उत्तराखंड –
केंद्र सरकार में पूर्व मंत्री/BJP सांसद अजय भट्ट ने औषधियाँ बनाने वाली IMPCL का निजीकरण रोकने के लिए PM मोदी सहित तमाम मंत्रियों को दर्जनों चिट्ठियाँ लिखी। बताया कि देशवासियों के इलाज में IMPCL की क्या भूमिका है। यह भी जानकारी दी कि 1983 से आज तक IMPCL प्रॉफिट में रही है।
अजय भट्ट ने हवाला दिया था कि इस कंपनी के बिकने से पहाड़ी क्षेत्र में रोजगार/पलायन की समस्या हो जाएगी।
भट्ट साहब और कई BJP नेताओं/मंत्रियों की दर्जनों चिट्ठियों को नजरअंदाज करके केंद्र सरकार ने IMPCL 121 करोड़ रुपए में निजी कंपनी को बेच दी। जबकि यह कंपनी लगातार प्रॉफिट में चल रही थी।
#असिस्टेंट_प्रोफेसर_जियोग्राफी ~ भूगोल --
73 हरियाणा से बाहरी 116 जनरल में से !!
हिंदी के बाद अब भूगोल के जोइनिंग लेटर्स -
इसमें भी *as expected* हरियाणा के युवाओं के हिस्से की नौकरियाँ लगातार बाहर वालों को दी गयी हैं -
और ऊपर से आंकड़ों की बाज़ीगरी करके “भर्तियाँ भर दीं” का नैरेटिव बनाया गया है !!
हरियाणा के युवाओं की मेहनत, टैक्स और वर्षों की तैयारी —
सब कुछ दाँव पर --
जनरल की कुल सीट - 181
जिनमे से भरी गयी - 146
इस बार आंकड़ों की कलाकारी ताकि खाली सीट का आंकड़ा कम दिखे -- 30 reserved category के अभ्यर्थियों को जनरल में जगह दी गयी (बेशक़ reserved की सीट खाली रहें )!!
तो 116 जनरल से भरी गयी सीट में से 73 हरियाणा से बाहर के अभ्यर्थियों को व 43 हरियाणा के युवाओं को !
और इस बार लिस्ट में बीच बीच में reserved category के अभ्यर्थियों का नाम भी डाला गया ताकि सारे पन्ने रंगीन न दिखें एकदम से (क्यूंकि मैं तो हाईलाइट करके ही दिखाउंगी)
सत्यानाश जब तक नहीं कर देंगे हरियाणा के युवाओं का तब तक नहीं रुकेंगे ये !!
है न @NayabSainiBJP जी ? @HariprasadBK2@raonarenderinc@DeependerSHooda@JitendraBaghel_
detailed सभी पेज fb पर -
#श्वेता_ढुल
ये है हमारा लेवल ~
शर्म आनी चाहिए सरकार को !
हरियाणा की उच्च शिक्षा व्यवस्था की हकीकत बेहद चिंताजनक है।
जहां एक ओर विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर 32 सरकारी कॉलेज ऐसे हैं जिनके अपने भवन तक नहीं हैं। कहीं कक्षाएं स्कूलों में चल रही हैं, तो कहीं मंदिरों में। सोचिए, जिस उम्र में युवाओं को बेहतर माहौल और संसाधन मिलने चाहिए, वहां वे टीन शेड के नीचे या प्लास्टिक की कुर्सियों पर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
स्थिति यहीं नहीं रुकती—185 सरकारी कॉलेजों में हजारों पद खाली पड़े हैं और लगभग आधा स्टाफ ही काम कर रहा है। ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। जब शिक्षक ही पर्याप्त नहीं होंगे, तो छात्रों का भविष्य कैसे संवर पाएगा?
यह सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, यह उन लाखों छात्रों के सपनों का सवाल है जो बेहतर शिक्षा के भरोसे अपना कल बनाना चाहते हैं। अगर आज भी शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।
अब वक्त है कि शिक्षा व्यवस्था को सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर मजबूत किया जाए—पक्के भवन, पूरा स्टाफ और बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। क्योंकि किसी भी राज्य की असली ताकत उसके शिक्षित युवा ही होते हैं।
@HariprasadBK2@raonarenderinc@JitendraBaghel_
@NCIBHQ थाना सार्वजनिक स्थान है,लेकिन पूरे थाना की रिकॉर्डिंग नहीं की जा सकती जैसे मालखाना रूम,रिकॉर्ड रूम, कंप्यूटर/CCTNS रूम आदि।
बाकी साथ साथ कोर्ट रूम की रिकॉर्डिंग पर भी जज साहब निर्देश दे देते तो सोने पर सुहागा हो जाता।
सोनीपत के गांव कुराड का रहने वाला 26 साल का नौजवान युवक अंकित अपने परिजनों को समझा बुझाकर करीब एक एकड़ जमीन बेचकर साल 2025 में कुछ रुपए लेकर रूस में पढ़ाई करने पहुंच गया और वहां उसने एक होटल में पहले तो नौकरी करनी शुरू की। बाद में जब रूस और यूक्रेन में युद्ध शुरू हुआ तो हजारों भारतीय नौजवानों के साथ साथ रूसी सेना ने अंकित को भी जबरदस्ती अपनी सेना में भर्ती कर लिया। इस युद्ध में अंकित की मौत हो गई। आज उसका शव गांव कुराड में पहुंचा।
#Haryana Sonipat #Ankit
कुरुक्षेत्र अम्बाला यमुनानगर इन जिलों से मुख्यमंत्री नायब सैणी जी का राजनितिक व परिवारिक नाता है
इस क्षेत्र में आलू की बम्पर खेती होती है
आपको यकीन नहीं होगा की पिपली मंडी कुरुक्षेत्र में आलू को कोई मुफ्त भी खरीदने को तैयार नहीं है
मंडी में आलूओं के डेर पड़े हैं कोई खरीददार नहीं है, प्रशासन मंडी से आलू उठाकर डंप कर रहा है
जो ये कहते है की खेती एक बढ़िया बिजनैस है और सभी फसलों पर MSP मिलती है
उनसे विनती है की पिपली मंडी में जरूर जाकर देखें
''पिछले 3 सालों में बैंकों ने सिर्फ़ ‘मिनिमम अकाउंट बैलेंस’ न रखने के लिए ₹19,000 करोड़ वसूला है। अमीरों से नहीं। बड़े कर्ज़ लेने वालों से नहीं। सिस्टम में सबसे गरीब अकाउंट्स से। उनका गुनाह? उनके पास काफ़ी पैसे नहीं थे।
कई मामलों में किसान के खाते में न्यूनतम राशि कम होने पर पेनल्टी लगाई गई। पेंशनर जब दवा के लिए पैसे निकालते हैं तो उन पर भी जुर्माना लगाया जाता है। वहीं दिहाड़ी मजदूर के खाते में कुछ सौ रुपये कम होने पर भी पेनल्टी वसूली जाती है।
गरीब लोग बैंकों में पैसा सुरक्षा के लिए रखते हैं। गरीब होने के लिए चुपचाप जुर्माना नहीं लगाया जाना चाहिए। फाइनेंशियल इनक्लूजन को छोटी बचत की रक्षा करनी चाहिए, न कि छोटे बैलेंस को सज़ा देनी चाहिए।
आज संसद में मैंने मिनिमम बैलेंस पेनल्टी खत्म करने का प्रस्ताव रखा ताकि बैंकिंग सिस्टम लोगों से उनकी गरीबी के लिए पैसे लेना बंद कर दे।''
दिल्ली : राज्यसभा में आप सांसद राघव चड्ढा का बड़ा बयान
#FinancialInclusion #BankingReform #RBI @raghav_chadha@AamAadmiParty #MinimumBalance
अगर आम एक पेट काट दे तो वन विभाग 5-6 साल कोर्ट के चक्कर कटवाता है ।
वही धन्ना सेठ के लिए 119000 पेड़ की बलि दे दिया ।
अब विपक्ष , सरकार पर्यावरणवादी किसी को कोई दिक्कत नहीं है ।
क्योंकि ये विकाश है !