ये मुसलमान है। ये महिला है। ये पत्रकार है। ये Gen-Z है।
जुर्म इतना है कि देशभक्त महिला पत्रकार ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से सवाल पूछ लिया। फिर अमित शाह की दिल्ली पुलिस ने बेरहमी से इस बहन की पिटाई कर दी।
मोदी जी के अमृतकाल वाले कथित न्यू इंडिया में अब मुसलमान होना, महिला होना और निष्पक्ष पत्रकार होना, सबसे बड़ा गुनाह है।
भाजपा ने पूरे देश में सत्ताई निरंकुशता की हर सीमा को लाँघ दिया है। निरंकुश भाजपा सरकारों से अब सवाल पूछना उनकी आलोचना करना ही सबसे बड़ा अपराध है।
दिल्ली हो या बिहार, हर जगह कायर भाजपाई अब पुलिस से पत्रकारों को पिटवा रहे हैं, डरा रहे हैं। भाजपा के शासनकाल में संवैधानिक संस्थाएं और पुलिस लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का प्रतीक बन गई है।
@asadowaisi@aimim_national@narendramodi@CMOfficeUP@CMODelhi@PMOIndia
अजीत भारती दलित लड़कियों को बांधकर जबरदस्ती,रेप करना चाहता है।
स्वतंत्र भारद्वाज मुस्लिम लड़कियों को मुल्लानी बताते हुए अपनी दीवानी बताता है।
दलित का सिर फाड़ देता है, अखिलेश यादव की मां दादी को गाली देता है।
दोनों आरक्षण विरोधी हैं यही इनमें कॉमन नाता है
Is this true @CPDelhi? Criminal gang members openly masquerading as Police officers—is this not a very urgent security threat in capital of the country? Is this why law & order situation is so bad?
बेरहमी की सभी सीमाएं पार कर दी हैं आपने @DelhiPolice . आप जिसे मर्जी उठाकर ले जाते हैं- जिसके साथ चाहें बर्बरता करते हैं? कोई जवाबदेही है @CPDelhi ? शर्मनाक! कुछ कहेंगी आप @gupta_rekha ? In solidarity with the Reporters of @4pmnews_network
दिल्ली पुलिस की बर्बरता का अंदाज़ा आप इस 16 सेकंड की वीडियो से लगा सकते हैं। पत्रकार का नाम नफ़ीसा है। उन्हें इस कदर पीटा गया कि उनकी सिसकती हुई आवाज़ खुद पूरी कहानी बयां कर रही है।
अब हमारी मांग है कि थाने की CCTV फुटेज सार्वजनिक की जाए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
सभी पत्रकारों को एकजुट होकर आवाज़ उठानी होगी। धार्मिक पहचान की बुनियाद पर पर दिल्ली पुलिस की यह कथित गुंडागर्दी बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है।
क्या अब पुलिस में भी आतंकवादी आ गए हैं ??
धर्म पूछ के मारा यहीं बात तो पुलवामा हमला में आतंकवादियों ने किया था और यही काम अब पुलिस द्वारा किया जा रहा हैं!
यह केवल संयोग नहीं है बल्कि मुझे लगता है ये पूरी आतंकवादी और पुलिस की मिलीजुली व्यवस्था हो सकता हैं— धर्म पूछ के मारना!
या तो इस पुलिस को ट्रेनिंग आतंकवादीयो द्वारा दिया जा रहा हैं या तो आतंकवादियों को ट्रेनिंग पुलिस द्वारा दी जा रही है!!
मोदी जी ध्यान दीजिए कुछ तो दाल में काला हैं।
Bureaucrats are being picked up from their morning walks. Journalists are being beaten inside police stations.
Yet we are told this is the “Mother of Democracy.”
Mother of democracy? Or the mother of all authoritarianism, Sarkar ?
When this attack happened, I personally went to the DCP and asked him to arrest these goons. The DCP replied, “We can’t arrest people randomly.”
I told him, “The attack happened right in front of the police. How can you say you can’t arrest them?”
To which the DCP replied, “You are free to go to the courts”
Such is the attitude of Delhi Police.
ये मुसलमान है। ये महिला है। ये पत्रकार है। ये Gen-Z है।
जुर्म इतना है कि देशभक्त महिला पत्रकार ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से सवाल पूछ लिया। फिर अमित शाह की दिल्ली पुलिस ने बेरहमी से इस बहन की पिटाई कर दी।
मोदी जी के अमृतकाल वाले कथित न्यू इंडिया में अब मुसलमान होना, महिला होना और निष्पक्ष पत्रकार होना, सबसे बड़ा गुनाह है।
भाजपा ने पूरे देश में सत्ताई निरंकुशता की हर सीमा को लाँघ दिया है। निरंकुश भाजपा सरकारों से अब सवाल पूछना उनकी आलोचना करना ही सबसे बड़ा अपराध है।
दिल्ली हो या बिहार, हर जगह कायर भाजपाई अब पुलिस से पत्रकारों को पिटवा रहे हैं, डरा रहे हैं। भाजपा के शासनकाल में संवैधानिक संस्थाएं और पुलिस लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का प्रतीक बन गई है।
दिल्ली में महिला पत्रकारों के साथ हुई बदसलूकी के मामले पर सुप्रीम कोर्ट के वकील खुलकर समर्थन में उतरे। उन्होंने दोषियों और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई और जेल भेजने की मांग की है।
"पत्रकारों की सुरक्षा और देश की हिफाजत करना हम सबकी जिम्मेदारी है।"
#Delhi#JournalistSafety #Justice #SupremeCourt
दिल्ली पुलिस में बैठे कुछ अधिकारियों की कथित हरकतें संविधान और क़ानून के मूल्यों के बिल्कुल विपरीत हैं। 4PM की महिला पत्रकार के साथ मारपीट और नाम पूछकर कथित तौर पर धर्म के आधार पर उग्रता दिखाना बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है।
गृहमंत्री अमित शाह जी के अधीन दिल्ली पुलिस की ऐसी कार्यशैली लोकतंत्र और क़ानून के राज पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
4PM की महिला पत्रकार शाहीन के साथ अल्पसंख्यक विभाग लीगल सेल की टीम साकेत थाने में मौजूद है,अल्पसंख्यक विभाग के NOB महमूद ख़ान जी अस्पताल से थाने तक पत्रकार बहन के साथ हैं, मैं भी लगातार उनके संपर्क में हूँ, मुख्यमंत्री से सवाल पूछने पर शाहीन के साथ बर्बरता करने वाले पुलिसकर्मियों के साथ क़ानूनी कार्यवाही सुनिश्चित होनी चाहिये।
@INCMinority@MahmoodKhanINC
रात के 1 बज रहे हैं और इस वक्त भी मै अकेली लड़की घर से काफी दूर साकेत थाने में हूं , सिर्फ इसलिए नहीं कि मैं एक पत्रकार हूं बल्कि इस लिए भी की जुल्म को अनदेखा करना जुल्म का साथ देना कहलाता है।
आप खुद से भी जरूर पूछें, आप आजाद हैं या आपको खामोश कर दिया गया है!
- पूजा माथुर #4PM
यह बेहद शर्मनाक है और पत्रकारिता की आज़ादी पर सीधा हमला है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
@asadowaisi@warispathan
"मेरी बच्ची का ऑपरेशन होता था। डॉक्टर बहुत सालों से टालते रहे। मुझे परेशान करते रहे। इन्होंने मेरी बच्ची को मार डाला"
दिल्ली एम्स में बेटी तन्वी की मौत के बाद उनकी मां का दर्द सुनिये। एम्स 14 साल में भी दिल के छेद की सर्जरी नहीं कर सका।