मुझे राजनीति और समाज से कोई मतलब नहीं, बस एक रूम मिल जाए जिसमें मैं बिस्तर पर लेटा रहा हूँ, घरवाले टाइम टाइम पर खाने देते रहे मैं वेब सीरीज मूवी और सोशल मीडिया चलाता रहूं। कभी कभी घरवाले मुँह पर पैसे फेंककर मार दे, ले कुछ खरीद लेना। बस इतना छोटा सा ख्वाब है।
किसी के सामने खुद को सही साबित करने की कोशिश करने से बेहतर है कि उसकी बात चुपचाप सुन ली जाए और फिर वहाँ से आगे बढ़ लिया जाए क्योंकि कई बार रुककर बार-बार सफाई देना केवल समय की बर्बादी बनकर रह जाता है और अंत में हासिल कुछ भी नहीं होता...!
Dear @UnionBankTweets आपकी शाखा जबलपुर नेपियर टाउन नियर जबलपुर हास्पिटल
का स्टाफ़ बहुत ही सुस्त और आलसी है।
खुद का पैसा निकालने के लिए घंटों इंतज़ार करना पड़ता है।और कुछ पूछो तो सही ठंग से जबाब भी नहीं देते।
@RBI
मेरे पास तुम्हारी एक तसवीर है उसे देखे बिना मेरा दिन शुरू नहीं होता,पर उन आँखों में आंसू हैं,और मैं जानता हूँ कि उनका कारण कहीं न कहीं मैं ही रहा हूँ,फिर भी अजीब सा सच है की वही तस्वीर मुझे दिन भर सँभाल कर रखती है वो आँसू मुझे तोड़ते नहीं,बल्कि याद दिलाते हैं कि1/2
तुम्हारे बिना मेरा ये जीवन व्यर्थ जा रहा है, कल को मृत्यु आएगी तो दुख इस बात का नही होगा कि मृत्यु आ गयी, बल्कि तुम्हें पा न सकने के दर्द को लेकर रो दूंगा...और वो दर्द मेरी चिता जलने तक साथ ही रहेगा....!
पैसों से संपत्तियाँ खरीदी जा सकती हैं,पर कुछ अमूल्य चीज़ें कभी भी धन से नहीं मिलतीं जैसे बीत चुका समय,मन को छू लेने वाला प्राकृतिक सौंदर्य और बोतल से निकलकर गिलास में पड़ी वो शराब,जिसका नशा सिर्फ महसूस किया जा सकता है,खरीदा नहीं...!
मानो या न मानों लेकिन मोह्हबत ही अवसाद का पहला कारण है,जिंदगी का ही जिंदगी से चले जाना उसके बाद बचता ही क्या है,सिवायदर्द,दुःख, अकेलापन,बेबसी,बेचैनी,नाराजगी,खालीपन,क्रोध और न जाने कितनी मौत से भी बदतर सुनसान रातों के,खैर!... हर कोई मजबूत नही होता...!