@RedOfficiagmiz@HemantSorenJMM@JMMKalpanaSoren@yourBabulal@RahulGandhi@ANI@FollowUp@joharlive दोषियों को सजा,निर्दोषों को न्याय।कोचिंग माफिया ओर भीड़तंत्र के दवाब में लिया गया निर्णय कही से उचित नहीं है।अब ऐसा सिस्टम बनता जा रहा जिनका सिलेक्शन नहीं होगा,भीड़ तंत्र का हिस्सा बनेंगे,कोचिंग माफियाओं के द्वारा दिग्भ्रमित होंगे ओर मेहनती और निर्दोषों की नौकरियों रद्द करवाएंगे
देखिए, ये महाशय किस तरह छात्रों को दिग्भ्रमित कर उनके भविष्य से खिलवाड़ करने पर तुले हुए हैं।
आपके ऊपर 7 केस हैं, शायद आपको इससे कोई फर्क न पड़े। लेकिन झारखंड के गरीब छात्र आपकी तरह दलाली करना नहीं जानते।
छात्रों के भविष्य को अपनी राजनीति और स्वार्थ का माध्यम बनाना बंद कीजिए।
ये हैं अनिल रजक जी, ये ऑटो चालक थे, पिता नहीं हैं लेकिन हार नहीं मानी अपनी मेहनत से JSSC CGL में नौकरी पाई। लेकिन आज कोचिंग माफियाओं द्वारा जांच की मांग न कर सीधे रद्द कराके इनकी जिंदगी अधर में लटका दी हैं, अगर लोकतंत्र में इनका नहीं सुना जाए तो सब दिखावा है🥺🥺 JSSC_CGL
@gutthi_org@The_FollowUp@JmmJharkhand@JHAR98765@prabhatkhabar भाजपा के राजनीतिक दलालों की तरह काम करने वालों और चंदे के नाम पर राजनीति चमकाने वालों
कोचिंग के नाम पर दुकानदारी और छात्रों के नाम पर राजनीति—दोनों नहीं चलेंगे।
छात्रों का भविष्य किसी के निजी एजेंडे की जागीर नहीं है।
सिलेबस बदले या कठिन हो—तैयारी इतनी ऊँची रखो कि फर्क ही न पड़े! 📚🔥
हर आंदोलनकारी शिक्षक आपका हितैषी नहीं होता; कुछ पढ़ाने कम और नेता बनने अधिक आते हैं। इसलिए भीड़, भाषण और परीक्षा रद्द होने की उम्मीद में अपना समय मत गँवाइए।
कोचिंग दिशा दे सकती है, सफलता नहीं।
असली हथियार—स्वाध्याय, अनुशासन और ऊँचा लक्ष्य है।
ऐसी तैयारी कीजिए कि JPSC–JSSC पाठ्यक्रम बदलें, प्रश्न कठिन करें या प्रतिस्पर्धा बढ़े—आप हर परिस्थिति के लिए तैयार रहें।
नेताओं के पीछे नहीं, अपने लक्ष्य के पीछे चलिए।
परीक्षा बदल सकती है—मेहनत का परिणाम नहीं! 🎯
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JSSC CGL: न्याय का रास्ता क्या हो?
यदि चयनित अभ्यर्थियों में कुछ वास्तव में गलत तरीके से चयनित हुए हैं, तो सवाल यह नहीं होना चाहिए कि “पूरी परीक्षा बचाई जाए या पूरी परीक्षा रद्द की जाए।”
असल सवाल होना चाहिए
क्या दोषी और ईमानदार अभ्यर्थियों को साक्ष्यों के आधार पर अलग-अलग पहचाना जा सकता है?
यदि हाँ, तो एक “Individual Accountability & Selection Protection Formula” अपनाया जा सकता है।
1. सबसे पहले — अभ्यर्थी-वार स्वतंत्र जांच
CID/SIT प्रत्येक चयनित अभ्यर्थी की परीक्षा-संबंधी सामग्री और उपलब्ध साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच करे।
OMR/उत्तर-पुस्तिका, परीक्षा-केंद्र रिकॉर्ड, उपस्थिति, CCTV, डिजिटल लॉग, दस्तावेज, परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े व्यक्तियों के बयान तथा अन्य विधिसम्मत साक्ष्यों का परीक्षण किया जाए।
केवल सोशल मीडिया आरोप, अफवाह या सामूहिक संदेह को दोष का आधार न बनाया जाए।
2. तीन स्तर पर वर्गीकरण
🟢 Green: कोई ठोस प्रतिकूल साक्ष्य नहीं
→ चयन/सेवा को केवल संदेह के आधार पर प्रभावित न किया जाए।
🟠 Amber: वास्तविक विसंगति या संदेह मौजूद
→ विस्तृत जांच हो, अभ्यर्थी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिले और निर्धारित समय में निर्णय हो।
🔴 Red: अनुचित साधन, प्रश्नपत्र संबंधी अपराध, नकल, प्रतिरूपण, फर्जी दस्तावेज या अन्य अनियमितता के पर्याप्त साक्ष्य
→ लागू कानून और प्राकृतिक न्याय के अनुसार संबंधित व्यक्ति पर व्यक्तिगत कार्रवाई हो।
यह वर्गीकरण स्वयं दोषसिद्धि नहीं होगा, बल्कि जांच को व्यवस्थित करने का माध्यम होगा।
3. मूल सिद्धांत —“व्यक्तिगत दोष, व्यक्तिगत दंड”
मान लीजिए 1,000 अभ्यर्थी चयनित हुए और जांच में 50 अभ्यर्थियों के विरुद्ध अनियमितता प्रमाणित हो गई।
तो पहले विकल्प के रूप में उन 50 के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
बाकी 950 से यह सवाल क्यों पूछा जाए कि उन्होंने उस परीक्षा में चयन कैसे प्राप्त किया?
सिर्फ इसलिए कि वे उसी परीक्षा से चयनित हुए हैं, उन्हें सामूहिक रूप से दोषी मानना न्यायसंगत नहीं हो सकता।
4. लेकिन एक महत्वपूर्ण अपवाद भी
यदि CID/SIT की जांच यह प्रमाणित करती है कि धांधली कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि—
• व्यापक थी,
• संगठित थी,
• परीक्षा के परिणाम को बड़े स्तर पर प्रभावित करती थी, और
• दोषी एवं ईमानदार अभ्यर्थियों को विश्वसनीय रूप से अलग करना संभव नहीं है,
तब संपूर्ण परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठेगा और पूरी परीक्षा/चयन प्रक्रिया के संबंध में कठोर निर्णय आवश्यक हो सकता है।
अर्थात
पहले यह निर्धारित हो कि समस्या “Individual Malpractice” है या “Systemic Contamination”।
5. प्राकृतिक न्याय अनिवार्य हो
किसी भी अभ्यर्थी के विरुद्ध केवल आरोप के आधार पर अंतिम कार्रवाई न हो।
उसे आरोप की जानकारी, उपलब्ध प्रतिकूल सामग्री की विधिसम्मत जानकारी और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले।
जांच लंबित होना = दोष सिद्ध होना नहीं।
6. ईमानदार चयनित अभ्यर्थी भी जांच में सहयोग करें
सेवा में 6–7 महीने बिता चुके चयनित अभ्यर्थियों को अपने आसपास के सहकर्मियों की परीक्षा-संबंधी गतिविधियों के बारे में कुछ जानकारी हो सकती है।
यदि किसी को किसी वास्तविक अनियमितता की विश्वसनीय जानकारी या साक्ष्य है, तो वह CID/SIT के समक्ष प्रस्तुत करे।
लेकिन शिकायत किसी को बदनाम करने के लिए नहीं, बल्कि सत्यापन योग्य तथ्य और साक्ष्य उपलब्ध कराने के उद्देश्य से होनी चाहिए।
सही जानकारी देने वालों के लिए गोपनीय एवं सुरक्षित शिकायत तंत्र बनाया जाना चाहिए।
7. पूरी परीक्षा रद्द करना अंतिम उपाय क्यों होना चाहिए?
क्योंकि किसी परीक्षा में यदि कुछ लोगों ने अपराध किया है, तो उनका अपराध स्वतः हर चयनित अभ्यर्थी का अपराध नहीं बन जाता।
लेकिन यदि अपराध की व्यापकता इतनी हो कि पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता ही समाप्त हो जाए, तो केवल कुछ लोगों को निकाल देना भी पर्याप्त नहीं होगा।
इसलिए समाधान भावनात्मक नहीं, साक्ष्य-आधारित होना चाहिए।
निर्णय का सही क्रम:
आरोप → स्वतंत्र जांच → अभ्यर्थी-वार साक्ष्य → वर्गीकरण → प्राकृतिक न्याय → दोषी की पहचान → व्यक्तिगत कार्रवाई → प्रणालीगत प्रभाव का मूल्यांकन → और आवश्यकता सिद्ध होने पर ही संपूर्ण परीक्षा पर निर्णय।
यही संतुलित रास्ता है।
न दोषी बचना चाहिए,
न निर्दोष फंसना चाहिए।
JSSC CGL में न्याय का पैमाना यह नहीं होना चाहिए कि “कितनों को हटाया गया”, बल्कि यह होना चाहिए कि—
“जिसने गलत किया, उसकी पहचान हुई या नहीं; और जिसने ईमानदारी से सफलता हासिल की, उसका अधिकार बचा या नहीं।”
दोषी को दंड देना न्याय है।
निर्दोष को दंडित करना अन्याय है।
@HemantSorenJMM
झारखण्ड में एक नया रोजगार उत्पन्न हुआ है, चंदा का........
👉अब कोर्ट के नाम पर नया QR CODE जारी करेगा।
👉लेकिन पहले वाला 50 लाख का हिसाब नहीं देगा।
👉बोला जाएगा जल्दी से 50 का जुगाड़ करो।
👉गरीब स्टूडेंट न्याय मांग रहे है,और ये लोग नोट गिन रहे है😭
#Chandagivi से सावधान रहे! 🙏
🚩🚩झारखंड में छात्र आंदोलन का नया करियर प्लान—
छात्र परीक्षा देते रहें, छात्र नेताजी विधायक बनते रहें! 🪑🪑
कोचिंग माफिया पढ़ाएगा कम, आंदोलन ज्यादा कराएगा; चंदा छात्र देगा और राजनीतिक भविष्य नेताजी का बनेगा। छात्र परीक्षा के चक्र में घूमता रहेगा—उम्र, पैसा, समय और ऊर्जा उसकी; कुर्सी नेताजी की! 🪑🪑
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