बैंको मे #KYC का क्या नियम है?
बचत खाता, कर्रेंट खाता व किसी ट्रस्ट का खाता कृपया अपडेट करें।
क्या जितने भी बैंक हैं #KYC के नियम अलग अलग हैं?
@canarabank@BankofIndia_IN
कृपया इस वीडियो को बहुत ही ध्यान से सुने और जाने के ये जो राजनीतिक दल हैं उनके जो प्रमुख हैं वह अपने को राजा समझते हैं और प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक यह हमारे सेवक हैं इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में...!!!
@narendramodi@yadavakhilesh@RahulDev718370@RahulGandhi
https://t.co/owLtwzg8bv
प्रधानमंत्री @narendramodi जी इस मासूम बच्ची के ऊपर कोई कार्रवाई करेगो जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में इन शब्दों का इस्तेमाल कर रही है वैसे नाबालिग बच्चियों की भी जेल होती है लेकिन इसका इलाज कौन करेगा शायद प्रभु ही करें।
@AmitShah@myogioffice
#मैथिलीशरण_गुप्त#राष्ट्रकवि
3 अगस्त 1886 - 12 दिसंबर 1964
हे मातृभूमि ! तू सत्य ही सगुण मूर्ति सर्वेश की ।
"चारुचंद्र की चंचल किरणें, खेल रहीं हैं जल थल में,
स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है अवनि और अम्बरतल में।"
राष्ट्रकवि, महान लेखक एवं पद्मभूषण से सम्मानित मैथिलीशरण गुप्त जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि 💐
मैथिलीशरण गुप्त जिन्हें राष्ट्रीय काव्य-धारा के अमर वाहक के रूप में याद किया जाता है का जन्म 3 अगस्त 1886 को चिरगांव (झाँसी, उत्तर प्रदेश) में हुआ था ।
मैथिलीशरण गुप्त हिंदी के महान कवि, राष्ट्रकवि तथा द्विवेदी युग के प्रमुख स्तम्भ थे । उन्होंने खड़ी बोली हिंदी को काव्य की प्रतिष्ठित भाषा बनाने में अतुलनीय योगदान दिया । गंभीर, शांत, सहज और देशभक्ति से ओतप्रोत काव्य-शैली ने उन्हें जनकवि के रूप में लोकप्रिय बनाया।
गुप्त जी की कविताएँ देशभक्ति, त्याग, एकता,स्वाभिमान और नैतिकता के प्रेरक संदेश से भरी होती थीं । महात्मा गांधी उनके अत्यंत प्रशंसक थे और उन्हें “राष्ट्रकवि” कहा।
खड़ी बोली हिंदी के संवाहक :
उन्होंने खड़ी बोली को साहित्यिक ऊँचाई दी । सरल भाषा में गूढ़ भाव व्यक्त करने की उनकी क्षमता अद्भुत मानी जाती है ।
प्रमुख कृतियों में भारत-भारती- देशभक्ति का महान ग्रंथ, जिसने स्वतंत्रता-आंदोलन में नई चेतना भरी । साकेत – उर्मिला को केंद्र में रखकर लिखा महाकाव्य, जिन्होंने उन्हें साहित्य में अमर कर दिया ।
जयद्रथ-वध, पंचवटी, यशोधरा, द्वापर आदि भी अत्यंत प्रसिद्ध कृतियाँ हैं ।
सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टि
गुप्त जी स्त्री-शक्ति, करुणा, नैतिकता और मानवतावादी आदर्शों के प्रबल समर्थक थे । उनकी कविता में भारतीय संस्कृति की आत्मा सजीव रूप में मिलती है ।
सम्मान :
‘पद्म भूषण’ (1954),राज्यसभा सदस्य (1952–1964)
आज 12 दिसंबर को हम उनके पुण्य दिवस पर मैथिलीशरण गुप्त जी को पुन: स्मरण करें-एक ऐसे महान कवि को, जिनकी काव्यधारा ने स्वतंत्रता-आंदोलन को प्रेरणा दी और हिंदी को राष्ट्रीय अस्मिता का स्वर प्रदान किया।
रिश्तों में आत्म सम्मान नहीं चलता है क्योंकि रिश्तों की असली पहचान है हम बिना किसी सम्मान के मिले और अगर रिश्तों में सम्मान की बात आ जाए तो रिश्ते बेईमानी है...!!!
आप मित्रों की क्या राय है?
#रानी_लक्ष्मीबाई
19 नवंबर 1828 - 18 जून 1858
झाँसी की रानी वीरांगना लक्ष्मी बाई को सादर नमन 💐
रानी लक्ष्मीबाई की जयंती 19 नवंबर को मनाई जाती है। प्रत्येक वर्ष इस दिन झांसी की रानी की वीरता को नमन किया जाता है और अंग्रेजों के खिलाफ उनकी शौर्य गाथा को याद किया जाता है 💐
वह झांसी की रानी थीं, जो अपने पति और पुत्र को खोकर और दत्तक पुत्र के लायक होने तक खुद एक महिला होकर झांसी का शासन संभाल रही थीं । हालांकि अंग्रेज हुकूमत ने झांसी को अपने अधिकार क्षेत्र में लेने का प्रयास किया और झांसी के किले पर आक्रमण कर दिया । रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के आक्रमण का मुंह तोड़ जवाब दिया ।
बनारस में 19 नवंबर 1828 को जन्मी लक्ष्मीबाई का बचपन का नाम मणिकर्णिका था । प्यार से उन्हें मनु कहा जाता था । उनके पिता मोरोपंत तांबे और मां भागीरथी सप्रे थीं । जब मनु चार साल की थीं, तभी उनकी मां का निधन हो गया । पिता बिठूर जिले के पेशवा बाजी राव द्वितीय के लिए काम करते थे । उन्होंने लक्ष्मी बाई का पालन पोषण किया । इस दौरान उन्होंने घुड़सवारी, तीरंदाजी, आत्मरक्षा और निशानेबाजी की ट्रेनिंग ली।
14 साल की उम्र में 1842 में मनु की शादी झांसी के शासक गंगाधर राव नेवलकर से कर दी गई । शादी के बाद उनका नाम लक्ष्मीबाई पड़ा । उस दौर में शादी के बाद लड़कियों का नाम बदल जाता था । विवाह के बाद लक्ष्मी बाई ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसकी मृत्यु महज चार महीने में ही हो गई । बाद में उनके पति और झांसी के राजा का भी निधन हो गया । पति और बेटे को खोने के बाद लक्ष्मी बाई ने खुद ही अपने साम्राज्य और प्रजा की रक्षा की ठान ली ।
उस समय ब्रिटिश इंडिया कंपनी के वायसराय डलहौजी ने झांसी पर कब्जे का यह बेहतर समय समझा क्योंकि राज्य की रक्षा के लिए कोई नहीं था । उन्होंने रानी लक्ष्मी बाई पर दबाव बनाना शुरू किया कि झांसी को अंग्रेजी हुकूमत के हवाले कर दें । रानी ने रिश्तेदार के एक बच्चे को अपना दत्तक पुत्र बनाया, जिनका नाम दामोदर था।
अंग्रेजी हुकूमत ने दामोदर को झांसी का उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया और झांसी का किला उनके हवाले करने को कहा । अंग्रेजों ने साम्राज्य पर कब्जा करने की कोशिश की लेकिन लक्ष्मी बाई ने काशी बाई समेत 14000 बागियों की एक बड़ी फौज तैयार की। 23 मार्च 1858 को ब्रिटिश फौज ने झांसी पर आक्रमण कर दिया और 30 मार्च को बमबारी करके किले की दीवार में सेंध लगाने में सफल हुए । 17 जून 1858 को लक्ष्मीबाई आखिरी जंग के लिए निकली । पीठ पर दत्तक पुत्र दामोदर को बांधकर हाथ में तलवार लिए झांसी की रानी ने अंग्रेजों से युद्ध किया ।
काशी की क्यारी में जन्मी एक गज़ब की फुलवारी
बिठुर के बागों में खिली वो प्यारी न्यारी मतवारी
महक तो थी झांसी के भाग में सो झांसी को चली गई
मणिकर्णिका नाम था जिसका लक्ष्मी बाई कही गई
चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी
बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी
#RaniLakshmibai
#बिरसा_मुंडा#जनजातीय_गौरव_दिवस#झारखंड_स्थापना_दिवस
जननायक धरती आबा बिरसा मुंडा जी की 150 वीं जयंती पर सादर नमन 💐 उन्होंने आदिवासी समाज की पहचान, सम्मान और अधिकारों के लिए अपना जीवन समर्पित किया । प्रकृति संरक्षण और जनकल्याण का उनका संदेश आज भी हमें प्रेरणा देता है ।
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा सार्द्धशती वर्ष (150वाँ जन्म वर्ष)
(1875 – 2025)
15 नवम्बर 1875 को झारखण्ड के छोटानागपुर क्षेत्र के उलीहातु गांव में जन्मे धरती आबा बिरसा मुंडा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक-सांस्कृतिक पुनर्जागरण और धर्म रक्षा के ऐसे अप्रतिम योद्धा थे, जिन्होंने मात्र 25 वर्ष की आयु में इतिहास का नया अध्याय रचा ।
आइए, इस अवसर पर हम भारत की समृद्ध जनजातीय परंपराओं और उनकी अनमोल विरासत को सम्मान दें। आप सभी को जनजातीय गौरव दिवस व झारखंड प्रदेश स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं जोहार 💐
#BirsaMunda150
#सरदार_वल्लभभाई_पटेल 🇮🇳
#राष्ट्रीय_एकता_दिवस
31 अक्टूबर 1875 - 15 दिसंबर 1950
भारत की एकता, अखंडता और संकल्प के प्रतीक, आधुनिक भारत के शिल्पकार, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी की 150वी जयंती पर सादर नमन 💐
उनकी अदम्य इच्छाशक्ति और दूरदर्शिता ने अनेक रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर अखंड भारत का स्वप्न साकार किया । आइए, उनके आदर्शों से प्रेरित होकर एक सशक्त, एकजुट और समृद्ध भारत के निर्माण का संकल्प लें ।
राष्ट्रीय एकता दिवस की शुभकामनाएं 🪷
सरदार वल्लभभाई पटेल भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता, कुशल प्रशासक और “भारत के लौह पुरुष” (Iron Man of India) के नाम से प्रसिद्ध थे । वे भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री भी रहे । उनका सबसे बड़ा योगदान “भारत के एकीकरण” में था, जब उन्होंने 562 रियासतों को भारतीय संघ में सम्मिलित कर एक अखंड भारत का निर्माण किया । सरदार पटेल एक महान देशभक्त, दूरदर्शी नेता और राष्ट्र-निर्माता थे, जिन्होंने अपने अटूट संकल्प, अदम्य साहस और कुशल नेतृत्व से देश के एकीकरण का ऐतिहासिक कार्य किया । उनकी कर्मनिष्ठा और राष्ट्रसेवा की भावना हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है । आइए, 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के अवसर पर हम सब एकजुट होकर, एक सशक्त, समरस और श्रेष्ठ भारत के निर्माण का संकल्प लें ।
प्रारंभिक जीवन
- *जन्म* : 31 अक्टूबर 1875, नडियाद (गुजरात) में एक पटिदार किसान परिवार में ।
- *शिक्षा* : बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैंड गए । 1913 में भारत लौटकर अहमदाबाद में वकालत शुरू की ।
- *महात्मा गांधी से प्रभाव* : 1917 में गांधीजी से मिले और खेड़ा सत्याग्रह (1918) में सक्रिय भूमिका निभाई ।
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
- *बारडोली सत्याग्रह (1928)* : गुजरात में किसानों के कर विरोधी आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसके लिए उन्हें “सरदार” की उपाधि मिली ।
- *नमक सत्याग्रह (1930)* : गिरफ्तार हुए ।
- *भारत छोड़ो आंदोलन (1942)* : कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में नेतृत्व किया, लंबी जेल यात्रा की ।
“उप-प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री” | 1947–1950 | रियासतों का विलय, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की स्थापना
“भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष” | 1931 | पार्टी को मजबूत किया ।
रियासतों का एकीकरण (Operation Integration)
- 1947 में भारत-पाक विभाजन के बाद 562 देसी रियासतें स्वतंत्र रहना चाहती थीं ।
- पटेल ने *राजनीतिक कुशलता, दबाव और समझौते* से :
- *जूनागढ़* : जनमत संग्रह से भारत में शामिल।
- *हैदराबाद* : पुलिस कार्रवाई (Operation Polo, 1948)
- *कश्मीर* : महाराजा हरि सिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए ।
- परिणाम : *आधुनिक भारत का भौगोलिक स्वरूप*बना
- *मृत्यु* : 15 दिसंबर 1950, मुंबई (दिल का दौरा)।
- “राष्ट्रीय एकता दिवस” : उनका जन्मदिन (31 अक्टूबर) “राष्ट्रीय एकता दिवस” (National Unity Day) के रूप में मनाया जाता है ।
- “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” : गुजरात के केवड़िया में विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा (182 मीटर), 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन ।
पटेल जी का “प्रसिद्ध उद्धरण” : "हर भारतीय को यह भूल जाना चाहिए कि वह राजपूत है, सिख है या जाट है । वह भारतीय है, पहले, बाद में और अंत में"
सरदार पटेल बिना किसी सैन्य बल के “कूटनीति से राष्ट्र निर्माण” के प्रतीक हैं । उनकी दूरदर्शिता के बिना आज का भारत संभव नहीं होता ।
आज (31 अक्टूबर) उनकी “150वीं जयंती” है , इसी उपलक्ष्य पर #RunForUnity जैसी सार्थक पहलें देशभर में हो रही हैं
#SardarPatel150
#NationalUnityDay
#इंदिरा_गांधी 🇮🇳
19 नवंबर 1917 - 31 अक्टूबर 1984
भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाली, अदम्य साहस और अटूट निष्ठा की प्रतीक, भारत की प्रथम महिला (Iron Lady) प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि 💐
उनका जीवन आज भी हमें यह सिखाता है कि सच्चा नेतृत्व त्याग, संघर्ष और जनसेवा से जन्म लेता है । उनके आदर्श और विचार सदैव सभी के लिए प्रेरणा स्रोत रहेंगे ।
#छठ_पर्व
नहाए खाए के साथ आज से शुरू हो रहे चार दिवसीय लोक आस्था एवं सूर्य उपासना का महा पर्व छठ महोत्सव की समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 💐
यह पावन पर्व सभी के जीवन में पवित्रता, समृद्धि और आरोग्यता का संचार करे । छठि मैया सब की मनोकामना पूर्ण करें 🪷
नहाय-खाय
पवित्रता और संकल्प का प्रथम चरण — नहाय-खाय
व्रती शुद्ध जल से स्नान कर सात्विक आहार ग्रहण करते हैं, जिससे आरंभ होती है लोक आस्था के महापर्व छठ की चार दिवसीय पावन यात्रा। व्रती इस दिन कद्दू की दाल एवं चावल खा कर अपने व्रत संकल्प की शुरुआत करते हैं
#ChhathPuja
#गोवर्धन_पूजा
प्रकृति और गौ सेवा के संरक्षण के प्रतीक पर्व गोवर्धन पूजा की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ 💐
भगवान श्रीकृष्ण जी की कृपा से आपके जीवन में सदा सुख, समृद्धि और सौभाग्य बना रहे।
जय श्रीकृष्णा
गोवर्धन पूजा, जिसे “अन्नकूट” के नाम से भी जाना जाता है, एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो दीपावली के अगले दिन, कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है ।
- यह पर्व भगवान कृष्ण के गोवर्धन पर्वत को उठाने की कथा से जुड़ा है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर गोकुलवासियों को इंद्र के प्रकोप (भारी बारिश) से बचाया था।
- यह त्योहार प्रकृति, पशुधन और कृषि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है।
- इस दिन गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा की जाती है, क्योंकि गायें हिंदू संस्कृति में पवित्र मानी जाती हैं और कृषि जीवन का आधार हैं।
पूजा विधि :
1. *गोवर्धन पर्वत की रचना* : घर या आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत की प्रतीकात्मक आकृति बनाई जाती है।
2. *पूजा* : इस आकृति की फूल, माला, मिठाई और अन्य नैवेद्य के साथ पूजा की जाती है। भगवान कृष्ण को भोग लगाया जाता है।
3. *अन्नकूट* : विभिन्न प्रकार के व्यंजनों, विशेष रूप से अनाज, दाल, सब्जी और मिठाइयों से बने भोजन को भगवान को अर्पित किया जाता है। इसे अन्नकूट कहते हैं।
4. *गाय पूजा* : गायों को स्नान कराकर, उन्हें तिलक लगाकर और भोजन देकर सम्मानित किया जाता है।
5. *परिक्रमा* : कुछ स्थानों पर गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने की परंपरा है, विशेष रूप से मथुरा और वृंदावन में।
सांस्कृतिक महत्व :
- यह पर्व पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देता है।
- मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन क्षेत्र में यह त्योहार विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है, जहां हजारों भक्त गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते हैं।
- यह सामुदायिक एकता को बढ़ावा देता है, क्योंकि लोग एक साथ भोजन बनाते और बांटते हैं।
- उत्तर भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, राजस्थान, और बिहार में यह त्योहार बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
- कुछ क्षेत्रों में इसे “गोधन पूजा” के रूप में भी मनाया जाता है ।