सबके हिस्से भूख आती है
सबके हिस्से नही आती रोटी
सबके हिस्से शाम आती है
सबके हिस्से नही आता घर लौट आना
आसमान आता है सबके हिस्से
सबके हिस्से में नहीं आती छत
मैं आता हूं सबके हिस्से
सब मेरे हिस्से में नहीं आते
~ तुम्हारा अनिमेष
@Kitabganj1@dildarakhtdilli
बातें बारिश के फुहारों सी
हरी हरी है हंसी उसकी
गेसू जैसे घनघोर घटा
बिजली सी है चमक उसकी
मन है सरोवर सा निश्चल
बहाव है नदियों सी उसकी
एक लड़की है सावन सी
~ तुम्हारा अनिमेष
जब किसी शहर के सबसे व्यस्त स��़क में गुलमोहर की तरह तुम खिल रही होगी ठीक उसी वक्त किसी गांव की सूनी पगडंडी पर पलाश की तरह मैं खड़ा मिलूंगा,
रंग एक सा रहेगा हममें, एक ही वसंत
नियति यही होगी एक जगह कभी नहीं खिलेंगे
मिलेंगे ज़रूर हमारे फूल, हम कभी नहीं मिलेंगे
~ तुम्हारा अनिमेष
तुम्हारे हर स्पर्श से अधिक जादुई है
मेरे सर पर तुम्हारा हाथ फेरना
तुम्हारे प्रेम के आयामों में
मुझे सबसे अधिक प्यारा है
तुम्हारा मां बन जाना
~ तुम्हारा अनिमेष
तुम्हारे होठ��ं से अधिक प्रिय है
मुझे तुम्हारा कांधा
जहां मैं अपनी थकान रख सकता
तुम्हारे बालों से ज्यादा रेशमी है
तुम्हारा आंचल
जिसने रखा है हिसाब मेरे पसीनो का
तुम्हारे आंखों से ज्यादा गहरा है
तुम्हारा गोद
जिसमे सर रखते ही मैं खो जाता हूं