यूपी में का बा
गांव के टॉपर के जिंदगी से खिलवाड़ बा
6000 के वेतन दिखा के मजदूर जैसना काम बा
यूपी मा का बा
पूरे गांव का सर्वे भ्रमण करने वाले टॉपर के जिंदगी के साथ खिलवाड़ बा
ब्लॉक मा बेज्जती प्रधान और सचिव के नौकर बा आज गांव के टॉपर के भैया या स्थिति बा
#panchyatsahayakup
जिस पंचायत व्यवस्था को गांव की रीढ़ कहा जाता है
उसी व्यवस्था के महत्वपूर्ण कर्मियों को ₹6000 मानदेय दिया जा रहा है।
काम बढ़ता गया, जिम्मेदारी बढ़ती गई, लेकिन मानदेय वहीं का वहीं रह गया।
#पंचायत_सहायक_संघर्ष@CMOfficeUP
लखनऊ के इको गार्डन में आज 7 दिन बीत चुके हैं, लेकिन हम पंचायत सहायकों के आंसुओं और पुकार को सुनने वाला कोई नहीं है। इतनी कम तनख्वाह में घर चलाना और बच्चों की दो जून की रोटी का इंतज़ाम करना रोज़ का संघर्ष बन गया है। क्या गांवों को संभालने वालों की कोई अहमियत नहीं?
@myogiadityanath
सरकार ग्राम पंचायतो को पेपरलेस मानती है परंतु इसे डिजिटल बनाने वाले ग हम पंचायत सहायक ही हैं।
योगी सरकार ग्राम पंचायतो को डिजिटल बनाने के लिए बहुत से प्रोग्राम लॉन्च की ग्राम पंचायतें डिजिटल तो हो गई हैं परंतु
इसको बनाने वाले पंचायत सहायकों के बारे में सरकार कभी नहीं सोचती है
यह वही पंचायत सहायक है जिसने 2021 से अपने कार्य के बदौलत पूरे ग्राम पंचायत में हर योजनाओं को घर-घर तक पहुचाया है
यूपी गवर्नमेंट को पंचायत सहायकों के बारे सोचना ही पड़ेगा।
@UPGovt@myogioffice@mopr_goi
#पंचायत_सहायक_संघर्ष #पंचायत_सहायक_का_मानदेय_बढ़ाओ #पंचायत_सहायको_की_मांगे_पूरी_करो
हम भी अपने परिवार के बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं। हम भी सम्मान के साथ जीवन जीना चाहते हैं। लेकिन ₹6000 में भविष्य बनाना बेहद कठिन है।
पंचायत सहायकों की आवाज सुनी जाए।
#पंचायत_सहायक_संघर्ष
कसम से, अब तो लगता है कि पंचायत सहायक की नौकरी कोई पेशा नहीं, बल्कि सरकार द्वारा चलाया जाने वाला कोई 'तपस्या कोर्स' है—जहां पेट भले ही खाली रहे, पर डिजिटल पोर्टल्स के चक्कर काटते-काटते आत्मा जरूर तृप्त हो जाती है! वाह रे व्यवस्था, क्या गजब का मज़ाक है!
#पंचायत_सहायक_संघर्ष