पांडेय ने अपनी तीक्ष्ण बुद्धि का इस्तेमाल किया, और यहां तक कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब दा को आरएसएस के नागपुर कार्यक्रम तक पहुंचा कर बंगाली भद्रलोक और कांग्रेस के काडर में आरएसएस और बीजेपी के प्रति हर तरह के भरोसे और आश्वस्ति से भर दिया। उसी समय भविष्य के बंगाल की इबारत वस्तुतः रामचंद्र पांडेय के संपर्कों ने रच दी थी।
यह सारा कार्य रामचंद्र पांडेय के संपर्क सूत्रों से आरएसएस के नागपुर केंद्र ने साकार कर दिखाया।
रामचंद्र पांडेय कोई साधारण नाम नहीं है। 1967 में जब मोदीजी ने प्रचारक जीवन शुरु किया, उसी समय रामचंद्र पांडेय ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के अपने गांव को अलविदा कह दिया। वह प्रो. राजें���्र सिंह के संपर्क में आए और फिर आरएसएस के होकर रह गए। 1967 से 2000 तक रामचंद्र पांडेय ने 33 साल अपनी जवानी पूर्वी यूपी से लेकर अवध, बुंदेलखंड आदि इलाकों में आरएसएस को मजबूत करने में खपा दी। बीजेपी के अनेक संगठन महामंत्री रामचंद्र पांडेय के द्वारा प्रशिक्षित हैं।
रामचंद्र जी आज भी गुमनाम तरीके से रहते हैं। दो जोड़ी कपड़ों में वह अपना साल गुजार देते हैं। उनकी साधारण चप्पल और निरंतर चलते रहने की उनकी इच्छाशक्ति ने उन्हें आरएसएस के सभी प्रचारकों में सबसे जमीनी स्तर पर खड़ा किया है। कोलकाता का कोई गली-कूचा नहीं, किसी आरएसएस और पुराने बीजेपी कार्यकर्ता का घर नहीं, जहां रामचंद्र पांडेय ने प्रवास न किया और बैठकी नहीं लगाई। उनके साथ इस कार्य में आरएसएस के युवा प्रचारकों की पूरी टोली दिन-रात संपर्क में जुटी रही। आरएसएस की घोषवादकों की टीम के वह पूरे देश के मार्गदर्शक संचारक हैं। और तो और, उत्तर प्रदेश के अवध, गोरखपुर, काशी, बुंदेलखंड के इलाकों में अधिकांश आरएसएस कार्यकर्ताओं के निर्माण में यदि सबसे ज्यादा सक्रिय भूमिका किसी ने निभाई तो 1967 से 2000 के मध्य रामचंद्र पांडेय ने निभाई।
सूत्र बताते हैं कि बीजेपी में नेताओं के चयन से लेकर टिकट बंटवारे तक में युवाओं को चुन चुनकर रामचंद्र पांडेय ने आगे किया और केंद्रीय नेतृत्व को स��ी सूचनाएं दीं। बीते 10 साल में रामचंद्र पांडेय ने पश्चिम बंगाल की जमीन के चप्पे चप्पे को छान मारा। बदलाव की बयार ऐसे ही आरएसएस कार्यकर्ताओं के बूते भी बीजेपी ने बंगाल में खडी की है।
श्रीरामनवमी (चैत्र शुक्ल नवमी)
भगवान् श्रीराम जी का जन्म पुनर्वसुयुता चैत्र शुक्ल नवमी में हुआ था।
दशमीविद्धा नवमी वाले दिन ही राम नवमी का व्रत करना चाहिए, क्योंकि रामनवमी के निर्णय में अष्टमी का वेध निष���द्ध माना गया है - "दिनद्वये मध्याह्नव्याप्तौ अव्याप्तौ वा परा,अष्टमीविद्धाया
निषेधात् ।। " - ( धर्मसिन्धुः )
इस वर्ष (सं. 2083 वि. में ) चैत्र शुक्ल नवमी 26 मार्च, 2026ई. को 11 घं. 49 मि. पर आरम्भ होगी और यह अगले दिन 27 मार्च, 2026 को 10 घं. 7 मि. तक व्याप्त रहेगी।
27 मार्च, 2026 को यह नवमी दशमीविद्धा भी है और पुनर्वसुयुता भी। अतः 'श्रीरामनवमी' का व्रत 27 मार्च 2026 को मनाया जायेगा।
सप्तशती के कुछ सिद्ध सम्पुट-मन्त्र
सब प्रकार के कल्याण के लिये --
सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
बाधा-शान्ति के लिये --
सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥
प्रसन्नता की प्राप्ति के लिये --
प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि।
त्रैलोक्यवासिनामीड्ये ���ोकानां वरदा भव॥
रोग-नाश के लिये --
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा
रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां
त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥
पापनाश तथा भक्ति की प्राप्ति के लिये --
नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
विश्वव्यापी विपत्तियों के नाश के लिये --
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥
“चैत्रे मासि जगद् ब्रह्मा ससर्ज प्रथमेऽहनि।
शुक्ल पक्षे समग्रे तु तदा सूर्योदये सति”
#भारतीय_नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् २०८३ की हार्दिक शुभकामनाएं। यह नव संवत्सर सभी के लिए समृद्धि और उत्साह से परिपूर्ण हो, इस अवसर पर राष्ट्रहित में नव ऊर्जा के साथ कार्य करने का संकल्प लें।
“चैत्रे मासि जगद् ब्रह्म ससर्ज प्रथमेऽहनि” अर्थात् चैत्र मास के प्रथम दिवस में ब्रह्मा ने इस जगत् की सृष्टि का आरम्भ किया, ऐसी सनातन मान्यता के आलोक में वैदिक नववर्ष संवत् २०८३ के पावन आगमन पर आप सभी को हार्दिक शुभ���ामनाएँ, मंगलकामनाएँ एवं अभिनन्दन।
नूतन संवत्सरोऽयं शुभं भवतु।
सर्वेषां जीवनं मंगलमयं, आरोग्यमयं, समृद्धिमयं, धर्ममयं च भवतु।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का यह दिव्य दिवस केवल एक नवीन कालगणना का प्रारम्भ मात्र नहीं, अपितु नव-जागरण, नव-संकल्प, नव-चेतना और नव-सृजन का भी पावन उद्घोष है। यह वह शुभ क्षण है, जब प्रकृति स्वयं नवयौवना रूप धारण कर लेती है। वृक्षों पर नव-पल्लव फूटते हैं, दिशाएँ नवीन आभा से भर उठती हैं, पवन में मधुरता आती है, आकाश में निर्मलता उतरती है और सम्पूर्ण सृष्टि मानो नवजीवन के स्वागत में पुलकित हो उठती है। इसीलिए भारतीय मनीषा ने इस काल को केवल ऋतु-परिवर्तन का समय नहीं माना, बल्कि अंतःकरण-परिवर्तन का भी श्रेष्ठ अवसर माना है। नवरात्रि, जो इसी नववर्ष के साथ ही प्रारम्भ होती है, वस्तुतः आदिशक्ति के आवाहन, आत्मशुद्धि, साधना, संयम और आन्तरिक रूपान्तरण का महापर्व है। यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि बाह्य जगत् में होने वाला प्रत्येक नव-सृजन, भीतर की चेतना में घटित जागरण से ही सार्थक होता है। जैसे धरती अपने भीतर संचित ऊर्जा को नये पुष्पों, फलों और पल्लवों के रूप में व्यक्त करती है, वैसे ही मनुष्य भी जप, ध्यान, उपासना, स्वाध्याय, व्रत, संयम और साधना के माध्यम से अपने भीतर निहित दिव्य सम्भावनाओं को अभिव्यक्त कर सकता है। ऋतु-संधि का यह काल अत्यन्त सूक्ष्म और महत्त्वपूर्ण होता है। इस समय शरीर, मन और मस्तिष्क में अनेक अदृश्य परिवर्तन स्वाभाविक रूप से घटित होते हैं। भारतीय ऋषियों ने इन परिवर्तनों को केवल जैविक या प्राकृतिक घटना के रूप में नहीं देखा, बल्कि इन्हें मानवीय चेतना के पुनर्संतुलन और उन्नयन का अवसर माना। इसीलिए उन्होंने इस अवधि में जप, ध्यान, मौन, उपवास, देवी-उपासना, शास्त्र श्रवण, हवन और सत्संग जैसे आध्या��्मिक उपादानों का विधान किया, जिससे मन का परिष्कार हो, इन्द्रियों का संयम हो, विचारों की शुद्धि हो और जीवन का प्रवाह पुनः धर्म, संतुलन और प्रकाश की ओर उन्मुख हो सके।
नवरात्र काल हमें यह भी प्रेरणा देता है कि जीवन में जब-जब असंतुलन, अवसाद, भय, मोह, आलस्य, संशय या नकारात्मकता जैसे घातक शत्रु जन्म लेते हैं, तब-तब हमें अपने भीतर की देवी-शक्ति को जगाना होता है। पराम्बा माँ दुर्गा का पूजन बाह्य अनुष्ठान मात्र नहीं, बल्कि भीतर सुप्त शक्ति, श्रद्धा, विवेक, साहस, धैर्य, करुणा और आत्मबल को जागृत करने की साधना है। यही जागरण मनुष्य को जड़ता से गति की ओर, भ्रम से प्रकाश की ओर, दुर्बलता से शक्ति की ओर, और सीमित अहंभाव से दिव्य आत्मबोध की ओर ले जाता है। नववर्ष का यह मंगलप्रभात हम सबके जीवन में नव-उत्साह का संचार करे, नूतन विचारों को जन्म दे, अभिनव सत्संकल्पों को दृढ़ करे, नयी साधना का आरम्भ कराए,
और नयी आध्यात्मिक ऊ��चाइयों की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा दे।
यह नवसंवत्सर २०८३ हम सभी के जीवन में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के संतुलित पुरुषार्थ का प्रकाश लाए। परस्पर प्रेम वृद्धि हो, समाज में सौहार्द बढ़े, राष्ट्रभक्ति और समन्वय बढ़े, तथा सम्पूर्ण मानवता में शान्ति, सद्भाव और करुणा का विस्तार हो।
आइये ! इस पावन अवसर पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम अपने जीवन को अधिक सजग, अधिक सात्त्विक, अधिक अनुशासित और अधिक ईश्वराभिमुख बनाएँगे; अपनी चेतना को ऊर्ध्वमुखी करेंगे और इस नववर्ष को केवल कैलेंडर का परिवर्तन नहीं, बल्कि स्वभाव, संस्कार और साधना के नवीनीकरण का अवसर बनाएँगे। पराशक्ति करुणामयी माँ ललिता राजराजेश्वरी का अनुग्रह, ऋषियों की वाङ्मयी परम्परा का प्रकाश और ईश्वर की अनन्त करुणा सभी के जीवन को सुख, शान्ति, आरोग्य, समृद्धि, साधना और सिद्धि से परिपूर्ण करे।
श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रोत्���िय ब्रह्मनिष्ठ जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्ड��ेश्वर अनन्तश्रीविभूषित पूज्यपाद श्री स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज “पूज्य आचार्यश्री जी” की ओर से नववर्ष संवत् २०८३ तथा चैत्र नवरात्रि की आप सभी को पुनः हार्दिक, मंगलमय-शुभाशयपूर्ण बधाई।
"नूतन संवत्सरोऽयं शुभं भवतु।"
#नवसंवत्सर२०८३ #नव_वर्ष #विक्रम_संवत् #चैत्र_नवरात्रि #सनातन_संस्कृति
#AvdheshanandG_Quotes
#विक्रम_संवत् #गुड़ी_पड़वा
Ekashloki Sundara Kāṇḍa from the Valmiki Ramayana —when recited with devotion invokes the essence of the full Sundara Kāṇḍa if one is unable to read the entire chapter.
it is recommended during:
•Sade Sati
•Mars afflictions
•Rahu–Ketu disturbances
•Moon affliction