बहनों इस उम्र तक रिश्ता निभा सको तो
आओ राखी बँधवाता हूँ।
मुश्किलें हैं‚ मगर ईमान नहीं छोड़ा है
ज़िंदगी ने अभी मैदान नहीं छोड़ा है
ताउम्र रिश्ता निभाऊंगा मेरी बहना
बाँधों राखी हाथों ने जान नहीं छोड़ा है
#HappyRakshaBandhanꫂ❁👫𓍯𓂃 🧆🏵️📿 🪔✨
नागपुर में 36 टन प्रतिबंधित थाई मांगुर मछलियों की खेप जब्त!
नागपुर के मत्स्य विभाग ने प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली के अवैध पालन और बिक्री पर कड़ी कार्रवाई की है. विभाग ने 36 टन मछलियों को नष्ट कर दिया.
Credit- Yogesh Pandey
शाम आते ही ग़म निकलता है
साथ सूरज के दिल भी ढलता है
मौत आती है ख़ुश-नसीबों को
मेरे जैसों को ग़म निगलता है
कैसे बीतेगी ज़िंदगी तुम बिन
सोचने पर ही दम निकलता है
मिट ही जाएगा ग़म भी सीने का
'उम्र भर कौन साथ चलता है
- अनस भोपाली
हमने अदब से हाथ उठाया सलाम को
समझा उन्होंने इससे है खतरा निजाम को
चोरी न करें झूठ न बोलें तो क्या करें
चूल्हे पे क्या उसूल पकायेंगे शाम को?
- अदम गोंडवी
मैं अपने भीतर
कुछ निरर्थक चीज़ें बचाए रखना चाहता हूँ ।
थोड़ी-सी लज्जा ,
थोड़ी-सी जिज्ञासा ,
थोड़ा-सा विस्मय ,
किसी के लौट आने की उम्मीद ,
किसी के चले जाने पर
उसे बुरा न कह पाने की विवशता ,
और रात के सबसे गहरे पहर में भी
सुबह पर विश्वास।
/ आरव
यह कदम्ब का पेड़ / सुभद्राकुमारी चौहान
यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे।
मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे॥
ले देतीं यदि मुझे बांसुरी तुम दो पैसे वाली।
किसी तरह नीची हो जाती यह कदंब की डाली॥
तुम्हें नहीं कुछ कहता पर मैं चुपके-चुपके आता।
उस नीची डाली से अम्मा ऊँचे पर चढ़ जाता॥
वहीं बैठ फिर बड़े मजे से मैं बांसुरी बजाता।
अम्मा-अम्मा कह वंशी के स्वर में तुम्हे बुलाता॥
सुन मेरी बंसी को माँ तुम इतनी खुश हो जाती।
मुझे देखने काम छोड़ कर तुम बाहर तक आती॥
रात भर फ़ुर्क़त के साए दिल को दहलाते रहे
ज़ेहन में क्या क्या ख़याल आते रहे जाते रहे
सैंकड़ों दिलकश बहारें थीं हमारी मुंतज़िर
हम तिरी ख़्वाहिश में लेकिन ठोकरें खाते रहे
तेरी ख़ातिर इश्क़ में बर्बाद होना था हुए
हम न माने लोग हम को लाख समझाते रहे
- ज़हीर अहमद ज़हीर
Redmi ने अपना सबसे तेज फोन Redmi Turbo 5 लान्च किया है. कंपनी का दावा है ये बहुत फास्ट काम करता है. इससे आपका काफी समय बचेगा. आइए जानते हैं कितना फास्ट है ये फोन?
Redmi | Smart Phone
ऐसा तो है नहीं इनको पहली बार पीछे हटना है पहले भी किसान बिल वापस ले चुके है.
तो अगर बच्चों को लग रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होना चाहिए तो पीछे हटने का विकल्प गलत थोड़ी है: विकास दिव्यकृति
"वर्दी सत्ता की नहीं, संविधान की होती है।"
आर्मी ऑफिसर के बीवी ने वर्दी का क्या धर्म ओर क्या फ़र्ज़ होता है ये खूबसूरत तरीके से समझाया
"आपके कंधों के सितारे ताकत नहीं, जिम्मेदारी का प्रतीक हैं। अशोक चिन्ह याद दिलाता है कि आपकी निष्ठा किसी सरकार से नहीं, संविधान और देश की जनता से है।
लाठी आवाज़ दबाने के लिए नहीं, कानून की रक्षा के लिए है। वर्दी का सम्मान उसके कपड़े से नहीं, उसे पहनने वाले के चरित्र से होता है।
वर्दी का धर्म: सेवा, संयम और संविधान।" 🇮🇳
Modi has UNITED the entire country AGAINST him.
People from all walks, all religions, all castes, all regions, from a small child to the elderly folks... Each one of them are TOGETHER.
Each one , and Unitedly All of them want to kick out the RSS BJP out of India forever.