जंतर मंतर पर विदेशी मीडिया के कैमरे पहुँच गए, लेकिन देश के कई बड़े प्राइम-टाइम चेहरे अब भी गायब हैं।
चित्रा अंजना और रूबिका कहां है और वो पाठशाला चलाने वाला सुशांत किधर है?
एक लड़का प्रोटेस्ट कर रहा था पत्रकारों से बातें कर रहा था.
तभी मोदी भक्तों ने कहा कि ये हिंदू आस्था का मजाक बना रहा है.
तभी लड़के ने अपना जनेऊ निकाल कर भक्तों को हैरत में डाल दिया.
संसद के सामने युवाओं पर आँसू गैस छोड़ना बंद कीजिए।
सरकार दमन नहीं, संवाद का रास्ता चुने। अपने अयोग्य शिक्षा मंत्री को हटाकर युवाओं की बात सुने।
#DharmendraPradhanResign#StudentsProtest#Sansad
तहसीन पूनावाला देश का सबसे जरुरी मुद्दा पूरी मजबूती से उठा रहे हैं !
ऐसे केवल 50 लोग आगे आ जाएँ तो सरकार को ये निर्णय वापस लेना ही पड़ेगा,
एथेनॉल मुद्दे को राष्ट्रीय मुद्दा बनाना पड़ेगा, हम सबकी जिम्मेदारी है हर दिन इसके खिलाफ ट्वीट करना पड़ेगा !
@tehseenp
ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ONS) की रिपोर्ट के अनुसार इंग्लैंड और वेल्स में लगातार तीसरे साल 'मोहम्मद' नाम लड़कों के लिए सबसे लोकप्रिय नाम रहा है। साल 2025 के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक लगभग 6,000 नवजात शिशुओं का नाम रखा गया है। यह नाम लगातार शीर्ष स्थानों पर बना हुआ है।
बड़बोले और मुसलमानों के खिलाफ नफरत घोलने वाले 2023 तक MP के गृहमंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा का भाजपा ने टिकट काट दिया!
मिश्रा जी के तीन हजार कार्यकर्ताओं की भावना आहत हो गई और दतिया के हाइवे को 11 घंटे जाम रखकर, जबरदस्त बवाल काटा!
पुलिस पर पथराव किया, ट्रकों को जलाने का प्रयास किया और इस दौरान एंबुलेंस तक फंसीं रही!
अब सवाल ये है कि अगस्त 2024 में छतरपुर के कांग्रेस नेता शहजाद अली के आलीशान घर पर मोहन यादव ने बुल्डोजर चलवा कर जमीदोज कर दिया था।
शहजाद पर आरोप लगा था उसके नेतृत्व हिंसक प्रदर्शन और कोतवाली थाने पर पथराव हुआ!
फिर नरोत्तम मिश्रा के घर पर मोहन यादव जी बुल्डोजर कब चला रहे है? इनके कार्यकर्ताओं ने आपकी पुलिस पर पथराव किया है, कानून को हाथ में लिया है, 11 घंटे सड़क जाम किया है!
देखते है यहां सीएम साहब का जमीर जिंदा रहता है या फिर बुल्डोजर सिर्फ एकतरफा मुसलमानों के ही मकान पर चलेगा?
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मुजफ्फरनगर के शिव चौक पर कांवड़ियों का जत्था डीजे वाहन के साथ पहुंचा था। डीजे की ऊंचाई अधिक होने के बावजूद कुछ युवक उसके ऊपर खड़े होकर शिव भक्ति गीतों पर नृत्य कर रहे थे। सुरक्षा की दृष्टि से खतरा देखते हुए ड्यूटी पर तैनात इंस्पेक्टर बृजेश शर्मा ने उन्हें नीचे उतरने के लिए कहा। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया।
देखते ही देखते कहासुनी ने तूल पकड़ लिया और मौके पर मौजूद कुछ पत्रकारों के साथ भी मारपीट की घटना सामने आई। पत्रकारों का आरोप है कि पुलिस के सामने उनके साथ अभद्रता और हमला हुआ, लेकिन किसी भी आरोपी के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
अगले कुछ दिनों तक ऐसी ख़बरें पढने के लिए खुद को तैयार कर लीजिए। साथ ही यूपी सरकार के मुखिया के उस बयान को भी याद रखिएगा जिसमें उन्होंने ‘दूसरों’ को ‘इनसे’ अनुशासन सीखने की सलाह दी थी।
'ज्यादा वर्दी का गुरूर हो तो बता देना, पांच मिनट में उतरवा दूंगा '
यूपी में पुलिस इंस्पेक्टर को ऐसी धमकी
कोई कांवड़िया ही दे सकता है . सरेआम ऐसी धमकी सुनने के बाद भी पुलिस वाले कुछ कर भी नहीं पाए. बाद में सुना कि FIR हुई है .
ये तो ट्रेलर है , सावन अभी बाकी है.
जिस यूपी में किसी के घर में दस लोगों के एक साथ नमाज़ पढ़ने पर गिरफ्तारी हो जाती है , उस यूपी में कांवड़ियों के सामने एक थानेदार की यही हैसियत है . मामला मुजफ्फरनगर का है .
पूरा वीडियो मेरे यूट्यूब चैनल पर
योगी आदित्यनाथ कहते हैं उत्तरप्रदेश में महिला 2 बजे भी अकेली जा सकती है लेकिन वीडियो में देखिए दिनदहाड़े एक मुस्लिम महिला पर तमंचे से फायरिंग हो रही है।
ये वीडियो कोई योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा दो क्योंकि उनकी कानून व्यवस्था इसमें साफ झलक रही है।
"लव जिहाद", "लैंड जिहाद", "UPSC जिहाद", "सुल्ली डील्स" और "बुल्ली बाई" के बाद अब जनरेटिव AI भारत में मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाने का एक नया माध्यम बन गया है। यह वही नफ़रत की राजनीति है, जो अब एक नए रूप में सामने आ रही है। AI पुराने स्त्री-विरोधी और इस्लामोफ़ोबिक पैटर्न को और बढ़ा रहा है, जिसका सबसे बड़ा खामियाज़ा उन मुस्लिम महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है, जिनकी ज़िंदगी, सुरक्षा और गरिमा दांव पर लग जाती है। : सृष्टि खन्ना (एक्टिविस्ट) -@shristhikhanna
📍 बेवर, मैनपुरी, उत्तर प्रदेश
22 टन प्रतिबंधित गोमांस बरामद, लेकिन सन्नाटा क्यों? 🤔
नवीगंज टोल प्लाजा पर 22 टन मांस के साथ ट्रक पकड़ा गया। FSL रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि हुई और मुख्य आरोपी 'सौरभ सरीन' पर गैंगस्टर एक्ट लगा।
लेकिन सवाल ये है कि...
अगर यहाँ आरोपी किसी दूसरे समुदाय (मुस्लिम) से होते, तो क्या तब भी इतनी ही चुप्पी होती?
शायद अब तक सड़कों पर 'ऑन-द-स्पॉट' इंसाफ (लिंचिंग) की कोशिश हो चुकी होती, चैनलों पर हफ्तों प्राइम-टाइम डिबेट चलती, एनकाउंटर की स्क्रिप्ट लिखी जाती और घर पर बुलडोजर चल चुका होता।
परंतु आरोपी 'सौरभ सरीन' है, इसलिए गो-रक्षा के नाम पर राजनीति करने वाले संगठन और मीडिया पूरी तरह मौन हैं।
यह सन्नाटा साबित करता है कि कई लोगों के लिए "गौ-रक्षा" सिर्फ एक राजनीतिक औजार है, जिसका इस्तेमाल चुनिंदा मामलों में खास समुदाय को निशाना बनाने के लिए होता है।
जब अपराधी अपनी जमात का हो, तो आस्था के पैमाने बदल जाते हैं।
अपराध का कोई धर्म नहीं होता, कानून सब पर समान रूप से लागू होना चाहिए!