ऐसे अनगिनत वीडियो देखने को मिल रहे हैं ! लोगों की गाड़ियाँ ख़राब हो रही है!
भरपाई कौन करेगा? गडकरी जी का बेटा?
एक पुत्रमोह में गडकरी जी ने करोड़ों भारतीय नागरिकों का नुक़सान किया है।
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भरपाई कौन करेगा? गडकरी जी का बेटा?
एक पुत्रमोह में गडकरी जी ने करोड़ों भारतीय नागरिकों का नुक़सान किया है।
बर्खास्त सिपाही सुनील शुक्ला का बीजीपी को अल्टीमेटम
मेरी बर्खास्तगी ईस्ट इंडिया बीजेपी के विजय रथ के ताबूत की आखिरी कील साबित होगी....
पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार की आवाज उठाने वाले सिपाही सुनील कुमार शुक्ला को बर्खास्त कर दिया गया था।
@SunilShukl82761@Uppolice#uppolice
अहम बात ये है कि ये खुद बीजेपी सपोर्टर थे 😮
पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार की आवाज उठाने वाले सिपाही सुनील कुमार शुक्ला को बर्खास्त कर दिया गया,
क्रांति इतनी आसान नहीं होती। इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है,
जैसे ईमानदार सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने चुकाई।
भरत तिवारी को अभी न्याय मिला ही नहीं था की तब तक उत्तर प्रदेश पुलिस के बेहद ईमानदार सिपाही श्री सुनील शुक्ल को भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने के लिए बर्खास्त कर दिया गया ।
ब्राह्मणों के बलिदान के दिन चल रहे हैं सबको एकजूट होना होगा भरत तिवारी के साथ साथ सुनील शुक्ल के लिए भी आवाज़ उठाना होगा । बेहद शालीन प्रवृति के ईमानदारी की प्रतिमूर्ति सुनील शुक्ल जी को सड़क, से संसद तक , कार्यपालिका से न्यायपालिका तक मदद की जायेगी आइए आप भी साथ दीजिए इस ईमानदार सिपाही सुनील शुक्ल का।
भरत तिवारी तो भ्रष्टाचार से लड़ते हुवे वीरगति को प्राप्त हो गए लेकिन सुनील शुक्ल को हमें बचाना होगा।
@myogiadityanath कृपया इस विषय का तत्काल संज्ञान लीजिए , अन्यथा ब्राह्मणों का वोट भूल जाइए ।
सुनील शुक्ला ब्राह्मण है इसलिए भ्रष्टाचार की पोल खोलने पर बर्खास्तगी मिली वही फायर का सिपाही राठौर विशेष वर्ग से है और वह वर्षों से विभाग का भ्रष्टाचार बता रहा है उसका कुछ नहीं। अलंकार का स्तीफा (यदि दिया गया है क्योंकि सार्वजनिक नही है) वह भी स्वीकार नही किया। @VoiceOfBrahmins
उत्तर प्रदेश पुलिस ने विभागीय अनुशासन और सोशल मीडिया नीति के उल्लंघन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया है.
करप्ट सिस्टम से लड़ने वाले एक और भगत सिंह जैसा कलेजा रखने वाले सिपाही सुनील शुक्ला को नौकरी से बर्खास्त कर दिया।
सिस्टम से लड़ना से आसान नही है, हर किसी को भरत तिवारी जैसा जनसमर्थन नही मिलता है, भरत तिवारी को भी जीते जी बड़ा जनसमर्थन नही मिला, यहां मरने के बाद लोगो का ज्यादा कद्र किया जाता है।।
वह भी यूपी में भूल ही जाओ, वँहा के समाज अंधभक्त में रीढ़विहीन हो चुका है, क्रांति की कीमत शुक्ला जी को नौकरी से हाथ धोकर चुकाना पड़ा।
UP पुलिस द्वारा सुनील शुक्ला जी की बर्खास्तगी ने साबित कर दिया कि देश में भ्रष्ट तंत्र बहुत मजबूत है।
इतना मजबूत भ्रष्ट तंत्र एक सामान्य सिपाही को की भ्रष्टाचार विरोधी बात को दबा ही देगा।
खैर इस भ्रष्टाचार प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जजों से होनी चाहिए क्योंकि अभी जो जांच हुई है उसमें वहीं लोग शामिल होंगे जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार की आवाज उठाई गई थी।
#सुनील_शुक्ला_को_बहाल_करो
उत्तर प्रदेश पुलिस के सिपाही सुनील कुमार शुक्ला को आखिरकार सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। आरोप यह है कि उन्होंने पुलिस आचरण नियमावली का उल्लंघन किया, लेकिन जनता के बीच यह सवाल गूंज रहा है कि क्या उनकी असली गलती उत्तर प्रदेश पुलिस के भीतर कथित भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठाना थी?
सुनील कुमार शुक्ला ने सोशल मीडिया पर दर्जनों वीडियो जारी किए, इंटरव्यू दिए, व्यवस्था पर सवाल उठाए, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें ही व्यवस्था से बाहर कर दिया गया। संदेश साफ है अगर सिस्टम पर सवाल उठाओगे, तो सिस्टम तुम्हें ही सजा देगा।
आज सुनील कुमार शुक्ला नौकरी हार गए होंगे, लेकिन उन्होंने डर के सामने झुकने से इनकार किया। अब सवाल जनता से है क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले को दंड मिलना चाहिए, या भ्रष्टाचार पर सवाल उठाने वालों की बात सुनी जानी चाहिए?
आपकी राय क्या है? क्या यह कार्रवाई केवल अनुशासनात्मक है, या भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी आवाज को दबाने का संदेश?
मेरी बर्खास्तगी ईस्ट इंडिया बीजेपी के विजय रथ के ताबूत की आखिरी कील साबित होगी.... बर्खास्त सिपाही सुनील शुक्ला बीजीपी को अल्टीमेटम
पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार की आवाज उठाने वाले सिपाही सुनील कुमार शुक्ला को बर्खास्त कर दिया गया। क्रांति इतनी आसान नहीं होती। इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। जैसे ईमानदार सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने चुकाई।
आज 28 जून 2026 को सिपाही सुनील शुक्ला को
उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है
सुनील शुक्ला बोलते है कि इससे तनिक भी दुख नहीं मुझे और प्रशासन को अपने विशेष शब्दों से उपमा दे रहे है
मेरी बर्खास्तगी ईस्ट इंडिया बीजेपी के विजय रथ के ताबूत की आखिरी कील साबित होगी.... बर्खास्त सिपाही सुनील शुक्ला बीजीपी को अल्टीमेटम
पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार की आवाज उठाने वाले सिपाही सुनील कुमार शुक्ला को बर्खास्त कर दिया गया। क्रांति इतनी आसान नहीं होती। इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। जैसे ईमानदार सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने चुकाई।
उत्तर प्रदेश अग्निशमन विभाग में 11 लाख रुपए की बुलेट आई है..जबकि उसकी कीमत कुल 3
लाख रुपए है..!
सोचिए 1 बुलेट में 8 लाख रुपए का घोटाला किया
गया है DG द्वारा..!
लखनऊ में अग्निकांड स्थल पर पहुंचे फायरमैन जितेंद्र राठौर के आरोप सुनिए..!
ये संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।
एक महिला जिसने अपना बेटा खोया है योगी जी उनसे कह रहे हैं “भाषण मत दीजिए”
योगी अग्निशमन विभाग का सिपाही आरोप लगा रहा है “3 लाख बुलेट 11 लाख में खरीदी गई”
4 मंजिला इमारत कैसे बन गई?
इन मुद्दों पर आप ही भाषण दे दीजिए योगी जी।
सर्वोच्च न्यायालय ने अनेक मामलों में माना है कि यदि किसी संस्था, ट्रस्ट, सोसायटी या धार्मिक निकाय के पदाधिकारियों द्वारा चोरी, गबन, आपराधिक न्यासभंग
(Criminal Breach of Trust),
धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार जैसे अपराध किए जाने का आरोप हो तो सामान्य आपराधिक कानून लागू होगा और पुलिस जांच कर सकती है।
ट्रस्ट का अस्तित्व आपराधिक जांच से प्रतिरक्षा (immunity) नहीं देता।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट के संदर्भ में भी उपलब्ध न्यायिक अभिलेखों में इसे संसद द्वारा स्थापित वैधानिक निकाय नहीं बल्कि एक स्वतंत्र ट्रस्ट बताया गया है।
इसलिए यदि कोई संज्ञेय अपराध बनता है
तो सामान्य आपराधिक कानून लागू होने का सिद्धांत रहेगा।
मेरे ज्ञान में ऐसा कोई विशिष्ट सुप्रीम कोर्ट निर्णय नहीं है जिसमें सीधे "श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट" या "सुप्रीम कोर्ट के आदेश से गठित ट्रस्ट" के संदर्भ में यह घोषित किया गया हो कि राज्य सरकार अनिवार्य रूप से जांच करेगी या नहीं करेगी ?
याचिका में संभावित प्रार्थना (Prayer)
कथित वित्तीय अनियमितताओं एवं संपत्ति हानि की स्वतंत्र जांच का आदेश।
FIR दर्ज करने अथवा शिकायत पर विधिसम्मत निर्णय लेने का निर्देश।
संबंधित अभिलेखों, ऑडिट रिपोर्टों एवं संपत्ति रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का आदेश।
आवश्यकता होने पर SIT/विशेष जांच दल का गठन।
जांच पूर्ण होने तक संबंधित अभिलेखों के संरक्षण के निर्देश।
ध्यान रहे कि न्यायालय में किसी भी आरोप को तथ्यात्मक रूप से सिद्ध करने हेतु विश्वसनीय दस्तावेज, समाचार रिपोर्ट, ऑडिट सामग्री, शिकायतें या अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करना आवश्यक होगा; केवल राजनीतिक या सार्वजनिक आरोप पर्याप्त नहीं माने जाते।