इन चयनित अभ्यर्थियों के साथ सिर्फ एक परीक्षा का परिणाम नहीं, बल्कि उनके माता-पिता की उम्मीदें और पूरे परिवार के सपने जुड़े हैं। उनके भविष्य को अधर में न छोड़ा जाए
भाजपा नेताओं को छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करने की आदत छोड़ देनी चाहिए :
भाजपा नेताओं को छात्रों के मुद्दों की आड़ में अप��ी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश बंद करनी चाहिए। जो लोग सत्ता में रहते हुए युवाओं और छात्रों के सवालों का समाधान ��हीं कर पाए, वे आज छात्रों के पीछे खड़े होकर राजनीतिक ड्रामा कर रहे हैं। जबकि हकीकत अब पूरा देश जान चुका है कि माननीय मुख्यमंत्री ने छात्रों की सभी मांगों को मान लिया है, छात्र अपने घर लौट चुके हैं और 25 अगस्त को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में कई और महत्वपूर्ण निर्णय सरकार छात्र हित में लेने जा रही है।
भाजपा नेताओं की राजनीति अब इतनी कमजोर हो चुकी है कि उन्हें अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए छात्रों को आगे करना पड़ रहा है। छात्र-युवा पढ़ाई, रोजगार और अपने भविष्य को लेकर संघर्ष करें, यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उनके आंदोलनों को राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करना भाजपा की पुरानी कार्यशैली रही है।
भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी बताएं कि यदि उन्हें वास्तव में छात्रों की चिंता है तो वे छात्रों के बीच जाकर उनके मुद्दों पर सकारात्मक संवाद क्यों नहीं करते? हर प्र��ासनिक कार्रवाई को राजनीतिक दमन बताकर माहौल गरमाना और फिर थाने पहुंचकर राजनीतिक प्रदर्शन करना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करना है।
कानून अपना काम करेगा और किसी भी मामले में पुलिस को कानून के दायरे में ही कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन किसी व्यक्ति पर कार्रवाई को लेकर बिना पूरी जानकारी के पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाना और उसे राजनीतिक रंग देना जिम्म���दार विपक्ष की भूमिका नहीं है। भाजपा को कानून और लोकतंत्र की दुहाई देने से पहले अपने राजनीतिक आचरण का आईना देखना चाहिए।
भाजपा नेता लगातार ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे छात्रों और युवाओं के बीच भ्रम और टकराव की स्थिति पैदा हो। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर कानून हाथ में लेने या राजनीतिक उकसावे की राजनीति को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
भाजपा की परेशानी यह है क��� झारखंड की जनता ने उसकी राजनीति को नकार दिया है। अब कभी छात्रों के नाम पर, कभी युवाओं के नाम पर और कभी कानून-व्यवस्था के नाम पर भाजपा अपनी राजनीतिक ��्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश कर रही है। जनता सब देख रही है और समझ रही है कि कौन छात्रों के भविष्य की चिंता कर रहा है और कौन उनके मुद्दों को अपनी राजनीति का ईंधन बना रहा है।
बाबूलाल मरांडी से सवाल है?.. कि यदि भाजपा को सचमुच छात्रों की इतनी चिंता है तो वह यह बताए कि केंद्र की भाजपा सरकार के कार्यकाल में युवाओं के रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सवालों पर उसने क्या ठोस कदम उठाए? सिर्फ थान��� में दो घंटे बैठ जाने से छात्र हितैषी होने का प्रमाणपत्र नहीं मिल जाता।
झामुमो छात्रों और युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करता है, लेकिन किसी भी आंदोलन को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश का विरोध करेगा। भाजपा नेताओं को सलाह है कि छात्रों को आगे करके अपनी राजनीति चमकाने के बजाय खुद मैदान में उतरें और जनता के सवालों का सामना करें।
भाजपा नेताओं को यह समझ लेना चाहिए कि छात्रों के कं���े पर बंदूक रखकर झामुमो से राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। जनता के बीच जाकर लड़ना है तो भाजपा नेता खुद मैदान में उतरें।
@JmmJharkhand
जब दिल्ली के जंतर-म���तर पर NEET के छात्र अपने अधिकारों और न्याय के लिए धरना दे रहे थे, तब कुणाल प्रताप ने देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को टैग करके छात्रों का पिछवाड़ा ��ाल और हरा करने कहा था।
आज वही व्यक्ति झारखंड में युवाओं का शुभचिंतक बनने का ढोंग कर रहा है। सच्चाई यह है कि इनका कोई जनहित या छात्रहित से लेना-देना नहीं है।
इनका एकमात्र एजेंडा QR कोड से चंदा लेना, छात्रों के आंदोलन की आड़ लेकर हेमंत सरकार की लोकप्रिय छवि को धूमिल करना और राज्य के शासन-प्रशासन में बाधा उत्पन्न करना है।
जो इंसान कल तक छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने की वकालत कर रह�� था, वह आज झारखंड के युवाओं का हितैषी कैसे हो सकता है?
@HemantSorenJMM
लैलासुर के वंशज लोग नहीं चाहते हैं कि झारखंड में विकास का गंगा बहे केवल चाहते हैं, कि मूलनिवासी आदिवासी नशा म��ं डूबे रहे... #JSSC_CGL में 90% मूलनिवासी आदिवासी का DV हुआ है ,इसलिए इसका चयन होना चाहिए ।।
@HemantSorenJMM @JairamTiger @IrfanAnsariMLA @sunny_sharad
@kumarsudivya सर आपके और @HemantSorenJMM सर के नेतृत्व में हमारा राज्य ओर भी मजबूती से आगे बढ़ रही है।इन कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसना बहुत जरूरी है।जिस तरह से येलोग JSSC CGL को रोकने का प्रयास किया है उसी तरह येलोग हर एग्जाम को बाधित करने का प्रयास करते है! धन्यवाद सर 🙏जोहार 🙏
आज कोचिंग संस्थान शिक्षा के पवित्र मंदिर नहीं रह गए हैं, बल्कि वे शोषण के विशाल कारखानों में तब्दील हो चुके हैं। खासकर झारखंड जैसे राज्यों में, जहाँ ह��ारों आदिवासी, गरीब और पिछड़े समुदाय के बच्चे उच्च शिक्षा के सपनों को साकार करने शहरों की ओर रुख करते हैं, ये संस्थान उनके और उनके परिवार के सपनों को चूर-चूर करके मुनाफा कमाने का एक घिनौना धंधा चला रहे हैं। ये संस्थान झूठे वा��ों, आकर्षक विज्ञापनों और मनमोहक ब्रोशर के जाल बिछाकर छात्रों और उनके अभिभावकों को फँसाते हैं और उनसे मोटी रकम ऐंठ लेते हैं। दाखिले के समय ये संस्थान इतना आकर्षक प्रचार और ब्रेनवॉशिंग करते हैं कि पढ़े-लिखे और समझदार माता-पिता भी इनके झांसे में आ जाते हैं। छात्रों को सफलता की गारंटी, उच्च पदों पर नौकरी, एक सुनहरा भविष्य और एक आलीशान जीवनशैली का लालच देकर उनसे लाखों रुपये वसूल लिए जाते हैं, ले��िन हकीकत में उन्हें न तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है और न ही वादा किया गया भविष्य
इस FSL रिपोर्ट में साफ लिखा है No GPS COORDINATES ARE FOUND तो टाइम का भी क्या महत्व रह जाता है ?
पूरी दुनिया में अलग अलग टाइम जोन है इंडिया और कनाडा के टाइम में ही 10:30hr का अंतर है। तो समय को manipulate करना भी आसान है।
#JSSC_CGL मामला 10 साल से लंबित है। अब तक पेपर लीक के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं। DV में चयनित अभ्यर्थियों के साथ न्याय होना चाहिए। युवाओं का धैर्य और भविष्य दांव पर है। सरकार से निवेदन है कि नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए। @HemantSorenJMM@JharkhandCMO