भीतर बहती अमृत धारा,
योगी रसपान किया करता;
कण कण में दिखता ब्रह्म उसे,
जो अगम अपार उसे दिखता।
वह निराकार विस्तार ही है,
माना किंचित आकार भी है।
विस्तारं शरणं गच्छामि,
भज गोरख शरणं गच्छामि।।
🏵 -Samarthguru @SiddharthAulia Ji 🏵
#Samarthguru#GorakhGeeta#spirituality
प्रेम बड़ा महीन धागा है।
दिखाई भी नहीं पड़ता,
इतना बारीक है। और
ऐसे बांध लेता है,कि जंजीरों
को चाहो तो तोड़ दो,
मगर प्रेम के धागे को नहीं
तोड़ सकते। तलवारें नहीं काट सकतीं,
अग्नि नहीं ,जला सकती।
#ओशो
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यदि निराकार का ख्याल नहीं
तृष्णा नीचे ले जाएगी
दृष्टि चेतन पर टिकी रहे
वासना विदा हो जाएगी
जो देह भाव में जीता है
तृष्णा में वह गिर जाता है
चैतन्यं शरणं गच्छामि
गोविन्दं शरणं गच्छामि
गोविन्दं शरणं गच्छामि
--समर्थगुरु, गोविंद गीता
जब भी तुम्हें दुःख सताए, उदासी घेरे या अकेलापन परेशान करे, तो याद कर लेना कि मेरे पास आत्मा है। तुम तत्काल सुखी हो जाओगे, आनंदित हो जाओगे। आत्मानंद होने से बड़ा इस संसार में कोई सुख नहीं है।
-Samarthguru @SiddharthAulia Ji 🏵
प्रेम एक रहस्य है। सृष्टि का सबसे बड़ा रहस्य। प्रेम से ही बना है ,अस्तित्व और प्रेम से ही समझ में आता है ,परमात्मा। प्रेम से ही आप आये हैं, इस जगत में और प्रेम ही वह सीढ़ी है, जिससे आप इस जगत् के पार जा सकते हैं। प्रेम को जिसने समझा केवल ,उसने परमात्मा को समझा।
#ओशो
विषम परिस्थिति में भी मन में चिंता, शोक और उदासी उत्पन्न न होने देने का गुण धैर्य है। अगर धैर्यपूर्वक थोड़ा इंतज़ार किया, थोड़ा समझ से काम लिया तो कोई-न-कोई रास्ता नज़र आता है, कोई-न-कोई रोशनी नज़र आती है।
-Samarthguru @SiddharthAulia Ji🏵