इतिहास में वह पहली औरत कौन थी जिसे सबसे पहले जलाया गया?
मैं नहीं जानता
लेकिन जो भी रही हो मेरी माँ रही होगी,
मेरी चिंता यह है कि भविष्य में वह आखिरी स्त्री कौन होगी
जिसे सबसे अंत में जलाया जाएगा?
मैं नहीं जानता
लेकिन जो भी होगी मेरी बेटी होगी
और यह मैं नहीं होने दूँगा.
रमाशंकर यादव 'विद्रोही'
यहां हर रोज़ ही गुमनाम लोग मरते हैं
किसी को क्या पड़ी कि आम लोग मरते हैं
कभी है हादिसे का डर कभी दरिंदों का
सुबह का वक्त हो या शाम लोग मरते हैं
सुनो हाकिम ने कहा ये हमारे मरने पर
लगा दो मौत का कुछ दाम लोग मरते हैं
ज़रा जल्दी करो गुस्साए कोई न सत्ता पर
किसी पे डाल दो इल्ज़ाम लोग मरते हैं
अरे जो पाते हैं ताक़त हवादिस और दंगों से
हुए जाते हैं वो गुलफ़ाम लोग मरते हैं
भले माने न कोई पर ये बात है सच कि
यही है हालत-ए-आवाम लोग मरते हैं
- गौरव त्रिपाठी
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@vivek_shukl111 प्रेम की जगह अनिश्चित है
यहाँ कोई नहीं होगा की जगह भी कोई है।
आड़ भी ओट में होता है
कि अब कोई नहीं देखेगा
पर सबके हिस्से का एकांत
और सबके हिस्से की ओट निश्चित है।
🙏🙏😚😚
''15 लाख सामान्य आदमी/कर्मचारी के घर मिलते हैं तो जेल जाता है.
15 करोड़ जज साहब के घर मिले हैं तो घर वापसी करवाई जा रही है...''
-अनिल तिवारी, अध्यक्ष, इलाहाबाद हाईकोर्ट बार असोसिएशन
सवाल तो लाजमी है...
यह समाज जिस गति से फूहड़ता नग्नता और सिचुएशनशिप की तरफ बढ़ रहा है इसका बेड़ा गर्क ही होगा। हो ही जाना चाहिए। कभी कभी मैं प्रार्थना करता हूँ काश कोई तबाही आ जाए और यह सभ्यता नष्ट हो, अब इस सभ्यता में सभ्यता जैसा कुछ बचा नहीं है।
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#KumbhMela को #Mahakumbh का इवेंट बनाकर 144 साल बाद के योग की अफवाह ने हजारों श्रद्धालुओं को मरवा दिया।
जबकी 144 साल पहले 1881 मे कुंभ का आयोजन हुआ ही नहीं था।
1855 में अंग्रेजों ने बंद करवा दिया फिर तत्कालीन @INCIndia अध्यक्ष भूपेन्द्र नाथ बोस, मदन मोहन मालवीय और मोतीलाल नेहरू के प्रयासों से पुन: 1915 मे कुंभ आयोजित किया गया था। फिर 1942 में जब पूर्ण कुंभ पर रोक लगी तो पंडित जवाहर लाल नेहरू ने संगम में डुबकी लगा कर शुरू कराया।
@RahulGandhi@priyankagandhi@profapm@Pawankhera@irfhabib@kharge@MahaaKumbh@INCUttarPradesh@Jairam_Ramesh
या तो भगदड़ होती है या भगदड़ नहीं होती है। ये
‘भगदड़ जैसी स्थिति’ कुछ नहीं होता है।
रेल मंत्रालय ने जिस तरह से भगदड़ का सच छुपाने की कोशिश की वो धोखा है,छल है। लोग मर गए और आप लाशें छिपा रहे थे,नई दिल्ली को प्रयागराज बना रहे थे!!
144 साल में एक बार…
ये लाइन भारी पड़ रही है। आम आदमी इसी में पगला गया है कि 2 पीढ़ी तो ये कुंभ देख नहीं पाएगी।
विवेकानंद जी ने भी 144 साल वाला प्रचारित कुंभ नहीं देखा,आप उनसे बड़े हिंदू हो गए हो? भक्ति होनी चाहिए अंधभक्ति नहीं।
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राजस्थान की लोक गायिका बतूल बेगम को पद्मश्री अवार्ड
◆ बतूल बेगम राजस्थानी मांड गायन की उस्ताद मानी जाती हैं
◆ संगीत के जरिए बतूल बेगम समाज में एकता का संदेश फैलाती हैं
#BatoolBegam | Padma Shri | Batool Begam
प्रेमानंद जी महाराज ने LGBTQ जैसे बहुत ही समकालीन एवं संवेदनशील मुद्दे को जिस सहानुभूति और समझ के साथ हम सब के सामने रखा है, वह हिंदू धर्म के सार को खूबसूरती से दर्शाता है - समावेशी, सहिष्णु और समय के साथ विकसित होने वाला धर्म.
हिंदू धर्म ने हमेशा विचार और अस्तित्व की विविधता को अपनाया है.