जब जीवन में सब कुछ मन के अनुसार हो,तब प्रभु का स्मरण करना आसान होता है,
लेकिन सच्ची भक्ति तो तब होती है जब परिस्थितियाँ विपरीत हों,इच्छाएँ पूरी न हों,फिर भी हृदय से यही निकले—
✨"हे प्रभु,
जो आपने दिया उसके लिए धन्यवाद,🙏🏻विश्वास रखिए,प्रभु श्रीराम कभी अपने भक्त का अहित नहीं करते!
🌹|| जय सियाराम ||🌹
अगर विश्वास है ईश्वर पर, तो कुछ कहने से पहले ही परमात्मा आपके मन की हर बात जान लेते हैं। ✨
💖 इसलिए प्रभु से बार-बार कुछ माँगने के बजाय, अपने विश्वास को और मज़बूत बनाइए।
🌿 क्योंकि जहाँ अटूट विश्वास होता है, वहाँ प्रभु की कृपा स्वयं मार्ग बना देती है।